Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

वेब-सिनेमा

एआई के बाद नैनो रोबोट (पार्ट-2): हमारे शरीर में सिंथेटिक ब्लू ब्लड दौड़ने लगेगा

अशोक कुमार शर्मा-

रे क़ुर्ज़विल और भारतीय मूल के प्रशांत मालवीय की पुस्तकें पढ़िए और जानिए पांच साल के भीतर मानवता का भविष्य कितना शानदार होगा।

भविष्य में इंसान 1000 साल तक भी जिंदा रह सकेगा। अगले पांच साल में आधुनिक विज्ञान के क्षेत्र में इतनी जबरदस्त स्टार की होने वाली है कि तकरीबन हर कार्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मनुष्य का सबसे बेहतरीन दोस्त साबित होगा।

नतीजा यह निकलेगा कि महंगाई बहुत कम होगी और बहुत सी चीजें बिल्कुल मुफ्त होंगी। वैज्ञानिक शरीर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नैनो रोबोटिक सेल्स से बना सिंथेटिक ब्लू ब्लड बनाने में कामयाब हो जाएंगे और वह हमारे शरीर में दौड़ने भी लगेगा। जिन्हें यह बात बहुत अजीब लग रही है, उनको समझ लेना चाहिए कि कुछ समय पहले तक इनहेलर, चश्मे, इंट्राऑकुलर लैंसेज, हार्ट और किडनी के स्टंट, वैक्सीन, थिनर्स तथा विभिन्न प्रकार के सीरम की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

मैंने पिछले एक साल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कुछ अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रमों को पूरा किया है और इस विधा से कुछ चित्र बनाए हैं जो मैं यहां डाल रहा हूं। जिन किताबों के मैं चित्र इस पोस्ट के बाद में डाले हैं उन किताबों को पढ़ने पर आप जान पाएंगे कि भविष्य में बुढ़ापा और त्वचा की बीमारियां भी नहीं हुआ करेंगी।

इंसान की फितरत है कि हर अविष्कार का दुरुपयोग करने की कोशिश करता है तो निश्चित रूप से इस विज्ञान का भी दुरुपयोग करने की चेष्टा की जाएगी लेकिन बहुत जल्दी ही वह भी कुछ राजनेताओं की हत्या करने में विभिन्न प्रकार के नैनो हत्यारे इस्तेमाल के प्रयासों के बाद रुक जाएगा। जिस व्यक्ति के शरीर में जो भी कमी होगी नैनो रोबोटिक सप्लीमेंट्स की खुराक से वह ठीक हो जाएगी और काम हो जाने के बाद मल मूत्र से यह नैनो रोबोटिक जीव वैसे ही निकल जाएंगे जैसे कि हम सामान्य शौच और मूत्र किया करते हैं।

निश्चित बात है कि सरकारी अनुदान और छीन झपट पर जिंदा रहने वाले लोग ही नहीं बल्कि जनता को आपस में लड़ाने वाले राजनेता भी इस दौर का सामना नहीं कर पाएंगे। आने वाले पांच साल में बहुत कुछ बदलने वाला है।

हम भारतीयों का दुर्भाग्य यह है कि विदेशी कुछ भी कहे हम उसे अपना बाप मान लेते हैं। जबकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारतीयों ने भी बहुत झंडे गाड़े हैं। बेशक कुर्ज़विल की किताब बेहतरीन है मगर वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के पिता हरगिज़ नहीं हैं। जॉन मैकार्थी ने इस विधा की संकल्पना की थी। आप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सही इतिहास किताबों में पढ़ सकते हैं।

बहुत मुमकिन है कि आपको इस विषय पर मेरा लिखा कुछ पढ़ने को मिले और बहुत जल्दी मिले।

Related News…

एआई के बाद नैनो रोबोट (पार्ट-1) : 1000 साल तक जी सकेगा मनुष्य

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन