अश्विनी कुमार श्रीवास्तव-
मेरी दिली इच्छा है कि अगले साल के चुनाव में योगी आदित्यनाथ की ही वापसी हो और कम से कम पांच साल तक वह यहां के मुख्यमंत्री और रहें। फिर वही आगे चलकर देश के प्रधानमंत्री भी बनें। हालांकि जनता क्या चाहती है, तय तो यह उसी से होगा लेकिन मेरी अपनी राय में योगी आदित्यनाथ से बेहतर इन दोनों पदों के लिए भाजपा या विपक्ष में फिलहाल कोई है नहीं।
योगी आदित्यनाथ के इस कदर समर्थन के कई कारण हैं और एक बहुत बड़ी शिकायत भी है। पहले शिकायत बताता हूं, फिर समर्थन के कारण।

शिकायत यह कि योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री के तौर पर सिस्टम में जो भी बदलाव किए हैं या दूरगामी नतीजों वाले काम किए हैं, उनके इंप्लीमेंट होने का जिम्मा भी उन्हें मजबूरी में ही सही, ऐसे कंधों पर डालना पड़ रहा है, जो कहीं न कहीं सिस्टम की बर्बादी का हिस्सा हैं। यानी हर विभाग के मुखिया/ वरिष्ठ अधिकारी या विभाग के ही अन्य अफसर। इस कारण, जनता से सीधा उनका जो कनेक्ट है, वह इन्हीं भ्रष्ट अधिकारी/ विभाग के चलते नेकनामी के बदले बदनामी में बदल जाता है। कैसे, यह समझाने के लिए पहले यह बताना पड़ेगा कि समर्थन आखिर क्यों कर रहा हूं।
दरअसल, योगी आदित्यनाथ भले ही महंत हों और वेशभूषा से कोई उन्हें पुरातनपंथी समझे लेकिन यूपी में उन्होंने अपने दो कार्यकाल में किया, वह कोई बेहद पढ़ा लिखा और आधुनिक सोच – समझ का ही व्यक्ति कर सकता है। उन्होंने सिस्टम सुधार का रास्ता अपनाया और तकरीबन शासन प्रशासन के हर तंत्र में इस सुधार को लागू करने के लिए दिन रात मेहनत भी की।
योगी ने AI, डिफेंस, IT, सुनियोजित विकास, उद्योग, निवेश जैसे भविष्योन्मुखी विषयों पर बड़े बड़े फैसले लेकर उन्हीं दिशाओं में सरकारी योजनाओं का मुँह मोड़ा और इससे जुड़े नियम कानूनों को सख्ती से लागू भी किया। कानून व्यवस्था, बुनियादी सुविधाएं और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर तो खैर काफी बड़ी बड़ी योजनाएं शुरू की गईं।
बस एक कमी रह गई, जिसकी मुझे खास शिकायत है और मेरी समझ से योगी की सारी मेहनत और उससे मिलने वाली ख्याति पर उसी ने पानी फेर रखा है। वह यह कि सपने देखना और उसके लिये मेहनत करना किसी के भी हाथ में है लेकिन जहां गड़बड़ी होती है, वह होता है उसे लागू करना या करवाना।
यह सही से तभी संभव है, जब मुख्यमंत्री के वादे इरादे को लागू करवाने वाली उनकी टीम के बाद की लेयर भी उसी जिद और ईमानदारी से काम करे। यहां यही कमी रह गई कि यूपी में ऐसा शायद ही कोई विभाग हो, जिसके मुखिया और उनके नीचे के अन्य नौकरशाह उस विभाग के भ्रष्टाचार को दूर करने के प्रति गंभीर हों।
योगी आदित्यनाथ में गोरखपुर में अपने उत्कर्ष के दिनों से ही जनता से सीधा कनेक्ट रखने की बहुत बड़ी खूबी है। इसी खूबी के साथ उन्होंने यहां सरकार में भी शिकायत और सुनवाई तंत्र बनाया है और खुद भी यथासंभव जनता से मिलते और उनकी समस्याएं दूर करने की कोशिश हर रोज करते हैं।
मगर जिस गंभीरता और ईमानदारी से वह शिकायतों पर सुनवाई करते हैं, उसका दस प्रतिशत भी शायद किसी भी विभाग में अमल में नहीं लाया गया।
मुख्यमंत्री समझ ही नहीं पाए कि यूपी के ज्यादातर विभाग और उनके अफसर जनता की सेवा की आदत लाख कोशिशों के बावजूद नहीं डाल सकते क्योंकि उन्हें दशकों से जनता को सताने और लूटने की आदत पड़ी हुई है। लिहाजा अपनी सारी अच्छाइयों और मेहनत के बावजूद चुनाव तक आते आते भी वह खुद के कामों का वह श्रेय नहीं ले पाए, जो उन्हें मिलना चाहिए था।
मेरा यकीन है कि अगले टर्म में वह निश्चित रूप से अपनी इस कमी में सुधार करके यूपी की दशा दिशा को बदल देंगें यूपी को योगी आदित्यनाथ जैसे शासक की ही जरूरत भी है, वरना भ्रष्टाचार और खस्ताहाल सिस्टम ने जो हालत यूपी की योगी के आने से पहले कर रखी थी, वह स्थिति दोबारा लौटने में वक्त नहीं लगेगा।


