मनोज अभिज्ञान-
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने अपने शेयरधारकों के लिए 1:1 के अनुपात में बोनस शेयर जारी करने का ऐलान किया, जिसका मतलब है कि हर शेयरधारक को अपने मौजूदा शेयरों के बराबर नए बोनस शेयर मुफ्त में मिलेंगे। यह खबर कई निवेशकों के लिए उत्साहजनक लगी, क्योंकि बोनस शेयर मिलने से निवेशकों के पास अधिक शेयर हो जाते हैं।
बोनस शेयर इश्यू के चलते सोमवार को रिलायंस का शेयर एक्स-डेट (ex-date) पर पहुंचा। शुक्रवार को शेयर का बंद भाव 2,655.45 रुपये था, लेकिन सोमवार सुबह यह सीधे लगभग 50% घटकर 1,338 रुपये पर खुला। यहां यह समझना जरूरी है कि यह कीमत में गिरावट असल में वास्तविक मूल्य में कमी नहीं थी, बल्कि बोनस शेयरों के वितरण का परिणाम थी।
बोनस इश्यू से शेयर की कुल संख्या बढ़ जाती है, जिसके कारण प्रति शेयर की कीमत में गिरावट देखी जाती है। हालांकि, निवेशकों के पास शेयरों की संख्या बढ़ जाने से उनके कुल मूल्य में बदलाव नहीं होता। इस प्रकार, अगर एक निवेशक के पास पहले 100 शेयर थे और बोनस के बाद अब उनके पास 200 शेयर हो गए हैं, तो भले ही प्रति शेयर कीमत आधी हो गई हो, उनके कुल पोर्टफोलियो की वैल्यू में कोई कमी नहीं हुई।
रिलायंस ने 1:1 अनुपात में बोनस शेयर देने की घोषणा की थी, लेकिन हकीकत में शेयर की कीमत में बदलाव कर इस वादे को पूरा किया। यदि देखा जाए, तो कंपनी ने वास्तव में नए शेयर ‘मुफ्त’ में नहीं दिए, बल्कि मौजूदा शेयर की कीमत को आधा कर कुल वैल्यू को बराबर बनाए रखा। इससे कुछ निवेशक इसे ‘चालाकी’ के रूप में देख सकते हैं, क्योंकि निवेशकों को अधिक शेयर तो दिए गए, लेकिन कंपनी के फ्री रिजर्व और सरप्लस में कमी आई है, जो किसी भी कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है।
हालांकि, इस तरह के बोनस इश्यू से शेयर की लिक्विडिटी में बढ़ोतरी होती है। शेयरों की संख्या बढ़ने से उन्हें बाजार में खरीदना-बेचना आसान हो जाता है और अधिक निवेशक सस्ते शेयरों में निवेश के लिए प्रोत्साहित होते हैं।
रिलायंस का यह कुल मिलाकर छठा बोनस इश्यू है और सबसे बड़ा भी माना जा सकता है। 2017 के पिछले बोनस इश्यू के बाद, कंपनी ने लगभग 266% का रिटर्न दिया था, जो निवेशकों के लिए फायदे का सौदा साबित हुआ। इस साल की शुरुआत से अब तक रिलायंस के शेयरों में लगभग 2.53% की बढ़त देखी गई है, हालांकि पिछले महीने के दौरान शेयरों में लगभग 10% की गिरावट भी देखी गई है।
बोनस शेयरों के साथ कंपनी का शेयर अधिक निवेशकों के लिए सुलभ हो जाता है, जिससे नए निवेशकों के लिए यह आकर्षक अवसर हो सकता है। लेकिन साथ ही, अनुभवी निवेशकों को यह समझना चाहिए कि यह ‘मुफ्त’ में शेयर देने का वादा नहीं है, बल्कि शेयर की कीमत को आधा करके यह बोनस इश्यू दिया गया है। यह एक वित्तीय रणनीति है जिससे शेयर बाजार में शेयरों की तरलता बढ़ती है, लेकिन कंपनी के फ्री रिजर्व और सरप्लस में कमी भी आती है।
इस प्रकार, इस प्रक्रिया में कंपनी ने वास्तव में किसी अतिरिक्त मूल्य का वितरण नहीं किया है, बल्कि निवेशकों की धारणा में उत्साह बनाए रखा है। रिलायंस का यह कदम मनौवैज्ञानिक रणनीति है, जिससे बाजार में सकारात्मकता बनी रहे और अधिक निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। बोनस इश्यू से केवल शेयर की लिक्विडिटी बढ़ती है, जिससे अधिक लोग कम कीमत में इसे खरीदने का मन बना सकते हैं, लेकिन शेयरधारक का वास्तविक लाभ उस समय तक नहीं होता जब तक कंपनी का शेयर आगे मूल्य में वृद्धि न करे।


