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सियासत

वक़्फ बिल, ब्रॉडकास्टिंग बिल के बाद लेटरल एंट्री रद्द होना मोदी की बड़ी हार!

प्रशांत टंडन-

राहुल गांधी ने टॉप ब्यूरोक्रेसी में आरक्षण खत्म करने की बड़ी कॉर्पोरेट साजिश नाकाम कर दी, जिसे मोदी अंजाम दे रहे थे.

वक़्फ़ बिल को जेपीसी में भेजना, ब्रॉडकास्टिंग बिल को वापिस लेने के बाद अब लेटरल एंट्री को रद्द करने की सिफारिश मोदी की बड़ी राजनीतिक हार है.

ये फर्क पड़ता है जब कोई राष्ट्रीय सोशल जस्टिस के एजेंडे को गंभीरता से पकड़ती है. राहुल गांधी कांग्रेस को इसी रास्ते पर लाना चाहते थे. कांग्रेसियों को अब देखना चाहिए कि लगभग 15 साल बाद कांग्रेस पॉलिटिकल एजेंडा सेट कर रही है.

इस कदम से मोदी पर आरक्षण विरोधी होने का लेबल चिपक गया है. जातिवार जनगणना की घोषणा करके मोदी इस लेबल को छुड़ा सकते हैं लेकिन कर नहीं पायेंगे. मोदी की ताकत जातिवादी हिंदू और कॉर्पोरेट है. दोनों ये नहीं होने देंगे.


सौमित्र रॉय-

मुस्लिम बच्चों के लिए अनाथालय पर बने अंबानी के महल एंटीलिया को बचाने के लिए वक्फ बोर्ड संशोधन बिल लाया जा रहा था। वापस हो गया।

फिर सोशल मीडिया पर प्रतिरोध को दबाने के लिए लाए जा रहे बिल से कदम खींचने पड़े।

अब लैटरल एंट्री के जरिए संघियों की भर्ती का आदेश रोकना पड़ा है।

याद रखिए। इस महफिल में हमारी आवाज एक राजनीतिक मुद्दा बन जाती है। इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने वाला बंदा है राहुल गांधी।

मोदी सत्ता की तीसरी पारी में यही प्रधानमंत्री है और नरेंद्र मोदी सेवक।

सेवक को मालिक की बात सुननी पड़ेगी। मालिक जनता का नुमाइंदा है।


डॉ राकेश पाठक-

लेटरल एंट्री का फ़ैसला वापस! केंद्र सरकार ने लेटरल एंट्री से कदम पीछे खींच लिए हैं। UPSC से कहा गया है कि इस बारे में जारी विज्ञापन वापस ले लिया जाए।

राहुल गांधी और विपक्ष के अलावा सरकार में शामिल चिराग पासवान ने भी इसका विरोध किया था। राहुल का आरोप है कि मोदी सरकार पिछले दरवाज़े से बड़े पदों पर भर्ती RSS के लोगों को भरना चाहती है।इन भर्तियों में आरक्षण के नियमों का पालन भी नहीं किया जा रहा। आरोप है कि मोदी सरकार आरक्षण को खतम करना चाहती है।

एनडीए सरकार की तीसरी पारी में यह चौथा मौका है जब सरकार को विपक्ष और जनता के विरोध के आगे यू टर्न लेना पड़ा है।

इससे पहले सरकार भारी विरोध के कारण…

० ब्रॉडकास्ट बिल वापस ले चुकी है।

० वक्फ बिल ठंडे बस्ते में डाल चुकी है।

०कैपिटल गेन टैक्स में बदलाव कर चुकी है।

नोट: जो लोग लेटरल एंट्री के पक्ष में अभियान चला रहे थे वे अब सरकार के बैक फुट पर जाने को मास्टर स्ट्रोक कह सकते हैं।

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