
दीपक शर्मा-
देश का लॉटरी किंग देश का सबसे बड़ा चंदा देने वाला सेठ निकला। ये जाहिर करता है कि इस दौर में चुनावी राजनीति भ्रष्टाचार के चरम पर है।
लेकिन हैरानी ये है कि लॉटरी किंग के बेटे को बीजेपी में शामिल करने की क्या मजबूरी थी? जिसके यहां ED के छापे पड़े उसके बेटे से वित्त मंत्री क्यों मिली? बीजेपी को इस खबर पर अपना पक्ष रखना चाहिये।
खबर का या तो खंडन करे या फिर सफाई दें? वित्त मंत्री बतायें कि ये उनकी तस्वीर नहीं है या फिर वो मजबूरी बतायें जिसके चलते लॉटरी किंग के बेटे से मुलाकात करनी पड़ी!
देखें कुछ कमेंट..
अमरनाथ-
वसूली गैंग का लॉजिक समझ नहीं आ रहा:
ज्यादातर कंपनियों पर ईडी का छापा पड़ने के बाद चंदा मिला।
अगर वो कंपनी भ्रष्ट थी तो चंदा क्यों से लिया?
ईडी ने उस कंपनी पर कार्रवाई क्यों रोक दिया ?
चंदा लेने के बाद सरकार ने उन भ्रष्ट कंपनियों को आगे और बड़ा ठेका क्यों दिया?
चंदा के अलावा उन कंपनियों ने मोदी सरकार के नेताओं को कॅश में कितने करोड़ दिया होगा?
ईडी के छापे के बाद लोग बीजेपी क्यों ज्वाइन कर लेते है, उनका दाग कैसे साफ़ हो जाता है
जांच होनी चाहिए, ये ईडी है या साहूकार का पहलवान, जो वसूली करने का काम करता है? साहूकार चौकीदार है या चोर
मुकेश गुप्ता-
अब इसपर भी ज़रा ध्यान दिजियेगा…स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया TheOfficialSBI ने सुप्रीम कोर्ट को दो दिन पहले ही बताया था कि कुल 22,217 इलेक्टोरल बॉण्ड बेचे गये थे! लेक़िन कल स्टेट बैंक ने केवल 18,871 बॉण्ड की जानकारी ही दी है! बाक़ी 3,346 बॉण्ड की जानकारी क्यों छुपायी गई है? 15 फ़रवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ही स्टेट बैंक को 12 अप्रैल, 2019 के बाद ख़रीदे गये सभी बॉण्ड की जानकारी सार्वजनिक करने के लिये कहा था!
शैलेन्द्र शुक्ला-
आज़ाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला एवं हवाला से भी बड़ा धन का इधर से उधर करके घूस के रूप में लोकतांत्रिक तरीके से बनी सरकारों को खरीदकर जनता के टैक्स के पैसे को अपने मुनाफे में बदलने का ये कांड शर्मनाक है। क्या तानाशाह आगे की सच्चाई सामने आने देंगे या परिवर्तन के बाद सामने आयेगा?
रमेश पटवाल-
दीपक जी मोदी का परिवार यही तो करते आया है इसका जबाब निर्मला को ही नही मोदी को भी देना होगा कि देश की जनता को लूटने वाले से मोदी के और उसके परिवार का क्या रिस्ता है। पूछता है भारत वाला अपने मुंह में दही जमा कर बैठा हुआ है। लेकिन देश के जागरूक जनता मोदी की असलियत को समझ गयी है।


