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यूपी में जंगलराज : सिपाहियों ने संपादक के मुंह में जबरन डाली शराब, जमकर की पिटाई

उत्तर प्रदेश में जंगलराज चरम पर है. समाजवादी पार्टी के नेताओं में आपसी घमासान का पूरा फायदा पुलिस और प्रशासनिक अफसर उठा रहे हैं. अखिलेश यादव की अनुभवहीनता और अहंकार पूरे प्रदेश को अंधेरे की तरफ ढकेल रही है. कोई किसी की सुनने वाला नहीं है. यूपी के एटा में एक ऐसी घटना हुई है जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं. यह एक संपादक के साथ हुआ. इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि आम आदमी का क्या हाल होगा. एटा में पुलिस वालों ने एक स्थानीय अखबार के संपादक पर बर्बर जुल्म ढाया.

उत्तर प्रदेश में जंगलराज चरम पर है. समाजवादी पार्टी के नेताओं में आपसी घमासान का पूरा फायदा पुलिस और प्रशासनिक अफसर उठा रहे हैं. अखिलेश यादव की अनुभवहीनता और अहंकार पूरे प्रदेश को अंधेरे की तरफ ढकेल रही है. कोई किसी की सुनने वाला नहीं है. यूपी के एटा में एक ऐसी घटना हुई है जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं. यह एक संपादक के साथ हुआ. इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि आम आदमी का क्या हाल होगा. एटा में पुलिस वालों ने एक स्थानीय अखबार के संपादक पर बर्बर जुल्म ढाया.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक एटा में एक महिला की मदद के लिए जब स्थानीय अखबार के संपादक ने पुलिस से मदद मांगी तो पुलिस वालों ने पीटकर संपादक को ही अस्पातल पहुंचा दिया. स्थानीय दैनिक अखबार मनसुख टाइम्स के संपादक बब्लू चक्रवर्ती ने एक औरत के सिर से खून बहता देखा. उन्होंने महिला की मदद करने के लिए पुलिस वालों से कहा. पुलिस वाले बुरी तरह शराब पिए हुए थे. उन्हें संपादक का अंदाज नागवार लगा तो संपादक को ही पकड़कर बिठा लिया और उनके मुंह में जबरन शराब डाल दी. इसके बाद पुलिस वालों ने पत्रकार की जमकर पिटाई की.

संपादक पुलिस वालों के पास जिस समय मदद की गुहार लगाने गए थे, उस समय सभी पुलिसकर्मी थाने में रसरंजन में लीन थे. टाइम्स ऑफ इंडिया को पीड़ित पत्रकार ने बताया कि यह घटना रविवार रात 9:15  की है, जब वह अपना काम खत्म कर ऑफिस से घर जा रहा था, कि तभी उसने कोतवाली नगर थाना के परिसर में एक महिला को देखा, जिसके सिर से बहुत तेजी से खून बह रहा था. पत्रकार ने दरियादिली दिखाते हुए जब उस महिला से हादसे के बारे में पूछा तो उसने पुलिस की बर्बरता की कहानी सुनाई. बात सुनने के बाद पत्रकार ने वहां मौजूद पुलिसवालों से महिला मदद करने और अस्पताल ले जाने को कहा ताकि महिला का खून बंद हो सके. लगभग 20 मिनट तक पुलिसवालों ने पत्रकार को कोई जवाब नहीं दिया. इसके बाद दो कॉन्स्टेबल अपने हाथों में कच्ची शराब से भरा ग्लास लेकर केबिन में आए और पत्रकार से उसके बारे में पूछताछ शुरू की. पुलिसकर्मी इस कदर नशे में धुत थे कि उन्होंने पत्रकार द्वारा महिला की मदद किए जाने की बात को अनसुना कर दिया.

पीड़ित पत्रकार ने कहा कि उनके इस तरह के व्यवहार को देखकर जब मैंने उन्हें फोन पर उनके सीनियर अधिकारियों से उनके बारे ये सब बताने की बात कही तो उन कॉन्स्टेबल ने 6 पुलिसकर्मियों को बुला लिया और इसके बाद हर कोई मुझे गाली देने लगा. उन लोगों ने इसके बाद लात-घूसों से मेरी पिटाई शुरू कर दी. उन लोगों ने कच्ची शराब मेरे मुंह में उड़ेल दी. इसके बाद मैंने एक अपने पत्रकार मित्र को वहां बुलाया, जिसने मुझे अस्पताल पहुंचाया. पीड़ित पत्रकार ने घटना की शिकायत लिखित में एसएसपी से की. जिन दो कॉन्स्टेबल्स ने पत्रकार पर हमला किया था, उन्हें लाइन हाजिर कर दिया गया है.

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