गाजियाबाद | वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन शर्मा इन दिनों दर-दर भटकने को मजबूर हैं. इसका कारण उनकी अपनी बेटी रीना शर्मा को बताया जा रहा है. रीना ने अपने पिता यानी मनमोहन का फ्लैट हड़प लिया जो जनसत्ता अपार्टमेंट में स्थित है. अब बुजुर्ग पिता बेसहारा बनकर सड़कों पर हैं.

अब रीना का नया कारनामा सामने आया है, जिसमें उसने अपने बुजुर्ग वरिष्ठ पत्रकार पिता को बेघर कर दिया है. साथ ही रीना ने अब यह फ्लैट किसी थर्ड पार्टी को बेच भी दिया है.
इस मामले में पूर्णिमा अरुण ने भड़ास से हुई बातचीत में कहा कि, “रीना ने अपने पिता को जबरन घर से बाहर करते हुए 2022 में फ्लैट की रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली. इसके बाद रीना ने 9 अगस्त को फ्लैट किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया. उन्होंने कहा कि रजिस्ट्री करवा लेने की बात पूरी तरह गलत है क्योंकि फ्लैट की रजिस्ट्री कराने से पहले समिति से एनओसी ली जाती है जो रीना ने नहीं ली और बिना एनओसी के रजिस्ट्री संभव नहीं है.”
सामाजिक संस्था ‘मेरा रंग’ की संस्थापक शालिनी श्रीनेत जी ने हमें बताया कि, “रीना शर्मा वही महिला है जिसने एक लड़की को कामकाज कराने की एवज में जबरन अपने फ्लैट में बंद कर लिया था. उसके साथ मारपीट की थी, बाद में कुछ महिला कार्यकर्ताओं द्वारा उसे मुक्त कराया जा सका था. रीना पर एफआईआर भी दर्ज हुई थी.”
पूरा मामला क्या है?
पूर्णिमा अरुण बताती हैं कि, आज जनसत्ता अपार्टमेंट के परिसर में चौकी इंचार्ज समेत 7 पुलिस कांस्टेबल, बी 101 (मनमोहन जी का फ्लैट नंबर) के नए खरीदारों के साथ सोसाइटी में घुसे. पुलिस वालों ने वहां मौजूद सचिव व अध्यक्ष से धमकी भरे लहजे में कहा कि, नए खरीदारों को अदर आने से न रोकें.
इससे पहले जन्माष्टमी के दिन थाने से एक व्यक्ति ने कार्यक्रम के आयोजन को लेकर सोसाइटी वासियों को धमकाया था. क्योंकि उस दिन रीना को सोसाइटी में घुसने से रोक दिया गया था. रीना उस दिन मकान के खरीदारों को फ्लैट पर कब्जा दिलाने आई थी.
सोसाइटी के लोगों ने पुलिस को तमाम दलीलें दीं कि बिना एनओसी के नए खरीदार मकान पर कब्जा नहीं कर सकते, सोसाइटी के नियमों के अनुसार बी 101 के मालिक मनमोहन शर्मा जी ही हैं. इसके अलावा मनमोहन जी ने जिलाधिकारी को लिखित शिकायत भी दी थी कि उनकी बेटी रीना ने धोखे से पावर ऑफ अटार्नी कह कर उनसे गिफ्ट डीड पर हस्ताक्षर करवा लिए. लेकिन पुलिस पर इन सब बातों का कोई असर नहीं पड़ा.
नतीजतन अब मनमोहन शर्मा कभी दिल्ली तो कभी अपनी जान-पहचान वालों के पास जाकर बसर कर रहे हैं. फोन पर बात करते हुए वह रोने लगते हैं. भड़ास से हुई बातचीत में वे सिर्फ इतना ही कह सके, “आप खुद को मेरी जगह रखकर देखिए, कितने दर्द में हूं…और फिर बुजुर्ग पत्रकार बिलख कर रोने लगे.”
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