दिलीप मंडल-
दूर देश में अंतिम विदाई से पहले की हिचकियाँ और भारत में कुछ लोगों को सपने में आ रहा संभोग का आनंद!
अमेरिका में इसी जनवरी में नई सरकार आ रही है। आपको पता ही है कि वहाँ जज और अटॉर्नी सरकार के साथ बदलते हैं।
हो सिर्फ ये रहा है कि पुराना, चुनाव में ख़ारिज हुआ लेफ़्ट-वोक प्रशासनिक और न्यायिक ढाँचा जाते जाते रायता फैला रहा है।
अमेरिका की आने वाली सरकार के कर्ताधर्ता पुराने लोगों की हरकतों से परेशान है। ट्रंप और इलॉन मस्क चेतावनी जारी कर चुके हैं। नए जजों की नियुक्ति रोक दी गई है। रायता तो नई सरकार को ही समेटना पड़ेगा।
ये अमेरिका के आंतरिक मामले हैं। हम लोगों को इसमें पड़ना नहीं चाहिए।
लेकिन कांग्रेस, सोरोस और कुछ भारतीय कॉर्पोरेट अमेरिकी रायते को देखकर संभोग का आनंद महसूस कर रहे हैं। जबकि कुछ है ही नही। कुछ नहीं हुआ है।
वे सपने देख रहे हैं कि ये होगा, फिर वो होगा, फिर भारत तबाह हो जाएगा और सोरोस के निकम्मे रिश्तेदार दिल्ली की राजगद्दी पर बैठ जाएँगे।
चार्जशीट पढ़िए। अमेरिका में आरोप लगे हैं कि भारत में कुछ राज्य सरकारों को रिश्वत दी गई है। वे सभी सरकार उस दौर में कांग्रेस और सहयोगी दल चला रहे थे। सफाई तो भूपेश बघेल देंगे न।
चार्जशीट है। यानी कोई बात सिद्ध नहीं है। आरोप लगाए गए हैं विदा हो रही सरकार के लोगों द्वारा।
भारत के कंपिटिशन कमीशन ने इस बीच मेटा यानी फ़ेसबुक और ह्वाट्सऐप की कंपनी पर सवा दो सौ करोड़ की फ़ाइन लगाई है। मेटा इस चुनाव में ट्रंप के खिलाफ और बायडन के पक्ष में रहा।
तकलीफ़ हुई है उनको। जनवरी में विदाई से पहले कुछ तो करेंगे वे।
जब भी कोई भारतीय कॉरपोरेट विदेश से पूँजी उठाने की कोशिश करता है, हर बार ऐसी हरकत होती है।
पर दुनिया ये न भूले। ये भारत की सदी है। विकसित भारत 2047 बन कर रहेगा। जहां ज़माना ही दुश्मन क्यों न हो जाए।

आने वाले चार साल में ये यानी ट्रंप और मस्क अमेरिका के दो सबसे पावरफुल लोग होंगे। ये दोनों वर्तमान रेडिकल लेफ़्ट झुकी ज्यूडीशरी से नाराज़ हैं।
इसलिए 20 जनवरी से पहले अमेरिकी कोर्ट में भारत को लेकर जो कुछ किया जा रहा है, उस पर कांग्रेस, सोरोस और कुछ भारतीय बिज़नेस हाउस को ज़्यादा जोश में नहीं आना चाहिए
अमेरिका में नई सरकार नए जज और अटॉर्नी लाती है। वहां यही सिस्टम है।
जाते नहीं, आते सिस्टम पर नज़र रखें।


