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उत्तर प्रदेश

कानपुर पुलिस पत्रकारों के साथ अब ज्यादती कर रही है!

कानून कहता है कि भले ही 100 अपराधी बच जाएं पर एक भी बेकसूर को सजा नहीं होनी चाहिए. लेकिन यूपी पुलिस ने शायद कानून का ये वाला पाठ नहीं पढ़ा होगा. पढ़ा भी होगा तो पढ़कर तिलांजलि दे दी होगी.

क्योंकि यूपी के कानपुर में इन दिनों कुछ ऐसे ही प्रकरण सामने आ रहे हैं, जिनमें कार्रवाई के नाम पर पत्रकार पुलिसिया ज्यादती का शिकार हो रहे हैं. कानपुर पुलिस अब गाँजा, चरस और स्मैक तस्करों की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर उन पत्रकारों को भी जेल भेज दे रही है जो वाकई समाज की अच्छाई के लिए काम कर रहे हैं.

कानपुर की काकादेव पुलिस ने पिछले दिनों जिस सूरज वर्मा उर्फ सूरज सोनी नाम के पत्रकार को जेल भेजा, उसकी शिकायत इलाके के चर्चित चरस-गाँजा तस्कर शोभरन गौतम की पत्नी माया द्वारा की गई है. लेकिन ये हैरान करता है कि पुलिस को क्यों नहीं पता चल सका कि शिकायतकर्ता तस्कर है.

भड़ास ने अपने खोजी सूत्रों के हवाले से तस्कर की फोटो के साथ इस मसले की गहनता से पड़ताल कराई. गाँजा तस्कर शोभरन सिंह पिछले कई सालों से काकादेव, डबल पुलिया, विजयनगर इत्यादि इलाकों में पूरी दबंगई से अपना सिंडिकेट संचालित कर रहा है. कई मर्तबा जेल भी जा चुका है और इस समय जमानत पर बाहर है.

यह कोई एक मामला नहीं, बल्कि कानपुर में ऐसी तमाम जगहों पर दशकों से अवैध नशे का कारोबार संचालित हो रहा है. इसमें पुलिस की मिलीभगत की बात भी सामने आती रही है. किदवई नगर, चकेरी, विजय नगर, तात्याटोपे नगर, गुजैनी, कल्याणपुर, नवाबगंज, खलासी लाइन, घंटाघर. कुल मिलाकर शहर की ऐसी कोई जगह नहीं है जहां पुलिस के ही संरक्षण में अवैध तस्करी न फल-फूल रही हो.

सूरज वर्मा नाम के इस पत्रकार ने गाँजा तस्कर के खिलाफ खबर बनाकर उस पर कार्रवाई कराई थी. पत्रकार तस्कर की अवैध गतिविधियों में रोड़ा बन रहा था, जिसके चलते जेल काटे आदमी ने अपनी पत्नी के कांधे पर बंदूक रखकर पत्रकार को निशाना बना लिया. पुलिस ने भी अपने गुडवर्क की चाह में बिना पड़ताल किए 9 अगस्त को मुकदमा संख्या-187-2024, भारतीय न्याय संहिता 356(1), 308(2), 352, 351(2) व 308(5) की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर पत्रकार को पूछताछ के बहाने थाने बुलाकर जेल भेज दिया.

पीड़ित पत्रकार की मां और बहन से भड़ास के एक सहयोगी ने बात की. उन्होंने तस्कर की शक्ल दिखाते हुए कहा कि, इस आदमी का अवैध धंधा मेरे बच्चे ने बंद कराया था. लेकिन हमें इस बात की पीड़ा ज्यादा है कि पुलिस ने कोई तहकीकात करने तक की जरूरत नहीं समझी. हम कोर्ट जाएंगे, और वहां सभी सबूत रखेंगे. तब क्या पुलिस को जवाब नहीं देना पड़ेगा. मेरा बेटा पत्रकार है, वह कभी कोई गलत काम नहीं करता. नौकरी छूट गई तो इस समय यूट्यूब पर एक चैनल बनाकर जनता के लिए काम कर रहा था, लेकिन जिन पुलिस वालों की तस्कर से सेटिंग थी उन्होंने गलत तरह से मेरे बेटे को फंसवा दिया.

परिवार का कहना है कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे मुख्यमंत्री के पास जाकर न्याय की गुहार लगाएंगी.

नीचे देखें तस्कर की शिकायत पर दर्ज हुई एफआईआर की कॉपी….

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