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सुख-दुख

आईआईएमसी से पढ़े और कई बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके युवा पत्रकार ददन विश्वकर्मा ने आजीविका के लिए फ़िल्म सिटी में ठेला लगाया!

ददन विश्वकर्मा देश के सर्वोच्च पत्रकारिता शिक्षा संस्थान आईआईएमसी से पढ़े हैं। उनका एफबी प्रोफाइल देखने पर पता चलता है कि उन्होंने कई बड़े मीडिया संस्थानों में काम किया है।

अब वे न्यूज़ चैनलों के गढ़ कहे जाने वाले नोएडा के फ़िल्म सिटी में ठेला लगा रहे हैं। उन्होंने फ़ेसबुक पर ठेले की तस्वीर डालकर अपने नए धंधे का एलान किया है। ‘पत्रकार पोहा वाला’ तो ठेले का नाम है। डिश कुछ यूँ है-

एडिटर स्पेशल पोहा
रिपोर्टर स्पेशल पोहा

देखें उनकी पोस्ट, तस्वीर और कुछ प्रतिक्रियाएँ-

ददन विश्वकर्मा-

अब इसे स्टार्ट अप कहिए, रोज़गार का साधन कहिए या जो भी. जगह- फ़िल्मसिटी, आजतक के सामने

जितेंद्र कुमार- कोई भी काम छोटा नहीं होता है, लेकिन ददन भाई पोहा बेचने के लिए आईआईएमसी में तो पक्का ही पढ़ने नहीं आए थे. अगर उपनाम मिश्रा, शर्मा, उपाध्याय, चतुर्वेदी, बनर्जी या वैष्णव ही होता तो ददन जी को कम से कम पोहा नहीं बेचना पड़ता!

जय शुक्ला- रोजी-रोटी का फेर आदमी को ‘इंदौर’ से बाहर तो ले आता है, लेकिन अंदर का ‘इंदौर’ उस आदमी से बाहर निकल नहीं पाता। रतलामी सेंव से सजे चक भन्नाट इंदौरी पोहे के स्वाद के साथ इंदौरी माहौल को दिल्ली तक खींच लाने के लिए Dadan भिया को हार्दिक बधाई !

बिलाल एम जाफ़री- Dadan Vishwakarma भाई पत्रकार हैं. पोहा बनाना जानते हैं तो काम आ गया। लेकिन हम जैसे तमाम लोगों का क्या? जिन्हें बनाने के नाम पर सिर्फ़ दूसरों को चूतिया बनाना आता है. जो जलेबी नहीं छान सकते लेकिन उनसे बस बड़ी-बड़ी बातें छनवा लो. नया स्टार्टअप ददन भाई को मुबारक. लेकिन पोहा खाते हुए सोचना मुझ जैसे उन लोगों को है, जो पत्रकारिता के नाम पर कंप्यूटर पीट रहे हैं और डाटा की एंट्री कर रहे हैं. ददन भाई को सलाम और सीख मुझ समेत हर उस इंसान को जिसे दूसरे को मूर्ख बनाना तो आया, लेकिन पोहा नहीं. पता नहीं ददन भाई इस बात को कैसे लेंगे. मगर ये तस्वीर मुझे इंडस्ट्री की तल्ख़ हक़ीक़त लगी. आई ओपनर है ये तस्वीर जिसे देखकर महसूस हुआ कि आदमी को ददन भाई की तरह टैलेंटेड होना चाहिए. जबकि कई साथी “तेलंटेड” बनने पर तुले हैं. विश यू लक ब्रदर. विश्वास है ये स्टार्टअप कईयों को एक नया स्टार्ट देगा. लव यू

मनोज द्विवेदी- भाई साहब ने हिम्म्मत दिखाई और रास्ता भी। बहुत बहुत शुभकामनाएं ददन भाई Dadan Vishwakarma …यह स्टार्टअप जरूर कामयाब होगा और पत्रकारों को प्रेरित भी करेगा।

संदीप शुक्ला- अपने पत्रकारिता के शुरुआत में ददन हमारे साथ भी रहे हैं। कुछ साल तक इनके हाथ के बनाए पकवान अपन भी चखे हैं। पोहा तो चक भन्नाट बनाते ही हैं। आप, उधर जाइये तो स्वाद जरूर लीजिये। बधाई Dadan Vishwakarma

मनदीप पुनिया- Dadan Vishwakarma भाई वो इंसान हैं जो हाथ पकड़कर पत्रकारिता में लेकर आए थे. आईआईएमसी में मेरा एडमिशन कराया. यह फोटो सामने आई है. इसे देखकर गुरमीत जज का गीत दिमाग में गूंज रहा है. जे जीणा हैं ता लड़ना पऊ. जे ना लड़या ता मरना पऊ…

रीतेश मिश्रा- फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया माध्यमों पर इस तस्वीर का लोग मज़ाक उड़ा रहे हैं। अच्छा, आप पत्रकारों के साथ नहीं खड़े होते और उम्मीद करते हैं कि वो आपके साथ खड़े रहें ?
अरे भाई दद्दन खूबसूरत आदमी है बहुत पहले जी चैनल पर ‘पकवान’ नाम का शो आता था। हम खाना बनाने के शौकीन हैं तो हर एपिसोड देखते थे। ददन जो इसे चला रहे हैं वो हम सब के मित्र हैं। उनसे आत्मीयता है अपनी। खाना बनाना उनका पैशन रहा है तो वो वही कर रहे हैं। सिंपल। जबरन काहें इतना हास्य आ रहा है?

राहुल मिश्रा- पत्रकारिता यहां भी चालू है.. वैसे पोहा भी बहुत स्वादिष्ट जायकेदार था… पहला पोहा एडीटर स्पेशल पोहा दूसरा रिपोर्टर स्पेशल पोहा। जगह- नोएडा फ़िल्मसिटी, आजतक के सामने। एमबीए वाले चाय बेचेंगे… बीटेक वाले पानीपुरी और पत्रकार पोहा। ठीक है! 🙂

देखें ये वीडियो स्टोरी-

इस पत्रकार ने तो सच में ठेला लगा लिया!

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