नई दिल्ली: एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और भारत की मोदी सरकार के बीच कंटेंट ब्लॉकिंग को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। कर्नाटक हाईकोर्ट 5 अप्रैल 2025 को इस हाई-प्रोफाइल केस की सुनवाई करेगा, जिसमें X ने सरकार के कंटेंट हटाने के आदेशों को चुनौती दी है।
मामला अवैध कंटेंट रेगुलेशन और मनमाने सेंसरशिप के आरोपों से जुड़ा है। X का कहना है कि सरकार आईटी एक्ट की धारा 79(3)(b) का दुरुपयोग कर रही है और धारा 69A के तहत तय किए गए कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा। 2015 में सुप्रीम कोर्ट के श्रेया सिंघल मामले में दिए फैसले के अनुसार, ऑनलाइन कंटेंट ब्लॉक करने के लिए सिर्फ धारा 69A का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। X का आरोप है कि सरकार के ये आदेश न्यायिक निगरानी के बिना जारी किए जा रहे हैं, जिससे उसके बिजनेस मॉडल पर खतरा मंडरा रहा है।
सहयोग पोर्टल को बताया “सेंसरशिप टूल”
X ने सरकार के सहयोग पोर्टल पर भी सवाल उठाए हैं, जिसे गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) संचालित करता है। X का दावा है कि यह पोर्टल अवैध रूप से सेंसरशिप लागू करने का साधन बन गया है, क्योंकि इसके जरिए सरकारी एजेंसियां और स्थानीय पुलिस सीधे कंटेंट हटाने के आदेश जारी कर सकती हैं, जिनकी कोई कानूनी समीक्षा नहीं होती। X ने इस पोर्टल से जुड़ने से इनकार कर दिया है और कोर्ट से मांग की है कि सहयोग पोर्टल के सभी आदेशों को निलंबित किया जाए जब तक अंतिम फैसला न आ जाए।
मस्क के भारतीय बाजार में निवेश पर असर
यह मामला उस वक्त सामने आया है जब एलन मस्क की अन्य कंपनियां – टेस्ला और स्पेसएक्स – भारत में अपने कारोबार को विस्तार देने की कोशिश कर रही हैं। टेस्ला भारत में इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण संयंत्र स्थापित करना चाहती है, जबकि स्पेसएक्स की स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के लिए अनुमति का इंतजार है। इस मुकदमे का असर मस्क के भारतीय बाजार में निवेश योजनाओं पर पड़ सकता है।
पहले भी हो चुकी है कोर्ट में टक्कर
X और भारत सरकार के बीच यह पहली कानूनी लड़ाई नहीं है। 2022 में जब यह प्लेटफॉर्म ट्विटर के नाम से जाना जाता था, तब इसने आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत जारी ब्लॉकिंग आदेशों को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, जून 2023 में हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया था और X पर 50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
अगली सुनवाई 5 अप्रैल को
इस मामले की पहली सुनवाई 17 मार्च को हुई थी, जिसमें जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने X को आश्वासन दिया था कि यदि सरकार कोई कठोर कदम उठाती है तो वह फिर से कोर्ट का रुख कर सकता है। सरकार का दावा है कि उसने अभी तक X के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की है।
5 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि भारत में ऑनलाइन कंटेंट रेगुलेशन के लिए क्या वैधानिक सीमाएं तय की जाएंगी और इसका डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर क्या प्रभाव पड़ेगा।



