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प्रधानमंत्री जी, ईवीएम जिन्दा है, आप कहां हैं?

ईवीएम का बचाव करने वालों की तकनीकी अज्ञानता से भारत का नाम होगा?

संजय कुमार सिंह

आपको याद होगा, प्रधानमंत्री ने चुनाव जीतने के बाद ईवीएम का विरोध करने वालों का मजाक उड़ाया था और पूछा था, …. ईवीएम जिन्दा है या मर गया। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री को ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं थी और ऐसा कहकर उन्होंने ना सिर्फ विरोधियों को हतोत्साहित करना चाहा बल्कि अपने समर्थकों को भी संदेश दे दिया था। इसके साथ जो बात कही वह उनका आरोप है और उसका अपना मकसद हो सकता है। हालांकि, इसका असर मस्क के ट्वीट के बाद दिख रहा है। ईवीएम की खबर कल दिन भर चर्चा में रही। प्रधानमंत्री का पता नहीं चला और आज इस खबर को प्रमुखता नहीं मिली। कल इतवार होने के बावजूद संबंधित चुनाव अधिकारी ने तथाकथित स्पष्टीकरण दिया और इस कारण उम्मीद थी कि आज यही खबर लीड होगी। लेकिन जैसा राहुल गांधी ने कहा है, ईवीएम ब्लैक बॉक्स की तरह है।

ब्लैक बॉक्स विमान में होता है इसे फ्लाइट डाटा रिकार्डर भी कहा जाता है। यह एक ऐसा उपकरण है जो उड़ान के दौरान विमान के अंदर के सभी परिचालनों को दर्ज करता है। यह खास तौर से सुरक्षित होता है ताकि विमान दुर्घटना की स्थिति में ऊंचाई से जमीन पर या पानी में गिरे तो भी नुकसान नहीं हो और ढूंढ़ा जा सके। इससे दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जाता है, सुरक्षित रखा जाता है और खास लोग ही इसे देख समझ सकते हैं। राहुल गांधी ने इसीलिए ईवीएम को ब्लैक बॉक्स कहा है। कल मामले की शुरुआत एसोसिएटेड प्रेस की एक खबर से हुई। इसके अनुसार प्यूरटो रिका के चुनाव में वोटिंग संबंधी सैकड़ों अनियमितताएं हुई हैं। एलन मस्क ने इस आशय के एक ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, इसे मनुष्यों या एआई से हैक किये जा सकने का जोखिम भले कम है फिर भी बहुत ज्यादा है। इसे खत्म किया जाना चाहिये। 

दिलचस्प है कि इसपर पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर ने लिखा, यह बेहद सामान्यीकरण है। “इसका मतलब हुआ कि कोई सुरक्षित डिजिटल हार्डवेयर बना ही नहीं सकता है”। कहने की जरूरत नहीं है कि मुद्दा यह है ही नहीं। बिल्कुल बना सकता है। पर आपने जो बनाया है वह संदेह से परे नहीं है। मुद्दा यह है कि जो व्यवस्था है, वह सुरक्षित है कि नहीं? फिर भी पूर्व केंद्रीय मंत्री का ऐसा कहना निश्चित रूप से दिलचस्प है और आज सिर्फ टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे हाइलाइट करने वाला शीर्षक लगाया है। मेरे लिये यह संतोष की बात है कि हिन्दी अखबारों में नवोदय टाइम्स ने भी ऐसा ही शीर्षक लगाया है। मामला गंभीर हुआ इस मामले में राहुल गांधी और अखिलेश यादव के भी राय रखने से। भाजपा की ट्रोल सेना का जो हाल और लक्ष्य है उसमें अमित मालवीय तुरंत कूद पड़े।

नवोदय टाइम्स की आज की खबर का शीर्षक है, राहुल क्यों कर रहे मस्क से भारतीय लोकतंत्र की शिकायत। इसमें कहा गया है मस्क या जो भी सोचता है कि वे ईवीएम को हैक कर सकते हैं उन्हें भारत के निर्वाचन आयोग से संपर्क करना चाहिये। यहां मेरा सवाल है कि यह पेशकश निर्वाचन आयोग क्यों नहीं करता है। क्यों बचाव में अवैज्ञानिक, तकनीक से अनजान और लचर तर्क दिये जाते हैं? भारत की बदनामी तो ऐसे तर्कों से भी होगी पर वह अलग मुद्दा है। कुछ लोग चुनाव आयोग की पुरानी पेशकश को याद करते हैं लेकिन तथ्य यह है कि तब आयोग की शर्त जो थी वह लगभग यही कि मशीन बिना छुये, खोले हैक करना था। इससे पहले इस कारण किसी ने ईवीएम का इंतजाम स्वयं करके उसे हैक करके दिखा दिया था तब जवाब देने की बजाय चुनाव आयोग ने ईवीएम चोरी का मामला बनाकर उसे जेल भिजवा दिया था। भाजपा ने इसका विरोध इसीलिए शुरू किया था। तब किताबें लिखी-लिखवाई गई थीं। सत्ता में आने के बाद कई यू-टर्न लिये गये। एक ईवीएम मामले में भी है।

इसलिए जो नहीं जानता है उसे अमित मालवीय भ्रमित कर सकते हैं पर उनका दावा छप गया है तो मुझे लगता है कि अभी भी बहुत लोग नहीं जानते हैं। खबर में अमित मालवीय का कहा बाकी जो भी है वह फूहड़ राजनीति है, राहुल गांधी से उनकी कुंठा है। इसमें तकनीक की बात नहीं है जबकि राहुल गांधी की जानकारी का पता इसी से चलता है कि उन्होंने ईवीएम को ब्लैक बॉक्स कहा है। यह कितना सटीक है वह मैं ऊपर बता चुका हूं। ईवीएम हैक किया जा सकता है। कितने ही वीडियो यू ट्यूब पर हैं और तकनीक का मामूली जानकार भी समझता है कि सत्तारूढ़ भाजपा की वेबसाइट (सत्ता में आने के तुरंत बाद) को हैक किया जा सकता है, किसी के कंप्यूटर में सबूत प्लांट करके उसे जेल भेजा जा सकता है एक ओटीपी से बैंक खाता खाली हो सकता है तो ईवीएम क्या चीज होगी। इसके पक्ष में हमेशा यह दलील दी जाती है कि उसमें कनेक्टिविटी नहीं है। न ब्लूटुथ, न वाई फाई, न इंटरनेट है।

नवोदय टाइम्स ने भी आज राजीव चंद्रशेखर की इसी दलील को हाईलाइट किया है। पर मुद्दा यह है कि इसमें बैट्री है, डाटा स्टोर रहता है तो ब्लूटुथ, वाई फाई या इंटरनेट एनैबल करना कौन सा मुश्किल है। बायें हाथ का खेल है। और बिना खोले-ढूंढ़े शक भी नहीं होगा। अब तो इसमें पैसे भी ज्यादा नहीं लगने हैं। इसलिए जब ईवीएम बना था तो इन दलीलों का मतलब रहा होगा। अब ये सब तकनीक नई आई है और इतनी सस्ती और छोटी या बेतार है कि इसे लाना ऐक्टिवेट करना बहुत आसान है। चुनाव आयोग इसीलिए मशीन नहीं देता है। आम राजनतिक कार्यकर्ता बचाव करे तो करे पूर्व आईटी मंत्री कर रहे हैं यह हास्यास्पद है और इसीलिए टाइम्स ऑफ इंडिया ने लीड बनाया है और शीर्षक में उल्लेख किया है। कुल मिलाकर, राहुल गांधी को पप्पू बनाने में बहुत सारे लोग अपना पप्पूपना खुद ही खोल कर ऱख दे रहे हैं पर वह अलग मुद्दा है। राहुल गांधी ने कल न सिर्फ एलन मस्क के ट्वीट को रीट्वीट किया था, मिडडे की एक खबर का कतरन भी चर्चा में रहा।

दरअसल खबर का शीर्षक लगाने वाले की तकनीकी चूक की वजह से लग रहा था कि खबर ईवीएम से संबंधित है जबकि वह पोस्टल बैलेट से संबंधित थी, खबर में लिखा भी था। लेकिन हमला ईवीएम पर था तो बचाव ईवीएम का ही करना था उसमें जो मुद्दा था वह रह गया। पुलिस जांच कर रही है तो फिर किसी दिन चर्चा होगी लेकिन तकनीक के संबंध में चुनाव आयोग और उसके अधिकारियों की यह चूक जानबूझकर की गई हो या अनजाने में गजब है। मिडडे की कल की खबर के अनुसार पुलिस ने पाया कि ईटीबीपीएस (इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलट सिस्टम) को ऑनलॉक करने के लिए निर्वाचित उम्मीदवार के रिश्तेदार ने उसी मोबाइल फोन के उपयोग से ओटीपी जेनरेट किया था। ईवीएम से वोटों की गिनती के दौरान संबंधित उम्मीदवार आगे थे पर ईटीबीपीएस के वोटों की गिनती के बाद पीछे हो गये और अंततः हार गये। यहां उल्लेखनीय है कि हम सब लोग यही जानते थे कि पोस्टल बैलट भौतिक तौर पर गिने जाते हैं। कल जब ओटीपी की बात हुई तो कह दिया गया कि ईवीएम के लिए ओटीपी की आवश्यकता होती ही नहीं है।

पता चला है कि पोस्टल बैलट को डिजिटली रखा जाता है और चुनाव आयोग ने सीडैक की सहायता से इलेक्ट्रॉनिक रुप से प्रेषित डाक मतपत्रों को रखने की एक  प्रणाली तैयार की है जिसे (ईटीपीबीएस) कहा जाता है। अब इलेक्ट्रॉनिक रूप से रखे पोस्टल बैलट भौतिक तौर पर कैसे गिने जाते हैं – राम जानें। उसपर फिर कभी लेकिन चुनाव आयोग के वेबसाइट पर ईटीपीबीएस की जो विशेषताएं लिखी हैं वो इस प्रकार हैं – 1) यह दो परतों की सुरक्षा वाली एक सुरक्षित प्रणाली है। 2) कूटलिखित इलेक्ट्रॉनिक प्रेषित डाक मतपत्र फ़ाइल को डाउनलोड करने के लिए ओटीपी की आवश्यकता है। 3) गोपनीयता बनाए रखी जाती है और क्यूआर कोड के कारण डाले गए ईटीपीबी का कोई डुप्लिकेट संभव नहीं है। विकोड (कूट पढ़ने), प्रिंट करने और ईटीपीबी डेलीवर करने के लिए पिन अपेक्षित है। इसीलिए चुनाव आयोग के खंडन में भी कल ही कहा गया था, अधिकृत व्यक्ति का फोन अनधिकृत रूप से उम्मीदवार के सहायक द्वारा उपयोग किया गया था। चुनाव अधिकारी ने आपराधिक मामला दर्ज करा दिया है। पर इससे यह पता नहीं चलता है कि देश भर में यह एक ही मामला है या और भी है जिसे छिपाया जा रहा है और खुलासा होने का इंतजार करना चाहिये।        

वैसे तो आज की सबसे बड़ी खबर ईवीएम से संबंधित उपरोक्त विवाद की ही होनी चाहिये थी पर आज आतंकवाद खत्म करने की सरकार की कोशिशों को भी अखबारों ने पूरा प्रचार दिया है। अखबारों की मानें तो आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई निर्णायक चरण में है। वैसे तो ऐसा गृहमंत्री ने कहा है। और नवोदय टाइम्स में यही छपा है। यह लीड है और मंत्री ने ‘अंतिम चरण’ कहा होता तो वही छपता। नहीं छपा है तो मैं मान रहा हूं कि जिस आतंकवाद को नोटबंदी से खत्म करने की उम्मीद की गई थी वह अब अंतिम सांसें गिन रहा है। अब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि सख्ती से कुचलें, तो कुचल ही दिया जायेगा। यही नहीं अमितशाह ने यह भी कहा है कि आतंकवाद के मददगारों पर कड़ाई बरतें। अमर उजाला की खबर के अनुसार गृहमंत्री ने प्रधानमंत्री के जम्मू-कश्मीर दौरे से पहले सुरक्षा हालात की समीक्षा की है और अमरनाथ यात्रा मार्ग पर कड़ी सुरक्षा के निर्देश दिये हैं।

नवोदय टाइम्स के अनुसार जम्मू में भी पूरी तरह नकेल कसने का निर्देश दिया गया है। लिहाजा, सुरक्षा बल अभियान तेज कर सकते हैं। द टेलीग्राफ ने इसे सीधे-सरल शीर्षक से समझा दिया है कि जम्मू में भी (कश्मीर) घाटी जैसी सख्ती बरती जायेगी। इसका फ्लैग शीर्षक है, केंद्र हिल गया है, सख्त प्रतिक्रिया का आदेश दिया। दोनों हिन्दी अखबारों के शीर्षक के मुकाबले इस एक शीर्षक से खबर और प्रचार का अंतर समझा जा सकता है। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर लीड है और शीर्षक, “अमित शाह ने कहा – जम्मू क्षेत्र में शून्य आतंकवाद की योजना अपनाइये”। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह तीन कॉलम की खबर है। शीर्षक है, आतंकी हमलों के बाद अमित शाह ने स्थिति की समीक्षा की; जम्मू में सुरक्षा बलों का स्तर बढ़ेगा।

इसके साथ कुछ बुलेट प्वाइंट का शीर्षक है, ग्रामीण रक्षा समितियों के लिए मजबूती? सूत्रों के हवाले से अखबार ने कहा है कि ग्रामीण रक्षा समितियों को मजबूत किये जाने की खबर है। इंडियन एक्सप्रेस में यह खबर दो कॉलम में है और खबर को अमरनाथ यात्रा की तैयारियों के रूप में पेश किया गया है न कि आतंकी घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की तरह। इंडियन एक्सप्रेस की खबर का फ्लैग शीर्षक है, यात्रा 29 जून को शुरू हो रही है। मुख्य शीर्षक है, जम्मू की सुरक्षा में वृद्धि, अमरनाथ यात्रा के लिए सख्ती। उपशीर्षक है, शाह ने सुरक्षा बलों से कहा, घाटी में जो सफलता मिली है उसे दोहराया जाये। द हिन्दू में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। यहां चार कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, तेलंगाना के मेडक शहर में सांप्रदायिक तनाव फैलने के बाद भाजपा के तीन नेता गिरफ्तार

यहां पांच कालम में फोटो के साथ एक और खबर छपी है जो दूसरे अखबारों में इतनी प्रमुखता से नहीं है। शीर्षक है, विपक्षी सांसदों के बायकाट के बीच उपराष्ट्रपति ने संसद परिसर में प्रेरणा स्थल का उद्घाटन किया। यहां छपी तस्वीर में उपराष्ट्रपति के साथ तीन लोग दिख रहे हैं। इनमें एक पूर्व लोकसभा अध्यक्ष, ओम बिड़ला, पूर्व मंत्री किरण रिजिजू और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश शामिल हैं। इसके साथ तीन कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, आजाद समाज पार्टी उत्तर प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव लड़ेगीइंडियन एक्सप्रेस ने प्रेरणा स्थल की खबर को चार कॉलम की फोटो और चार कॉलम की खबर के साथ छापा है। फोटो में कुल जमा नौ लोग दिख रहे हैं। यहां शीर्षक है, संसद में प्रदर्शन की जगह वाली गांधी मूर्ति को नई जगह मिली, कांग्रेस ने कहा मनमाना, लोकतंत्र का उल्लंघन। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर चार कॉलम में है। यहां शीर्षक है, स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रीय हस्तियों की मूर्तियां संसद कांपलेक्स में प्रेरणा स्थल पर ले जाई गईं। 

इन खबरों के बीच आज के अखबारों ने एक औऱ खबर को महत्व दिया है वह है नीट। आप जानते हैं कि (अभी तक) नीट परीक्षा की वही खबर छपती है जो शिक्षा मंत्री चाहते हैं। पहले दिन शिक्षा मंत्री के खंडन के साथ खबर छपी थी फिर इनके खंडन में कुछ नया और खास नहीं था तो खबरें नहीं छपीं। आज अमर उजाला ने इसे लीड बनाया है। शीर्षक है, शिक्षा मंत्री ने माना नीट में कुछ जगह गड़बड़ी हुई, दोषियों को बखशेंगे नहीं। पर मुद्दा यह है कि वे यही बात पहले दिन से कह रहे हैं। इसमें नया कुछ नहीं है। उपशीर्षक है, धर्मेंद्र प्रधान ने कहा – एनटीए का कोई अफसर धांधली में लिप्त मिला तो उसे भी नहीं छोड़ेंगे। यह ना तो कोई बड़ी बात ना ही इतनी नई कि उपशीषर्क बनाया जाये। मुद्दा यह है कि घोटाला हुआ है। इससे हजारों छात्र और उनके अभिभावक परेशान हैं। प्रश्नपत्र लीक होने की शंका है और इसलिए पूरी परीक्षा रद्द करवाकर फिर से कराने की मांग की गई है।

सरकार ने यह मांग नहीं मानी है इसलिए छात्रों को सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा है और अखबार आज बता रहे हैं कि गड़बड़ी (जो अब मिली है) को सुप्रीम कोर्ट की जानकारी में ले जाया जायेगा और अदालत के आदेश के अनुसार सरकार काम करेगी। आप जानते हैं कि सरकार के लिए अदालत का आदेश नहीं मानने कि विकल्प होता ही नहीं है। अमर उजाला ने नीट की आज की खबर को लीड बनाया है। नवोदय टाइम्स ने शिक्षा मंत्री के हवाले से लिखा है, एनटीए में सुधार की जरूरत। यहां छपी मुख्य खबर के अनुसार नीट मामले की जांच कर रही बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने आगे की तारीख के छह चेक बरामद किये हैं। ईओयू को संदेह है कि इन्हें माफिया के पक्ष में जारी किया गया है। प्रश्नपत्र के लिए अभ्यर्थियों से 30 लाख रुपये मांगे गये थे और कई लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि प्रश्नपत्र परीक्षा खत्म होने से पहले सार्वजनिक हो गये थे। दूसरी ओर शिक्षा मंत्री कहते रहे हैं कि मामला प्रश्न पत्र लीक का नहीं है।

आज की एक और महत्वपूर्ण खबर इंडियन एक्सप्रेस में है। यह बताती है कि लोकसभा चुनाव में सिकस्त खाने और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के नहीं बनने की खबरों के बीच मध्यप्रदेश के मंडला में 11 घर गिरा दिये गये हैं। खबर के अनुसार पुलिस का कहना है कि इन घरों के फ्रीज में गोमांस मिले हैं। यहां भाजपा के पहली बार केंद्र में सत्ता में आने के बाद दिल्ली के पास दादरी के बिसहाड़ा गांव में मोहम्मद अखलाक के घर में गोमांस मिलने के बिना पर उसे पीटकर मार दिये जाने का मामला याद आता है। अब फिर वैसा ही समाज बनाने की कोशिश लग रही है जबकि इस बीच गोमांस निर्यात करने वाली कंपनी से इलेक्टोरल बांड लेने के आरोप पर कहा जा चुका है कि बीफ का मतलब गो मांस नहीं भैंस का मांस है और भारत में गो-हत्या होती ही नहीं है। गोमांस का निर्यात भी नहीं होता है। ऐसे में किसी के घर में गोमांस होने का शक कैसे और किसे हो जाता है और उसकी पुष्टि के बिना घर गिरा दिया जाना तथा खबर सिर्फ इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने पर होना बहुत कुछ कहता है।    

एक तरफ अगर इस खबर से सरकार की राजनीति का असर दिखता है तो नीट के मामले से सरकार की प्रशासनिक योग्यता क्षमता का पता चलता है। आप जानते हैं कि हर साल कई छात्र परीक्षा में असफल होने या सफलता के दबाव में आत्महत्या कर लेते हैं। नीट जैसी परीक्षा का ठीक-ठाक, बिना विवाद होना इसलिए भी जरूरी है और जब ऐसी खबरें आ रही हैं तो प्रभावित बच्चों पर ध्यान रखने की भी जरूरत है। ऐसे में आज हिन्दुस्तान टाइम्स में 17 साल के एक लड़के की आत्म हत्या की खबर है। हालांकि, यह इंजीनियरिंग का परीक्षार्थी था पर परीक्षा तो परीक्षा है और मेडिकल वाले छात्र परेशान होंगे तो इंजीनियरिंग वाले कब तक अप्रभावी रह सकत हैं। और अभिभावकों के लिए तो यह अंतर शायद और कम हो।

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1 Comment

1 Comment

  1. Neeraj

    June 22, 2024 at 11:03 am

    The name of this channel is just right. The content here is nothing but badhas of anti-Modi, anti-India, anti-Hindu scoundrels.

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