
संजय कुमार सिंह
विनेश के साथ जो हुआ वह साजिश हो या चूक, नुकसान देश का है पर अखबारों के लिए मुद्दा नहीं है
वैसे तो आज की (दस साल की कहना चाहिये) सबसे बड़ी राजनीतिक खबर यह है कि केंद्र सरकार ने वक्फ विधेयक को जेपीसी यानी संयुक्त संसदीय कमेटी के पास भेज दिया है और इसका सीधा मतलब है कि सरकार वक्फ विधेयक पास नहीं करा पाई और विपक्ष भले ओम बिरला को लोकसभा का सभापति बनने से नहीं रोक पाया, सरकार ने मान लिया कि वह इस विधेयक को पास नहीं करा पायेगी। 10 साल में ऐसा शायद पहली बार हुआ है। मंदिर बनवाने के लिए मिले रोडरोलर बहुमत के दुरुपयोग की कहानी लंबी है और अब अखबारों में छपनी शुरू हो गई है। यह अलग बात है कि आज कुछ और महत्वपूर्ण खबरें हैं और इस कारण जो हेडलाइन मैनजमेंट हुआ है या करना पड़ा है उसमें यह खबर भी दब गई है।
संबंधित अखबारों की लीड के लिहाज से आज की दूसरी प्रमुख खबरें इस प्रकार हैं
1. पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य का निधन (द टेलीग्राफ)
2. मुहम्मद युनूस के नेतृत्व में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने शपथ ली (द हिन्दू)
3. ओलंपिक में नीरज चोपडा को रजत पदक और हॉकी में भारत को कांस्य पदक
(इंडियन एक्सप्रेस, हिन्दुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया और अमर उजाला)
4. वक्फ विधेयक जेपीसी के पास (नवोदय टाइम्स)
इसके अलावा, आज पहले पन्ने पर जो प्रमुख खबरें हैं उनकी चर्चा के बाद बताउंगा कि आज कौन सी खबरें पहले पन्ने पर होनी चाहिये थी।
1. अल्पसंख्यकों के बहाने हिन्दुओं की चिन्ता – इंडियन एक्सप्रेस की आज की सेकेंड लीड खास है। इससे भारत की चिन्ता और प्राथमिकता का पता चलता है। देश में जो सब चल रहा है वह तो आप जानते ही हैं। इसके अलावा यह भी कि बांग्लादेश की चौथी बार निर्वाचित प्रधानमंत्री शेख हसीना को सोमवार, 5 अगस्त को वहां की जनता ने सत्ता से बेदखल कर दिया। उसके बाद चार दिन में ही वैकल्पिक उपाय कर लिये गये और नोबल विजेता मुहम्मद युनूस ने कल अंतरिम सरकार के सलाहकार के रूप में शपथ ले ली है। भारत में यह प्रचार किया जाता रहा है कि नरेन्द्र मोदी का विकल्प नहीं है और बांग्लादेश में भी नहीं ही था और शेख हसीना चौथी बार चुनी गई थीं। लेकिन सत्ता से बेदखल किये जाने के बाद विकल्प चुनने और शपथ लेने में चार दिन ही लगे। आज की खबर और शीर्षक में यह भाव होना चाहिये था पर नजर नहीं आया। अब भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बांग्लादेश के मुहम्मद युनूस से कहा है कि वहां के हिन्दुओं और अन्य सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। मुझे नहीं पता वहां की अंतरिम सरकार के मुखिया के लिए सभी नागरिक बराबर होंगे या अल्पसंख्यकों को खास सुरक्षा देंगे पर भारत के प्रधानमंत्री ने यहां जो हो रहा है उससे समय निकालकर वहां के अल्पसंख्यकों की चिन्ता जताई है और मुझे लगता है कि भारत के मामले में कोई ऐसी सलाह दे या चिन्ता जताये तो इसे भारत के आंतरिक मामलों में दखल मान लिया जाता है। पता नहीं यह कैसी कूटनीति और राजनीति है। मेरे लिये तो यही महत्वपूर्ण है कि इंडियन एक्सप्रेस ने आज इसे प्रमुखता से छापा है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने इसे युनूस के शपथग्रहण की खबर के साथ दो कॉलम की अलग खबर के रूप में छापा है।
2. सीबीआई ने ईडी के एक निदेशक को गिरफ्तार किया – मुंबई के जौहरी से 20 लाख रुपये रिश्वत लेते ईडी के एक निदेशक को गिरफ्तार किया है। इसी ईडी और सीबीआई के बनाये केस पर एक निर्वाचित मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के कई नेता जेल में हैं। संजय सिंह और एक अन्य मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जेल रह आये हैं। पीएमएलए कानून और दूसरे कारणों से उन्हें महीनों से जमानत नहीं मिल रही है। क्या होगा, अगर बाद में पता चलेगा कि ये लोग निर्दोष हैं?
3. विनेश फोगाट ने यह कहकर खेल से सन्यास ले लिया कि कुश्ती जीत गई मैं हार गई मां। विनेश का मामला आप जानते हैं। कल उसपर लिख चुका हूं। जो सवाल अनुत्तरित हैं उनका जवाब अभी तक नहीं है और यह तो नहीं ही कहा जा रहा है कि साजिश हो या चूक – नुकसान सिर्फ विनेश का नहीं, देश का हुआ है। इसलिये मामले की जांच कराई जानी चाहिये और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिये। लेकिन हमारे यहां इसका रिवाज नहीं है। जब पुलवामा की जिम्मेदारी तय नहीं हुई, जनता ने मांग नहीं की या जितनी की वो सुनी नहीं गई तो इसकी उम्मीद बहुत कम है। इसरो जासूसी कांड जब फर्जी हो सकता है तो कुछ भी हो सकता है और नरेन्द्र मोदी के बड़े-बड़े दावों के बावजूद देश में कुछ नहीं बदला है। कम से कम बेहतरी के लिए तो कुछ नहीं हुआ है।
4. पांच भारतीय 24 लाख नेपाली रुपये के साथ नेपाल में गिरफ्तार। पांच लोगों के पास 24 लाख रुपये बहुत ज्यादा नहीं है। नेपाली रुपया भारतीय रुपये से कम होता है इसलिए असल में और कम हुआ। फिर भी मामला तो नेपाली मुद्रा और नेपाल के कानूनों का है। इसलिए पहले पन्ने की खबर है।
5.बिहार में 14वां पुल गिरा। बिहार के कटिहार जिले में गंगा पर बन रहा पुल गिर गया। यह जून से राज्य में अपनी तरह का 14वां मामला है। इस पुल का निर्माण तीन करोड़ रुपये से किया जा रहा था और जल्दी ही उद्घाटन किया जाना था। यहां प्रधानमंत्री का, ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा और 2016 में पश्चिम बंगाल में निर्माणाधीन पुल गिरने पर यह कहना कि ऐक्ट ऑफ गॉड नहीं ऐक्ट ऑफ फ्रॉड है, याद आता है। उसके बाद से बनारस समेत गुजरात के मोरबी में पुल गिरते रहे हैं लेकिन बिहार में तो हद हो गई है। और मामला पुल गिरने का ही नहीं है खेत में पुल बना दिये जाने का भी एक मामला हाल में सामने आया था। इस पुल के दोनों तरफ कोई सड़क नहीं है। पर प्रधानमंत्री ने इस पर कुछ कहा हो यह नहीं पता है। इसका कारण यह हो सकता है कि दिल्ली में नरेन्द्र मोदी या राजग की सरकार बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और उनकी पार्टी के भी समर्थन से चल रही है। आप इसे ऐक्ट ऑफ सपोर्ट कह सकते हैं और यह सपोर्ट केंद्र सरकार को भी है। खबर सिर्फ द हिन्दू में पहले पन्ने पर है।
6. सीएए के दिशा निर्देश संशोधित – सरकार ने विदेशी मूल साबित करने के लिए दिये जाने वाले दस्तावेजों के संबंध में सीएए के दिशा निर्देशों को संशोधित किया। आप जानते हैं कि सरकार ने दिसंबर 2019 में नागरिकता अधिनियम 1955 को संशोधित किया था ताकि बगैर दस्तावेज भारत आने वाले छह गैर मुस्लिम समुदायों के प्रवासियों को पंजीकरण के जरिये नागरिकता दी जा सके और इसका सामान्यीकरण किया जा सके। अब यह कानून जैसा भी हो, जैसा बना था उसमें इसी सरकार ने यह संसोधन किया है तो यह आज द हिन्दू में पहले पन्ने पर चार कॉलम की खबर है।
7. सुप्रीम कोर्ट का पैनल – उत्तराखंड की पन बिजली परियोजनाओं को सहमति की समीक्षा के लिए पैनल बनाया गया है। खबर के अनुसार अदालत ने कहा है, आपको दिखाना है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया तर्क संगत है। कहने की जरूरत नहीं है कि पहले के फैसलों में मनमानी की बू आ रही होगी तभी ऐसा आदेश दिया गया होगा।
आज के अखबारों में मेरे लिये सबसे आश्चर्यजनक है, विनेश फोगाट का मामला एक ही दिन में पहले पन्ने से हट गया है। आप जानते हैं कि विनेश के साथ जो हुआ वह साजिश हो या चूक, नुकसान देश का है पर अखबारों के लिए मुद्दा नहीं है। सरकारी पक्ष के लिए तो नहीं ही है। उनके लिए पाकिस्तान ने कुछ नेताओं को आम भेजा है जैसा मामला महत्वपूर्ण है जबकि तमाम लोग इससे इनकार कर चके हैं। बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले की खबर को गर्माने की भी कोशिश हुई पर संबंधित लोगों को कामयाबी नहीं मिली। वक्फ विधेयक निश्चित रूप से गंभीर मामला है पर अमर उजाला और नवोदय टाइम्स दोनों में यह पहले पन्ने पर नहीं है। द टेलीग्राफ ने शीर्षक में लिखा है कि जेपीसी वक्फ विधेयक की दुर्लभ समीक्षा करेगी। खबर के अनुसार विपक्ष ने इसे देश में ध्रुवीकरण करने और अस्थिरता लाने की साजिश बताया है।


