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विनेश फोगाट के स्वागत की खबर छापने में कंजूसी कर गये दिल्ली के अखबार

संजय कुमार सिंह

आज जो खबरें हैं उनमें विनेश फोगाट का वापस दिल्ली आना और यहां से उनके गांव तक जोरदार स्वागत सबसे बड़ी खबर है। मेडल मिलने पर जैसा भी स्वागत होता आम माना जा सकता था लेकिन मेडल नहीं मिलने पर भी इतना भव्य स्वागत निश्चित रूप से बड़ी खबर है लेकिन सिर्फ टेलीग्राफ में। कोलकाता के द टेलीग्राफ में यह खबर लीड है लेकिन दिल्ली के किसी भी अखबार में विनेश के वापस आने की खबर लीड नहीं है। इंडियन ए्क्सप्रेस और द ट्रिब्यून में लीड के बराबर में विनेश के स्वागत की फोटो है। दिल्ली के अखबारों में आज कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के खिलाफ मुकदमा चलाने की राज्यपाल की अनुमति लीड है। हालांकि, राज्य सरकार ने राज्यपाल के इस फैसले को असंवैधानिक कहा है और कांग्रेस ने इसके लिए केंद्र सरकार की आलोचना की है। राज्य सरकारों के खिलाफ केंद्र सरकार की चालें नई नहीं है और पांच साल पहले भी भाजपा ने कर्नाटक की सरकार गिराई थी। मुकदमा चलाने की राज्यपाल की अनुमति के बाद भाजपा ने मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की है जबकि द हिन्दू के उपशीर्षक अनुसार, राज्य मंत्रिमंडल ने आपात बैठक में कहा कि यह अवैध, असंवैधानिक और लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। इससे पहले की राज्य सरकार को भी भाजपा ने तोड़-फोड़ कर गिराया था। झारखंड के मुख्यमंत्री के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अभी भी जेल में है।

आज की तीसरी प्रमुख खबर आईएमए की अपील पर देश भर के अस्पतालों में हड़ताल ही है। नवोदय टाइम्स ने डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए केंद्र की समिति बनेगी खबर को लीड बनाया है। द टेलीग्राफ में यह खबर सेकेंड लीड है। इसके अनुसार, रात में सुरक्षा के लिए अब ऐप्प और महिला गांर्ड रहेंगी। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, डॉक्टर्स के देशव्यापी आंदोलन के कारण चिकित्सा सेवाएं प्रर्भावित रहीं। द हिन्दू में इस खबर का शीर्षक है, हड़ताल से मरीज प्रभावित हुए; ; चिकित्सकों के लिए केंद्र सरकार की योजना का आकलन कर रहा है आईएमए। हत्या के बाद से देश भर के रेजीडेंट डॉक्टर हड़ताल पर हैं। कल आईएमए ने 24 घंटे की हड़ताल की अपील की थी। आपातकालीन सेवाओं को हड़ताल से मुक्त रखा गया था। आज अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, देश भर में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित केंद्र की अपील, काम पर लौटें डॉक्टर। इंडियन एक्सप्रेस में हड़ताल की खबर नहीं है।  जो खबर है उससे बताया गया है कि आरजी कार अस्पताल में तोड़फोड़ करने वाले आरोपियों में तृणमूल कांग्रेस के लोगों के साथ छात्र, जिम ट्रेनर, डिलीवरी स्टाफ आदि लोग थे।  

टाइम्स ऑफ इंडिया ने पहले पन्ने पर डॉक्टर की हत्या से संबंधित दो बड़ी खबरें छापी हैं। टॉप पर छपी खबर में कहा गया है, अपने ही अस्पताल में मारी गई डॉक्टर एक ऐसी डॉक्टर थी जिसमें समझदारी थी और मुश्किलों में बड़ी हुई थी तथा आगामी दुर्गा पूजा का इंतजार कर रही थी। इस खबर के हाइलाइट किये हुए अंश में बताया गया है कि वह एमबीबीएस छात्रों के उस बैच से थी जिसने कोविड महामारी का फैलना देखा है। इस डॉक्टर ने अपनी सुविज्ञता के रूप में रेसपायरेट्री मेडिसिन चुना था और आरजी कार में रहते हुए वह कैम्पस को अपना दूसरा घर कहती थी। उसने खुद को मरीजों की सेवा में झोंक दिया था। लंबे समय तक काम और पढ़ाई की जरूरतों के कारण उसके पास सोने के लिए भी बहुत कम समय होता था। टाइम्स ऑफ इंडिया का आज का लीड इस मामले में एक सवाल है। यह सवाल उसके अभिभावकों और सहकर्मियों का है। इसके अनुसार, क्या डॉक्टर ने बहुत ज्यादा जानने की कीमत चुकाई। मुझे नहीं लगता है कि ये खबर पहले पन्ने की हैं और घटना के इतने दिनों बाद इसे पहले पन्ने पर जगह देने की जरूरत थी।

विनेश फोगाट के स्वागत की खबर आज टाइम्स ऑफ इंडिया में सबसे नीचे दो कॉलम में दो कॉलम की फोटो के साथ है। लाल स्याही से जो शीर्षक है वह हिन्दी में कुछ इस तरह होता, लोगों का प्यार एक हजार मेडल के बराबर है। फोटो का कैप्शन ही खबर है और बाकी विवरण अंदर के पेज पर होने की सूचना है। कैप्शन हिन्दी में लगभग इस तरह है – पहलावन विनेश फोगाट के लिए इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक भावनात्मक घर वापसी का समय था। भारी भीड़ ने उनका स्वागत किया। इनमें साथी पहलवान, ओलंपिक विजेता साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया के साथ कांग्रेस सांसद दीपन्दर हुडा शामिल हैं। दिल्ली से विनेश के गांव, बलाली तक की 135 किलोमीटर की दूरी उनके करवां ने कल 10 घंटे में पूरी की। रास्ते में भिन्न पंचायतों ने उनका सम्मान किया। इसमें उन्होंने कहा, उनलोगों ने मुझे मेडल मेडल नहीं दिया तो क्या हुआ …. , हमारे अपनों ने हमें गोल्ड से ऊपर नवाजा है।” हिन्दुस्तान टाइम्स ने पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर तीन कॉलम की फोटो छापी है। इसका शीर्षक है, एक चैम्पियन का स्वागत। द हिन्दू में फोटो फोल्ड से नीचे है। शीर्षक है, हीरो का स्वागत।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर का शीर्षक है, विनेश वापस आईं मुझे जो प्यार मिला वह 1000 ओलंपिक गोल्ड से ज्यादा का है। विनेश फोगाट के स्वागत पर वरिष्ठ पत्रकार, प्रशांत टंडन ने लिखा है, मेडल जीत कर आती तब भी स्वागत होता पर शायद इतना नहीं। विनेश के साथ अन्याय हुआ इसलिए लोगों ने पलकें बिछा दीं। यही है भारत के समाज की गहराई। और कोई अपने घमंड में अभी भी बृजभूषण शरण के साथ खड़ा है। एक्सप्रेस में एक और खबर है, इसका शीर्षक है, एक गांव जो सम्मान देने की अपनी परंपरा पर कायम रहा। अखबार में उन्हें मिले उपहारों की सूची का एक पन्ना भी है। इसके अनुसार विक्रांत फौजी ने 21,000 रुपये दिये हैं तो संजय चौकीदार ने 100 रुपये दिये हैं। उपहारों में साफे औऱ तलवार भी हैं। जाहिर है, यह सूची खेल मंत्रालय के खर्चों की सूची से महत्वपूर्ण है और मुद्दा यह है कि विनेश को एक ऐसे विशेषज्ञ की सेवा नहीं मिली जो उनका वजन ठीक रख पाता। और जैसा मैंने पहले लिखा है, 100 ग्राम में देश की पूरी व्यवस्था उघाड़ हो चुकी है। अभी समय है, खिलाड़ियों पर खर्चों का हिसाब भले रखा जाये पर जो चाहिये वह समय पर मिलना भी महत्वपूर्ण है।

नवोदय टाइम्स में दो कॉलम की फोटो है, दो लाइन का कैप्शन और शीर्षक में स्वागत। अमर उजाला में डेढ़ कॉलम की खबर, फोटो का शीर्षक है, स्वदेश वापसी पर विनेश का भव्य स्वागत, भावुक हुई। पांच लाइन की खबर इस प्रकार है, पेरिस ओलंपिक में 50 किग्रा भार वर्ग के फाइनल में  पहुंचने के बावजूद पदक नहीं जीत पाने वाली पहलवान विनेश फोगाट का शनिवार को घर वापसी पर भव्य स्वागत हुआ। हवाईअड्डे पर उनके स्वागत में सैकड़ों समर्थक पहुंचे। इस दौरान देश से मिले प्यार और समर्थन से विनेश भावुक हो गईं और रो पड़ीं। तस्वीर रोती हुई है। इसके साथ दो लाइन के शीर्षक औऱ चार लाइन की खबर उल्लेखनीय है। शीर्षक है, बजरंग फिर विवाद में …. तिरंगे पर पैर रखने की तस्वीर वायरल। खबर के अनुसार, विनेश के स्वागत के मौके का एक वीडियो वायरल होने से बजरंग पूनिया फिर विवादों में घिर गये हैं। दरअसल बजरंग कार के बोनट पर खड़े थे। बोनट पर ही तिरंगे का पोस्टर चिपका हुआ था। इसपर बजरंग ने अपना पैर रख दिया। इस खबर से समझ में आया कि कल प्रधानमंत्री की यह पुरानी फोटो क्यों सोशल मीडिया पर दोबारा से घूमने लगी थी।

आज की दूसरी महत्वपूर्ण खबरें

  • वाराणसी-अहमदाबाद साबरमती एक्सप्रेस के 22 डिब्बे कानपुर के पास पटरी से उतरे
  • उदयपुर में तनाव, चाकू मारने वाले के घर पर चला बुलडोजर
  • यूपीएससी ने केंद्रीय मंत्रालयों में लैटरल एंट्री के 45 पदों का विज्ञापन निकाला
  • जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद बढ़ने से सीमा पर पर्यटन कम हुआ

विनेश की खबर और स्वागत से भाजपा के समर्थक पत्रकारों की परेशानी का पता रजत शर्मा के इस ट्वीट से चलता है, “चैंपियन विनेश को सिर आँखों पर बिठाओ. मान दो। वो देश का गौरव है। पर हरियाणा में चुनाव है इसलिये उसे अपनी ट्रॉफी की तरह  मत घुमाओ। खेल में राजनीति मत घुसाओ। बृजभूषण शरण सिंह भी नेतागिरी करते थे। भाजपा को धमकाते थे कि वो समाजवादी पारटी में चले जाएंगे और 4-5 सीटें हरवा देंगे। पूरी कुश्ती बर्बाद कर दी। जब तक खेल में राजनीति और परिवारवाद घुसा हुआ है, हमें मेडल नहीं मिल सकते। ओलंपिक में मेडल पाने वाले 84 देश थे, हम 71वें नंबर पर आये। ज़रा सा नीदरलैंड छठे नंबर पर है, छोटा सा कोरिया आठवां है।  हमारे खिलाड़ियों के लिये बजट था, पूरा सपोर्ट था। पर क्या हुआ? सच तो ये है मेडल पाने के लिये जो 10-15 साल की तैयारी  चाहिये उसकी पहले 70 साल में किसी ने परवाह नहीं की। खेलों की सारी एसोसिएशंस कुछ नेताओं, कुछ परिवारों की दुकान बन गई। ये अभी भी पूरी तरह बदला नहीं है। पीछे से वही चलाते हैं। अब भी हम सुन रहे है विनेश को राज्य सभा में लाएँगे, मनु भाकर को विधानसभा चुनाव लड़वायेंगे। अब खिलाड़ियों को लेकर या तो राजनीति हो सकती है या सारा फोकस मेडल लाने पर हो सकता हैं। दोनों तो नहीं हो सकते।” कहने की जरूरत नहीं है कि यह दूसरों को बेवकूफ समझने की राजनीति से अलग नहीं है।

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