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अथर्व फॉर यू इंफ्रा एंड एग्रो लिमिटेड ने हजारों गरीबों का 1,000 करोड़ रुपये हड़पा

उन्मेष गुजराथी

‘अथर्व फॉर यू इंफ्रा एंड एग्रो लि.’ कंपनी ने हजारों गरीब लोगों की मेहनत की कमाई लूट ली है और फरार होने के चक्कर में है। इस कंपनी ने बीमा कंपनी की तरह ही लोगों से रुपए जमा किए। एक साल तक इस कंपनी ने लोगों को ठीक तरीके से रकम भी लौटाई, लेकिन इसके बाद इसने सब कुछ बंद कर दिया। सबको एक हजार करोड़ रुपए तक का चूना लगाने के बाद यह कंपनी अब फरार होने के चक्कर में है।

इस कंपनी ने अलग-अलग लोगों से अलग-अलग रकम भरने पर एक साल में खूब फायदा होने का लालच दिया। कंपनी ने 1 लाख भरने वाले व्यक्तियों को एक साल में 1 लाख 30 हजार हजार देने का झांसा दिया। ज्ञात हो कि सेबी ने अब तक इस कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं की है, जिससे साबित होता है कि इनकी आपस मे मिलीभगत है।

लोगों की मेहनत की कमाई लूटकर अथर्व कंपनी के पांच डायरेक्टर्स कभी भी भाग सकते हैं। इन पांचों डायरेक्टर्स के नाम गणेश रामदास हजारे, शिवाजी शंकर निकाडे, सुलिंद्र रावसाहेब भिल, सचिन हनुमंत गोसावी और मुकेश कुमार सुंदेशा हैं। हजारों लोगों को चूना लगाने के बाद ये सभी अब कभी भी भाग सकते हैं, लेकिन सरकार इन्हें रोकने को लेकर सतर्क नहीं हैं। लोगों की तकलीफ और शिकायतों का सरकार और पुलिस विभाग पर कोई असर होता नहीं दिखाई दे रहा है। पीड़ित लोग बेहद चिंतित हैं।

गौरतलब है कि जैसे ‘मैत्रेय’ की वर्षा सत्पालकर फरार है और ट्विंकल ग्रुप का गौरव गोयनका लापता है, वैसे ही ये पांचों भी फरार हो सकते हैं। सत्पालकर ने हजारों निवेशकों को सस्ते दर पर भूखंड देने के नाम पर करोंड़ों का चूना लगाया है और गोयनका के नाम 4,900 करोड़ का स्कैम है।

जो डायरेक्टर्स भाग सकते हैं, उनके नाम हैं- गणेश रामदास हजारे, शिवाजी शंकर निकाडे, सुलिंद्र रावसाहेब भिल, सचिन हनुमंत गोसावी और मुकेश कुमार सुंदेशा.

अथर्व कंपनी ने कृषि और उससे संबंधित कार्य करने का दिखावा किया है। अपने जानकारी वाले पत्र में एक्टिविटी के रूप में कंपनी ने कृषि और उससे संबंधित कार्य करने की बात कही है। लेकिन यह बस लोगों को झांसा देने के लिए है। कंपनी ने लोगों से रुपए लूट कर अपनी मंशा जगजाहिर कर दी है। इसके शिकार हुए हजारों लोग परेशान है, क्योंकि उनकी मेहनत की कमाई लूट ली गई है।

अथर्व कंपनी ने जिस तरह खुलेआम गरीबों की मेहनत की कमाई लूटी है, उससे पता चलता है कि इसके पीछे बड़ी साजिश है। कंपनी, सरकार, सेबी और दहिसर पुलिस स्टेशन की मिलीभगत से लोगों का पैसा हड़पा गया है। हजारों निवेशकों से करोड़ों की ठगी कर ये लोग अपनी जेब गरम कर रहे हैं। कंपनी का रजिस्ट्रेशन करने वाली सरकार किसी स्कैम की जिम्मेदारी से कैसे भाग सकती है? इस सब मामले में कंपनी के किसी डायरेक्टर की गिरफ्तारी नहीं होने से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।

अथर्व कंपनी कई नामों से चलाई जा रही है। जानकारी के अनुसार 7 से 8 कंपनियां अथर्व के अलग-अलग नामों से चलाई जा रही है। इतना बड़ा स्कैम होने के बावजूद इन कंपनियों के खिलाफ सरकार और सेबी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।

अल मदद फाउंडेशन के फाउंडर प्रेसिडेंट अमजद भूरा कुरेशी कहते हैं- अथर्व कंपनी के लोगों से बहुत बड़ी ठगी हुई है। ठगी के शिकार कई लोग हमारे पास आए, जिनका कंपनी की तरफ से मिला चेक बाउंस हो चुका है। ये सब बेहद निराश और दुखी हैं। सब मिडिल क्लास के लोग हैं। हमने सेबी और पुलिस में शिकायत की है। हम चाहते हैं कि लोगों को न्याय मिले।

अखिल भारतीय ठेकेदार संघ के अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल का कहना है- यह एक हजार करोड़ तक का चिटफंड घोटाला है। गरीबों का पैसा हड़पकर ये कंपनी टाउनशिप बना रही है। चेक देने से पहले ही यह कंपनी बैंक से स्टॉप पेमेंट करा चुकी है, और इसके बावजूद लोगों को चेक थमाकर मूर्ख बना रही है। इस मामले में लोगों को अविलंब न्याय मिलना चाहिए।

लेखक उन्मेष गुजराथी दबंग दुनिया अखबार के मुंबई के स्थानीय संपादक हैं.

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