7 नवंबर 2025 : हर बड़ी कहानी अक्सर छोटे और सादे पलों से शुरू होती है, जिनमें बातचीत, किस्से, अनुभव और यादें बुनी होती हैं। इन्हीं सहज, ईमानदार संवादों में जीवन खुलता है, और व्यक्ति का असली स्वरूप सामने आता है।
एनडीटीवी का लोकप्रिय कार्यक्रम ‘वॉक द टॉक’, अब अपने नए रूप में राहुल कंवल (सीईओ और एडिटर-इन-चीफ, एनडीटीवी) के साथ वापसी कर रहा है। यह कार्यक्रम फिर से उसी जादू को लौटाता है, स्टूडियो की सीमाओं से बाहर निकलकर, असली दुनिया में कदम रखते हुए, जहां हर कदम एक नई कहानी कहता है और एक नई शख्सियत को उजागर करता है।
यहां न कोई स्टूडियो है, न स्क्रिप्ट… बस एक सहज सफर, जिसमें सार्वजनिक छवि के पीछे छिपा इंसान सामने आता है- उसकी सोच, उसकी यादें और वे पल जिन्होंने उसे गढ़ा।
‘वॉक द टॉक’ हर कहानी को वैसे ही बहने देता है जैसे वह स्वाभाविक रूप से खुलती है।
यह शो एनडीटीवी के सबसे चर्चित और प्रतिष्ठित प्रारूपों में से एक की विरासत को फिर से जीवित करता है, एक ऐसी श्रृंखला जिसमें दुनिया और भारत की कुछ सबसे बड़ी हस्तियां शामिल रही हैं- नेता, विचारक, कलाकार, उद्यमी और खेल जगत की आइकॉनिक शख्सियतें।
अब यह शो नए डिजिटल और सोशल युग के दर्शकों के लिए नए अंदाज में लौट रहा है, मोबाइल-फर्स्ट और ऑथेंटिक कंटेंट के साथ। मूल भावना वही है, पर प्रस्तुति अब और भी जीवंत, वास्तविक और मानवीय है।
पहला एपिसोड इस नई यात्रा की दिशा तय करता है। इसमें शामिल हैं विश्वप्रसिद्ध अर्थशास्त्री और चिंतक रुचिर शर्मा, जो वैश्विक बाजारों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर अपनी गहरी दृष्टि के लिए जाने जाते हैं।
राहुल कंवल और रुचिर शर्मा साथ मिलकर बिहार के दिल- उसके गांवों, नदी किनारों और कस्बों से गुजरते हैं, जहां महत्वाकांक्षा, उम्मीद और बदलाव की कहानियां आपस में मिलती हैं।
यह सफर एक दिलचस्प विरोधाभास है, जहां कैपिटल मार्केट्स मिलते हैं मखाना की खस्ता महक से, और वॉल स्ट्रीट की समझ टकराती है ग्रामीण भारत की नब्ज़ से।
यह बिहार पर बातचीत नहीं, बल्कि बिहार के रास्ते होती बातचीत है, जो भारत के बदलाव की चुनौतियों और संभावनाओं को एक साथ समेटती है।
इस शो की खूबसूरती इसकी सहजता में है, कुछ भी बनावटी नहीं, कुछ भी तयशुदा नहीं, बस वे पल जो अपने आप खुलते हैं और सच्चाई को सामने लाते हैं।
राहुल कंवल के शब्दों में-
“जब आप किसी के साथ चलते हैं, तो दुनिया को उसकी आंखों से देखते हैं। ‘वॉक द टॉक’ उसी साझा दृष्टि की यात्रा है जहां बातचीत बन जाती है खोज।”
‘वॉक द टॉक’ का यह पुनरारंभ पत्रकारिता की कहानी कहने की शैली को एक नई दिशा देता है, जहां संवाद उद्देश्य से मिलता है, और पत्रकारिता संवेदना से।
यह लोगों को वैसे ही समझने का प्रयास है जैसे वे हैं… एक कदम, एक कहानी, एक सच्चाई में।



subodh
November 8, 2025 at 11:19 am
वाह बहुत ही अच्छा शो है
Anil mishra
November 8, 2025 at 1:30 pm
Really it’s a good show.i also like