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मजीठिया को लेकर नवभारत छत्तीसगढ़ में हड़ताल जारी, प्रबंधन की तरफ से कोई सकारात्मक पहल नहीं

एडिटर, भड़ास4मीडिया, महोदय, आपने नवभारत रायपुर-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) संस्करण में हो रहे गोलमाल को अपनी वेबसाइट में स्थान दिया, उसके लिये नवभारत प्रेस का स्टॉफ आपका शुक्रगुजार है. प्रबंधन की ओर से सोमवार 11 अगस्त को भी कोई पहल नहीं की गई जिससे उसकी संवेदनहीनता का पता चलता है. इसके बाद भी कर्मचारियों में आस है.

एडिटर, भड़ास4मीडिया, महोदय, आपने नवभारत रायपुर-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) संस्करण में हो रहे गोलमाल को अपनी वेबसाइट में स्थान दिया, उसके लिये नवभारत प्रेस का स्टॉफ आपका शुक्रगुजार है. प्रबंधन की ओर से सोमवार 11 अगस्त को भी कोई पहल नहीं की गई जिससे उसकी संवेदनहीनता का पता चलता है. इसके बाद भी कर्मचारियों में आस है.

इधर, खबर है कि सीईओ आर. अजीत दिन भर हड़ताल को रोकने के लिये वकीलों और लोअर कोर्ट के अधिकारियों के साथ मशगूल रहे ताकि कर्मचारियों का और अहित कराया जा सके और अपनी पकड़ फिर से दिखाई जा सके.  इसी बीच खबर यह भी है कि नवभारत के मालिक ने मध्यस्थता करने के लिये प्रेस के वरिष्ठ उमाशंकर व्यास को कमान सौंपी है. इसके पूर्व भी वो ऐसे मामलों में आंशिक रूप से सफल रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है शायद इससे कोई हल निकल सके.

नवभारत की इस हड़ताल को शहर में हर किसी का समर्थन मिल रहा है. दूसरी तरफ श्रम विभाग की कार्यशैली पर आघात आने से अधिकारी सकते में आते दिखाई दे रहे हैं.  नवभारत प्रेस के लोग आज भी अपनी मांगों को लेकर उसी तरह शांति के साथ डटे रहे और धरना-प्रदर्शन किया. क्योंकि किसी भी वेज ोर्ड में ऐसा नहीं हो सकता कि वर्तमान वेतन पहले मिल रहे वेतन से कम हो जाये. कुछ गलत सलाहकारों के कारण ऐसा हो रहा है. जिसकी वजह से शायद मालिक तक सही बात ही नहीं पहुंच रही है.

प्रेस विज्ञप्ति

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2 Comments

2 Comments

  1. Ganesh

    August 12, 2014 at 9:22 pm

    यह विज्ञप्ति अर्ध सत्य है. यह सही है कि मजीठिया वेतनमान देने में नवभारत प्रबंधन और श्रम विभाग ने कर्मचारियों को धोका दिया. लेकिन रायपुर और बिलासपुर में चल रही हड़ताल श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन है. सहायक श्रमायुक्त के हस्तक्षेप से गलत वेतन देने अनुशंसा के मामले को अदालत में चुनौती दी सकती थी और स्टे लिया जा सकता था. दूसरा विकल्प आई डी एक्ट के अनुसार विधिवत नोटिस देकर हड़ताल की जा सकती थी. इन दोनों विकल्पों को छोड़कर देर शाम सात बजे काम बंद कर देना, पता नहीं किस किस्म का आंदोलन है. बीते दिनों में रायपुर नवभारत में काम रोकने की आदत सी बन गई है.
    किसी भी संस्था को भारी क्षति पहुंचाना और लड़ने के जायज तरीके से भागना कैसे उचित ठहराया जा सकता है. आंदोलन का नेतृत्व करने वाले यह भी नहीं बता पा रहे हैं कि वे हाई कोर्ट या लेबर कोर्ट किस कमजोरी या मजबूरी के चलते नहीं गए. यह भी शायद कर्मचारी नेताओं को नहीं मालूम है कि हड़ताल करने का अधिकार श्रम कानूनों के तहत कुछ प्रक्रियाओं के पालन की बाध्यता से बंधा हुआ है.
    बस एक बात हो हो रही है कि लड़ाई उलझ गई और प्रबंधन ने अपराध किया तो उसे सजा दिलाने की जगह खुद भी वही करने लगे.

  2. Ganesh

    August 14, 2014 at 8:34 am

    नवभारत छत्तीसगढ़ के बिलासपुर संस्करण में अखबार 14 अगस्त को छपकर पाठकों के हाथ में पंहुचा। वेज बोर्ड का लाभ और न्याय नहीं मिला है। श्रम न्यायालय ने बिना नोटिस और आई डी एक्ट की धारा 23(1) के पालन न करने के कारण हड़ताल को अवैध करार दिया। कर्मचारियों ने अदालत का सम्मान करते हुए काम प्रारंभ कर दिया।
    इसके साथ ही बिलासपुर नवभारत के कर्मियों ने वेज बोर्ड के सही फिक्सेशन के कानूनी लड़ाई जारी रखने का फैसला लिया है। अवैध हड़तालसे प्रेस सहित कर्मचारियों का भारी नुकसान हुआ है। रायपुर में अभी गतिरोध टूटा नहीं है लेकिन यहाँ भी समझदारी और सावधानी केसाथ लड़ाई करने की जरूरत है।

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