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भारतीय मर्दों को थोड़ा लचीला बनने के लिए ये किताब जरूर पढ़नी चाहिए!

यशवंत सिंह-

Vipin Dhankad सही मायने में प्रिंट मीडिया वाले पत्रकार हैं। उन्हें लिखने का सहूर है। उनका दिमाग़ रचनात्मक और उर्वर है। मेरठ के इस पत्रकार को किन हालात में ग़ाज़ियाबाद शिफ्ट होना पड़ा, हाउस हसबैंड बनना पड़ा, इसकी रोचक कहानी इस किताब में है।

देश में हाउस हसबैंडों की बढ़ती संख्या के चलते ये सेक्टर काफ़ी डिमांड में है। इसलिए इनकी किताब पढ़ी जाएगी। मैंने वन फोर्थ पढ़ लिया। कई बार विपिन के लिखे ने चमत्कृत किया, हंसाया, उत्सुकता पैदा की।

मतलब किताब पढ़ेंगे तो पढ़ते ही जाएँगे। भारतीय पुरुषों को ये किताब ज़रूर पढ़नी चाहिए। शायद उनके भीतर का मर्द थोड़ा प्रेरित हो, थोड़ा लचीला बने। विपिन की पत्नी बाली को सचमुच गर्व होगा कि उन्हें शानदार इंसान मिला, पति के रूप में!

इस हाउस हसबैंड को मेरा भी सलाम है। किताब पर अगर मुंबई वालों की नज़र पड़ गई तो कुछ न कुछ बन जाएगा। फ़िलिम या टीवी सीरियल या ओटीटी सीरीज!

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला जी ने इस किताब को लेकर क्या कहा-लिखा नीचे लिंक पर पढ़ें..

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