लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक बार फिर प्रशासनिक तंत्र में कड़ा संदेश देते हुए प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई चंदौली जिले के पं. दीन दयाल उपाध्याय नगर में सरकारी भूमि से जुड़े 20 आरसी प्रपत्र नोटिसों को विवादित तरीके से हटाए जाने के मामले में की गई है।
सरकार का कहना है कि यह फैसला राजस्व संहिता 2006 के उल्लंघन, प्रशासनिक लापरवाही और सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण में गंभीर चूक को देखते हुए लिया गया है। निलंबन आदेश प्रमुख सचिव (नियुक्ति) एम. देवराज की ओर से जारी किया गया।
क्या है पूरा मामला: 20 आरसी प्रपत्र विवाद
चंदौली के पं. दीन दयाल उपाध्याय नगर तहसील में सरकारी भूमि—जैसे खलिहान, चकमार्ग, कब्रिस्तान, नवीन परती और बंजर भूमि—पर अतिक्रमण को लेकर 20 आरसी प्रपत्र नोटिस जारी किए गए थे। ये नोटिस अवैध कब्जों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए दिए जाते हैं।
जांच में सामने आया कि नोटिस जारी होने के बावजूद उन्हें बाद में बिना ठोस आधार के वापस ले लिया गया, जिससे सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों को अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण मिला। इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का गंभीर उल्लंघन माना गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के स्तर से जांच शुरू की गई और सरकार ने एक तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की, जिसमें एडीएम (न्यायिक), एसडीएम चकिया और अतिरिक्त एसडीएम चंदौली को शामिल किया गया।
जांच रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकला कि संबंधित अधिकारियों ने अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया और ऐसे आदेश पारित किए जो सरकारी हितों के प्रतिकूल थे।
किन अधिकारियों पर गिरी गाज
निलंबित किए गए तीनों अधिकारी वर्तमान में अलग-अलग जिलों में एसडीएम पद पर तैनात थे:
- विराग पांडेय – पूर्व तहसीलदार, वर्तमान में एसडीएम गाजियाबाद
- ललिता प्रसाद – पूर्व पीठासीन अधिकारी, वर्तमान में एसडीएम बुलंदशहर
- सतीश कुमार – पूर्व पीठासीन अधिकारी, वर्तमान में एसडीएम एटा
तीनों अधिकारियों ने विवाद के समय तहसील स्तर पर ऐसे निर्णय लिए थे, जिनसे 20 आरसी प्रपत्र नोटिसों को हटाया गया।
निलंबन अवधि के दौरान तीनों अधिकारियों को राजस्व परिषद, लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया है और वे वहीं रिपोर्ट करेंगे। इस दौरान उन्हें कोई फील्ड पोस्टिंग नहीं दी जाएगी।
सरकार का सख्त संदेश
योगी सरकार ने साफ कर दिया है कि सरकारी भूमि, नियमों के उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही के मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का मानना है कि भूमि से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है, क्योंकि ऐसे मामलों का सीधा असर आम जनता के हितों पर पड़ता है।
पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश सरकार ने भूमि घोटालों, भ्रष्टाचार और नियम उल्लंघन से जुड़े मामलों में कई अधिकारियों के खिलाफ निलंबन और विभागीय कार्रवाई की है।
आगे की जांच
इस पूरे मामले की विस्तृत जांच अब वाराणसी मंडलायुक्त के अधीन चलेगी। जिलाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराएं।
जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे विभागीय कार्यवाही, दंडात्मक कार्रवाई या सेवा से बर्खास्तगी जैसे कड़े कदम भी उठाए जा सकते हैं।
सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक हलकों में सख्त चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है कि सार्वजनिक संपत्ति और नियमों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई अब भारी पड़ सकती है।


