
पत्रकारों के वेतन, एरियर और प्रमोशन से जुड़े मजीठिया वेज बोर्ड मामले में आज मुम्बई शहर के श्रम उपायुक्त ने एक बड़ा निर्देश जारी कर 22 अखबार मालिकों को नोटिस भेज कर उन्हें 19 अक्टूबर तक एफिडेविड देने को कहा है। ये एफिडेविड 300 रुपये के स्टाम्प पेपर पर देना होगा और इस एफिडेविड में अखबार मालिकों को साफ़ तौर पर ये लिख कर देना पड़ेगा कि उन्होंने अपने सभी कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार बकाया दे दिया है। साथ ही ये भी कि मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार ही वे कर्मचारियों को वेतन दे रहे हैं। अब अगर अखबार मालिकों ने झूठा एफिडेविड दिया और अगर ये झूठ सिद्ध हो गया तो उनके खिलाफ फर्जी एफिडेविड देने का नया मामला दर्ज होगा।
कामगार उपायुक्त द्वारा भेजे इस नोटिस में साफ़ कहा गया है कि अगर आप ने एफिडेविड नहीं दिया तो आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस नोटिस से अखबार मालिकों के गले में केकड़ा फंस गया है। अगर वो एफिडेविड देते हैं और वो फर्जी निकल गया तो उन पर एक नया केस दर्ज होगा। उन्होंने एफिडेविड नहीं दिया तो कामगार आयुक्त उनके खिलाफ मामला दर्ज कराएंगे। आपको बता दूँ कि कामगार आयुक्त ने मजीठिया वेज बोर्ड से जुड़े सभी 17(1) के मामलों को 29 अक्टूबर तक निपटारे का आदेश राज्य के सभी कामगार उपायुक्तों को दिया है।
अब देश के दूसरे राज्यों के श्रमायुक्तों को भी एफिडेविड वाला फार्मूला अपनाना चाहिए। ये नोटिस टाइम्स ऑफ इंडिया, मिड डे, सामना सहित कुल 22 अखबार मालिकों को भेजा गया है। आपको बता दें अखबार मालिक अपनी जान बचाने के लिए अपने कार्मिक प्रबंधक से फर्जी एफिडेविड दिला सकते हैं। अगर ऐसा हुआ और सिद्ध हो गया कि कार्मिक प्रबंधक या दूसरे अधिकारियों ने फर्जी एफिडेविड दिया है तो उनको आसानी से सुप्रीम कोर्ट में पार्टी बनाया जा सकता है और तब उन्हें तिहाड़ जेल में पूरी लाइफ बितानी पड़ सकती है।
शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
9322411335
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Pawan kumar
October 16, 2016 at 1:44 am
टीवी चैनलों का भी कुछ करो सर ….. स्ट्रिंगर नाम बहुत शोषण कर रहे हैं
Gurumurthy Mehendale
October 16, 2016 at 4:46 am
Thanking you,
Please report some of the efforts done individually by effected workers of the industry. We had reported to ASST. LC, LC & DLC Of Karnataka
ಮಾನ್ಯರೇ,
ವಿಷಯ: ದಿ ಪ್ರಿಂಟರ್ಸ್ ಮೈಸೂರು ಪ್ರೈ. ಲಿ.
ಪ್ರಕಾಶಕರು: ಡೆಕ್ಕನ್ ಹೆರಾಲ್ಡ್, ಪ್ರಜಾವಾಣಿ, ಸುಧಾ, ಮಯೂರ ಇವರು ಮಜೀತಿಯಾ ವೇತನಮಂಡಳಿಯ ಶಿಫಾರಸ್ಸನ್ನು
ಜಾರಿಮಾಡುವಾಗ ಸರ್ಕಾರದ ಆದೇಶ ಹಾಗು
ಸುಪ್ರೀಮ್ ಕೋರ್ಟ್ ನೀಡಿರುವ ತೀರ್ಪಿನ ಪ್ರಕಾರ ಜಾರಿಮಾಡದಿರುವಬಗ್ಗೆ
ಉಲ್ಲೇಖ: ಕಾರ್ಮಿಕ ಆಯುಕ್ತರು ನೀಡಿರುವ ದಿನಾಂಕ 17-09-2016ರ ಪತ್ರಿಕಾ ಪ್ರಕಟಣೆ
ಮೇಲೆ ತಿಳಿಸಿರುವ ವಿಷಯದ ಸಂಬಂಧ ದಿ ಪ್ರಿಂಟರ್ಸ್ ಮೈಸೂರು ಪ್ರೈ. ಲಿ, ಬೇಲೂರು ಕೈಗಾರಿಕಾ ಪ್ರದೇಶ, ಧಾರವಾಡದಲ್ಲಿ ಉದ್ಯೋಗಿಯಾಗಿ 26 ವರ್ಷಗಳಿಂದ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿರುವ, ಗುರುಮೂರ್ತಿ ಬಿ. ಮೆಹೆಂದಳೆ ಆದ ನಾನು, ಅರಿಕೆಮಾಡಿಕೊಳ್ಳುವುದೇನೆಂದರೆ, ಈ ಹಿಂದಿನ ಮನಿಸಾನಾ ವೇತನಮಂಡಳಿಯ ಶಿಫಾರಸ್ಸಿನಂತೆ, ದಿನಾಂಕ 01-05-2011ರ ವರೆಗೂ ಕಾಲಕಾಲಕ್ಕೆ ಸಂದಾಯವಾಗಬೇಕಾದ ವೇತನ ಹಾಗು ಇತರ ಸೌಲಭ್ಯಗಳು ಸಕಾಲದಲ್ಲಿ, ಸರಿಯಾಗಿ ಸಂದಾಯವಾಗುತ್ತಿದ್ದು, ಎಲ್ಲವೂ ಸುಲಲಿತವಾಗಿ ನಡೆಯುತ್ತಿತ್ತು.
ಆದರೆ, 11-11-2011ರ ಸರ್ಕಾರಿ ಆದೇಶ ಹಾಗು ಸುಪ್ರೀಮ್ ಕೋರ್ಟ್ ನ ಆದೇಶಾನುಸಾರ ನ್ಯಾಯಮೂರ್ತಿ ಮಜೀತಿಯಾ ವೇತನಮಂಡಳಿಯ ಶಿಫಾರಸ್ಸನ್ನು ಜಾರಿಮಾಡುವಾಗ, ಹುದ್ದೆಯಲ್ಲಿ ಹಿಂಬಡ್ತಿ ಮಾಡಿ, (ಸೀನಿಯರ್ ಸೂಪರ್ ವೈಸರ್ F-2 ಎಂದು ಇರಬೇಕಾಗಿದ್ದ ಹುದ್ದೆಯಿಂದ, ಕೆಳಹಂತದ ಪ್ರೊಡಕ್ಷನ್ ಅಸಿಸ್ಟೆಂಟ್ F-3, ಹುದ್ದೆಗೆ ಬದಲಾಯಿಸಿದ್ದಾರೆ). ಮೂಲವೇತನದಲ್ಲೂ ಬಹಳಷ್ಟು ಕಡಿಮೆಮಾಡಿದ್ದಾರೆ. ಹಾಗೂ ತುಟ್ಟಿಭತ್ಯೆಯನ್ನೂ ವೇತನಮಂಡಳಿಯಲ್ಲಿ ತಿಳಿಸಿರುವಂತೆ, ವಿಭಜಕ ಸಂಖ್ಯೆ 167ರ ಬದಲಿಗೆ 189ನ್ನು ಗಣನೆಗೆ ತೆಗೆದುಕೊಂಡು ಲೆಕ್ಕಾಚಾರಮಾಡಿ ಕಡಿಮೆ ಮಾಡಿದ್ದಾರೆ. ಇದಲ್ಲದೇ, ಪ್ರಾಥಮಿಕ ಮೂಲವೇತನ ತಪ್ಪಾಗಿ ನಿರ್ಧರಿಸಿದ ನಂತರ, ಹಿಂದಿನ ವೇತನದ ವ್ಯತ್ಯಾಸದ ಹೆಚ್ಚುವರಿ ಹಣವನ್ನೂ ನೀಡಿರುವುದಿಲ್ಲ. (ಏಪ್ರಿಲ್, 2014 ತಿಂಗಳವರೆಗೂ ಕೊಟ್ಟ ವೇತನ ಮತ್ತು ಒಪ್ಪಂದ(16-09-1995 ಹಾಗು 12-01-2006) ಹಾಗು ರೂಢಿಗತವಾಗಿ ಕೊಡುತ್ತಿದ್ದ ಎರೆಡು ವರ್ಷದ ಬೋನಸ್ ಹಣವನ್ನೂ, ಸಂಸ್ಥೆಯ ಲೆಕ್ಕಾಚಾರದಂತೆ, ಹಿಂಪಡೆದಿರುತ್ತಾರೆ.)
ತುಟ್ಟಿಭತ್ಯೆ ಲೆಕ್ಕ ಹಾಕುವಾಗ, ಕೇವಲ ಮೂಲವೇತನವನ್ನಷ್ಟೇ ಗಣನೆಗೆ ತೆಗೆದುಕೊಂಡು ವೇರಿಯೇಬಲ್ ಪೆ ಹೊರತುಪಡಿಸಿ ಲೆಕ್ಕಹಾಕಿ ತುಟ್ಟಿಭತ್ಯೆ ಕಡಿಮೆ ಮಾಡಿದ್ದಾರೆ.
ಈ ಎಲ್ಲ ಕಾರಣಗಳಿಂದಾಗಿ ವೇತನದಲ್ಲೂ, ಭವಿಷ್ಯ ನಿಧಿಯಲ್ಲೂ ಸಂಗ್ರಹಣೆ ಮೊದಲಿಗಿಂತ ಕಡಿಮೆಯಾಗುತ್ತಿದೆ. ಇದರ ಜೊತೆಗೆ ಗಾಯದಮೇಲೆ ಬರೆ ಎಳೆದಂತೆ ಭವಿಷ್ಯನಿಧಿಯಲ್ಲಿ ಸಂಗ್ರಹವಾಗಿದ್ದ ಹಣವನ್ನೂ ಲೆಕ್ಕಾಚಾರದ ಹೆಸರಿನಲ್ಲಿ ಹಿಂಪಡೆದಿದ್ದಾರೆ.
ಪ್ರತಿ ವರ್ಷಕ್ಕೊಂದರಂತೆ ಕೊಡಬೇಕಾಗಿರುವ ಇನ್ಕ್ರಿಮೆಂಟನ್ನೂ ಕೊಡದೇ ಇರುವುದರಿಂದ ನಮ್ಮ ವೇತನ ನಿಂತಲ್ಲೇ ನಿಂತುಹೋಗಿದೆ. ಕಳೆದ 5 ವರ್ಷಗಳಿಂದ ಮೂಲವೇತನ ಹೆಚ್ಚಾಗದೇ ಸಂಕಷ್ಟದಲ್ಲಿ ಸಿಲುಕಿದ್ದೇವೆ. ಸಾಲದ ಹೊರೆ ಹೆಚ್ಚಾಗಿದೆ. ಮಕ್ಕಳ ಶಿಕ್ಷಣದ ವೆಚ್ಚಕ್ಕಾಗಿ ಸಾಲಮಾಡಲೇಬೇಕಾದ ಪರಿಸ್ಥಿತಿ ಎದುರಾಗಿದೆ. ಉನ್ನತ ಶಿಕ್ಷಣದ ಅಪಾರ ವೆಚ್ಚಗಳು ನಮ್ಮಲ್ಲಿ ಭಯ ಉಂಟುಮಾಡಿದೆ. ಮಕ್ಕಳ ಮದುವೆ, ಹಿರಿಯರ ಆರೋಗ್ಯದ ವೆಚ್ಚಗಳು, ನಿವೃತ್ತಿಯ ಸಮೀಪ ಬಂದಂತಹ ಈ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ದಿನನಿತ್ಯದ ಜೀವನ ನಿರ್ವಹಣೆಯ ಖರ್ಚು ಏರುಗತಿಯಲ್ಲೇ ಸಾಗುತ್ತಿರುವುದರಿಂದ ಭವಿಷ್ಯ ಮಸುಕಾಗಿ ಕಾಣುತ್ತಿದೆ. ಇತ್ತೀಚೆಗೆ ನಿವೃತ್ತರಾದ ಬಹಳಷ್ಟು ಕಾರ್ಮಿಕರಿಗೆ, ಕೊಡುತ್ತಿದ್ದ ಗ್ರ್ಯಾಚುಟಿ ಮೊತ್ತದಲ್ಲೂ ಕಡಿತಗೊಳಿಸಿ ಲಕ್ಷಾಂತರ ರೂ. ಗಳನ್ನು ಕಡಿಮೆ ಪಾವತಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಇವೆಲ್ಲವೂ ನಮ್ಮಲ್ಲಿ ಭವಿಷ್ಯದಬಗ್ಗೆ ಭಯ ಉಂಟುಮಾಡಿದೆ.
ನಮ್ಮ ಜೀವನದ ಬೆಳಕಾಗಿ ನಮಗೆ ದಾರಿದೀಪವಾಗಿದ್ದ ಸಂಸ್ಥೆ, 26 ವರ್ಷದ ಸುದೀರ್ಘ ಸೇವೆಸಲ್ಲಿಸಿದ ನಮ್ಮಂತಹ ಹಿರಿಯ ಉದ್ಯೋಗಿಗಳನ್ನು ಹತಾಷೆಯತ್ತ ನೂಕಿದೆ.
ಈ ಎಲ್ಲ ವಿಷಯಗಳಿಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದಂತೆ, ಕಾರ್ಮಿಕ ಸಂಘವು ಹೂಡಿರುವ ಮೊಕದ್ದಮೆಗಳು ವಿವಿಧ ನ್ಯಾಯಾಲಯಗಳಲ್ಲಿ ವಿಚಾರಣೆಯ ಹಂತದಲ್ಲಿದೆ.
ತಾವು ಈ ಎಲ್ಲ ವಿಷಯಗಳನ್ನು ಸರ್ವೋಚ್ಚನ್ಯಾಯಾಲಯದ ಗಮನಕ್ಕೆ ತಂದು, ನಮ್ಮ ಇಂತಹ ಸಂಕಷ್ಟದ ಪರಿಸ್ಥಿತಿಯಲ್ಲಿ ಮಜೀತಿಯಾ ವೇತನಮಂಡಳಿಯ ಶಿಫಾರಸ್ಸಿನ ಹಾಗು ಸರ್ವೋಚ್ಛ ನ್ಯಾಯಾಲಯದ ಆದೇಶದ ಪ್ರಕಾರ ನ್ಯಾಯಯುತವಾಗಿ ಸಲ್ಲಬೇಕಾದ ವೇತನ ಮತ್ತಿತರ ಸೌಲಭ್ಯಗಳನ್ನು ಕೊಡಿಸಿಕೊಡಲು ತಮ್ಮಲ್ಲಿ ವಿನಮ್ರತೆಯಿಂದ ವಿನಂತಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತೇನೆ.
ನಾನು ಮೇಲೆ ತಿಳಿಸಿದ ಏರುಪೇರಿನ ಚಿತ್ರಣನೀಡಲು ಅನುವಾಗುವಾಂತೆ ಸಂಬಳದ ವಿವರಗಳ ದಾಖಲೆಗಳನ್ನು ಹಾಗು ಬಡ್ತಿಯ ಆದೇಶದ ವಿವರವನ್ನು ಈ ಪತ್ರದ ಕೆಳಗಿನ ಭಾಗದಲ್ಲಿ ಕೊಟ್ಟಿರುತ್ತೇನೆ.
sandeep kumar
October 17, 2016 at 2:15 pm
himachal pradesh ke akhbar maliko ki to chandi hai yahan to koi puchne wala hi nahi hai. yahan to himachal dustak aur divyahimachal me kam karne walon ka hai . sabse bura haal to divyahimachal me hai jo apne aap ko to divyahimachal ka no.1 akhbar batata hai par majhethia ke naam par kuch nahi de raha pichala arrear to kyaa salary b kam de raha hai.