Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

आज के अखबार : द टेलीग्राफ के शीर्षक से समझिये हेडलाइन मैनेजमेंट का खेल, दावा को घोषणा बना देना

संजय कुमार सिंह

आज द टेलीग्राफ को छोड़कर मेरे सभी अखबारों में कश्मीर में प्रधानमंत्री का चुनाव प्रचार लीड है। शीर्षक में दो ही बातें हैं, कश्मीर में आतंकवाद अंतिम सांस ले रहा है और तीन खानदानों तथा विदेशी ताकतों ने जम्मू कश्मीर को बर्बाद किया। अमर उजाला के शीर्षक में, ‘हम-आप बनायेंगे सुरक्षित’ भी है। तथ्य यह है कि ये स्थिति नरेन्द्र मोदी के 10 साल प्रधानमंत्री रहने के बाद है, नोटबंदी से आतंकवाद खत्म होगा के दावे के बावजूद है और अनुच्छेद 370 हटाने के पांच साल बाद भी है। जिन खानदानों पर बर्बाद करने का आरोप है, उनके कुछ लोगों को जेल में रखकर रिहा किया जा चुका है। उसका फायदा भी पता नहीं है। चुनाव के लिए एक सांसद विशेष की रिहाई का भी मामला है पर उसकी बात नहीं हो रही है इसलिए उसे रहने देता हूं। मैं यहां बता चुका हूं कि राहुल गांधी कुछ कहते हैं तो वह भाजपा के बयान या जवाब के साथ ही पहले पन्ने पर छपता है, भले अगले दिन छपे या नहीं छपे। लेकिन प्रधानमंत्री कुछ भी कहें अक्सर लीड बन जाता है।

द टेलीग्राफ में आज यह खबर सेकेंड लीड है। शीर्षक है, प्रधानमंत्री का दावा : आतंकवाद अंतिम चरण में । सबूत : 5 मरे। अंदर इस खबर का शीर्षक है, प्रधानमंत्री दो वोट बैंक को प्रभावित करने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। इसका फ्लैग शीर्षक है, चुनाव वाले हरियाणा में मोदी ने दावा किया, गणपति को भी सलाखों में रखा गया और यह भी कि कांग्रेस पार्टी आरक्षण के खिलाफ है। आप जानते हैं कि आतंकवाद अंतिम सांस ले रहा है – कहने का कोई आधार नहीं है। आज ही गोलियों से छलनी एक इमारत की तस्वीर छपी है और यह सभी अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं हो सकती है। नवोदय टाइम्स और द हिन्दू में छपी इस तस्वीर से पता चलता है कि बारामूला में आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ में यह बिल्डिंग क्षतिग्रस्त हुई है।

खबरों के अनुसार इस मुठभेड़ में तीन आतंकवादी मारे गये हैं और यह शनिवार यानी कल की ही घटना है। प्रधानमंत्री जब हेडलाइन मैनेजमेंट के लिये शीर्षक दे रहे थे तो यह मुठभेड़ हो चुकी थी या बाद में हुई, खबरों से पता नहीं चल रहा है। इससे पहले शुक्रवार को आतंकवादियों ने दो सैनिकों को मार डाला था। दो दिन में पांच मौतें, यही टेलीग्राफ की खबर में शीर्षक का सबूत है। कहने की जरूरत नहीं है कि तीसरी बार शपथग्रहण के समय ही तीर्थयात्रियों की बस पर हमला हुआ था और वारदातें लगातार बढ़ी हैं। उसका कारण भी बताया गया और स्थिति से निपटने के लिए सैनिकों की संख्या बढ़ाने की खबर भी छपी। पर नतीजा सामने है। कई अखबारों में प्रधानमंत्री का दावा है, उसपर संदेह करने वाली खबर उस पन्ने पर नहीं है जैसे उपरोक्त दोनों अखबारों में है।

मुझे लगता है कि दोनों खबरें एक साथ नहीं छाप सकते थे तो प्रधानमंत्री के बयान को लीड बनाने की जरूरत नहीं थी पर मामला मीडिया की आजादी का है और आजादी से याद आया, प्रधानमंत्री ने एक्स पर सूचना दी है कि उनके घर एक बछिया हुई है। मैं सोच रहा था कि लुटियन दिल्ली के बंगलों में तो गाय पालने पर रोक है। न भी हो तो लुटिन्स दिल्ली के बंगले में अकेले (बिना परिवार) रहने वाले के लिए गाय पालने की कोई जरूरत नहीं है। शौक से, धार्मिक या राजनीतिक कारण से पालना ही हो तो सरकारी कर्मचारियों की सेवा लेना और खुद 24 घंटे, बिना छुट्टी काम करने के दावे के बाद गाय पालना, बछिय़ा होना जितनी खबर है उससे ज्यादा सवाल अनुत्तरित हैं और यही प्रेस कांफ्रेंस नहीं करने ‘मन की बात’ करने का कारण है।

वैसे भी गाय को कोई सोफे पर नहीं बैठाता है और ना गोद में लेकर घूमता है। फिर भी, भक्तगण कुत्ते के साथ सोनिया गांधी की तस्वीर लगाकर बता रहे हैं कि उनका नेता गो-सेवक है। वे भूल जाते हैं कि उनका नेता देश का प्रधानमंत्री भी है और उसकी जिम्मेदारियां सोनिया गांधी या राहुल गांधी से ज्यादा व अलग हैं। मैंने अभी तक घर और गोदी में कुत्ता तो देखा था पर बछिया पहली बार देख रहा हूं। गांवों में लोग रखते होंगे, मैं गांव में रहा नहीं और शहर की बात कर रहा हूं। वरिष्ठ पत्रकार अनुराग चतुर्वेदी ने एक्स पर लिखा है, नवजात बछड़े को भी चुनावी राजनीति का हिस्सा बना डाला। हरियाणा में चुनाव का मौसम है, मोदीजी की हर तस्वीर के मायने होते हैं। फोटो में बछड़े को प्यार-दुलार, तथाकथित ‘गौ रक्षकों’ और भीड़ बनकर विधर्मियों की हत्या करने वालों को बड़ा अच्छा लगता होगा।

यहां मुझे याद आता है कि इस बार के चुनाव के लिए अगर देश के मुख्य न्यायाधीश के घर पर गणेश जी की पूजा की तस्वीर जारी की गई तो एक बार व्हील चेयर पर मां की भी तस्वीर जारी की गई थी और वह नोटबंदी के समय बैंक से नकद निकालने की खबर से अलग थी। कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार के मोड में हैं। वोट मांगने या लेने के लिए अपने काम या योजना नहीं बताते दूसरों की आलोचना करते हैं। अभी यही जारी है। कल हरियाणा में भी उनका भाषण था और उसकी चर्चा करने वाले विश्लेषकों का कहना था कि प्रधानमंत्री के भाषण में हरियाणा से जुड़े मुद्दे नहीं थे, पूर्व मुख्यमंत्री नहीं थे, भाजपा के मुद्दे नहीं थे। यही नहीं, कुरुक्षेत्र में पीएम ने कहा – जब तक मोदी है, आरक्षण की व्यवस्था में रत्तीभर भी कमी नहीं आएगी। आप जानते हैं कि 10 साल में आरक्षण का कितना लाभ जरूरतमंदों को मिला है और न मिले उसके लिए क्या सब किये गये हैं। इसमें लैटरल एंट्री और हाल में उसे रद्द किया जाना शामिल है।

दिलचस्प यह है कि कल की कुरुक्षेत्र रैली के बाद कहा गया कि 10 साल में यह पहली बार हो रहा है कि प्रधानमंत्री ने चुनाव की घोषणा से पहले रैलियां नहीं कीं और चुनाव की घोषणा के बाद रैली कर रहे हैं। कल ही मुझे पता चला कि प्रधानमंत्री झारखंड चुनाव से पहले आज जमशेदपुर से पटना के लिए वंदे भारत ट्रेन का उद्घाटन करेंगे। इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह बताना है कि प्रधानमंत्री ने जय श्री कृष्ण और राम राम के साथ रैली में बोलना शुरू किया। उन्होंने हरियाणवी अंदाज में कहा, “मन्नै इस पवित्र धरती पै आणकै घणा आच्छा लाग रया सै”। लेकिन अपने, अपनी पार्टी, उसके काम, उपलब्धियों या योजनाओं की चर्चा करने की जगह कांग्रेस को अर्बन नक्सल का नया रूप कहकर चुनाव जीतने की उम्मीद कर रहे हैं। यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस आरक्षण खत्म कर देगी जबकि राहुल गांधी स्पष्ट कर चुके हैं कि वे आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा खत्म करना चाहते हैं। इस झूठ के साथ उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा जो कहती है उसे पूरा करती है।

प्रधानमंत्री भले आरक्षण में रत्तीभर कमी नहीं आने की बात करें और राहुल गांधी आरक्षण बढ़ाने की बात कर रहे हैं तब भी उनके बारे में झूठ बोलें और 2021 में तय जनगणना का काम अगर कोविड के कारण नहीं हो पाया तो उसका अभी तक अता-पता नहीं है और कारण यही है कि उसमें जातिवार जनगणना की बात नहीं हुई तो आरक्षण पर काम मुश्किल होगा और जनगणना न होने से भाजपा की रीति-नीति स्पष्ट नहीं हो रही है। आप जानते हैं कि बिहार में जातिवार जनगणना का काम हुआ था पर नीतिश कुमार भाजपा के साथ आ गये और मामला ठंडे बस्ते में है। इसी तरह, 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के समय  कश्मीर को एक राज्य दो केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। राहुल गांधी कह चुके हैं कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। दूसरी ओर अनुच्छेद 370 हटाने से भाजपा को या कश्मीर को वो फायदा नहीं हुआ है जो बताया गया था। वहां चुनाव है। सरकार उसे राज्य का दर्जा दे सकती है पर वह भी लटका हुआ है। शायद चुनाव की घोषणा के बाद करना नहीं चाहते हों। वैसे तो तमाम घोषणाएं हो ही रही हैं। आज अमर उजाला में छपी एक खबर के अनुसार कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाया है। 

न्यूजलॉन्ड्री – तीन चैनल पर एक ही वीडियो

जहां तक अनुच्छेद 370 की बात है, अब यह समझना मुश्किल नहीं है कि भाजपा (और संघ परिवार) ने इसे बेवजह मुद्दा बना रखा था और दोबारा जब पूर्ण बहुमत की सरकार बन गयी तो इसे हटाना मजबूरी थी। जैसे-तैसे हटा भी दिया गया और विरोध को ताकत के दम पर कुचल दिया गया। कल न्यूजलॉन्ड्री के एक वीडियो से पता चला कि उस समय टेलीविजन चैनलों पर एक ही वीडियो चलाकर सरकार की तरफ से यह दावा किया गया था कि सब शांत है और जनता खुश है। कहीं कोई आंदोलन नहीं है। इसके बावजूद स्थिति अब भी वैसी नहीं है जैसा तब दिखाया बताया गया था। ऐसे में कश्मीर में चुनाव प्रचार के लिए कुछ बोलने लायक भाजपा के पास है ही नहीं और इसीलिए ऐसा भाषण है। बाकी अखबार वाले संभाल लेते हैं।

यह तो हुई कश्मीर की स्थिति। द टेलीग्राफ की एक खबर के अनुसार, भाजपा की उम्मीद : केजरीवाल के कारण भाजपा विरोधी वोट बंटेंगे और उसे इसका फायदा मिलेगा। आप जानते हैं कि राज्य में (तारीख बढ़ाने के बाद) 5 अक्तूबर को चुनाव है और केजरीवाल को जमानत नामांकन दाखिल करने के बाद हुई है। राज्य में भाजपा का कांग्रेस से कड़ा मुकाबला है और आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन जितना अच्छा होगा, कांग्रेस का प्रदर्शन उतना ही खराब होगा और भाजपा को कामयाबी मिलने की संभावना बनेगी। आम आदमी पार्टी ने राज्य के सभी सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। खबर के अनुसार आम आदमी पार्टी के हरियाणा प्रमुख के उत्साह ने भाजपाई प्रबंधकों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। इसका कारण 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में जो हुआ वह भी है। वहां आम आदमी पार्टी ने वोटो का बड़ा प्रतिशत पाया पर सीटें कम हैं। इन वोटों का फायदा भाजपा को मिला था और कुल 182 में से 156 सीटें मिल गई थीं। हरियाणा में एंटी इनकमबैंसी के कारण भाजपा की हालत इतनी बुरी है कि हिमाचल में मस्जिद को लेकर विवाद थम ही नहीं रहा है। नवोदय टाइम्स में शीर्षक है, “मस्जिद विवाद : हिमाचल के कई शहर बंद”।

डबल इंजन वाले राज्यों की हालत बताने वाली एक खबर आज टाइम्स ऑफ इंडिया में सेकेंड लीड है, फरीदाबाद के अंडरपास में पानी भरने से एसयूवी में बैंक के दो लोग फंसे, मारे गये। आप जानते हैं कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के समय पुल गिर जाने को भ्रष्टाचार का मामला बताया गया था और अब अंडरपास में पानी भरने से लोग मर रहे हैं। यही नहीं, पिछले दिन खबर थी कि गुजरात में 2017 में बने एक फ्लाई वर को 2014 में तोड़ा जायेगा और बनाने में जो खर्च हुआ था उससे ज्यादा तोड़ने में होगा। ऐसी सरकार ने सैकड़ों किलोमीटर सड़क बनवाई है और इसे नापने का तरीका भी बदल दिया है। अब छह लेन की 20 किलोमीटर सड़क को 120 किलोमीटर की सड़क कहा जाता है और कुछ ही दिनों बाद उसके टूटने, पानी भरने और धंसने की खबरें आने लगती हैं और यह सब ना खाउंगा ना खाने दूंगा के दावे के बाद है। यही नहीं, प्रधानमंत्री ने यह भी दावा किया था कि वे ड्रोन भेजकर सब पता कर लेते हैं पर कई सड़कें हैं जो सुधर ही नहीं रही हैं। द टेलीग्राफ की लीड के अनुसार डॉक्टर्स का आंदोलन जारी है और मुख्यमंत्री से वार्ता की कोशिश नाकाम रही। छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री के घर वार्ता के लिए कल शाम पहुंचा था लेकिन सीधे प्रसारण की मांग पर बात नहीं बनी। बाद में दोनों पक्षों के वीडियो रिकार्डिंग पर सहमति हो गई थी लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और सरकार की ओर से कह दिया गया कि अब नहीं। बलात्कार और हत्या के मामले में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और थाना इंचार्ज को गिरफ्तार किया गया है।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन