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सियासत

धनंजय सिंह बनाम IPS संजीव भट्ट : इतिहास नायकों को नहीं साहस को याद रखता है!

श्याम मीरा सिंह-

कुछ दिन पहले एक दूसरे मामले में IPS संजीव भट्ट को 20 साल की सज़ा का सुनाई गई। मैं, संजीव भट्ट की बेटी-आकाशी और उनका बेटा- शांतनु गूगल मीट (वीडियो) पर बात कर रहे थे। हम विचार कर रहे थे कि कैसे संजीव भट्ट की बात को लोगों तक पहुँचाया जा सके।

मैंने कहा (ऐसे ही मन जानने के लिए)- कि वैसे कहना नहीं चाहिए पर मुझे नहीं लगता जब तक ये सरकार है तब तक वे जेल से बाहर आ सकेंगे। एक ही रास्ता है, समझौता कर लें कि जेल से बाहर आकर चुप रहेंगे। ऊपर के कुछ लोगों से बात कर ली जाए। और कोई विकल्प मुझे तो नहीं दिखता।

समझौते की बात सुनते ही संजीव भट्ट की बेटी- आकाशी बोली- “समझौता पापा कभी नहीं करेंगे। अगर डेडी भी कहें तो हम नहीं करने देंगे।” शान्तनु ने कहा- समझौते का कोई मतलब ही नहीं है।

मैंने मज़ाक़ में कहा- कैसे बच्चे हो यार, तुम जैसे बेटी हो तो बाप को मरवा ही दे (मज़ाक़ में कहा)..

हालाँकि ये कहते हुए मुझे शांतनु और आकाशी के शब्दों पर स्नेह और सुखद अभिमान हुआ। क्या स्वाभिमानी परिवार है। क्या खूब आदमी हैं संजीव भट्ट- जिसने लिखा था कि लड़ाई शुरू हुई है, हुई तो हो जाने दो। एक उनकी पत्नी- जिन्होंने कहा- श्याम समझौता तो हम चारों में कोई भी नहीं करने देगा, ख़ुद संजीव नहीं करेंगे। और एक उनकी बेटी और बेटा- जिनका पिता अभी जेल में है और अभी भी वे इस इंतज़ार में हैं कि वे न्याय की लड़ाई लड़ेंगे, और तब तक लड़ेंगे जब तक कि न्याय सुनिश्चित नहीं हो जाता।

धनंजय सिंह पर कुछ नहीं लिखूँगा। वो एक शब्द भी डिजर्व नहीं करते। उनके लिए यही एक कथन है। इतिहास नायकों को नहीं साहसियों को याद करता है। विजयों और पराजयों को नहीं विद्रोहों को याद रखता है।

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