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सियासत

गुजरात के ठगों को मोदी सरकार शुरू से बचा रही है!

गिरीश मालवीय-

गुजरात के ठगों को मोदी सरकार शुरू से बचा रही है. यहां हम ताजे ठग किरण पटेल की बात नहीं कर रहे. हम बात कर रहे हैं पीएनबी घोटाले के आरोपी मेहुल चौकसी की.

ख़बर आई है कि इंटरपोल ने भारत के भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी का नाम वांटेड लिस्‍ट से हटा दिया है.

यह मत सोच लीजिएगा कि पहली बार उस मेहुल चौकसी की मदद की गयी है जिसे भारत के प्रधान मंत्री ‘हमारे मेहुल भाई’ जैसा संबोधन देते हैं. उसके मदद तो ला एंड ऑर्डर से जुड़ी हर एजेंसी ने की है.

जब पीएनबी घोटाला खुला भी नहीं था तब नीरव मोदी पर और मेहुल चौकसी की फर्म गीतंजली जेम्स पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने छापे मारी की थी. गीतांजलि जैम्स पर तो 2013 से जांच चल रही थी.

इन दोनों कम्पनियों के मिले जुले घोटालो की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को थी यानी मामला उसी वक्त खुल चुका था. सारे कागजात इनकम टैक्स वालो की नजर मे आ चुके थे.

तभी साफ हो गया था कि ये लोग देश छोड़कर भाग सकते हैं लेकिन उसके बाद भी नीरव मोदी और मेहुल चौकसी का पूरा परिवार एक एक करके फरार हो गया.

एंटीगुआ के कानून मंत्री स्टीड्रॉय बेंजमिन ने यह दावा किया था कि 2017 में जब मेहुल चोकसी ने एंटीगा की नागरिकता के लिए आवेदन किया था तब भारतीय अधिकारियों ने कोई आपत्ति या रेड सिग्नल नहीं दिया था.

एक न्यूज चैनल से बातचीत में मंत्री ने कहा, ‘न तो किसी अधिकारी और न ही भारत की किसी भी संस्था ने मेहुल चोकसी पर ऐतराज जताया था।’ एंटीगुआ प्रशासन ने भी जानकारी दी थी कि एंटीगा अधिकारियों को बाकायदा भारतीय विदेश मंत्रालय के स्थानीय पासपोर्ट ऑफिस से पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ था जबकि उस वक्त भी गीतांजलि जेम्स के मालिक मेहुल चौकसी पर गम्भीर आर्थिक आरोप लगाए जा चुके थे.

यह चौंकाने वाली बात है कि मेहुल चोकसी जिसके ऊपर 2017 में कई मामले दर्ज थे, उसे बेदाग रिपोर्ट किस आधार पर दी गई और मुंबई पुलिस ने रिपोर्ट देने से पहले इन मामलों को नजरअंदाज कर दिया. साफ दिख रहा है कि शुरू से मेहुल चौकसी की मदद की जाती रही है.

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