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अमर उजाला को चिट्ठी लिखने पर इंटेलीजेंस से भिड़ गईं पीर साहब की पत्नी!

आस मोहम्मद कैफ-

चिट्ठी ‘अमर उजाला’ को लिखी है। सबक सभी के लिए है। वैसे खाल उधाड़ कर रख दी है, इफ्तिखार जावेद साहब ने!

एक कहानी सुनाता हूँ, मुजफ्फरनगर के मोरना में एक खुशाल पीर साहब थे। वो बिहारगढ़ में क़याम करने लगे, यहां एक मदरसा और घर बना लिया। ज़मीन सरकार ने लीज पर दे दी।

लाखों फ़ॉलोअर है दुनिया मे, मुरीदों ने महल बना दिया। एक अखबार के संवाददाता ने उनसे 10 हजार₹ विज्ञापन के नाम पर मांग लिए, हजरत क्या समझते इसे! राजनीतिक आदमी तो थे नही!

अखबार इन्हें संदिग्ध और मदरसे को आतंकवादी अड्डा लिखने लगा! बात लोकल इंटेलिजेंस तक पहुंची। डिमांड बढ़ गई! पीर साहब की पत्नी पढ़ी-लिखी थी, वो इंटेलिजेंस के अफसर से भिड़ गई। जब कुछ गलत नही तो पैसे किस बात के!

जांच अधिकारी ने भी बिना सुबूत के कुछ कुछ ‘संदिग्ध’ लिख दिया! अब मदरसा और घर दोनों जमीदोंज कर दिए गए हैं। मुजफ्फरनगर के स्थानीय लोग बताते हैं कि मुजफ्फरनगर दंगे में अखबारों में माहौल गर्म रखने के लिए पैसा बाँटा गया था।

एक बात पता है”’बड़े अखबारों के देहात संवाददाता फ्री में काम करते हैं, और टीवी चैनलों के जनपद संवाददाता 2 हजार में।” अब नँगा क्या बिछाएगा और क्या पहनेगा! आप चिट्ठी पढ़िए!

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