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कल याशिका का आजतक के दफ्तर में आखिरी दिन था

Vikas Mishra : कल याशिका का आजतक के दफ्तर में आखिरी दिन था। याशिका मेरी टीम की बहुत ही प्यारी, मेहनती, भरोसेमंद साथी रही है। उसे विदा करने में अपनी भूमिका बाबुल की लग रही थी। विदाई पर मेरी पुरानी टीम इकट्ठा हुई, दफ्तर में लंच हुआ, तस्वीरें खींची गईं और याशिका चली गई। 2 जनवरी 2012 को मैं जब आजतक में आया था, तो प्रोग्रामिंग टीम में ज्वाइन किया था। नीलेंदु जी हेड थे, उनके बाद की जिम्मेदारी मेरी थी। उन्होंने कहा था – टीम को मैं परिवार की तरह रखता हूं।

Vikas Mishra : कल याशिका का आजतक के दफ्तर में आखिरी दिन था। याशिका मेरी टीम की बहुत ही प्यारी, मेहनती, भरोसेमंद साथी रही है। उसे विदा करने में अपनी भूमिका बाबुल की लग रही थी। विदाई पर मेरी पुरानी टीम इकट्ठा हुई, दफ्तर में लंच हुआ, तस्वीरें खींची गईं और याशिका चली गई। 2 जनवरी 2012 को मैं जब आजतक में आया था, तो प्रोग्रामिंग टीम में ज्वाइन किया था। नीलेंदु जी हेड थे, उनके बाद की जिम्मेदारी मेरी थी। उन्होंने कहा था – टीम को मैं परिवार की तरह रखता हूं।

मैंने कहा-सर, मैं दूध से भरी गिलास में चीनी की तरह आऊंगा, दूध छलकेगा नहीं, मीठा हो जाएगा। शायद हुआ भी ऐसा, नीलेंदु सर ने जब इस्तीफा दिया तो सारी जिम्मेदारी मेरे ऊपर थी। काम भी खूब हुआ, रिश्ते भी गहरे बने। अब हम सब एक टीम के साथी नहीं हैं, तमाम लोग अलग-अलग टीम में हैं, लेकिन तस्वीरें गवाह हैं कि रिश्तों की वो मिठास अभी भी कायम है। मौके पर श्वेता सिंह, संजीव चौहान, मुहम्मद अनस जुबैर, पंकज शर्मा, प्रवीण मिश्रा, विवेक राय, श्रुति, याशिका, सुगंधा, सिमर, निमिषा, याशिका और मैं खुद था।

आजतक में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार विकास मिश्र के फेसबुक वॉल से.

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