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सुख-दुख

क्रिप्टो में 15 हजार रुपये लगाया, साल भर में ढाई हजार रह गया!

सुभाष सिंह सुमन-

रातों-रात करोड़पति बनने का सपना देखना बुरा नहीं है, बुरा है इसके चक्कर में फंसकर बर्बाद हो जाना. अभी इधर दो-चार दिन से एक परिचित मुझे भी करोड़पति बनाने के प्रयास में लगे हुए थे. अफसोस कि मैंने इस बार भी करोड़पति बनने का मौका जाने दिया.

मुझे जो प्रोडक्ट बेचने का प्रयास किया जा रहा था, वह नेटवर्किंग और क्रिप्टो का डेडली कॉम्बो था. उन्हें किसी ने आइडिया बेच दिया. अब वे बाकियों को आइडिया बेचने में लगे हुए हैं. खैर… मुझे जो उचित लगा, वो उन्हें समझा दिया. यहां लिख दे रहे हैं, क्योंकि संभव है कुछ लोगों के काम आ जाए.

इन्वेस्टमेंट की दुनिया में सबसे खराब चीज है ईजी मनी. ईजी मनी मने एविल मनी. ईजी मनी जैसा कुछ नहीं होता है. इसके चक्कर में पड़े तो बर्बादी तय है. इन्वेस्टमेंट का दूसरा नियम है कि जिस चीज को खुद नहीं समझ पा रहे हों, उससे दूर रहें. जैसे शेयर बाजार ही है, यह हर किसी के लिए नहीं है. यहां डूबने वालों का प्रतिशत कमाने वालों की तुलना में 8-9 गुणा है. मतलब कि 90 फीसदी से ज्यादा लोग शेयर बाजार में पैसे गंवाते ही हैं और उनके नुकसान से ही गिने-चुने लोगों की कमाई बनती है.

शेयर बाजार समझ आता है, तो खुद से ट्रेडिंग करिए. बहुत बढ़िया चीज है. समझ नहीं आता है, तो ट्रेडर न बनिए. इसके लिए प्रोफेशनल लोग काम कर रहे हैं. किसी अच्छे पेशेवर की मदद लीजिए या म्यूचुअल फंड के रास्ते जाइए. रील्स-फील्स देखकर पैसे लगाने गए तो डूबने की गारंटी आप किसी से भी लिखित में ले सकते हैं. कही-सुनी बातों पर पैसे लगाने ही नहीं चाहिए.

नेटवर्किंग की तारीफ नहीं करूंगा. हर समझदार व्यक्ति इस जन्नत की हकीकत जानता है. क्रिप्टो के बारे में भी दूसरा नियम लागू है कि समझ नहीं आता है तो दूर रहें. मैंने डेढ़-दो साल पहले सीखने के उद्देश्य से कुछ डॉलर लगाया था, रुपये में करीब 15 हजार. साल भर होने वाले होंगे, उसे मैंने देखना बंद किया हुआ है. लास्ट टाइम जब देखा था, तब 15 हजार का ढाई हजार हो चुका था.

प्रोडक्ट बेचने वाले भाई साब मुझे ‘6 महीने में पैसा डबल’ बेच रहे थे. मैंने उन्हें इससे बेहतर स्कीम चिपका दिया…‘8 महीने में पैसा ट्रिपल’. मेरी स्कीम प्रत्यक्ष उदाहरण के साथ थी. नाम है सुजलॉन. 8 महीने पहले 6.5 रुपये पर लिए थे, अभी 18-19 पर है. हालांकि साथ में मैंने यह भी जोड़ दिया कि खुद समझ आए, तभी लगाएं. मेरी स्कीम सिर्फ मेरे लिए है और यह बेचने के लिए नहीं, बल्कि ऐसे मौकों पर चिपकाने के लिए है. यहां भी वही दोहराएंगे कि उदाहरण देखकर सुजलॉन नहीं खरीदना है.

सबसे अंतिम बात. करोड़पति बनना बुरी बात नहीं है. बहुत अच्छी बात है. बुरा है इसके चक्कर में हजार-लाख भी डूबा देना. एक रात में न तो वारेन बफे बना जाता है, न राकेश झुनझुनवाला. इन्वेस्टमेंट की शुरुआत में सिर्फ एक टारगेट रखें कि महंगाई और बैंक एफडी से बेहतर निकल जाए. अभी के हिसाब से इसे 10 पर्सेंट सालाना रख लीजिए. जैसे-जैसे पारखी बनते जाएं, टारगेट को धीरे-धीरे बढ़ाएं.

कोई शेयर खरीदें तो उसका भाव रोज चेक करने से बढ़ नहीं जाएगा. अच्छे फंडामेंटल्स वाले शेयरों में पैसा वैसे ही लगा दें, जैसे एफडी कर देते हैं. 10-20 साल में स्वप्न सरीखा चमत्कार हो सकता है. अनुभव हो जाने पर एसआईपी का तरीका अपनाएं (एसआईपी खरीदना नहीं है, एसआईपी का तरीका अपनाना है). यह चमत्कार की चमक बढ़ा देगा.

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