Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

आज के अखबारों में विश्व गुरू के ज्ञान की चर्चा और ‘पाठशाला’ का हाल

संजय कुमार सिंह

आज हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, युद्ध के मैदान में समाधान नहीं तलाश सकते, मोदी ने पुतिन से कहा। द टेलीग्राफ की लीड का शीर्षक है, खून और शव के क्षेत्र में कोई स्थायी समाधान नहीं। यह जम्मू में उग्रवादियों की सक्रियता पर टिप्पणी है जबकि हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय छवि को निखारने का एक प्रयास है। यह उनके ज्ञान के रूप में पुतिन को दी गई सलाह का प्रचार है। इंडियन एक्सप्रेस ने यह काम और गंभीरता से किया है। शीर्षक है, प्रधानमंत्री की मुश्किल : बच्चों की हत्या तकलीफदेह है; पुतिन को सुनते हुए, मुझे उम्मीद है। आज के ज्यादातर अखबारों की लीड प्रधानमंत्री की यात्रा की खबरों से संबंधित है और सबमें उन्हें महान बनाने की कोशिश भी।

द टेलीग्राफ अपवाद है। यहां प्रधानमंत्री-पुतिन की खबर पहले पन्ने पर तीन कॉलम में है लेकिन लीड जम्मू की खबर है जो होनी भी चाहिये। कुल मिलाकर मामला यह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पुतिन को ज्ञान दे रहे हैं लेकिन कश्मीर में आतंकवाद नहीं रोक पा रहे हैं। ना नोटबंदी से रुका ना अनुच्छेद 370 हटाने से। तीसरी बार शपथग्रहण के दिन ही वारदात करके आतंकवादियों ने अपना विरोध ही जताया होगा पर भारतीय मीडिया में ऐसी कोई चर्चा लगभग नहीं है। द हिन्दू के अनुसार, प्रधानमंत्री ने पुतिन से आग्रह किया कि वे रूसी सेना में नियुक्त भारतीय सैनिकों को मुक्त कर दें। यह प्रधानमंत्री के सीधे हस्तक्षेप से संभव हुआ है और रूसी राष्ट्रपति ने इस संबंध में निर्देश दे दिये हैं। अब भिन्न स्थानों में नौकरी कर रहे या तैनात भारतीय सैनिकों को कुछ ही हफ्तों में मुक्त कर दिया जाएगा।

आतंकवादी हमलों में सेना के जवानों की मौत निश्चित रूप से तकलीफदेह है पर उसे ऐसे प्रस्तुत करने की बजाय हेलिकॉप्टर और ड्रोन से आतंकियों की तलाश और बलिदानियों के पार्थिव शरीर एयरलिफ्ट किये गये जैसी खबरों के रूप में पेश किया गया है। भारत में इन आतंकवादी वारदातों की गंभीरता का पता इससे भी चलता है कि राष्ट्रपति ने भी इसपर ट्वीट किया है। नवोदय टाइम्स में प्रकाशित खबर के अनुसार राष्ट्रति ने लिखा है, सोमवार को कठुआ के बदनोटा इलाके में भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने एक गश्ती दल पर घात लगाकर हमला किया था। इसमें पांच जवान शहीद और कई अन्य घायल हो गये। इस महीने जम्मू संभाग में यह पांचवां आतंकवादी हमला है। द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार भारत ने कहा है कि वह इन मौतों का बदला लेगा। टाइम्स ऑफ इंडिया में इसका शीर्षक इस प्रकार है, कठुआ के आतंकवादियों की तलाश के बीच दोनों ओर से गोलीबारी शुरू। एक और खबर है, उत्तराखंड अपने पांच बहादुरों के लिए शोक मग्न।

हाथरस की खबर भी वैसे नहीं छप रही है जैसे छपनी चाहिये। आप जानते हैं कि इसमें 121 लोगों की मौत हो चुकी है और जिस बाबा के सत्संग के लिए भीड़ जुटी थी उनपर शक नहीं है और एफआईआर में उन्हें पक्ष भी नहीं बनाया गया है। आज छपी खबरों के अनुसार उपेक्षा के आरोप में छह अधिकारियों को निलंबित किया गया है। इनमें डीएसपी, एसडीएम आदि हैं। बाबा अभी तक आजाद ही नहीं हैं उनकी जिम्मेदारी पर कोई उंगली भी नहीं उठी है। उल्टे साजिश का आरोप है और उनके वकील दावा कर चुके हैं कि जहरीले स्प्रे से भगदड़ मचाई गई। आठ जुलाई को एक खबर का शीर्षक था, “बाबा ने कहा, चरण लेकर जाना … तभी मची भगदड़ : गवाह”। गिरफ्तारियों की आज की खबर के साथ उसका कोई जिक्र नहीं है।

इस मामले में अभी तक जो खबरें आई हैं उनके अनुसार

– सत्संग के लिए निमंत्रण आयोजन किसी ने किया हो, भीड़ बाबा ने जुटाई

– चाहे जितने अधिकारी अफसर जिम्मेदार हों, बाबा कैस बच सकते हैं 

– साजिश हो भी तो भीड़ जुटने से ही साजिश पूरी हो पाई होगी

– तथ्यों को छिपाने के लिए आखिरकार कौन जिम्मेदार हो सकता है

– चरण रज लेने के लिए कहने से पहले भीड़ और प्रतिक्रिया का अंदाजा किसे लगाना था?

– इसमें चूक ही मुख्य कारण है। चरण रज बाद में भेजा / बांटा जा सकता था

– यह कहा जाना चाहिये था कि एक-एक कर आराम से आयें, जल्दबाजी नहीं करें

– भगदड़ मच गई तो भीड़ को नियंत्रित करने के उपाय होने चाहिये थे

– इन सारी चीजों के लिए एक और सिर्फ एक व्यक्ति जिम्मेदार नहीं लगता है?

ऐसे में मांग की जा रही है कि जांच के विए विशेषज्ञ समिति बनाई जाये जबकि मुझे लगता है कि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जरूरत है।  

दिल्ली एनसीआर में अवैध ट्रांसप्लांट

हिन्दी के मेरे दोनों अखबारों में आज अवैध ढंग से किडनी ट्रांसप्लांट करने के एक रैकेट का खुलासा लीड है। यह चार साल से दिल्ली एनसीआर में चल रहा बताया जाता है। इसमें एक डॉ. विजया राजकुमारी को शामिल बताया जा रहा है और खबर है कि अवैध ढंग से 500 किडनी ट्रांसप्लांट हुए हैं। असल में भारत में किडनी खरीदना-बेचना गैर कानूनी है जबकि चिकित्सीय तौर पर ट्रांसप्लांट संभव है। भारत में लागू नियमों के अनुसार जिन लोगों की दोनों किडनी खराब है वे किसी रिश्तेदार से दान ले सकते हैं। किसी मृतक का मिल जाये तो उपयोग कर सकते हैं पर खरीद नहीं सकते। इसे रोकने के लिए नियम हैं और चिकित्सकों को भी आश्वत होना होता है कि मामला किडनी (गुर्दा) खरीदने बेचने का नहीं है। ऐसे में गड़बड़ी होने पर चिकित्सकों की भी गिरफ्तारी होती रहती है। मामला कुछ दिन चर्चा में रहता है फिर दब जाता है। कहने की जरूरत नहीं है कि कानूनन प्रतिबंधित होने के कारण किडनी खरीदने-बेचने वालों का बाजार और धंधा गुपचुप चलता है। उसकी अलग समस्या है और उसकी अनुमति दे दी जाये तो अलग समस्या होगी।

अभी भारत में डॉक्टर बनना जितना मुश्किल और महंगा है उसमें किडनी ट्रांसप्लांट सीखकर, मरीज और दान दाता या विक्रेता होते हुए भी बेरोजगारी जैसी स्थिति हो तो डॉक्टर की मनोदशा तथा आंख मूंदने का नुकसान और जोखिम आप समझ सकते हैं। यहां अग्निवीर योजना की चर्चा चल रही है तो आज पता चल रहा है कि रूसी सेना में भी भारतीय नौकरी कर रहे हैं और चूंकि रूस युद्ध कर रहा है इसलिए भारतीयों की जान वहां जोखिम में थी तो प्रधानमंत्री उन्हें वहां से मुक्त करवाकर ले आये। दूसरी ओर यह भी सही है कि भारत में किडनी ट्रांप्लांट का मरीज वीआईपी हो तो उसे अंगदान मिल जाता है। इसके भी उदाहरण हैं। कुल मिलाकर, अंगदान को प्रोत्साहित किया जाये तो सर्जन को काम मिलेगा और प्रतिबंध हटा दिया जाये तो किडनी बेचकर सहायता या पैसा चाहने वालों का जीवन आसान होगा। मरीजों को सहूलियत होगी वह अलग बात है।

इसपर चर्चा लगभग नहीं होती है और जब मामला पकड़ा गया है तो अंग्रेजी अखबारों के लिए प्रधानमंत्री का प्रचार ज्यादा महत्वपूर्ण है। उस प्रधानमंत्री के लिए जिसने कहा था, ना खाउंगा ना खाने दूंगा पर इलेक्टोरल बांड ले आया जिससे चंदा दो धंधा लो का मामला सामने आया और अब दिल्ली एनसीआर में यह रैकेट सामने आया है जो चार साल से चल रहा था। वैसे आप कह सकते हैं कि इसमें प्रधानमंत्री का क्या काम। टाइम्स ऑफ इंडिया की आज की लीड का शीर्षक है, “युद्ध में जब निर्दोष बच्चे मरते हैं तो दिल दुखता है : मोदी ने पुतिन से कहा”। यह टिप्पणी अस्पताल पर हमले से उपजी नाराजगी के बाद की है और इसलिए बड़ी खबर या लीड है। सारे ज्ञान के बावजूद डोडा में सैनिक मर रहे हैं तो खबर यह है कि (मारने वाले) आतंकवादियों की तलाश जारी है। यह पाकिस्तान पर हवाई हमले में एक साथ 300 आतंकवादियों को मार डालने के दावे के बावजूद हो रहा है। इंडियन एक्सप्रेस ने आज अपने एक्सप्रेस एक्सप्लेन्ड में बताया है कि सुरक्षा प्रतिष्ठान को दो महीने पहले एक बड़े समूह की सफल घुसपैठ की सूचना मिली थी। उसके बाद से ही जम्मू और कश्मीर में आतंकवादी हमलों में वृद्धि हुई है। आज यह खबर अमर उजाला में टॉप पर है।

अयोध्या में तेजी का लाभ

इन और ऐसी खबरों के बीच आज इंडियन एक्सप्रेस की एक विशेष खबर के अनुसार, अयोध्या में आई तेजी का लाभ उठाने वालों में कोई लोग हैं। इनमें अरुणाचल प्रदेश के डिप्टी सीएम से लेकर यूपी स्पेशल टास्क फोर्स के प्रमुख और पूर्व सांसद बृजभूषण के सांसद बेटे से लेकर भिन्न दलों के राजनेता शामिल हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने यह खबर अयोध्या में मंदिर के पास 25 गावों में हुई रजिस्ट्री के आधार पर लिखी है और बताया है कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से 2500 से ज्यादा रजिस्ट्री हुई हैं। इनमें कई राजनेताओं, बड़े अफसरों और स्थानीय नेताओं के हैं। दिलचस्प यह है कि सात साल में सर्किल रेट नहीं बढ़ा है। इससे सरकार को तो राजस्व का नुकसान होता ही है सरकार अगर किसानों की जमीन का अधिग्रहण करती है तो उन्हें सरकारी रेट ही मिलता है जो वास्तविक बाजार दर से कम है।   

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन