संजय सिन्हा-
वैसे तो ये खबर नहीं है, लेकिन खबर है कि रवीश कुमार 9 दिन की छुट्टी पर गए हैं। रवीश कुमार पत्रकार हैं। आप उन्हें जानते हैं। बहुत से लोग उन्हें प्यार करते हैं। वो शानदार पत्रकार हैं।
आप पू्छेंगे कि वो छुट्टी पर गए इसका क्या मतलब? वो कौन-सी नौकरी करते हैं, जो छुट्टी पर गए? उन्हें किससे छुट्टी लेनी है? अब तो वो अपनी मर्जी की पत्रकारिता करते हैं, एनडीटीवी के मुलाजिम नहीं, जो उन्हें किसी से छुट्टी लेनी पड़े? आप कह सकते हैं कि संजय सिन्हा, कुछ लिखने को नहीं मिल रहा तो रवीश की छु्ट्टी भी आपकी कहानी हो गई?
हां। मेरे लिए ये कहानी है। असल में जब आप खुद से छुट्टी लेते हैं तब वो संजय सिन्हा के लिए कहानी होती है। कायदे से खबर भी होनी चाहिए। रवीश एनडीटीवी छोड़ने के बाद रोज एक वीडिओ (औसतन डेढ़ वीडियो) पूरे साल बना कर आपके सामने आते रहे। अब वो नौ दिनों की छु्ट्टी आपसे मांग कर अपने लिए निकल पड़े हैं।
बहुत बड़ी बात है इस तरह खुद से छुट्टी लेकर खुद के लिए निकल पड़ना। मैं ऐसा नहीं कर पाया।
मैंने 12 नवंबर 2013 से फेसबुक पर लिखना शुरू किया। तब से लिख रहा हूं। रोज़। कई बार मन में आया कि एक दिन नहीं लिखूं। छुट्टी ले लूं। लेकिन ऐसा हो ही नहीं सका।
कई बार कुदरत ने ऐसा नहीं होने दिया, कई बार आपने और कई बार खुद मैंने।
वैसे ऐसा मौका कई बार आया, जब मुझे लगा कि आज मैं नहीं लिख पाऊंगा। पर वहां कुदरत ने साथ दिया।
आपको बता चुका हूं कि कुछ साल पहले मैं कोलंबो के एक होटल में रुका था और वहां इटरनेट नहीं चल रहा था। उस सुबह मुझे लगा था कि कम से कम आज मैं अपने परिजनों तक कहानी लेकर नहीं पहुंच पाऊंगा। लेकिन हुआ क्या? मैं लिफ्ट से नीचे उतर रहा था, एक अमेरिकन लिफ्ट में साथ था। उसने मेरे हाथ में लैपटॉप देखा और पूछ बैठा, क्या आपको नेट चाहिए?
और उसने अपना निजी डोंगल मुझे दे दिया कि आप इस्तेमाल कर लीजिए। और मैं उस सुबह भी आप तक पहुंच गया था।
एक बार रोम से लौटते हुए फ्लाइट में ऐसा मौका आया था। उस सुबह भी लगा था कि आज छुट्टी हो जाएगी। लेकिन अचानक फोन पर कनेक्शन चमका और…
फिर मौका आया था जब मेरे पेट में दर्द उठा और मैं अस्पताल में भर्ती हो गया। डॉक्टर ने कहा कि तुरंत गॉलब्लैडर का आपरेशन करना होगा। मैं रात में घर भाग आया। सुबह पेट में भयंकर दर्द उठा। मुझे अस्पताल जाना था। आपरेशन होना था। लेकिन पेट पकड़ कर लिख लिया तो चैन आ गया। फिर आपरेशन थिएटर में गया तो डॉक्टर से पूछ लिया था कि कल सुबह तक होश में आ जाऊंगा न?
मेरी चिंता आप थे। मेरी चिंता आप हैं।
सर्दी के इस मौसम में दस मिनट की देर होती है तो फोन पर संदेश चमकने लगते हैं। लोग चिंतित हो जाते हैं।
फिर क्या? आपकी चिंता, मेरी जिम्मेदारी। और मैं लिखने बैठ जाता हूं।
4040 दिन हो गए। मैंने एक दिन भी छुट्टी नहीं ली। न खुद से, ना आपसे। लेकिन रवीश कुमार ने छुट्टी ली, अपने लिए।
जो लोग अपने लिए छुट्टी ले सकते हैं, वो जीवन जीना जानते हैं। वो जीते हैं। आदमी को छुट्टी लेनी चाहिए।
रवीश कुमार यू ट्यूब पर हैं, यू ट्यूब पर आर्थिक लाभ भी जुड़ा है। यकीनन नौ दिनों की छुट्टी में वो लाखों रुपयों का नुकसान उठाएंगे। और मैं?
मुझे फेसबुक पर लिखने के कोई पैसे नहीं मिलते। मिलता है सिर्फ आपका प्यार… पैसों से आदमी छुट्टी ले सकता है, लेकिन प्यार से कैसे?
मेरी तो सुबह होती है, आपके प्यार से। रात होती है प्यार से… प्यार में पड़ा आदमी छुट्टी नहीं लेता है।
नोट-
- मुझे रवीश कुमार के छुट्टी पर जाने की खबर ‘भड़ास’ पर मिली। मैं नियमित रूप से भड़ास पढ़ता हूं।
- मैं टीवी नहीं देखता। रात में यूट्यूब पर रवीश की रिपोर्ट देखता हूं। उसमें मुझे दिन की खबर मिल जाती है।
- 4040 सुबह हज़ारों लोगों के प्यार में पड़े एक आदमी की प्रेम कहानी है ये।
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