मनमोहन के समय भी चापलूस पत्रकार थे पर मोदी के समय तो चापलूसी के लिए लाइन लगी हुई है!

Vimal Kumar Interview part five

मीडिया वाले सिर्फ ताकत की पत्रकारिता करते हैं, सत्ता की कवरेज करते हैं… मीडिया के लिए किसान-मजदूर के कोई मायने नहीं… यहां तो केवल सत्ता की पत्रकारिता होती है… पावरफुल लोगों की पत्रकारिता होती है…

खबर की भाषा बिलकुल बदल गई है…. तटस्थ और संतुलित पत्रकारिता खत्म हो गई है.. चैनल वालों ने अपने मन से सारी बातें बोलना शुरू कर दिया है… शब्दावली में अतिशयोक्ति का भाव है…

मनमोहन के समय भी चापलूस पत्रकार थे… मोदी के समय तो चापलूसी की लाइन लगी हुई है….

वरिष्ठ पत्रकार विमल कुमार के इंटरव्यू का अगला हिस्सा देखें-

इसके पहले का पार्ट पढ़ें-देखें :

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