
प्रधान प्रचारक का यह हाल, ऐसे दूसरे उदाहरणों के साथ लीड हो सकता था और यह उनके विकास की सत्यकथा भी है लेकिन….
संजय कुमार सिंह
बड़े-बड़े वादे करके और सपने दिखाकर सत्ता में आई नरेन्द्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी अब सिर्फ चुनाव लड़ती है। 2024 के लोकसभा चुनावों में ईवीएम जिन्दा है कि मर गया की स्थिति आने के बाद अब केंद्र सरकार की बैसाखी बने राज्यों में एक, बिहार में चुनाव है। उससे पहले दिल्ली में भी – जहां जीतना अभी तक मुश्किल रहा है। नरेन्द्र मोदी की सरकार को समर्थन दे रहे नीतिश कुमार को इस बार बिहार विधानसभा चुनाव लड़ना (और जीतना) है ताकि मजबूत बने रहें। देश की राजनीति अभी बहुत कुछ इस बात पर निर्भर है कि पलटू राम के नाम से मशहूर हो चुके नीतिश कुमार कब पलटेंगे या अब नहीं पलटेंगे। दूसरी ओर, नरेन्द्र मोदी और उनके संघ परिवार की राजनीति किसी पर निर्भर या आश्रित रहने की नहीं है। अभी तक वे समर्थन देने वालों को ही तोड़ते रहे हैं। ऐसा नहीं है कि बिहार में कोशिशें नहीं चल रही हैं पर मेरा मानना है कि नीतिश का पलटना या नहीं पलटना इस पर भी निर्भर करेगा कि भाजपा नीतिश कुमार को कमजोर करने में कब तक कितना कामयाब हो पाती है। इस क्रम में कल कुछ भाजपाई कोशिशों का खुलासा हुआ है जो आज पहले पन्ने पर नहीं के बराबर है लेकिन इसी कारण द टेलीग्राफ की लीड का शीर्षक है, क्या नीतिश पलटेंगे? टिक टॉक, टिक….। इसमें तथ्य यह भी है कि नीतिश कुमार अभी तक अपनी मर्जी से पलटते रहे हैं और इसमें कभी घाटे में नहीं रहे, लगातार मुख्यमंत्री बने रहे। सीबीआई-ईडी से भी लगभग बचे रहे। सबके नुकसान से अब घिर गये हैं और उन पर नजर रखना दिलचस्प होगा।
इसका असर केंद्र की सरकार पर भी पड़ सकता है। इसलिए ऐसा कोई कारण नहीं है कि केंद्र सरकार उन्हें मजबूत होने दे और नहीं होने दे तो विपक्षी मजबूत हो जाये, बिहार हाथ से निकल जाये। इसलिए संकट भाजपा के लिए भी है और 10 साल बाद अब लोग झांसे में नहीं आयेंगे। आम मतदाता आ भी जायें, दलबदल और उलट-पलट कर सहयोग करने वाले महंगे और मुश्किल हो जायेंगे। इसलिए होगा वही जो नीतिश की मजबूरी होगी और अभी उसपर अटकल लगाना मुश्किल है। इसलिए ‘‘राजा का बाजा’’ बजाना सबसे आसान भी है। हालांकि वह अलग मुद्दा है। आज की दूसरी लीड जिसका शीर्षक जो ‘‘राजा का बाजा’’ का नहीं है, द हिन्दू में है। हालांकि, यह भी सरकार के खिलाफ नहीं है और एक रूटीन खबर ही है कि, प्रधानमंत्री के पेरिस दौरे से पहले राफेल और स्कॉरपीन सौदे अंतिम चरण में पहुंचे। प्रधानमंत्री को 10 और 11 फरवरी को फ्रांस आमंत्रित किया गया है और अनुमान है कि इसमें 10 अरब डॉलर के सौदे मंजूरी के लिए रखे जायेंगे।
अन्य सभी अखबारों में प्रधानमंत्री की रैली-चुनाव प्रचार और चुनाव की घोषणा से पहले के शिलान्यास, उद्घाटन आदि की खबरें हैं। दिलचस्प यह है कि आज प्रधानमंत्री ने जो कहा वही कई अखबारों में शीर्षक है और इससे पता चलता है कि प्रधानमंत्री के पास अब चुनावी घोषणा करने के लिए भी कुछ खास या नया नहीं है। पुरानी घोषणाएं जो पूरी नहीं हुईं उन्हें भुला दिया गया है और जो पूरी हुईं उनसे कोई फायदा नहीं हुआ और उसे वापस लेने की मांग चल रही है। मैं अनुच्छेद 370 खत्म करने की बात कर रहा हूं। नोटबंदी अलग है। उसके नफा नुकसान की भी चर्चा नहीं होती है। इन सबके बावजूद सहयोगी चुनाव आयोग की कृपा से भाजपा चुनाव जीतती रही है और इसलिए संभव है सरकार को बहुत अच्छा बोलने की जरूरत ही नहीं हो पर कई अखबारों ने आगे-पीछे सोचे बिना ‘‘राजा का बाजा’’ बजाया है। उदाहरण के लिए अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, “कोई कल्याणकारी योजना बंद नहीं होगी, भ्रष्टाचार का करेंगे खात्मा : मोदी”। कहने की जरूरत नहीं है कि कल्याणकारी योजना बंद नहीं होगी – खबर नहीं है। लीड तो बिल्कुल नहीं। लेकिन प्रधानमंत्री ने कहा है।
वह भी तब जब ऐसी योजनाएं बंद करने के लिए होती नहीं हैं और अगर उनका मकसद पूरा हो गया हो तब बंद की जायें तो धूम-धड़ाके से की जाएंगी और ज्यादा बड़ी खबर होगी। चुनाव लड़ने वाला कोई राजनीतिक दल कह भी नहीं सकता है कि वह जीत जाये तो कल्याणकारी योजनाएं बंद कर देगा। पर प्रधानमंत्री ने कहा है और यह कई अखबारों में लीड है। हालांकि, टाइम्स ऑफ इंडिया ने शीर्षक में ही बता दिया है कि प्रधानमंत्री ने ऐसा क्यों कहा है और यह पता हो तो मामला समझ में आता है वरना प्रधानमंत्री का जो हाल हुआ है उसपर हंसी ही आती है। टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक है, कोई भी कल्याणकारी योजना रद्द नहीं होगी, यह आप का फैलाया हुआ झूठ है। इस खबर का इंट्रो है, ‘ईमानदारी सुनिश्चित करूंगा, आपदा की लूट रोकूंगा’। मोदी यह दावा तब कर रहे हैं जब उन्हें पता है कि अदाणी के खिलाफ मामले की जांच सेबी के तबके प्रमुख ने भी नहीं की थी और अब वे अदाणी की नौकरी कर रहे हैं और उसी टीवी चैनल में हैं जो मोदी सरकार की मेहरबानी से अब अदाणी के पास है। इस तरह, जांच तो पिछली सरकार के समय की लूट की सुनिश्चित नहीं हुई है वाशिंग मशीन पार्टी में शामिल होने की पेशकश पाने का दावा करने वालों के लिये इसका क्या होना है? लीड के साथ टाइम्स ऑफ इंडिया ने आम आदमी पार्टी का जवाब भी छापा है और दो कॉलम की इस खबर का शीर्षक है, “भाजपा के अत्याचारों के बावजूद केंद्र के साथ सहयोग किया : केजरीवाल”। टाइम्स ऑफ इंडिया ने लाल स्याही से शीर्षक छापा है, “मुख्यमंत्री निवास के पुनरुद्धार पर 33 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किये गये : सीएजी”।
कहने की जरूरत नहीं है कि पीएम केयर्स सरकारी नहीं है और उसके खाते सीएजी नहीं देखता है और भाजपा मुख्यालय बनने पर कितना खर्च आया यह किसी अखबार ने शायद बताया हो। भाजपा तो छोड़िये, झंडेवालान के करीब 2.5 एकड़ क्षेत्र में ‘केशवकुंज’ को अब नया और आधुनिक बनाया गया है। अब इसमें कुल तीन टावर हैं और हर टावर में ग्राउंड प्लस 12 फ्लोर हैं। दूसरे और तीसरे टावर के बीच में एक बड़ा मैदान है जिसमें संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार की मूर्ति लगाई गई है। जहां तक सीएजी की बात है, द हिन्दू की 17 अगस्त 2023 की एक खबर है, सीएजी रिपोर्ट में सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का खुलासा, जवाबदेही और निगरानी बढ़ाने की मांग। इसमें कहा गया था, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने हाल ही में तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सरकारी धन के गलत आवंटन और दुरुपयोग के मामले सामने लाए हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि यह 33 करोड़ के खर्च से अलग मामला है और इसके बाद सीएजी की रिपोर्ट का ही पता अब चल रहा है।
अमर उजाला की लीड शीर्षक का दूसरा हिस्सा है, भ्रष्टाचार का करेंगे खात्मा। मुझे नहीं लगता है कि अब इस दावे पर कुछ कहने की जरूरत रह गई है। भारत में भ्रष्टाचार का जो हाल है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टचार के आरोपी तथा मामले की जब जांच ही नहीं कराई जा रही है तब इस दावे का मतलब प्रधानमंत्री भले न बतायें, इसे शीर्षक बनाने से पहले तो सोचा ही जाना चाहिये था। दिलचस्प यह है कि प्रधानमंत्री कह रहे हैं और अमर उजाला ने हाईलाइट करके छापा है, करोड़ों का खेल…. पोल खोली तो भड़क रहे। लगभग यही शीर्षक नवोदय टाइम्स में है। खबर में लिखा है जनलोकपाल के मुद्दे पर खड़ी हुई पार्टी का मुख्य मुद्दा भ्रष्टाचार हटाना था, लेकिन इसके ज्यादातर नेताओं पर करोड़ों के भ्रष्टाचार के मामले हैं। मुझे नहीं लगता कि इसपर कुछ कहने की जरूरत है और जनता पार्टी से वाशिंग पार्टी बन चुकी पार्टी के मुखिया के लिए कुछ कहना उपयुक्त होगा। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, “आपदा का कच्चा चिट्ठा खोला तब से वे तिलमिलाये : मोदी”। दि एशियन एज की लीड का शीर्षक है, “आप ने दिल्ली का जनादेश बर्बाद कर दिया; शहर को आपदा में धकेला : पीएम”।
नवोदय टाइम्स में इस खबर का शीर्षक है, “जब यह आपदा सरकार जायेगी, तभी दिल्ली में सुशासन शुरू होगा : पीएम”। प्रधानमंत्री के सुशासन का मतलब अब चुनाव लड़ना और किसी तरह जीतना ही रह गया है हालांकि पूरा जोर लगा कर भी नहीं जीत पा रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के आरोपों पर आम आदमी पार्टी ने क्या कहा उसे ढूंढ़ना पड़ता है। द टेलीग्राफ अपवाद है। उसकी खबर का शीर्षक है, “आप बनाम ‘आपदा‘ दिल्ली के द्वंद में तड़का”।
प्रधानमंत्री आम आदमी पार्टी की पोल खोलने की बात कर रहे हैं पर खुद का पोल खोलने वालों के साथ क्या किया है उसकी चर्चा नहीं है। हाल में डबल इंजन वाले एक पत्रकार की हत्या और उसे सेप्टिक टैंक में चुनवा दिये जाने की घटना पर (केंद्र) सरकार या सरकार की तरफ से किसी ने अफसोस जताया हो, इसे ईमानदार (यु बुरी) पत्रकारिता के क्रम में गिनाया या याद किया हो ऐसा कुछ सुनने में नहीं आया। अखबारों में खबर कैसे कितनी छपी अब वह सब मुद्दा नहीं है और लोग पत्रकारों से ही अपेक्षा करते हैं कि वह इनपर जरूर लिखे, बोलें। हालांकि, आज इंडियन एक्सप्रेस में तीन कॉलम की खबर है। पत्रकार की हत्या की यह खबर प्रधानमंत्री को मिले जनादेश का उपयोग हो सकता है उनका किया ‘विकास’ भी माना जा सकता है पर वे गिनाना तो शुरू करें। प्रेस कांफ्रेंस नहीं करते हुए भी वे सरकारों की पोल खोलने लगे। पर यह उनका काम नहीं है उसके लिए जो पत्रकार और मीडिया संस्थान थे उन्हें चौपट करने के बाद विपक्ष की सरकारों की पोल खोलना प्रधानमंत्री का काम नहीं हो सकता है और अगर उसे ही अपना काम समझ रहे हैं तो वेतन भत्ते बहुत ज्यादा हैं – वह भी भ्रष्टाचार है। इसके बावजूद मीडिया राजा का बजा बजा रहा है तो आइये देंखे उसमें क्या है।
इंडियन एक्सप्रेस ने पांच कॉलम की लीड बनाया है। शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने प्रण किया कि भाजपा सत्ता में आई तो दिल्ली की कल्याणकारी योजनाएं जारी रखेगी। फ्लैग शीर्षक है, दिल्ली चुनाव से पहले परिवर्तन रैली। इसके साथ दो कॉलम की खबर आम आदमी पार्टी की भी है। शीर्षक है, केजरीवाल ने जवाब दिया, प्रधानमंत्री ने जो परियोजनाएं शुरू की हैं वो राज्य के साथ संयुक्त उपक्रम हैं। यह अमर उजाला के शीर्षक, ‘भाजपा ने मेट्रो को चप्पे-चप्पे तक पहुंचाया‘ का जवाब है। वैसे इससे संबंधित पाञ्चजन्य डॉट कॉम की ‘खबर’ इस प्रकार है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में 12,200 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शुभारंभ और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं के साथ दिल्ली की यातायात और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान होगा। इन परियोजनाओं में एक प्रमुख पहल रैपिड रेल सेवा और नमो भारत कॉरिडोर का उद्घाटन था, जिससे दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में यात्रा करना और भी सरल और सुविधाजनक होगा। इन और ऐसी खबरों के बीच आज भाजपा के गालीबाज पूर्व सांसद ने कल क्या कहा उसकी चर्चा आज दि एशियन एज में पांच कॉलम में है। आप जानते हैं कि गालीबाज सांसद को लोकसभा का टिकट नहीं दिया गया था और विधानसभा का दिया गया तो उन्होंने तुरंत ही अपना रंग दिखा दिया। यह देश और देश की राजनीति के हालात हैं। अच्छे लोग इस कीचड़ में आ ही नहीं सकते और सब वाशिंग मशीन से धोकर अलग-अलग नाम के समर्थक बनाये जा रहे हैं। मीडिया के पास इसके लिए समय नहीं है। खबर तो यह सब नहीं ही है।


