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उत्तर प्रदेश

विश्ववार्ता के नाम शिकायत होने पर ये पत्रकार अपनी प्रेस मान्यता स्थानांतरित कराना चाहता है क्या?

त्तर प्रदेश के जनपद अम्बेडकरनगर से एक पत्रकार का अजब-गजब मामला सामने आया है. इस मामले में कई कड़ियां जुड़ती दिखाई दे रही हैं. पहली कड़ी विश्ववार्ता अखबार है, दूसरा सूचना निदेशक यूपी, तीसरा एक लोकल अखबार तमसा संकेत और चौथी व सबसे अहम कड़ी जिले के एक PWD अधिशासी अभियंता द्वारा दिया गया पत्र है.

पत्रकार महोदय का नाम बृजेंद्र वीर सिंह है. जनपद अम्बेडकरनगर से विश्ववार्ता अखबार के प्रतिनिधि हैं. पत्रकार महोदय विश्ववार्ता अखबार से यूपी सूचना विभाग से मान्यता प्राप्त पत्रकार का बिल्ला पाए हैं. लेकिन अब लोकल अखबार तमसा संकेत द्वारा इनकी प्रेस मान्यता को विश्ववार्ता की जगह तमसा संकेत के नाम स्थानांतरित किए जाने का पत्र जारी किया गया है. यह पत्र 2 जुलाइ 2024 को जारी किया गया है.

सूचना निदेशक को प्रेषित पत्र में कहा गया है कि बृजेंद्र वीर सिंह तमसा संकेत में 1 जुलाई 2024 से बतौर संवाददाता कार्य कर रहे हैं. इससे पहले ये दैनिक विश्ववार्ता में थे. बृजेंद्र अम्बेडकरनगर से जिला मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त संवाददाता के रूप में कार्यरत रहे हैं, जिनकी मान्यता संख्या ABN-48 है. आगे अनुरोध किया गया है कि पत्रकार की मान्यता विश्ववार्ता से तमसा संकेत में स्थानांतरित करने की कृपा करें. नीचे देखें पत्र…

2 जुलाई को जारी किए गए इस पत्र के बाद जिला सूचना अधिकारी अम्बेडकरनगर की तरफ से 10 जुलाई 2024 को एक पत्र जारी हुआ. यह पत्र सूचना एवं जनसंपर्क विभाग लखनऊ के लिए जारी हुआ है, जिसकी संख्या- 69/सू0वि0 2024 है. इस पत्र में भी यही बात कही गई है कि विश्ववार्ता से इनकी प्रेस मान्यता तमसा में स्थानांतरित करने की कृपा करें. नीचे देखें…

अब नंबर आता है अहम कड़ी का. इस अहम कड़ी में अम्बेडकरनगर के लो0नि0वि0, निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता जुड़ते हैं. इन्होंने 27 मई 2024 को एक पत्र जारी किया है. पत्र विजेंद्र वीर सिंह, पत्रकार विश्ववार्ता के नाम प्रेषित है. जिसका विषय है कि आप द्वारा अनावश्यक फोन करना, पैसे की मांग सम्बंधी फोन तथा मैसेज करने तथा द्वेष भावना से खबर छापने के सम्बंध में..

इसमें आगे कहा गया है कि, आपका कृत्य पत्रकारिता के आचरण मानक 2019 की धारा-14, कपटपूर्ण गतिविधियां, धारा-31 सरकारी कर्मचारी पर टिप्पणी करने के प्रेस के अधिकारों के विरूद्ध है तथा आपके उक्त कृत्य आईपीसी की धारा-186, सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करना, धारा-506 सरकारी कर्मचारी को धमकी देना, धारा-420 सरकारी कार्यालय में अनधिकृत तौर पर प्रवेश करना तथा अन्य सुसंगत 383, 384 एवं 386 के विरूद्ध हैं. इसके बाद इस पत्र पर बृजेंद्र से जवाब मांगा गया है. पत्र को 6 अन्य जगहों पर भेजा गया है. नीचे देखें…

इस मसले पर भड़ास की तरफ से पत्रकार बृजेंद्र वीर सिंह से संपर्क किया गया. बृजेंद्र ने बताया कि, “ये मामला डेढ़ महीने पुराना है, अब खत्म हो गया. मुझे न कोई दिक्कत है और न हो सकती है. मेरे बहुत लोगों से संबंध हैं. उन्होंने हेमंत तिवारी, भास्कर दुबे समेत विभिन्न लोगों के नाम गिनाए. हमने इस कड़ी के पीछे मूल बात पूछी तो बृजेंद्र झुंझला उठे. उन्होंने कहा कि मैं विश्ववार्ता छोड़ना चाहता था, आपको तो पता ही है ये लोग पैसा नहीं देते. उन्होंने यह भी कहा कि, आप अगर सच्चे पत्रकार और भाई मानते होंगे तो यह बात किसी से कहेंगे नहीं.”

हमने उनसे पूछा कहीं ऐसा तो नहीं कि विश्ववार्ता को लेकर आपकी शिकायत हुई और आप प्रेस मान्यता अब तामस संकेत नामक अखबार में स्थानांतरित कराना चाहते हों? जिसपर उन्होंने बातचीत का विषय ही बदल लिया और कहा कि, “आज संडे है, मेरा स्कूल चलता है. मेरी 75 साल की मां, 74 साल का भाई..आप मेरे भाई हैं…इत्यादि-इत्यादि.”

बहरहाल, इस मामले में अधिशासी अभियंता भी कोई दूध का धुला नहीं प्रतीत होता है. यह लोग जिससे दाल गलती है उसकी अंटी में पैसा ठूंसकर अपना हल निकाल लेते हैं. जिसे सोचते हैं इससे हमारा क्या काम उसकी शिकायत कर मीडिया जगत को दबाव में लेने की जुगत भिड़ानी शुरू कर देते हैं. ऐसे अधिकारियों को भी इन सब मामलों से सबक लेने की जरूरत है.

इन दोनों प्राणियों यानी पत्रकार बृजेंद्र वीर सिंह (प्रेस क्लब अम्बेडकरनगर का मंत्री भी बताया जाता है) और अधिशासी अभियंता के छल, दंभ, द्वेष, पाखंड, झूठ तथा माफी मांग लेने से संबंधित एक वीडियो भी है, जिसे आप नीचे सुन सकते हैं…

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