आज-कल प्रतिष्ठित हिंदी अखबारों में हिंदी की दशा और दुर्दशा तो सर्वसुलभ है। कभी-कभी लगता है कि व्याकरण के सारे नियमो व सिद्धांतों को तिलांजलि दिलाने के बाद ही शायद संपादकों को नियुक्ति पत्र दिया जाता हो, क्योंकि हम तो अभी वहां तक पहुंचे नहीं इसलिए इस रस्म की ठोस जानकारी नहीं है।
खैर… सोशल मीडिया पर कई वरिष्ठ, समकक्ष व कनिष्ठ साथियों को हिंदी पर बात करते देखता हूं तो जी चाहता है कि, इस विषय में जो थोड़ी सी समझ मुझमें है, उसे मैं विनम्रता से साझा करूं। आज भास्कर के जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़ के पूर्व ब्यूरो चीफ पवन शर्मा जी (वर्तमान में रायगढ़ में कार्यरत) की पोस्ट दिखी, जिसमें ‘Photo’ के लिंग को लेकर सवाल था।

इसका उत्तर देना तब लाजिमी हो जाता है जब बड़े बड़े संपादक भी इसमें और इसके जैसे तमाम शब्दों में गलती करते हों।
हाल ही में नवरात्रि के दिनों में भास्कर की पूर्व संपादक और अमर उजाला वाराणसी की वर्तमान संपादक के x और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ढेरों पोस्ट दिखे। हर पोस्ट में वे ‘नवरात्री’ शब्द लिखती हैं। वहीं भाषा की बेतरतीबी इतनी कि ‘ज्यादा खास कुछ असर नहीं हो पाया.. सरीखे जुमले पढ़ने को मिलते हैं। इसके बजाय सिर्फ ‘कुछ खास’ या ‘ज्यादा कुछ’ लिखकर काम चलाया (दौड़ाया) जा सकता था। लेकिन संपादक है तो कुछ सोचकर ही लिखा होगा। शायद वो एक ही पंक्ति में सभी समानार्थी शब्दों को जगह देकर न्याय करना चाहती हों…!
खैर ऐसा लेखन गंभीर केवल तब है, जब यह किसी बड़े अखबार की बड़ी संपादक ने लिखा हो। वैसे ऐसे संपादकों के लिए सुझाव है कि अपने सोशल मीडिया पोस्ट के लिए एक व्यक्तिगत संपादक जरूर रख लें।
अब ‘Photo’ की बात करें तो.. ‘Photo’ शब्द कोई पूर्ण शब्द है ही नहीं, अपितु अंग्रेजी के शब्द ‘Photograph’ का संक्षेप संस्करण है। ‘Photo’ मूल रूप से ग्रीक भाषा का है जिसका अर्थ ‘प्रकाश’ से है। वहीं ‘graph’ का अर्थ ‘उकेरना/अंकित करना/दर्ज करना या अध्ययन करना आदि’ से है, इसी प्रकार ‘प्रकाश संश्लेषण’ के लिए ‘Photo+Synthesis’ के प्रयोग समेत ‘Photo’ के अनन्य प्रयोग मिलते हैं।
वहीं ‘Graph’ का भी ‘Telegraph’, ‘Calligraphy’ ‘Geography’ आदि जैसे शब्दों में सहजता से प्रयोग दृष्टव्य है। इस प्रकार ‘Photograph’ अंग्रेजी के अनुसार निश्चित रूप से पुल्लिंग संज्ञा है। लेकिन लिप्यांतरण के बाद इसके साथ हमें हिंदी में स्त्रीलिंग जैसा व्यवहार करना चाहिए। क्योंकि कुल मिलाकर बात यह है कि सिर्फ़ व्याकरण से लिंग निर्धारण संभव नहीं है, शायद मुझमें इतनी प्रवीणता नहीं है कि छोटी टिप्पणी में कमतर शब्दों में अधिकतम या पूरा सिद्धांत व्यक्त कर सकूं इसलिए पूरा सिद्धांत यहां नहीं लिख पा रहा हूं।
अपनी समझ के अनुसार एक उदाहरण देता हूं, शायद इससे समझने में आसानी हो, और शायद ही किसी ने इसपर गौर किया हो?
‘ग़ज़ल’ या ‘खबर’ निश्चित रूप से स्त्रीलिंग है, जैसे ग़ज़ल या खबर लिखी जाती है, ना कि ‘खबर लिखा गया, या ग़ज़ल लिखा गया’, इसके ठीक विपरीत जब हम इनकी नवीनता का उल्लेख करते हैं तो लिखते है कि ‘आज की ताज़ा ख़बर या ग़ज़ल’ इस जुमले में ‘की और ताज़ा’ शब्द ग़ौरतलब है, अगर खबर स्त्रीलिंग है तो उसे सब्जी की तरह ‘ताज़ी’ होनी चाहिए, और यदि ‘ताज़ा’ लिखना ही है तो की के बजाय ‘आज का ताजा खबर’ लिखना चाहिए। लेकिन ठीक अगल बगल तो विरुद्धलिंगाभाषी शब्द ‘की, ताज़ा’ लिखते हैं। वहीं ‘ख़बर’ का बहुवचन ‘अख़बार’ के साथ हम ‘ आज का अखबार या ताज़ा अखबार’ लिख सकते हैं।
इस टिप्पणी की लघुता की मर्यादा बनाए रखने के लिए बहुत विस्तार में ना जाकर अंत में बस इतना निवेदन करूंगा कि हिंदी में ‘photo’ का प्रयोग स्त्रीलिंग के रूप में करना ही जायज है, दूसरा निवेदन यह है कि ऊपर मेरे द्वारा दिए गए जुमले ‘आज की ताज़ा खबर’ का कोई खंडन मिले तो मुझे भी अवगत करवाइएगा।
वैसे सामान्य समझ के अनुसार भी photo स्त्रीलिंग ही है, क्योंकि जब किसी अन्य भाषा को हम अपनी भाषा में प्रयुक्त करते हैं तो अपनी भाषा में जिस शब्द के स्थान पर उसका प्रयोग कर रहे होते हैं उसके लिंग के अनुसार व्यवहार करते हैं। हम बहुधा ‘तस्वीर’ शब्द की जगह ‘Photo’ का प्रयोग करते हैं। ‘तस्वीर’ के लिंग स्त्रीलिंग के अनुसार भी ‘Photo’ स्त्रीलिंग है, यदि कोई ऐसी जगह ‘Photo’ लिख रहा है जहां ‘प्रतिबिंब’ भी लिखकर चलाया जा सकता हो तो बेशक फोटो को पुल्लिंग के रूप में प्रयोग करे।
यह भी गौरतलब है कि ‘Photo’ का अर्थ ‘चित्र या छवि’ नहीं है, चित्र केवल ‘बनाया’ जा सकता है, खींचा या कैद नहीं किया जा सकता, वहीं छवि केवल देखी या उकेरी जा सकती है (सिर्फ अंतर्मन में)। बनाई, खींची या कैद नहीं की जा सकती। और बनाई, खींची या कैद किया भी जा सकता है तो सिर्फ अंतर्मन में।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित…


