अश्विनी कुमार श्रीवास्तव-
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक उस वक्त नाराज होकर बीबीसी का एक इंटरव्यू बीच में ही छोड़कर चले गए , जब उनसे पूछा गया कि वह ब्रिटेन में ही आने जाने के लिए इतने धड़ल्ले से प्राइवेट जेट क्यों इस्तेमाल कर रहे हैं?
सुनक और उनकी सरकार के अहम लोग महज एक साल के भीतर 74 बार प्राइवेट जेट्स का उपयोग कर चुके हैं और वह भी ब्रिटेन के अंदर। यह आंकड़ा 1 जून 2022 से 30 जुलाई 2023 तक का है।
प्राइवेट जेट के ऐसे बेधड़क उपयोग पर पूछे गए सवाल पर सुनक ने कहा- जलवायु परिवर्तन के लिए ‘एयरक्राफ्ट में सफर न करें, छुट्टियां न मनाने जाएं’ ये सब फिजूल की बातें हैं। मेरे पहले भी जो ब्रिटिश प्रधानमंत्री थे, वो सभी प्राइवेट जेट यूज करते थे, पहले तो आपने सवाल नहीं किए?
इस पर इंटरव्यू करने वाले पत्रकार ने जवाब दिया कि ‘सर प्राइवेट जेट और कमर्शियल फ्लाइट में फर्क होता है। वे एयरलाइंस की फ्लाइट से जाते थे न कि अपने निजी विमान से‘
पत्रकार के इसी जवाब पर नाराज होकर सुनक ने इंटरव्यू बीच में ही छोड़ दिया।
पश्चिम या जापान आदि विकसित देशों में आम या खास आदमी ही नहीं बल्कि बड़े बड़े VIP और सेलेब्रिटी भी नजदीकी जगहों पर जाने के लिए साइकिल का इस्तेमाल गाहे बगाहे कर लेते हैं।
धनकुबेर या रसूखदार लोग वहां अपने पैसे या रसूख का इस्तेमाल करके आम आदमी से दूर रहकर निजी विमान या कारों के जबरदस्त काफिले की बजाय फ्लाइट, ट्रेन या सादगी के साथ सड़क का सफर करते हैं।
जबकि भारतीय लोग पैसा या रसूख आते ही खुद को आम आदमी से अलग करके भारी सुरक्षा और महंगी महंगी गाड़ियों के काफिले में चलना शान समझते हैं।
सुनक फिलहाल उसी भारतीय मानसिकता के साथ जी रहे हैं कि प्रधानमंत्री बनने के बाद अब वह किसी आम आदमी की तरह फ्लाइट या ट्रेन में कैसे चल सकते हैं? पैसा तो उनके पास पहले से था, अब रसूख भी आ गया है।
अपने यहां यानि भारत के ऋषि मुनि भी तो करोड़ों की luxury गाड़ियां, चार्टेड प्लेन- हेलीकॉप्टर, निजी कमांडो और सैकड़ों गाड़ियों का काफिला आदि लेकर निकलते हैं।
ऋषि तो अब हर जगह सिर्फ नाम के ऋषि रह गए हैं।
अपने वाले पीएम की तरह सुनक नाराज भी हो गए सवाल पूछने पर और उन्हीं की तरह नेहरू से पूछने जैसा जवाब दिया कि पहले वाले ब्रिटिश पीएम से क्यों नहीं पूछा ?
यही नहीं अपने वाले पीएम की तरह इंटरव्यू बीच में छोड़कर भाग गए । कोई बड़ी बात नहीं कि अपने वाले पीएम की तरह मीडिया से ही दूरी बना लें।
लेकिन वहां की जनता अपनी जनता की तरह अंधभक्त नहीं है। न ही वहां का मीडिया यहां की तरह चाटुकार मीडिया है। बीबीसी का बजट काटा या मीडिया से दूरी बनाई अथवा जेट का इस्तेमाल करते रहे तो एक ही टर्म पूरा कर पाना उनके लिए मुश्किल होगा।
यहां अपने वाले पीएम तो खैर जेट पर ही सवार रहे हैं नौ साल और पूरी दुनिया के न जाने कितने चक्कर लगा चुके हैं।लेकिन यहां की मीडिया और जनता सवाल पूछना तो दूर उन्हें तीसरी बार चुनने की तैयारी में लगी है।



shalin verma
August 3, 2023 at 9:26 am
ashwini ji salute hai apko
अशोक कुमार शर्मा
August 9, 2023 at 7:22 pm
बड़ी अजीब मानसिकता है भाई। खबर बीबीसी और ऋषि सुनक की है। लेकिन उसमें लेखक ने भविष्यवक्ता की भूमिका भी खुद ही अख्तियार कर ली है और यह घोषणा कर दी है कि ब्रिटेन के लोग ऋषि सुनक को दूसरी बार मौका नहीं देंगे।
माना कि सुनक ने तुनक में बीबीसी का इंटरव्यू बीच में छोड़ दिया, लेकिन क्या उनमें इतनी बुद्धि और प्रतिभा नहीं है कि अपने उस फैसले का आकलन पहले से ही कर सके होंगे? भाई एक आदमी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इतने ऊंचे पद पर बैठा हुआ है वह क्या मूर्ख है अपनी किसी भी हरकत का आकलन पहले से ना कर सके?
वैसे इस खबर में कहां से यह निष्कर्ष निकल आता है कि ब्रिटेन के लोग सनक को दूसरा मौका नहीं देंगे और पहले टर्म भी उनका पूरा नहीं होगा। क्या यह भूल जाते हैं कि उन्हें पहला मौका मिला ही नहीं था उन्हें तो ब्रिटेन के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने संकटमोचक के रूप में खुद ही बुलाया है और अब उनका बहुमत है। सुन्नत के आने पर ब्रिटेन की डगमगा की अर्थव्यवस्था में काफी सुधार भी हुआ है और थोड़ा मोड़ा नहीं 71% स्थिति सुधर गई है। सरकार को कोई एसेट बेचना नहीं पड़ा है। अपनी किसी भी जनकल्याणकारी योजना में कोई कटौती नहीं करनी पड़ी है। ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय संबंध वैसे भी विश्व में सर्वश्रेष्ठ स्केतर माने जाते हैं और महाशक्ति तो पहले से ही बना हुआ है।
बीबीसी की विश्वसनीयता क्या है? यह हम भारत के लोग भले ही ना जानते हो परंतु वैश्विक मीडिया इस बात को अच्छी तरह से जानता है कि उनकी विश्वसनीयता में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितने प्रतिशत की गिरावट आई है।
यह भारतीयता विरोधी खुमारी इतनी जबरदस्त है कि हर पल यह मानती है कि कहीं कुछ भी भारतीय नजर आए या उसका भारत से दूर-दूर का कुछ भी रिश्ता हो उसको गरियाने से आप सेकुलर हो जाएंगे। अभी तो ब्रिटेन में ही एक भारतीय मूल का व्यक्ति प्रधानमंत्री बना है। तब आप क्या करेंगे जब अमेरिका में इस प्रकार की कोई नई स्थिति पैदा हो जाएगी।
सबसे मजेदार बात यह है कि इस खबर का नरेंद्र मोदी से कोई लेना-देना नहीं था लेकिन आपने उसमें उन्हें भी घसीट लिया। इससे आपकी सेकुलर मानसिकता का पता चलता है जिसे मेरा शत-शत प्रणाम है।