न्यूज24, न्यूज नेशन और इंडिया न्यूज चैनलों पर मुकदमा, देखें नोटिस की कॉपी

गुरुग्राम की बाल उत्थान समिति की तरफ से तीन न्यूज चैनलों को नोटिस भेजा गया है. इसमें बताया गया है कि न्यूज24, न्यूज नेशन और इंडिया न्यूज चैनलों ने झूठी और मानहानि कारक खबर दिखाई. इसके कारण इन चैनलों के खिलाफ मुकदमा लिखाया गया है. चैनलों से नोटिस का संज्ञान लेते हुए तत्काल जवाब देने के लिए कहा गया है. Continue reading

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अखंड गहमरी ने अमर उजाला के स्थानीय संवाददाता से दुखी होकर प्रधान संपादक को भेजा लीगल नोटिस

हमारे गहमर में एक समाचार पत्र है अमर उजाला जिसके स्‍थानीय संवाददाता को कार्यक्रम में बुलाने के लिए जो मानक है वह मानक मैं पूरा नहीं कर पाता। इस लिए वह न तो हमारे कार्यक्रम की अग्रिम सूचना छापते हैं और न तो दो दिनो तक कार्यक्रम के समाचार। तीसरे दिन न जाने उनको क्‍या मिल जाता है जो आनन फानन में मुझसे बात कर न करके अन्‍य लोगो से व्‍यक्ति विशेष के बारे में सूचना मॉंगते है और मनगढ़त खबर बना कर प्रकाशित कर देते है।

अब इस मनगढ़त समाचार पर अमर उजाला समाचार पत्र के संवाददाता, ब्‍यूरो और संपादक के खिलाफ मानहानि और पेड-न्‍यूज का मुकदमा तो बनता ही है। हमारे संवाददाता महोदय ने पूरे के पूरे कार्यक्रम को बदल दिया… देखें कैसे…

(1) कार्यक्रम गहमर के आशीर्वाद पैलसे में किया गया परन्‍तु श्रीमान जी उसका नाम भूल गये एक जगह तो उन्‍होेनें लिखा ” एक” पैलसे और दूसरी जगह चित्र के नीचे लिख दिया ” गहमर पैलेस”। कम से कम बैनर तो देख लिया होता।

(2) उन्‍होंनेे बड़ी आसानी से मेरे मेहनत पर पानी फेरते हुए कवि सम्‍मेलन को काव्‍य-गोष्‍ठी बना दिया, अब जब श्रीमान जी को काव्‍य सम्‍मेलन या काव्‍य गोष्‍ठी में फर्क नहीं मालूम है तो किसी से पूछ लेना चाहिए था।

(3) उनके अनुसार कार्यक्रम में जो सम्‍मान दिये गये थे वो काव्‍य गोष्‍ठी के बाद तय किये गये थे, जब कि श्रीमान को यह पता नहीं कि मेरे सारे सम्‍मान 9 अगस्‍त 2017 को ही तय किये जा चुके थे, जिसकी सूचना सोशलमीडिया से लेकर समाचार पत्रों को प्रेस नोट के द्वारा दे दिया गया था।

(4) श्रीमान जी को आये हुए अतिथियों के नाम नहीं मिले और जो सम्‍मान न आने के कारण मंच से निरस्‍त कर दिये गये वही नाम उन्‍होनें प्रकाशित कर दिया। जिन्‍हेें सम्‍मान मिला ही नहीं, जो सम्‍मान पाये उनका नाम हवा में।

(5) श्रीमान जी ने रविता पाठक, सुलक्षणा अहलावत, बीना श्रीवास्‍तव, डा0 चेतना उपाध्‍याय, कमला पति गौतम, डा0 ज्‍योति मिश्रा को अलग अलग सम्‍मान दिया जाना लिखा है जबकि इन सभी को साहित्‍य सरोज शिक्षा प्रेरक सम्‍मान दिया गया। यहॉं तक की आरती का सम्‍मान न आने के कारण दिया ही नहीं गया।

(6) भाई साहब ने फोटो में भी लिखा है कि बीना श्रीवास्‍तव को सम्‍मानित करते साहित्‍यकार जबकि फोटो में साफ दिख रहा है कि बीना श्रीवास्‍तव जी को मुख्‍य अतिथि कमल टावरी जी सम्‍मानित कर रहे हैं।

(7) पूरे समाचार में आप कही भी इस कार्यक्रम को आयोजित करने वाली संस्‍था या आयोजक का नाम और साथ में यह कार्यक्रम कब हुआ उसका पता नहीं।

(8) जो सम्‍मान दिया जा रहा है वह शिक्षक दिवस के अवसर पर दिया गया 5 सितम्‍बर को और जो समाचार की हेडिंग बनी है वह है चार सितम्‍बर की।

(9) 4 सितम्‍बर को आयोजित ” आखिर क्‍यो कटघडे में मीडिया” परिचर्चा के अन्‍य वक्‍ताओं, सभा अध्‍यक्ष, मुख्‍यअतिथि सबके नाम गायब।

और भी बहुत कुछ है जिसकी चर्चा मैंने अपने कोर्ट नोटिस में किया है।

भाई, आपको मुझसे एलर्जी थी तो आप मत छापते मेरा समाचार. मैं आपके चरण तो पखार नहीं रहा था. और न ही आपको किसी डाक्‍टर ने मेरा समाचार छापने को कहा था। और यदि किसी मजबूरी या लालच के आधार पर छाप भी दिया तो सही सही छापना था। क्‍यों गलत सही छाप कर मेरे कार्यक्रम की तौहीन कर दिये। आपको किसने हक दिया था इसका।
अब आप सब खुद समझदार हैं। मैं अधिक बोलूगॉं तो आप सब यही कहेंगे कि मैं बेफजूल की बात कर रहा हूँ।

चलिये मैंने वीडियो रिकार्डिग और फोटो के आधार पर कोर्ट की नोटिस तो दिनांक 08 सितम्‍बर 2017 को प्रधान संपादक के नाम भेज कर कापी टू संपादक, ब्‍यूरो, कर दिया है। आगे देखते हैं क्‍या हेाता है। कुछ हो न हो पर मन को तसल्‍ली तो मिलेगी कि मैंने आवाज उठाई।

अखंड गहमरी

गहमर

गाजीपुर (उत्तर प्रदेश)

akhandgahmari@gmail.com

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एपीएन और समाचार प्लस समेत 13 चैनलों को टाटा स्काई ने भेजा नोटिस, तीन हफ्ते का अल्टीमेटम

टाटा स्काई वालों ने इंडियन एक्सप्रेस में 13 चैनलों की एक लिस्ट छपवाई है. इन चैनलों पर आरोप लगाया है कि इन्होंने ब्रीच आफ कांट्रैक्ट किया है यानि आपसी समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है.

इंडियन एक्सप्रेस में नोटिस छाप कर टाटा स्काई ने समाचार प्लस, एपीएन समेत 13 चैनलों से पूछा है कि शर्तों का उल्लंघन करने के चलते क्यों न आपकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएं? टाटा स्काई ने इन चैनलों को तीन हफ्ते का टाइम दिया है सुधरने के लिए. तीन हफ्ते बाद भी अगर ये सेवा शर्तों का उल्लंघन करते रहे तो इन 13 चैनलों को टाटा स्काई अपने यहां दिखाना बंद कर देगा.

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गिरती टीआरपी से परेशान ‘इंडिया टीवी’ प्रबंधन ने 5 डे वीक खत्म किया, चैनल एलर्ट मोड में

इंडिया टीवी चैनल की टीआरपी लगातार गिर रही है. चैनल दो नंबर से चार नंबर तक लुढ़क गया. इससे प्रबंधन परेशान है. चैनल की टीआरपी गिरने की गाज इसके कर्मियों पर गिराई गई है और सबको एक आदेश जारी कर कह दिया गया है कि अब फाइव डे वीक खत्म. हफ्ते में छह दिन काम होगा, सिर्फ एक दिन छुट्टी मिलेगी. देखें चैनल की तरफ से क्या आदेश जारी किया गया है….

Dear all,

As directed by the Editor-in-chief, for all Editorial, Production and Technical departments all over the country, five days week facility is withdrawn with immediate effect till further notice. All Editorial, Production and Technical departments will observe six days week and avail one weekly off till further instructions.

All supporting departments and services will ensure complete support and do the same if required.

Puneet Tandon

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लड़की के साथ फोटो छापने पर नवाजुद्दीन सिद्दकी ने फिल्मफेयर मैग्जीन पर मुकदमा कर दिया

चर्चित युवा एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने फिल्मफेयर मैग्जीन पर मुकदमा करने की तैयारी कर ली है. इसके तहत सबसे पहले मैग्जीन को लीगल नोटिस भेज दिया गया है. फिल्मफेयर मैग्जीन के इसी महीने के शुरुआती हफ्ते वाले अंक में प्रकाशित एक आर्टकिल में नवाज की एक लड़की के साथ दिखाया गया और लिखा गया है कि वे इस लड़की के साथ डेट कर रहे हैं.

नवाजुद्दीन ने अपने नोटिस में कहा है कि फिल्मफेयर की तरफ से उनके बारे में झूठी, अपुष्ट, भ्रामक और बेहूदा लेख को छापा गया है. इस लेख के कारण उन्हें मानसिक पीड़ा और आघात से गुजरना पड़ रहा है. नवाजुद्दीन ने फिल्मफेयर मैगजीन को सात दिन में माफी मांगने और खंडन छापने को कहा है.

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‘गोरख धंधा’ शब्द का इस्तेमाल करने पर एबीपी न्यूज को भेजा नोटिस

सेवा में,
श्री मान मुख्य सम्पादक महोदय जी,
ABP न्यूज़ चैनल

विषय :- ‘गोरख धंधा’ शब्द का इस्तेमाल ना करने और इस संबंध में स्पष्टीकरण प्रसारित करने के बारे में.

श्री मान जी,

उपरोक्त विषय में आपको सूचित किया जाता है कि आपके चैनल द्वारा पंजाब के मनसा की खबर “पेट्रोल पम्प पर गोरख धंधा” (समाचार क्लिप संलग्न है) दिखाई गई जिसमें कई बार आपके चैनल के रिपोर्टर / वायस ओवर करने वाले ने गोरखधंधा शब्द का प्रयोग किया है और इसके साथ-साथ मनसा पुलिस के प्रवर पुलिस अधीक्षक ने भी ‘गोरख धन्धा’ शब्द का प्रयोग किया है.

इस बारे में बताना यह है कि उक्त ‘गोरख धंधा’ का ‘गोरख’ शब्द मेरे गुरु श्री श्री महायोगी 1008 गुरु गोरख नाथ जी से सम्बन्ध रखता है और गुरु गोरखनाथ ने कभी भी कोई गलत कार्य नहीं किया.  गलत कामों के साथ मेरे गुरु का नाम जोड़ा जाना कष्टप्रद है. गोरख धंधा शब्द के इस्तमाल करने से मेरे गुरु के सम्मान को ठेस पहुंचती है और इस शब्द के प्रयोग से मेरी व मेरे सर्व जोगी समाज  की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है. ऐसा किया जाना कानूनन अपराध है और भारतीय दंड सहिता के अनुसार एक दंडनीय अपराध है.

यह है कि आप का चैनल व प्रवर पुलिस अधीक्षक लिखित में माफी मांगें कि इस शब्द का प्रयोग भविष्य में उनके द्वारा ना किया जायेगा. साथ ही इस सम्बन्ध में इस शब्द के प्रयोग का खंडन / स्पष्टीकरण प्रसारित करें. या फिर मुझे निजी तौर पर स्पष्टीकरण देकर बतायें कि आखिर गोरख धंधा शब्द का इस्तेमाल आप सब ने किन हालात में और किसलिए किया.

मेरा आपसे पुन: अनुरोध है कि उक्त शब्द का प्रयोग आगे से न करें. यहि भविष्य में गोरख धंधा शब्द का प्रयोग किया गया तो मजबूरन मुझे आपके चैनल व कर्मचारियों के खिलाफ न्याय हेतु माननीय न्यायालय की शरण में जाना पड़ेगा. इसके हर्जे खर्चे के आप स्वयं जिम्मेवार होंगे. इस पत्र को जोगी समाज जाग्रति मंच सभा हरियाणा की तरफ से नोटिस समझा जाये. उचित कार्यवाही ना होने पर देश की ४१ जोगी समाज संगठनों द्वारा इस पर क़ानूनी कार्यवाही की जाएगी.

भवदीय
मयंक जोगी
प्रदेश मीडिया प्रभारी
जोगी समाज जाग्रति मंच
हरियाणा
+91-829-555-666-0
myankjogi@gmail.com

देखें संबंधित वीडियो…

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सुरेश चह्वाणके ने भड़ास को भेजा लीगल नोटिस

सुदर्शन न्यूज चैनल जो मुसलमानों के खिलाफ जहर उगलने के लिए कुख्यात है, भड़ास को भेजे लीगल नोटिस में लिखता है कि भड़ास पर उनके चेयरमैन सुरेश चह्वाणके के सेक्स स्कैंडल के बारे में जो खबर छापी गई है, दरअसल वह और कुछ नहीं बल्कि जहर समान है. चार पन्नों के लीगल नोटिस में सुदर्शन चैनल और इसके मालिक सुरेश चव्हाणके के वकील ने भड़ास पर छपी खबरों का हवाला देते हुए इसे बिलकुल गलत, बकवास, बेबुनियाद और चरित्र हनन करने वाला बताया है. इस नोटिस में भड़ास के बारे में कहा गया है कि इस पोर्टल का न तो कोई आफिस है और न ही कोई संपर्क नंबर, इसलिए मेल पर नोटिस भेजा जा रहा है. Continue reading

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एचएमवीएल के एचआर हेड को उप श्रमायुक्त गोरखपुर ने जारी किया नोटिस

हिन्दुस्तान अखबार को चलाने वाली कंपनी हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड (एचएमवीएल) के एचआर हेड को उप श्रमायुक्त गोरखपुर ने नोटिस जारी किया है। नोटिस के जरिये कंपनी के प्रतिनिधि को बुलाया गया है ताकि कंपनी अपना पक्ष रख सके। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि 7 फरवरी 2015 तक सभी अखबार चार किश्तों में मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से एरियर का पूर्ण भुगतान कर दें। नवम्बर की 11 तारीख और वर्ष 2011 से 10 जनवरी 2013 तक के मेरे एरियर का भुगतान कंपनी को 18 प्रतिशत कंपाउंड ब्याज के साथ मुझे बिना मांगे देना चाहिये था। मैंने बड़ी विनम्रता से माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई समयावधि का इंतजार किया। जब एक पाई कंपनी ने नहीं भेजा तब कंपनी के एचआर हेड और समूह संपादक को पत्र भेजकर अपना एरियर मांगा। इस बेशर्म कंपनी ने जवाब तक नहीं दिया।

मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सबसे कमजोर श्रेणी की कंपनी को सीनियर स्टाफ रिपोर्टर को कम से कम 8000-10000 मासिक की बेसिक देनी चाहिये। इन नबाबों ने सिर्फ 3750 रूपये प्रति माह बेसिक दिया, जबकि ये क्लास वन में आते हैं और उस हिसाब से इन्हें मुझे 17000 मासिक का बेसिक देना चाहिये था। इस कंपनी ने मुझे लगभग 15000 का कुल मासिक वेतन दिया जबकि देना 63000 मासिक चाहिये था। एचएमवीएल कंपनी, एचटी मीडिया समूह का अंग है जिसका औसत रेवेन्यू 1000 करोड़ प्रति वर्ष से ज्यादा रहा है। लिहाजा कंपनी को क्लास वन के हिसाब से एरियर देना पड़ेगा। अब करीब 14 माह के बकाये एरियर का कंपनी को ब्याज समेत भुगतान करना होगा।

हालांकि यह ढीठ कंपनी इतनी आसानी से पैसा नहीं देगी। एमाउंट पर विवाद फंसाकर लेबर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़वाएगी। हम भी लड़ने को तैयार हैं। हम वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की जिस धारा 17(1) के तहत लड़ रहे हैं, उसमें क्लेम पाने का अधिकार मेरे बच्चों तक का है। यानी इस पीढ़ी में लड़ाई पूरी न हुई तो अगली पीढ़ी उस लड़ाई को लड़ सकेगी। और कंपनी जब तक इस लड़ाई को खींचेगी तब तक प्रति वर्ष 18 प्रतिशत कंपाउंड ब्याज लगता रहेगा। यानी यह लड़ाई एक प्रकार का बीमा कवर भी है। कंपनी भी यह तथ्य जानती है लेकिन वह मामले को सिर्फ इस नाते लिंगर आन करेगी और 2-10 साल तक फंसाएगी ताकि दूसरे पत्रकार और गैर पत्रकार कर्मचारी लड़ने की हिम्मत न जुटा सकें। और हो भी यही रहा है। पूरे यूपी में एचएमवीएल के साथी घुट रहे हैं लेकिन क्लेम नहीं लगा पा रहे हैं।

जिन 14 लोगों ने यूपी में मजीठिया को लेकर क्लेम लगाया/शिकायत की उनमे से 13 टर्मिनेट हो गए और एक का तबादला कर दिया। उनको भी देर सबेर टर्मिनेट कर देंगे। हांलाकि इन 14 में जो भी अंत तक लड़ेगा वह मजीठिया वेज बोर्ड के साथ हैवी मुआवजा लेकर बहाल होग। बस नुकसान इतना होगा कि चुप बैठे साथियों का हक मारा जाएगा, क्योंकि जब तक ये साथी चुप्पी तोड़ेंगे तब तक एचएमवीएल कंपनी नये नाम से अवतार ले चुकी होगी। ऐसे में कोई क्लेम नहीं हो पाएगा और बाकी साथी शायद अपने हक से हाथ धो बैठें। कंपनी भय का व्यापार कर अपने मकसद में सफल होती दिख रही है। जो साथी इस लड़ाई में हैं या आने वाले हैं वे हौसला रखें। आय के अन्य उचित साधनों की तलाश कर लें। हम यह लड़ाई जरूर जीतेंगे। जो लड़ेगा, वह विजयी होगा और उसके दिन जरूर बदलेंगे।

“मजीठिया क्रांति की जय”

आप सभी का साथी
वेद प्रकाश पाठक “मजीठिया क्रांतिकारी”
स्वतंत्र पत्रकार, कवि, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट
संयोजक-हेलमेट सम्मान अभियान गोरखपुर 2016
आवास-ग्राम रिठिया, टोला पटखौली, पोस्ट पिपराईच
जनपद गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, पिन कोड-273152
मोबाइल व वाट्स एप्प नंबर-8004606554
ट्विटर हैंडल-@vedprakashpath3

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मजीठिया मामला : मुम्बई के 22 अखबार मालिकों को एफिडेविड देने का निर्देश

पत्रकारों के वेतन, एरियर और प्रमोशन से जुड़े मजीठिया वेज बोर्ड मामले में आज मुम्बई शहर के श्रम उपायुक्त ने एक बड़ा निर्देश जारी कर 22 अखबार मालिकों को नोटिस भेज कर उन्हें 19 अक्टूबर तक एफिडेविड देने को कहा है। ये एफिडेविड 300 रुपये के स्टाम्प पेपर पर देना होगा और इस एफिडेविड में अखबार मालिकों को साफ़ तौर पर ये लिख कर देना पड़ेगा कि उन्होंने अपने सभी कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार बकाया दे दिया है। साथ ही ये भी कि मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार ही वे कर्मचारियों को वेतन दे रहे हैं। अब अगर अखबार मालिकों ने झूठा एफिडेविड दिया और अगर ये झूठ सिद्ध हो गया तो उनके खिलाफ फर्जी एफिडेविड देने का नया मामला दर्ज होगा।

कामगार उपायुक्त द्वारा भेजे इस नोटिस में साफ़ कहा गया है कि अगर आप ने एफिडेविड नहीं दिया तो आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस नोटिस से अखबार मालिकों के गले में केकड़ा फंस गया है। अगर वो एफिडेविड देते हैं और वो फर्जी निकल गया तो उन पर एक नया केस दर्ज होगा। उन्होंने एफिडेविड नहीं दिया तो कामगार आयुक्त उनके खिलाफ मामला दर्ज कराएंगे। आपको बता दूँ कि कामगार आयुक्त ने मजीठिया वेज बोर्ड से जुड़े सभी 17(1) के मामलों को 29 अक्टूबर तक निपटारे का आदेश राज्य के सभी कामगार उपायुक्तों को  दिया है।

अब देश के दूसरे राज्यों के श्रमायुक्तों को भी एफिडेविड वाला फार्मूला अपनाना चाहिए। ये नोटिस टाइम्स ऑफ इंडिया, मिड डे, सामना सहित कुल 22 अखबार मालिकों को भेजा गया है। आपको बता दें अखबार मालिक अपनी जान बचाने के लिए अपने कार्मिक प्रबंधक से फर्जी एफिडेविड दिला सकते हैं। अगर ऐसा हुआ और सिद्ध हो गया कि कार्मिक प्रबंधक या दूसरे अधिकारियों ने फर्जी एफिडेविड दिया है तो उनको आसानी से सुप्रीम कोर्ट में पार्टी बनाया जा सकता है और तब उन्हें तिहाड़ जेल में पूरी लाइफ बितानी पड़ सकती है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
9322411335

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प्रसार भारती के चेयरमैन सूर्य प्रकाश ने सीईओ जवाहर सरकार को नोटिस भेजा

प्रसार भारती के चेयरमैन ए. सूर्यप्रकाश ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी जवाहर सरकार को शो कॉज नोटिस जारी किया है. वजह है सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति की एक बैठक में वरिष्ठ अधिकारी की जगह कनिष्ठ अधिकारी को भेजना. प्रसार भारती के चेयरमैन द्वारा सीईओ को नोटिस दिए जाने के औचित्य पर सवाल उठ रहे हैं कि वे नोटिस दे सकते हैं या नहीं. सीईओ का पद संवैधानिक होता है.

इस नोटिस के नेपथ्य में कर्नाटक से सांसद डीके सुरेश की एक चिट्ठी बताई जाती है, जो उन्होंने केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली को लिखी. डीके सुरेश ने आरोप लगाया है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति की बैठक में प्रसार भारती के वरिष्ठ अधिकारी महेश जोशी (एडीजी, दक्षिण) की जगह जूनियर रैंक के एक अधिकारी को भेज दिया गया. वह अधिकारी उस दिन की बैठक में किसी सवाल का सटीक जवाब नहीं दे सका. डीके सुरेश का आरोप है कि दरअसल, प्रसार भारतीय के सीईओ ने उस बैठक को महत्व ही नहीं दिया. इसलिए जूनियर अधिकारी को भेजा गया. सांसद सुरेश के इसी पत्र के आधार पर जवाहर सरकार को कारण बताओ नोटिस दिया गया.

ज्ञात हो कि दूरदर्शन के धारावाहिकों की मंजूरी में घूसखोरी के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंप कर जवाहर सरकार एक लॉबी के निशाने पर पहले से ही थे. प्रसार भारती में कई और मामलों को लेकर संघ की घनिष्ठ लॉबी के साथ जवाहर सरकार की टकराव की स्थिति है. प्रसार भारती चेयरमैन सूर्य प्रकाश वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं और उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का घनिष्ठ माना जाता है. कहा जा रहा है कि जवाहर सरकार को शो-कॉज नोटिस से उठे विवाद के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संज्ञान लिया है. उनके निर्देश पर मंत्री अरुण जेटली निजी तौर पर इस मामले को देख रहे हैं.

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Delhi HC issues notice to top editorial staff of UNI

New Delhi : Taking strong cognizance of the torture and humiliation of a dalit employee of United News of India (UNI), a prestigious news agency of the country, the Delhi High court yesterday issued notice to two high profile scribes of UNI including Joint Editor Neeraj Bajpayee, Journalist Ashok Upadhyay and an another employee of the agency Mohan Lal Joshi.

While hearing the case Delhi high court hon’bleJustice Pratibha Rani issued the notices directing the trio to file a reply by July 15, 2016 informed the counsel Jitendra kumar Jha and Shahid Iqbal. The counsels further said that after taking cognizance of non filing of any appeal by the government lawyer against acquittal of the accused by a lower court, judge asked the government lawyer about it and he admitted that no writ was filed against the decision of the lower court and he accepted the notice .

Earlier UNI Joint Editor Mr Bajpayee,journalist Mr Upadhyay and an another employee of UNI Mr Joshi were sent to tihar jail by lower court in 2013 in connection with the SC/ST case lodged at Parliament Street police station with FIR No. 61/2013. The trio who have unleashed a reign of terror in the organisation were put behind the bars for one week from 12/12/2013 to 18/12/2013.

As per the case these three acused had humiliated and had threatened the victim, (petitioner )Virender Verma, a Dalit employee of UNI in the office premises on 14/03/2013. The incident took place within the premises of the UNI located on 9, Rafi Marg, New Delhi situated within 200 meters of the Indian Parliament. The case was lodged Under Sec 3 of SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989 in which the accused persons were acquitted by the lower court.

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पत्रिका ने अपने कर्मी को बर्खास्त किया तो कर्मी ने नोटिस भिजवाया और लेबर आफिस में शिकायत दर्ज कराई

राजस्थान पत्रिका समूह के अखबार पत्रिका के ग्वालियर संस्करण के सरकुलेशन डिपार्टमेंट में कार्यरत शैलेंद्र सिंह को प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना के संस्थान से टर्मिनेट कर दिया. इससे दुखी महेंद्र ने प्रबंधन को वकील के माध्यम से लीगल नोटिस भिजवाया है और लेबर आफिस में शिकायत दर्ज कराई है. इस प्रकरण से संबंधित सभी दस्तावेज नीचे दिए जा रहे हैं…

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दैनिक जागरण चंदौली में गलत खबर छपने पर संपादक को नोटिस जारी

वर्ष 2012 के अक्टूबर व नवम्बर माह में दैनिक जागरण के चंदौली संस्करण में मुगलसराय से प्रकाशित हुये दो भ्रामक समाचारों की शिकायत को संज्ञान में लेने के बाद भारतीय प्रेस परिषद ने वादी व जागरण के वाराणसी के सम्पादक को सुनवाई के लिये नोटिस जारी किया है। सुनवाई वर्ष 2016 के 5 जनवरी को सुनिश्चित है। विदित हो कि वर्ष 2012 के अक्टूबर माह के 19 तारीख को जागरण के पृष्ठ संख्या 02 पर ”बिजली कटौती के विरोध में क्रमिक अनशन” नामक शीर्षक से समाचार प्रकाशित हुआ था जो पूरी तरह गलत था। वादी राजीव कुमार ने स्पष्ट किया था कि दिनांक 17 अक्टूबर को एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल किया जायेगा और किया भी गया था। इसका समाचार लगभग सभी समाचार पत्रों ने प्रमुखता से 18 अक्टूबर के अंक में प्रकाशित किया था, जागरण को छोड़कर। उसी समाचार को दैनिक जागरण ने 19 अक्टूबर को क्रमिक अनशन के रूप में दिखाया।

नवम्बर माह में भी 06 नवम्बर के दैनिक जागरण के पृष्ठ संख्या 3 पर ”एक्सईएन ने समाप्त कराया अनशन” नामक शीर्षक से प्रकाशित समाचार में भी आपत्ति की थी। उक्त समताचार में आन्दोलन किन मुद्दों पर हुआ और किस विभाग के एक्सईएन ने समाप्त करवाया, यह न प्रकाशित करके पूरी खबर को चार लाईन में समेट दिया गया था। जनहित के लिये किये गये आन्दोलन के समाचार के साथ खिलवाड़ के बाबत जब जागरण के स्थानीय प्रतिनिधि विनय वर्मा से पूछा गया था तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया था कि आपके पास बीजे एमजे का प्रमाणपत्र नहीं है इसलिये अपको पूछने का हक नहीं है। इसकी शिकायत वादी ने प्रेस काउंसिल आफ इंडिया को की थी।

इसके बाद भारतीय प्रेस परिषद ने मामले को गम्भीरता से लेते हुये पत्रांक मिसिल संख्या 14/600/12-13 पीसीआई के तहत परिवाद दर्ज कर कार्यवाही के लिये समाचार पत्र की प्रति मांगी थी जिसे वादी ने मय प्रपत्र बजरिये डाक भेज दिया था। भारतीय प्रेस परिषद ने पुनः दिनांक 16 दिसम्बर 2015 को जारी किये गये पत्र के माध्यम से वादी राजीव कुमार व प्रतिवादी दैनिक जागरण के सम्पादक को 2016 के 5 जनवरी को दिल्ली के प्रेस कौसिल कार्यलय के सूचना भवन में उपस्थित होने के लिये नोटिस जारी किया है।

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सहारा के जिस डिवीजन के लोग हड़ताल करेंगे, सहाराश्री उस डिवीजन को ही बंद कर देंगे… देखें नोटिस

सहारा अपने कर्मचारियों को लगभग डेढ़ साल से नियमित वेतन नहीं दे रहा है। एक साल से ज्यादा का समय हो गया है, सिर्फ आधा वेतन दिया जा रहा है। वेतन न मिलने से लाखों कर्मचारी प्रभावित हैं। वेतन न मिलने की वजह से कई तो खुदा को प्यारे हो गए। पंद्रह सितंबर 2015 को सहारा के सभी कार्यालयों में सहारा सुप्रीमो का यह पत्र नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दिया गया है। पत्र में वेतन न देने की बात करते हुए हड़ताल न करने की हिदायत दी गई है साथ ही चेतावनी या धमकी जो कह लीजिए, दी गई है कि उस विभाग को ही बंद कर दिया जाएगा जहां के कर्मचारी वेतन की मांग करेंगे। मसलन पैराबैंकिंग में हड़ताल होती है तो वह ही बंद कर दिया जाएगा।

हमारे संविधान ने हमें जुर्म के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए या अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन करने का अधिकार दिया है। अंग्रेजों से आजादी भी हमारे पूर्वजों ने यूं ही हासिल नहीं की। इसके लिए धरना प्रदर्शन किया है। लेकिन पैसे के मद में चूर सहारा इंडिया के मुखिया सुब्रतो राय अपने कर्मचारियों से यह अधिकार भी छीन लेना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने बकायदे गश्ती पत्र जारी किया है।

इस पत्र में उन्होंने हड़ताल को अराजकतावादी कदम बताया है। इसका मतलब आजादी के आंदोलन के सारे के सारे क्रांतिकारी अराजक थे? राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का असहयोग आंदोलन अराजकतावादी कदम था? इस तरह तो भगत सिंह सबसे बडे अराजक थे? इस पत्र में यह धमकी भी दी गई है कि जिस भी डिवीजन में हडताल हुई वह बंद कर दिया जाएगा। जैसे नियम कानून इनके अधिकारियों की तरह इनके आगे पीछे दुम हिलाते फिरते हैं।

प्रसंगवश जिस संस्थान में एक हजार या उससे अधिक कर्मचारी हैं वह बिना अनुमति के कारोबार नहीं समेट सकता। बीमार संस्थान को बंद करने के भी नियम हैं। हर नियमित कर्मचारी का पूरा ड्यूज देना होगा। जिसकी जितनी सेवाएं बची हैं उसको पूरा वेतन देना पडता है। कानपुर में एक नहीं दर्जनों फैक्ट्रियां/ मिलें बंद हुई हैं सभी ने पूरा बकाया दिया है। कांग्रेस का नेशनल हेरल्ड और नवजीवन इसके उदाहरण हैं। बंद होने को तो बंबई और कोलकाता में न जाने कितनी मिलें बंद हुई हैं सुब्रतों राय, लेकिन ऐसे नहीं जैसे तुम या तेरे गुर्गे समझ / समझा रहे हैं।

एक सहाराकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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टीवी पत्रकार ने जागरण और हिंदुस्तान को थमाया तीन करोड़ की मानहानि का नोटिस

 आगरा के मून टीवी चैनल के पत्रकार शशिकांत गुप्ता ने एक खबर से अपनी मानहानि होने पर दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान को तीन करोड़ रुपए अदा करने का नोटिस दिया है। शशिकांत गुप्ता के खिलाफ बीते अप्रैल माह में जागरण और हिन्दुस्तान ने एक खबर प्रकाशित की थी। एक खबर, जो 24 अप्रैल को छपी थी, उसमें एक शराबी युवक द्वारा बिजली घर पर तोड़फोड़ का उल्लेख किया गया था। अगले दिन 25 अप्रैल को फिर खबर छपी कि बिजली घर पर तोड़फोड़ करने वाला युवक शशिकांत गुप्ता है, जिसके विरुद्ध थाने में मुकदमा लिखाया गया है।

गौरतलब है कि बिजलीघर की लॉगसीट में ट्रिपिंग होना और मशीन में कोई तोड़फोड़ नहीं हुई थी लेकिन इन अखबारों ने फर्जी खबर छापकर विभाग के अफसरों पर दबाव बनाया। इसके बाद 30 अप्रैल को एनसीआर दर्ज कराई गई। इस मामले को लेकर अखबार के स्थानीय संपादक से एत्मादपुर के विचपुरबियाना निवासी पत्रकार शशिकांत गुप्ता ने मुलाकात कर अपना पक्ष रखा लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। इसके बाद शशिकांत को वॉटसएप पर धमकी तक दी गई कि शांत रहें, नेतागिरी न करें। 

इतने बड़े अखबारों की ओछी हरकत से आजिज आकर आखिरकार शशिकांत ने कोर्ट के माध्यम से प्रबंधन को नोटिस दिया है। दोनो अखबारों को प्रेषित नोटिस में कहा गया है कि जब तोड़फोड़ की ऐसी सूचना न बिजली विभाग के पास है, न थाना पुलिस के पास तो खबर किस आधार पर प्रकाशित की गई है। इससे शशिकांत की सामाजिक प्रतिष्ठा नष्ट हुई है। इसके एवज में तीन करोड़ रुपए का भुगतान करें वरना वह केस करने के लिए बाध्य होंगे। 

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मजीठिया : गोरखपुर में 10 अखबारों को श्रम विभाग का नोटिस, पांच बिंदुओं पर जवाब तलब

गोरखपुर : मजीठिया वेज की संस्तुतियों को लागू कराने के सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अमल में लाने के लिए गोरखपुर जर्नलिस्टस प्रेस क्लब द्वारा बनाए गए दबाव के बाद गोरखपुर का श्रम विभाग हरकत में आ गया है। यहां से प्रकाशित होने वाले दस अखबारों के प्रबंधन से मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुतियां लागू करने के सबंध में पांच बिंदुओं पर नोटिस से जवाब तलब किया गया है। इस नोटिस के बाद अखबार प्रबंधकों के होश उड गए हैं। सबसे ज्यादा मुसीबत एचआर के गले आ पड़ी है। उन्हें सूझ नहीं रहा है कि क्या जवाब दें। लिहाजा नोटिस की अवधि लगभग समाप्त होने को है। मात्र तीन अखबारों ने आधा-अधूरा जवाब भेजा है। श्रम विभाग का कहना है कि यदि तय अवधि में जवाब नहीं आते हैं तो अगली कार्रवाई की जाएगी। इसमें औचक छापे पड़ेंगे और जानकारी ली जाएगी। इस दौरान कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने मई माह में देश के सभी राज्यों के प्रमुख सचिवों को विशेष श्रम अधिकारी नियुक्त कर मीडिया संस्थानों  में मजीठिया वेज बोर्ड लागू होने के संबंध में जांच पड़ताल कराकर रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया था। 28 जून तक श्रम अधिकारियों की नियुक्ति हो जानी थी। 24 जून को गोरखपुर में जर्नलिस्टस प्रेस क्लब के अध्यक्ष अशोक चौधरी की अगुआई में पत्रकारों के एक दल ने उप श्रमायुक्त को सुप्रीम कोर्ट के उक्त आदेश की प्रति सौंपकर पत्रकारों व प्रेसकर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड के अनुरूप वेतन दिलाने की मांग की थी। 

वार्ता के दौरान अधिकारी ने बताया था कि अभी उनके पास शासन से इस संबंध में कोई निर्देश नहीं आया है। ज्ञापन को शासन को भेजकर निर्देश लेंगे। इसके बाद इस ज्ञापन को श्रमायुक्त को भेजा गया। ज्ञापन मिलने के बाद 28 जून को श्रमायुक्त ने पूरे प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में सभी उप श्रमायुक्तों को मीडिया हाउसों की जांच करने का निर्देश दिया। मालूम हो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही इस जांच पडताल में श्रम विभाग को डीएम की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। वे सीधे बिना किसी सूचना के मीडिया संस्थानों का औचक निरीक्षण कर सकेंगे।

पता चला है कि नोटिस मिलने के बाद अखबारों के प्रबंधन ने पूर्व की भांति श्रम निरीक्षकों की सेटिग करने की कोशिश की। उनसे मनुहार की गयी कि वे प्रबंधन के मनोनुकूल रिपोर्ट भेज दें। एक अखबार के प्रबंधन ने तो इसके एवज में बड़ी रिश्वत की भी अपने वकील के माध्यम से पेशकश कर दी लेकिन निरीक्षकों ने हाथ खड़े कर दिये और साफ कहा कि वे इस मामले में कोई मदद नहीं कर पाएंगे। मामला सुप्रीम कोर्ट का है, लिहाजा वे अपनी नौकरी के साथ खिलवाड़ नहीं करेंगे। 

सेटिंग के सभी प्रयास विफल हो जाने के बाद प्रबंधन ने अपने संस्थानों के भीतर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। स्ट्रिंगरों की हाजिरी बंद है। सारे रिकार्ड छिपा लिए गए हैं। एचआर विभाग के कमरे में कर्मियों के प्रवेश पर निगरानी रखी जा रही है। जिला कार्यालयों पर जांच में गए श्रम अधिकारियों को गलत सूचनाएं दी गयीं। उन्हें दिन में 11 बजे बुलाया गया। जब कोई कर्मी आफिस में होता ही नहीं लेकिन कर्मियों ने भी मजीठिया लेने के लिए कमर कस ली है। जिलों से उपश्रमायुक्त कार्यालय पर अभिलेखों के साथ पत्रकारों के शिकायती पत्र पहुंच रहे हैं। बस्ती, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, देवरिया, पडरौना के दो बड़े राष्ट्रीय अखबारों के पत्रकारों ने श्रम निरीक्षकों से सायं 6 से 7 के बीच में अखबारों के आफिस में आने को कहा है ताकि प्रबंधन के फर्जीवाड़े का असली नजारा मिल सके।

सूत्रों के अनुसार गोरखपुर के दो राष्ट्रीय अखबारों की कथित फ्रेंचाइजी कंपनियों को भी नोटिस भेजा गया है। टेक्नो वे और कंचन नाम की इन कंपनियों से उक्त दोनों अखबारों के प्रोडक्शन, विज्ञापन, डीपीटी आदि विभागों के कर्मियों को जुड़ा बताया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि यह फर्जीवाड़ा मजीठिया से बचने के लिए किया गया लगता है क्योंकि पिछले तीन साल में होने वाली सारी भर्तियां इन्हीं कंपनियों में दिखाई गयी हैं।

इधर मीडियाकर्मियों में भी एकजुटता दिख रही है। दैनिक जागरण के 17 पूर्व कर्मियों ने मजीठिया वेज बोर्ड के नवंबर 2011 से बकाया एरियर की मांग करते हुए प्रबंधन और श्रम विभाग को ज्ञापन भेजा है। इस ज्ञापन में उप श्रमायुक्त से बताया गया है कि जागरण प्रबंधन ने दूर के स्थानों पर उनका स्थानांतरण कर त्यागपत्र देने के लिए विवश किया। उनकी उम्र 54 से 56 के बीच पहुंच चुकी थी। ऐसे में उनकी सेवामुक्ति को बीआरएस का लाभ मिलना चाहिए।

पत्रकार अशोक चौधरी से संपर्क : gkp.ashok@gmail.com

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पत्रकार जगेंद्र हत्याकांड पर केंद्र और यूपी सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

नई दिल्ली : शाहजहांपुर के जुझारू पत्रकार जगेंद्र सिंह की हत्या के मामले को सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान ले लिया है। इससे हत्याकांड के आरोपी मंत्री और पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता भी आसान होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। कोर्ट ने हत्याकांड के संबंध में यूपी सरकार, केंद्र सरकार और प्रैस काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस भेजकर दो सप्ताह के भीतर जवाब तलब कर लिया है। 

जगेंद्र हत्याकांड पर पत्रकार सतीश जैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार और केंद्र के अलावा प्रैस काउंसिल ऑफ इंडिया को भी नोटिस भेजा है। याचिका में पत्रकार जगेंद्र सिंह की मौत की जांच सीबीआई से कराने की मांग भी की गई है। याचिका में मामले की सीबीआई जाँच के साथ-साथ पत्रकारों की सुरक्षा के लिए भी दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है। 

याचिका में कहा गया है कि अगर किसी भी पत्रकार की आकस्मिक मौत होती है तो इसकी जाँच कोर्ट की निगरानी अदालत के देखरेख में हो। याचिकाकर्ता के वकील आदिश अग्रवाल ने बताया कि प्रैस काउंसिल ऑफ इंडिया के मुताबिक पिछले ढाई साल में 79 पत्रकारों की हत्या हुई है। ऐसे में जरूरी है कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कोई गाइडलाइन जारी की जाए। इसलिए काउंसिल को भी याचिका में पार्टी बनाया गया है। इस मामले में उसकी भूमिका अहम होगी क्योंकि ये एक सरकारी संस्था है जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज चेयरमैन हैं।

उन्होंने कहा कि अब मध्यप्रदेश में भी पत्रकार की जलाकर हत्या कर दी गई है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल की जाएगी। इसमें सभी राज्यों को पार्टी बनाया जाएगा। इस वक्त राज्यों में पत्रकारों की हालत खराब है और ऐसे में उनकी सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई दो हफ्ते बाद करेगा।

आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने पत्रकार जगेन्द्र सिंह केस में सीबीआई जांच के लिए पीआईएल में सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर स्थिति से अवगत कराने के आदेश का स्वागत किया है। उनका कहना है कि मात्र एक स्वतंत्र संस्था द्वारा तफ्तीश ही लोगों के मन में मंत्री और पुलिस की भूमिका के प्रति पर्याप्त विश्वास पैदा कर सकती है। ख़ास कर यदि इस बात पर ध्यान दिया जाए कि जगेन्द्र के आग लगने का एफआईआर उसके मरने के बाद ही दर्ज हो सका था। वह भी तब जब उनके परिवार वालों ने बिना एफआईआर हुए दाह संस्कार करने से साफ़ मना कर दिया था। 

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दैनिक जागरण प्रबंधन के होश उड़े, कर्मचारियों का अल्टीमेटम, मांगें पूरी करो वरना सीधे टकराएंगे

इलाहाबाद हाईकोर्ट में गर्मियों की छुट्टियां शुरू होने से ठीक एक दिन पहले यूनियन पर स्टे लेने वाले दैनिक जागरण प्रबंधन की खुशियां बहुत दिन टिक नहीं पाईं इसके पहले कि वह कर्मचारियों के शोषण व उत्‍पीड़न के अपने इरादों को अंजाम देने की दिशा में कोई कार्रवाई कर पाता, जागरण के कर्मचारियों ने श्रम कानूनों में ही निश्चित प्रावधानों के तहत अपनी एक सभा कर अपने बीच से ही सात प्रतिनिधियों का चुनाव कर प्रबंधन को पटखनी दे दी। इन सात प्रतिनिधियों के मार्फत एक सूत्रीय मांग पत्र तैयार कर जागरण प्रबंधन को थमा दिया गया है। यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं तो पिछली सात फरवरी की तरह वह हड़ताल पर चले जाएंगे।

दैनिक जागरण प्रबंधन को दिए गए मांगपत्र की छाया प्रति (पृष्ठ-1)

दैनिक जागरण प्रबंधन को दिए गए मांगपत्र की छाया प्रति (पृष्ठ-2)

दैनिक जागरण प्रबंधन को दिए गए मांगपत्र की छाया प्रति (पृष्ठ-3)

दैनिक जागरण प्रबंधन को दिए गए मांगपत्र की छाया प्रति (पृष्ठ-4 अंतिम)

श्रम कानूनों के अनुसार इन सात प्रतिनिधियों को मांगें पूरी न होने पर हड़ताल पर जाने का नोटिस देने तक का अधिकार है। इसके अलावा प्रबंधन द्वारा यूनियन पर लिए गए स्‍टे को खत्‍म कराने की दिशा में भी कानूनी सलाह ली जा रही है। कानूनविदों का कहना है कि हाईकोर्ट से केस जीतकर आने के बाद यूनियन और ज्‍यादा ताकतवर ढंग से प्रबंधन के समक्ष कर्मचारियों की बात को उठा सकेगी। 

दैनिक जागरण कर्मचारियों द्वारा सौंपे गए मांगपत्र में प्रबंधन द्वारा किए जा रहे कर्मचारियों के उत्पीड़न को तुरंत रोकने की पुरजोर मांग की गई है। प्रबंधन को दिए गए इस मांग पत्र की प्रतिलिपि नोएडा के उप श्रमायुक्त के अलावा जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नगर मजिस्ट्रेट, पुलिस क्षेत्राधिकारी, उत्तर प्रदेश के श्रम आयुक्त, प्रमुख सचिव, श्रम मंत्री और मुख्य मंत्री को भेजी गई है। इस मांग पत्र में मजीठिया वेज बोर्ड के तहत मिलने वाले वेतनमान तथा अन्य सभी सुविधाएं तत्काल लागू करने, रात्रिपाली में काम करने वालों को भत्ते एवं अन्य सुविधाए देने, मजीठिया की मांग करने और इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में केस दायर करने वाले जिन कर्मचारियों का इनक्रीमेंट रोका गया है उसे तुरंत देने, ट्रेड यूनियन गतिविधियों में हिस्सा लेने वाले कर्मचारियों के खिलाफ़ रंजिशन कार्रवाई बंद करने तथा वेतन पर्ची में मौजूद विसंगतियां खत्म करने की मांग उठाई गई है।   

इससे जाहिर है कि दैनिक जागरण प्रबंधन चाहे कितनी भी कोशिशें कर ले, अब वहां कर्मचारियों की एकता टूटने वाली नहीं है। कर्मचारियों ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर इसके बाद भी प्रबंधन की ओर से कर्मचारियों के उत्पीड़न की कार्रवाई जारी रही तथा कर्मचारियों के हितों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई तो वे बीती 7 फरवरी की तरह फिर से सड़कों पर उतर सकते हैं। इस बार केवल नोएडा और हिसार यूनिट के ही नहीं बल्‍कि कई राज्‍यों की यूनिटों के कर्मचारी सड़क पर उतरने का मन बनाए बैठे हैं। 

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ACB विवाद : केजरीवाल को झटका, सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली सरकार को नोटिस

नई दिल्ली: कोर्ट ने नौकरशाहों के खिलाफ एसीबी को कार्रवाई करने की अनुमति देने वाले उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र की अपील पर भी दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधी पैनल की शक्ति सीमित करने संबंधी अधिसूचना को संदिग्ध ठहराने वाले उच्च न्यायालय के आदेश स्थगित करने की मांग करने वाली केंद्र की याचिका पर दिल्ली सरकार से तीन सप्ताह में जवाब देने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह 25 मई के अपने फैसले की टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना दिल्ली सरकार की ताजा याचिका पर स्वतंत्र तरीके से कार्यवाही करे।

गौरतलब है कि केंद्र ने एलजी की शक्तियों पर गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना को संदिग्ध बताने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। वहीं ‘आप’ की सरकार ने नौकरशाहों की नियुक्ति में एलजी को पूर्ण अधिकार देने की केंद्र की अधिसूचना को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि दिल्ली सरकार अधिसूचना की गलत व्याख्या कर रोज दिक्कतें पैदा कर रही है। इससे प्रशासनिक समस्याएं सामने आ रही हैं। अत: मामले की त्वरित सुनवाई की जाए।

जस्टिस एके सीकरी और यूयू ललित की पीठ ने कहा, दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला नहीं दिया,उसने सिर्फ अधिसचना को संदिग्ध बताया है। ऐसे में समस्या नहीं होनी चाहिए। इस पर एएसजी ने कहा कि ऐसा नहीं है। दिल्ली सरकार और एलजी के बीच समीकरण में संतुलन के लिए संविधान के अनुच्छेद 239 एए की स्पष्ट व्याख्या जरूरी है।

हाईकोर्ट में दिल्ली सरकार के अधिवक्ता रमण दुग्गल ने कहा कि गृह मंत्रालय ने मनमाने तरीके से अधिसूचना जारी की है। इसे रद्द किया जाए। सरकार ने शंकुतला गैमलिन की नियुक्ति भी रद्द करने की मांग की है।

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साहित्यिक चोरी के आरोप में ‘पीके’ के निर्माताओं को नोटिस

नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक उपन्यासकार द्वारा साहित्यिक चोरी का आरोप लगाने के बाद आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘पीके’ के निर्माता, निर्देशक को नोटिस जारी किया है. उपन्यासकार ने फिल्मकारों पर 2013 में प्रकाशित अपनी हिन्दी किताब ‘फरिश्ता’ के कुछ हिस्सों की साहित्यिक चोरी करने का आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है.

न्यायमूर्ति नाजमी वजीरी ने निर्माता विधु विनोद चोपडा और निर्माता-निर्देशक राज कुमार हिरानी, उनकी प्रोडक्शन कंपनियों और पटकथाकार अभिजात जोशी को नोटिस जारी कर उन्हें  याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया है. याचिका में उच्च न्यायालय से फिल्म के चीन में प्रदर्शन पर रोक लगाने का निर्देश देने की मांग की गयी है.

न्यायाधीश ने कहा, नोटिस जारी किया गया है. उन्हें (फिल्मकारों) चार हफ्ते में अपना जवाब देना होगा. उन्होंने कहा कि फिल्म के प्रदर्शन पर रोक नहीं लगायी जा सकती क्योंकि फिल्म दुनिया भर में रिलीज हो चुकी है और ना तो इस अदालत ने ना ही किसी दूसरी अदालत ने कोई निषेध लगाया है. फिल्म गत 22 मई को चीन में रिलीज हुई है.

उपन्यासकार कपिल इसापुरी ने याचिका में चोपडा और हिरानी, उनकी प्रोडक्शन कंपनियों और पटकथाकार जोशी पर उपन्यास से चरित्रों, विचारों की अभिव्यक्ति, दृश्य (अनुक्रम) चुराने का आरोप लगाया है जिसके बाद अदालत ने यह नोटिस जारी किया. याचिका में फिल्म की सभी कॉपी जब्त करने का आदेश देने की भी मांग की गयी है. इसमें कहा गया कि फिल्म द्वारा चीन में कमाए गए मुनाफे या प्रसिद्धि वादी की कडी मेहनत की कीमत पर होगी.

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जी के चैनल ‘जिंदगी’ और फिल्म गब्बर के डायरेक्टर को नोटिस

धारावाहिक ‘वक्‍़त ने किया क्‍या हसीं सितम’ और फिल्म ‘गब्बर’ विवादों के घेरे में आ गए हैं। धारावाहिक ‘वक्‍़त ने किया क्‍या हसीं सितम’ पर बीसीसीसी के अध्‍यक्ष मुकुल मुद्गल ने जी के ‘ज़िंदगी’ चैनल को एक सम्‍मन भेजकर इसके कंटेंट पर जवाब-तलब किया है। दर्शकों ने इस धारावाहिक पर ऐतराज़ जताया है। उधर, इंडियन मेडिकल असोसिएशन ने फिल्म गब्बर के डायरेक्टर को लीगल नोटिस भेजकर आपत्ति जताई है कि इसमें मेडिकल प्रफेशन को अपमानजनक और गलत रूप में दिखाया गया है।   

‘ज़िंदगी’ चैनल ने आधि‍कारिक बयान जारी करते हुए बीसीसीसी से नोटिस मिलने की बात मानी है। चैनल का कहना है कि हमने नोटिस पर अपनी प्रतिक्रिया भेज दी है और हम बीसीसीसी के सामने उन सारे कदमों को स्पष्ट करेंगे, जो हमने सेल्फ रेगुलेटरी गाइडलाइन्स और प्रोग्राम कोड का पालन करने के लिए उठाए हैं। विभाजन के मुद्दे को लेकर यह धारावाहिक नहीं बना, बल्‍कि‍ कुछ एपिसोड्स में इसकी पृष्ठभूमि ज़रूर है।

इस धारावाहिक पर भारतीय सिख और हिंदुओं की नकारात्मक छवि दिखाने के आरोप हैं। धारावाहिक को टाइमलेस लव स्‍टोरी करार दिया गया था, लेकिन सूचना और प्रसारण मंत्रालय इसे महज़ प्रेम कहानी मानने को तैयार नहीं। मंत्रालय ने बीसीसीसी (ब्रॉडकास्‍ट कंटेंट कॉम्‍प्‍लेंट्स काउंसिल) को इसका कंटेंट देखने की हिदायत दी है। रज़ि‍या बट की क़ि‍ताब ‘बानो’ पर आधारित यह धारावाहिक पाकिस्‍तान में ‘दास्‍तान’ नाम से प्रसारित हो चुका है। 

उधर, इंडियन मेडिकल असोसिएशन ने फिल्म गब्बर के डायरेक्टर को लीगल नोटिस भेजकर फिल्म से उस सीन को हटाने की मांग की है जिसमें मेडिकल प्रफेशन को अपमानजनक और गलत रूप में दिखाया गया है। आईएमए ने इसके पहले अपने 2.50 लाख डॉक्टर सदस्यों को इस बारे में जागरूकता फैलाने के लिए फिल्म की क्लिप भेजी थी और अपने सभी सदस्यों को इस फिल्म का बहिष्कार करने के लिए कहा था।

आईएमए के महासचिव डॉक्टर के. के. अग्रवाल ने कहा है कि इस फिल्म में मेडिकल प्रोफेशन को जिस तरह दिखाया गया है, उससे उन्हें काफी दुख हुआ है। फिल्म में एक अस्पताल के अंदर डॉक्टरों को भ्रष्ट काम करते हुए दिखाया गया है, जिसमें डॉक्टर अस्पताल लाए जाने से पहले मर चुके मरीज का इलाज कर रहे हैं।

आईएमए का कहना है कि अगर सेंसर बोर्ड, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने कोई कार्रवाई नहीं की तो आईएमए फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन करेगी। इस सीन को हटाने तक फिल्म के शो पर बैन लगाया जाना चाहिए।

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कस्बाई पत्रकार ने मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी न देने पर अपने अखबार मालिक को भेजा लीगल नोटिस

ऐसे दौर में जब बड़े बड़े पत्रकार पापी पेट की खातिर चुप्पी साधकर नौकरी कर रहे हैं और मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी न दिए जाने के मैनेजमेंट की मनमानी से आंखे फेरे बैठे हैं, मेरठ के एक कस्बे के पत्रकार ने हिंदुस्तान अखबार के मालिकों और मैनेजरों को लीगल नोटिस भेज दिया है. इस कस्बाई पत्रकार ने मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी देने की मांग की है. हिन्दुस्तान अखबरा मवाना (मेरठ) के प्रभारी संदीप नागर ने मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी नहीं दिए जाने पर अखबार को लीगल नोटिस दे दिया है. लगभग दो माह पूर्व दिये गये नोटिस का हिन्दुस्तान के प्रबन्ध तंत्र ने अभी तक जवाब नहीं दिया है.

हिन्दुस्तान मवाना के प्रभारी संदीप नागर ने बताया कि प्रबन्ध तंत्र से उन्होंने कई बार पत्र लिखकर मजीठिया वेज बोर्ड लागू कर उसके अनुसार वेतन देने का अनुरोध किया था. लेकिन हिन्दुस्तान प्रबन्ध तंत्र ने उन्हें अखबार से हटाने की धमकी दी तो अखबार की धमकी को स्वीकार करते हुए अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भिजवाया. इसमें मजीठिया वेज बोर्ड लागू करते हुए मजीठिया के अनुसार वेतन देने की मांग की. लगभग दो माह पूर्व दिये गये नोटिस का हिन्दुस्तान प्रबन्ध तंत्र अभी तक कोई जवाब नहीं दे सका है. संदीप नागर का कहना है कि हिन्दुस्तान प्रबन्ध तंत्र उन पर फैसला करने का दबाव बना रहा है.

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रूबी प्रकरण : आईएएस एकेडमी के डिप्टी डाइरेक्टर का अखबारों को नोटिस, एक करोड़ हर्जाना मांगा

देहरादून : रूबी चौधरी प्रकरण में अपनी छीछालेदर से बौखलाए आईएएस एकेडमी के डिप्टी डाइरेक्टर सौरभ जैन ने देहरादून के अखबारों को मानहानि का नोटिस देकर एक करोड़ रुपए हर्जाना मांगा है। उधर, मसूरी की लालबहादुर शास्त्री एकेडमी में फर्जी ट्रेनी आईएएस बनकर रही रूबी चौधरी को लेकर देहरादून पुलिस मंगलवार को मेरठ पहुंची और गंगानगर में उसके रिश्तेदारों से पांच घंटे पूछताछ की। यह भी पता चला है कि एकेडमी प्रशासन ने फ़ोन टेप होने की आशंका में सभी कर्मचारियों के फ़ोन नंबर तलब कर लिए हैं। बाहर के लोगों से कर्मचारियों संपर्क नहीं होने दिए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि मसूरी स्थित आईएएस ट्रेनिंग एकेडमी में रूबी चौधरी ट्रेनी आईएएस ऑफिसर बनकर करीब छह महीने से अकादमी में रह रही थी। इस मामले के खुलासे के बाद रूबी ने अकादमी के अधिकारी सौरभ जैन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। बाद में उसे एक होटल से गिरफ्तार कर लिया गया था।

पुलिस की नजर अब रूबी चौधरी के लैपटाप पर है। गढ़वाल रेंज के डीआईजी गुंज्याल ने बताया कि चार दिन की रिमांड पर ली गई रूबी चौधरी की निशानदेही पर उसका लैपटॉप और दूसरे कागजात बरामद करना पुलिस कार्यवाही की प्राथमिकता में है। लैपटॉप से महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल होने की उम्मीद है। एसआईटी रूबी चौधरी से नए सिरे से पूछताछ कर पूरे मामले की तह तक जाएगी।

इस बीच पता चला है कि एकेडमी के डिप्टी डायरेक्टर सौरव जैन अबतक मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं। उन्होंने देहरादून के अखबारों को मानहानि का नोटिस देकर एक करोड़ रुपए हर्जाना मांगा है। हैप्पी वैली स्थित उनके सरकारी आवास पर मीडिया वालों की इंट्री इन दिनो खासतौर से प्रतिबंधित बताई जाती है। बंदूकधारी सुरक्षा गार्ड मीडिया को उनके आवासीय परिसर में प्रवेश नहीं करने दे रहे हैं। डिप्टी डायरेक्टर सौरव जैन के साथ ही डाइरेक्टर राजीव कपूर आदि अन्य कोई अधिकारी भी रूबी चौधरी प्रकरण पर कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

मसूरी की लालबहादुर शास्त्री एकेडमी में फर्जी ट्रेनी आईएएस बनकर रही रूबी चौधरी को लेकर देहरादून पुलिस मंगलवार को मेरठ पहुंची। यहां गंगानगर स्थित गंगासागर कालोनी में रूबी के रिश्तेदारों से पांच घंटे तके पूछताछ की। फरवरी में रूबी गंगासागर में ही रही थी। मंगलवार को मामले की जांच करने के लिए देहरादून पुलिस रूबी के वकील अरुण खन्ना के साथ गंगासागर कालोनी के एफ-83 मकान में पहुंची। 

मसूरी थाने के एसएचओ चंदन सिंह बिष्ट और पुलिसकर्मियों के साथ रूबी के मामा अजय पंवार भी थे। गंगासागर में रूबी के रिश्तेदार किरनपाल का है। किरनपाल रूबी के पति वीरेन्द्र मलिक के जीजा हैं। पुलिसकर्मियों ने बंद मकान में रूबी से पूछताछ कर लगभग पांच घंटे तक उसकी पढ़ाई और ट्रेनिंग से संबधित कागजात की जांच की। शाम सवा आठ बजे करीब पुलिस रूबी के साथ बच्चपार्क स्थित आईएएस कोचिंग सेंटर पर पहुंच गई। इस कोचिंग सेंटर से रूबी ने आईएएस के लिए तैयारी की थी। रूबी के एडवोकेट अरुण खन्ना ने दावा किया कि एकेडेमी के डायरेक्टर सौरभ जैन ने रूबी को लाइब्रेयिन की पोस्ट का लालच देकर बुलाया था। जॉब का सौदा बीस लाख रुपये में हुआ था, जिसमें से पांच लाख रुपये सौरभ जैन को दिए भी जा चुके हैं। इस मामले में सौरभ जैन के खिलाफ भी मुकदमा दायर कराने की तैयारी की जा रही है। 

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लखनऊ में शॉपिंग मॉल्स और शोरूम की तलाशी, सीसीटीवी कैमरों पर सतर्कता, 45 प्रतिष्ठानों को नोटिस

लखनऊ : सरकार ने राजधानी के 45 प्रतिष्ठानों को अपने कैमरों की जगह बदलने के लिए नोटिस भेजा गया है। इस बीच शहर के सभी प्रमुख शॉपिंग मॉल्स और शोरूम की तलाशी के दौरान गत दिवस कहीं कोई आपत्तिजनक सामान नहीं मिला। शहर में फन मॉल, सहारागंज तथा फीनिक्स मॉल को 10-10, वेब मॉल को 12 और एआरएस मॉल को तीन नोटिस भेजे गए हैं। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा गोवा में ट्रॉयल रूम में गुप्त कैमरा पकड़े जाने के मद्देनजर मुख्यमंत्री ने इस तरह की सतर्कता निर्देश दिए थे। 

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देवरिया के बीएसए ने दिया अखबार को नोटिस, पत्रकारों में रोष

देवरिया : सम्भवतः गोरखपुर में वित्तीय अनियमितता में निलम्बित हो चुके तथा कई आरोपों से घिरे जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने एक समाचार के प्रकाशन से क्षुब्ध होकर समाचार पत्र को कानूनी नोटिस दिया है। इससे नाराज पत्रकारों ने बीएसए के कार्यों की जांच कराने की मांग मुख्यमंत्री एवं प्रदेश के मुख्य सचिव से की है।

लखनऊ से प्रकाशित सिटी टाईम्स के संवाददाता प्रेम शंकर मणि ने बीएसए मनोज कुमार मिश्र के सम्बन्ध में खबर लिखी थी कि अध्यापकों के प्रमोशन में घपला किया गया है। इस समाचार में कई करोड़ रुपए के खेल का बीएसए पर आरोप लगाया था गया। इससे नाराज बीएसए ने समाचार पत्र को अपने एक अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा है कि यदि 15 दिन के भीतर जवाब नहीं दिया गया तो अदालती कार्यवाही की जाएगी। हांलाकि निर्धारित अवधि बीत गई है। 

सूत्रों के अनुसार इससे पूर्व जब बी एस ए गोरखपुर में थे, नियुक्ति में गड़बड़ी की शिकायत पर इनको निलम्बित कर दिया गया था। जिलाधिकारी शरद कुमार सिंह ने बताया कि पूरा मामला क्या है, उनकी जानकारी में नहीं है। 

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Notice to Govts on Norms for Scribes

CHENNAI: The Madras High Court on Monday directed issuing of notices to Central and State governments following a PIL seeking guidelines for appointing scribes to assist visually-impaired students for board exams. The petitioner, C Govindakrishnan, a social activist, submitted that the Ministry of Social Justice and Empowerment Department of Disability Affairs released an Official Memorandum dated February 26, 2013 listing the guidelines for conducting written examinations for persons with disabilities.

 “The memorandum directs the examining body to create a selection panel in order to scrutinise the suitability of the scribes appointed as per the requirement of the examination,” Govindakrishnan said.

This is to ensure that the scribe is acclimatised to the student’s examination needs wherein both parties can determine if the scribe has the minimum requirements to assist the student in the examination, he added. He further stated that following a representation, the State government issued a letter to the School Education and Higher Education departments, and the Commissioner for the Differently-Abled to follow the guidelines while appointing scribes. Even after this, the letter issued by the government has not been implemented, which has caused severe setbacks and mental agony to the disabled students, he alleged.

The petitioner sought an interim direction to the authorities to implement the guidelines listed in the official memorandum dated February 26, 2013. Admitting the petition, the first bench comprising Chief Justice S K Kaul and Justice M M Sundresh ordered notices to Central and State governments and directed them to file their counters within three weeks. The matter has been posted for next hearing on April 24.

 

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मजीठिया वेज बोर्ड संघर्ष : अमर उजाला को जवाब दायर करने का अब आखिरी मौका, भारत सरकार भी पार्टी

अमर उजाला हिमाचल से खबर है कि यहां से मजीठिया वेज बोर्ड के लिए लड़ाई लड़ रहे प्रदेश के एकमात्र पत्रकार को सब्र का फल मिलता दिख रहा है। अमर उजाला के पत्रकार रविंद्र अग्रवाल की अगस्त 2014 की याचिका पर सात माह से जवाब के लिए समय मांग रहे अमर उजाला प्रबंधन को इस बार 25 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आखिरी बार दस दिन में जवाब देने का समय दिया है। अबकी बार कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि अगर इस बार जवाब न मिला तो अमर उजाला प्रबंधन जवाब दायर करने का हक खो देगा और कोर्ट एकतरफा कार्रवाई करेगा।

ज्ञात रहे कि इस मामले में प्रथम पार्टी भारत सरकार को बनाया गया है। केंद्रीय श्रम मंत्रालय की ओर से कोर्ट में जवाब दायर किया जा चुका है। मामले की दूसरी पार्टी अमर उजाला के प्रबंध निदेशक हैं। उनकी ओर से सात माह में जवाब दायर नहीं किया जा सका है। हर बार कोर्ट से समय लिया जाता रहा है। इस बीच रविंद्र की ओर से अमर उजाला प्रबंधन द्वारा चार्जशीट करके वेतन बंद किए जाने की शिकायत भी कोर्ट में कर दी गई थी। इस संबंध में जनवरी माह में अर्जी दाखिल हुई थी।

इस पर भी कोर्ट ने प्रबंधन से 11 मार्च से पहले जवाब-तलब किया है। इस मामले की तीसरी पार्टी श्रम विभाग हिमाचल प्रदेश को बनाया गया है, जिस पर वेज बोर्ड लागू करवाने का जि मा है। विभाग की ओर से सबसे पहले कोर्ट में गोलमोल जवाब दायर किया गया था। इसके बाद से विभाग हरकत में आ गया और सभी समाचार पत्रों के प्रबंधकों से वेज बोर्ड को लेकर जानकारी मांगी जाने लगी है। हालांकि फिलहाल सब कार्रवाई खानापूर्ति ही मानी जा रही है। हिमाचल प्रदेश में किसी भी अखबार ने मजीठिया वेज बोर्ड नहीं दिया है। इसके इतर अमर उजाला व जागरण प्रबंधन ने श्रम विभाग को दी जानकारी में तो दावा किया है कि वे वेज बोर्ड दे रहे हैं।

ज्ञात रहे कि अमर उजाला प्रबंधन के खिलाफ रविंद्र अग्रवाल ने लेबर आफिसर से भी अगस्त माह में ही शिकायत कर रखी है। पहले तो लेबर विभाग कार्रवाई की खानापूर्ति करता रहा। अब कोर्ट की सख्ती के डर से कार्रवाई में कुछ तेजी लाई है, मगर यह तेजी भी जानकारी के आभाव में प्रभावी नहीं साबित हो पा रही है। पिछले दिनों 20 फरवरी को लेबर आफिसर के यहां वेज बोर्ड के तहत एरियर व रोके गए वेतन की रिकवरी की तारीख रखी गई थी। इसके लिए नोएडा से खासतौर पर लीगल एक्सर्ट को भेजा गया था। लेबर आफिसर को मुहैया करवाए गए दस्तावेजों के जरिये अमर उजाला ने दावा किया है कि अखबार तो वेज बोर्ड दे रहा है। जब पूछा गया कि किस आधार पर तो बताया गया कि यूनिटें अलग करके।

इसके पीछे अमर उजाला इंडियन एक्सप्रेस बनाम भारत सरकार के 1995 में आए एक निर्णय व वेज बोर्ड की नोटिफिकेशन की सेक्शन दो के पैरा 3 में समाचार पत्रों की क्लासीफिकेशन के क्लास ए में विभिन्न विभागों ब्रांचों व सेंटरों को क्लब करने को लेकर दिए गए फार्मूले को आधार बताया गया। वहीं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फरवरी 2014 के निर्णय की अनदेखी गई गई। माननीय न्यायालय की जजमेंट के पैरा 54 से लेकर पैरा 59 तक एक समाचार पत्र की सभी यूनिटों की आय को ही वेज बोर्ड लागू करने का आधार माना गया है। इनमें साफ लिया गया है कि एक समाचार पत्र की सकल आय को वेज बोर्ड लागू करने का आधार बनाना कानूनसंगत है। इसमें उस इंडियनएक्सप्रेस मामले का भी जीक्र किया गया है, जिसमें यूनिटों को अलग करने को लेकर व्यवस्था दी गई थी, मगर इस निर्णय में यह भी कहा गया था कि आल इंडिया आधार पर समाचार पत्र की आय को वेज बोर्ड का आधार बनाना किसी संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं है। साथ ही इसे नोट बैड इन ला कहा गया था। हालांकि यह फैसला तब के वेज बोर्ड को लेकर था और मौजूदा वेज बोर्ड को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय का नया फैसला आ चुका है, मगर अखबार प्रबंधन कर्मचारियों को उनका हक देने से बचने के लिए कई तरह के कानूनी हथकंडे आजमाने की जुगत भिड़ा रहे हैं।

इसके अलावा अमर उजाला ने वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट में न्यूजपेपर एस्टेबलिशमेंट की परिभाषा व इसकी सेक्शन 2डी से जुड़े शेड्यूल को भी ताक पर रखा है। अमर उजाला अपने प्रकाशन केंद्रों को अलग-अलग यूनिटें बनाकर वेज बोर्ड के भार से बचना चाह रहा है। जबकि यही प्रबंधन अपने कर्मचारियों को एक यूनिट से दूसरी यूनिट में ट्रांस्फर कर रहा है। अब सवाल यह उठता है कि अगर अमर उजाला प्रबंधन दूध से धुला है तो वह हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में अपना जवाब दायर करने से क्यों बचता आ रहा है। अब अमर उजाला को कौन समझाए कि अगर मजीठिया वेज बोर्ड से इसी तरह बचा जा सकता तो दैनिक जागरण, भास्कर, हिंदोस्तान व अन्य अखबार भी ऐसा ही कर सकते थे।

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दैनिक भास्कर होशंगाबाद के 25 कर्मचारी मजीठिया के लिए गए हाईकोर्ट, नोटिस जारी

दैनिक भास्कर से सबसे ज्यादा मीडियाकर्मी मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी एरियर पाने के लिए कोर्ट की शरण में गए हैं. ये संख्या हजारों में हो सकती है. ताजी सूचना होशंगाबाद यूनिट से है. यहां के करीब 25 मीडियाकर्मियों ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है. जब इसकी खबर भास्कर के वरिष्ठ पदाधिकारियों को मिली तो इन्होंने हाईकोर्ट जाने वालों कर्मियों को एक एक कर अलग अलग केबिन में बुलाया और धमकाना शुरू कर दिया. इन्हें नौकरी से निकाल दिए जाने की धमकी भी दी गई है. कर्मचारियों से कहा गया कि उन्हें सात दिन गैर-हाजिर दिखाकर नौकरी से टर्मिनेट कर दिया जाएगा.

इन सभी कर्मियों को एक प्रोफार्मा पर साइन करने को कहा गया जो पचास रुपये के स्टैंप पेपर पर बना हुआ है. कर्मचारियों ने इस कागज पर साइन करने से इनकार कर दिया. कर्मचारी इस तरह की गीदड़भभकियों से डर नहीं रहे हैं और कोर्ट के जरिए प्रबंधन को सबक सिखाने का मूड बनाए हुए हैं. सभी कर्मचारी जोश के साथ प्रबंधन से दो दो हाथ करने को आतुर हैं. सभी कर्मियों का उत्साह बराबर बना हुआ है. कई कर्मचारियों ने भास्कर के अधिकारियों से उनकी सेलरी तक पूछ ली और अपनी खुद की सेलरी बताई. साथ ही यह भी कहा कि हम लोग कितनी कम सेलरी में अपना जीवन चलाते हैं. जब सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी देने को कह दिया है तो प्रबंधन क्यों नया वेतनमान न देकर गैर-कानूनी काम कर रहा है.

भास्कर होशंगाबाद के कर्मियों को बहलाने फुसाने धमकाने में जिन आला अधिकारियों की भूमिका बेहद घटिया रही, उनके नाम हैं- एमपी प्रोडक्शन हेड विनय शुक्ला, भोपाल के हेड ललित जैन, एचआर हेड जया आजाद, अतुल छावड़ा, अविनाश कोठारी, नवनीत गुर्जर आदि. इस बीच, गुजरात हाईकोर्ट ने याचिका को संज्ञान लेते हुए भास्कर के मालिकों को नोटिस जारी कर दिया है. गुजरात हाईकोर्ट में यह मामला केस नंबर 2384 पर दर्ज है. ज्ञात हो कि दैनिक भास्कर का रजिस्टर्ड आफिस अहमदाबाद में है. इस कारण भास्कर के मालिकों के खिलाफ केस गुजरात हाईकोर्ट में किया गया है.

इस बीच, दैनिक भास्कर होशंगाबाद के एक कर्मचारी ने भड़ास को मेल कर अंदर की स्थिति के बारे में यह जानकारी भेजी है: ”Hoshangabad bhaskar ke karmchariyo ko milne Lagi barkhast karne ki dhamki, stamp pr jabran karva rhe sign. Dainik bhaskar hoshangabad unit me karmchariyo dvyara majithiya ko lekar lagaye gaye case ko wapas lene ke liye bhaskar prabandhan har tarike apna rha hai. Budhwar ko dainik bhaskar ke state head navneet gujar, hr head jaya aazad, atul chabda sahit anya adhikarion ne hoshangabad me apna dera dal liye hai. Or we ek niji hotal me sabhi ko ek-ek karke bulakar case wapas lene ka kaha rhe hai sath hi eo stamp paper par singnacher le rhe hai. Jisme likha hai ki hamara samjhota ho gya hai or ham apna case wapas le rhe hai. Karmchariyo ke nhi manne par unko naokri se barkhast karne ka dawab banaya ja rha hai.”’

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लाला लाजपत राय को भाजपाई पटका पहनाने के मामले में कोर्ट ने किरण बेदी के खिलाफ कार्रवाई का ब्योरा मांगा

किरण बेदी अपनी मूर्खताओं, झूठ, बड़बोलापन और अवसरवाद के कारण बुरी तरह घिरती फंसती जा रही है. पिछले दिनों नामांकन से पहले किरण बेदी ने स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय की प्रतिमा को भगवा-भाजपाई पटका पहना दिया. इस घटनाक्रम की तस्वीरों के साथ एक कारोबारी सुरेश खंडेलवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट के जाने-माने वकील हिमाल अख्तर के माध्यम से किरण बेदी को कानूनी नोटिस भिजवाया फिर कोर्ट में मुकदमा कर दिया. इनका कहना है कि लाला लाजपत राय किसी पार्टी के प्रापर्टी नहीं बल्कि पूरे देश के नेता रहे हैं. ऐसे में किसी एक पार्टी का बैनर उनके गले में टांग देना उनका अपमान है.

इस मामले में दायर मुकदमें को संज्ञान लेने हुए आज कोर्ट ने पुलिस को किरण बेदी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के संबंधि में पूछा है कि पुलिस ने क्या क्या किया है अब तक, इस बारे में रिपोर्ट पेश करे. सुनवाई की अगली तारीख 18 फरवरी है. उपर कोर्ट का आदेश है. नीचे पूरे मामले से संबंधित तस्वीर, अखबारी कटिंग, कंप्लेन और लीगल नोटिस का प्रकाशन किया जा रहा है. इस मामले में किसी अन्य जानकारी के लिए वरिष्ठ वकील हिमाल अख्तर से संपर्क उनके मोबाइल नंबर 09810456889 के जरिए किया जा सकता है.

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किरन बेदी का झूठ बोलना सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा, भाजपा को तगड़ा झटका

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किरण बेदी का पुलिसिया अंदाज़ देखकर मैं हैरान था : रवीश कुमार

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‘फरिश्‍ता’ के लेखक ने फिल्‍म ‘पीके’ पर किया साहित्‍य चोरी का मुकदमा

‘‘मैंने 1 जनवरी, 2015 को पीके फिल्‍म देखी तो मैं हैरान हो गया। पीके फिल्‍म मेरे उपन्‍यास फरिश्‍ता की कट /कॉपी /पेस्‍ट है।’’ –कपिल ईसापुरी

अपने इन शब्‍दों में लेखक कपिल ईसापुरी काफी मर्माहत दिखते हैं। प्रेस कॉन्‍फेरेंस कर अपना दर्द बयान करते हैं। लेकिन मीडिया में एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है- लिखता कोई है, दिखता कोई और है, बिकता कोई और है। इस कहावत का व्‍यावहारिक रूप प्रसिद्ध लेखक निर्देशक बी आर इसारा विविध भारती को दिए एक साक्षात्‍कार में इस प्रकार समझाते हैं- ‘‘कम चर्चित साहित्‍यकारों के साहित्‍य की चोरी फिल्‍मी दुनिया में खूब होती है। जब मैं फिल्‍मी दुनिया में आया था। मुझसे कम चर्चित उर्दू साहित्‍यकारों का साहित्‍य पढ़वाया जाता और उसको तोड-मरोड़ कर इस्‍तेमाल कर कर लिया जाता।’’

इस तरह की साहित्‍यिक चोरी बड़े-बड़े लेखक, निर्देशक और निर्माता तक करते हैं। हाल में आयी ब्‍लॉकबलस्‍टर फिल्‍म पीके पर भी उपन्‍यासकार कपिल ईसापुरी ने अपने उपन्‍यास ‘फरिश्ता’ से कन्टेंट चुराने का आरोप लगाया है। एक लेखक के लिए उसके साहित्‍य की चोरी सबसे बड़ी क्षति ही नहीं, बल्‍कि उसके लिए अहसनीय दर्द होता है। उसके विचारों की चोरी उसके लिए संवैधानिक अधिकारों का हनन होता है। ‘‘मैंने चार जनवरी को फिल्‍म लेखक संघ, मुबई में ईमेल से शिकायत दर्ज की। लेकिन वहां से पांच जनवरी को मुझे ईमेल से नकारात्‍मक उत्‍तर मिला। फिर मैंने कोर्ट में जाने का फैसला किया’’ 

दिल्‍ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कपिल ईसापुरी ने आरोप लगाया है कि उनके उपन्‍यास ‘फरिश्‍ता’ से कन्टेंट चुराया गया है। ‘‘साल 2013 में छपे अपने उपन्यास ‘फरिश्‍ता’ में मैंने तथाकथित धर्मगुरुओं की अंधभक्ति की आलोचना की है। मैंने उपन्‍यास में इस बात विशेष जोर दिया है कि धर्म का पेशा प्राकृतिक नहीं बल्कि मानव निर्मित और कृत्रिम है।’’ किसी साहित्‍यिक कृति का मूल विचार चुराकर केवल भाषा और शैली बदलकर एक नया साहित्‍य गढ़ने का धंधा शातिर लोग अक्‍सर करते रहते हैं।

‘‘फिल्म के जरिए उठाए गए विभिन्न मुद्दे मेरी किताब में से कॉपी किए गए हैं। उपन्यास में कई और भी ऐसे दृश्‍य  हैं, जिनमें मामूली बदलाव और अनावश्‍यक परिवर्तन करके पीके में इस्‍तेमाल किया गया है।’’

वकील ज्योतिका कालरा की मदद से दायर की गई याचिका में लेखक ने पीके फिल्‍म के निर्माता विधु विनोद चोपड़ा, निर्देशक राज कुमार हिरानी, स्क्रिप्ट राइटर अभिजीत जोशी और अभिनेता आमिर खान को कठघरे में खड़ा किया है। अपने उपन्‍यास से सत्रह दृश्‍य चुराने का आरोप लगाया है। जिसमें दृश्‍य, संवाद और विषयवस्‍तु शामिल है।                                                  

जस्‍टिस नाजमी वजीरी ने फिल्म के निर्माता विधु विनोच चोपड़ा, निर्देशक राज कुमार हिरानी, उनकी फिल्‍म निमार्ण कंपनी, पटकथा लेखक अभिजीत जोशी और अभिनेता आमीर खान से 16 अप्रैल से पहले दिल्‍ली हाई कोर्ट के जॉइंट रजिस्ट्रार के सामने अपना पक्ष रखने को कहा है।  लगभग 600 करोड़ कमाने वाली पीके के निर्माताओं से लेखक ने एक करोड़ रुपये के मुआवजे के साथ-साथ अपने काम के लिए श्रेय की भी मांग की है। कपिल ईसापुरी ने इंजिनियरिंग और पत्रकारिता की पढ़ाई की है।   

अमलेश प्रसाद की रिपोर्ट.

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