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सियासत

मामला हिन्डनबर्ग रिपोर्ट में फ्लैग किये गये लेन-देन का ही है…

संजय कुमार सिंह-

कॉरपोरेट घोटाले के लिए ऑडिटर को भी जिम्मेदार बनाने का नफा-नुकसान… शर्माते, सुकचाते, डरते और बचते हुए आखिर यह खबर छप ही गई कि अडानी की कंपनी के एक ऑडिटर डेलॉयट ने इस्तीफा दे दिया है।

कल इस आशय की खबर के साथ बताया गया था कि कंपनी ने कहा कि उसे कुछ पता नहीं है और डेलॉयट ने टिप्पणी करने से मना कर दिया था। मामला हिन्डनबर्ग रिपोर्ट में फ्लैग किये गये लेन-देन का ही है जिसपर समूह ने कार्रवाई नहीं की तो आखिरकार डेलॉयट के इस्तीफे की पुष्टि हो गई।

इस्तीफे का कारण मोटा-मोटी यह हो सकता है कि अब नियम है कि घोटाले की जिम्मेदारी ऑडिटर की भी है। इसलिए इससे बचना डेलॉयट की मजबूरी हो सकती है। यह नियम का नुकसान है कि इस कारण पोल खुल गई।

नियम का फायदा संघी ऑडिटर (रों) को हो रहा होगा। वह साइड इफेक्ट है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि नया ऑडिटर संघी ही है। मुद्दा कारोबार के नुकसान का है। ऑडिटर संघी हुआ तो अंदरखाने की सारी जानकारी पहुंचाएगा और नहीं हुआ तो घोटाला कर नहीं पायेंगे।

मोटे तौर पर भारत में कमाना इसी को कहते हैं। यह एक दिलचस्प एंगल है। बिजनेस वालों को इसपर रिपोर्ट करना चाहिए। दो-चार आईडिया मेरे पास भी है।

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