सरकारी भोंपू ‘जी न्यूज’ कैसे सत्ता संरक्षण में फल-फूल रहा, मुंबई एयरपोर्ट इसका छोटा-सा उदाहरण है!

Rahul Kotiyal : पिछले हफ़्ते मुंबई जाना हुआ. ऐयरपोर्र से निकलते हुए वहां लगी कुछ टीवी स्क्रीन्स पर नज़र पड़ी जिन सभी में ज़ी न्यूज़ चल रहा था. देख कर कुछ अजीब तो लगा लेकिन ऐसा सुनियोजित तरीक़े से किया जा रहा यह वापसी के वक़्त समझ आया. मुंबई में भारी बारिश के चलते मैं समय से थोड़ा पहले ऐयरपोर्ट पहुँचा और फ़्लाइट भी आधा घंटा डीले हो गई. इस कारण क़रीब तीन-चार घंटे छत्रपति शिवाजी ऐयरपोर्ट पर ही बिताने पड़े. इस पूरे दौरान एयरपोर्ट की प्रत्येक स्क्रीन पर सिर्फ़ ज़ी न्यूज़ ही चलता रहा.

सैकड़ों स्क्रीन्स पर सिर्फ़ सुधीर चौधरी का चेहरा नज़र आ रहा था. यहां तक कि लाउंज में लगी स्क्रीन्स पर भी कोई अन्य चैनल नहीं चल रहा था. यानी ऐयरपोर्ट अथॉरिटी सुनियोजित प्रॉपगैंडा के तहत ये कर रही है. यहां आने वाले लाखों यात्रियों को ख़बरें सिर्फ़ उसी चश्मे से दिखाई जा रही हैं जिस चश्मे से सरकार के मुँहलगे चाटुकार उन्हें देखते हैं और उनका डीएनए करते हैं. ऐसा डीएनए जो कभी दो हज़ार के नोट में नैनो जीपीएस चिप लगे होने की बात पूरी बेशर्मी से कहता है, कभी एक सांसद के भाषण को चुराया हुआ बताने की फ़र्ज़ी कहानी बुनता है, अपने झूठे प्रॉपगैंडा को रीसर्च कहता है और झूठ पकड़े जाने पर शर्मिंदा होने की जगह दोगुनी बेशर्मी से साबित करता है कि ‘नंग बड़ा परमात्मा से.’

ये वही सुधीर चौधरी है जो फ़र्ज़ी ख़बर चलाकर एक महिला की लिंचिंग करवा चुका है, सौ करोड़ की उगाही करते हुए कैमरे में देखा जा चुका है और इस कारण तिहाड़ जेल में बंद भी रह चुका है. इतने कीर्तिमान इस आदमी के नाम हैं और ये मौजूदा प्रधानमंत्री का चहेता पत्रकार है. चूँकि सत्ताधरियों को हमेशा चाटुकार बेहद प्रिय होते हैं और इसमें कोई दोराय नहीं कि आज हिंदी चैनलों की दुनिया में इस आदमी से बड़ा चाटुकार खोजना मुश्किल है. सरकार के हर फ़ैसले को तर्क-कुतर्क करके महान बताना और हर विरोध को देशद्रोह घोषित करना ही इस आदमी की पत्रकारिता का एकमात्र उद्देश्य और ध्येय है.

चुनावों से पहले अमित शाह का एक वीडियो लीक हुआ था जिसमें वो अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दे रहे हैं कि ‘बात चाहे सच्ची हो या झूठी हो, हमारे पक्ष की है तो फैलाते रहो.’ इस निर्देश का अनुपालन सुधीर चौधरी भाजपा कार्यकर्ताओं से ज़्यादा समर्पित भाव से करता है और सोशल मीडिया पर नहीं बल्कि पूरी बेशर्मी के साथ राष्ट्रीय टेलिविज़न पर करता है.

ज़ी न्यूज़ पूरी तरह से सरकारी भोंपू बना हुआ है और यह भोंपू सबको सुनाई दे, इसके लिए सरकार ऐयरपोर्ट जैसे सार्वजनिक स्थानों पर सिर्फ़ इसे ही बजाए जा रही है. व्हट्सएप से शुरू हुआ फ़र्ज़ी ख़बरों का सिलसिला अब टीवी पर भी डंके की चोट पर चल रहा है और सरकार ख़ुद इसे बढ़ावा दे रही है. ज़ी न्यूज़ की ख़बरों को फ़ेसबुक भले ही फ़र्ज़ी घोषित करे, फ़ैक्ट चेक करने वाली वेबसायट इसे झूठ घोषित कर दें लेकिन इन वेबसाइट्स की पहुँच बहुत सीमित है और प्रॉपगैंडा फैलाने वाले टीवी चैनलों की बहुत व्यापक. ऊपर से ये सरकार की छत्रछाया में फल-फूल रहे हैं, पूरी सरकारी मशीनरी इनके विस्तार के लिए इस्तेमाल हो रही है. मुंबई एयरपोर्ट इसका छोटा सा उदाहरण है.

प्रॉपगैंडा की घुट्टी कई माध्यमों से जनता को पिलाई जा रही है और जनता उसे देशभक्ति का टॉनिक समझ कर गटक भी रही है. प्रॉपगैंडा की इस घुट्टी के दुष्परिणाम कितने घातक होते हैं, विश्व इतिहास में कई उदाहरण मौजूद हैं. हम फ़िलहाल उन्ही घातक उदाहरणों को दोहराने की दिशा में बेहद तेज़ी से बढ़ रहे हैं.

मुंबई प्रेस क्लब द्वारा प्रतिष्ठित रेड इंक अवार्ड से सम्मानित पत्रकार राहुल कोटियाल की एफबी वॉल से.

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