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‘कल्याण’ में कई बार धर्म के नाम पर हल्की सामाग्री प्रकाशित हाती है!

प्रमोद रंजन-

2026 में गीता प्रेस की पत्रिका ‘कल्याण’ अपने प्रकाशन का 100 साल पूरा करेगी। अभी इस मासिक की 2 लाख से अधिक प्रतियां प्रकाशित होती हैं।

लेकिन, अगर हम इसके अंकों को देखें तो पाते हैं कि इसमें धर्म के नाम ऐसी हल्की सामाग्री प्रकाशित हाती है, जिसे हास्यास्पद कहा जाता है।

मसलन, ताजा अंक अप्रैल, 2023 में कल्याण ने “भगवान का स्मरण कैसे करें?” शीर्षक लेख प्रकाशित किया है, जिसके लेखक पत्रिका के संस्थापक-संपादक दिवंगत हनुमान प्रसाद पोद्दार (1892–1971) हैं।

लेख में पोद्दार लिखते हैं कि, भगवान का स्मरण:

  1. ऐसे करो, जैसे अफीमची अफीम न मिलने पर अफीम का स्मरण करता है।
  2. ऐसे करो, जैसे मुकदमेबाज मुकद्दमे का स्मरण करता है।
  3. ऐसे करो, जैसे जुआरी जुए का स्मरण करता है।
  4. ऐसे करो, जैसे लोभी धन का स्मरण करता है।
  5. ऐसे करो, जैसे नवीन विधवा अबला अपने मृत पति का स्मरण करती है।
  6. ऐसे करो, जैसे घर में रहने वाली कुलटा स्त्री अपने जार का स्मरण करती है, आदि।

लेख में कुछ अच्छे वाक्य भी हैं, जो यत्र-तत्र से जमा किए गए हैं।

हिंदू धर्म से संबंद्ध दर्शन की सुदीर्घ और गंभीर दर्शन-परंपरा रही है। कल्याण अंकों को हाल ही में पढ़ना शुरु किया किया। अभी तक जितना देख पाया हूं, उससे यही लगता है कि पत्रिका उस परंपरा से रिश्ता जोड़ने की जगह अपने पाठकों के लिए मूर्खता के परनाले ही खोलती रही है।

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1 Comment

1 Comment

  1. Ajay Kumar

    May 10, 2023 at 9:58 am

    संतो महात्माओ द्वारा, जन मानस को समझाने के लिए, पहले भी, तत्कालीन समय और सामाजिक हालात के अनुसार उदाहरण दिए जाते रहे हैं ……
    सुमिरण की सुधि यौ करो,
    जैसे कामी काम।
    एक पल बिसरै नहीं,
    निश दिन आठौ जाम॥ (कबीर साहिब)

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