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आज के अखबार : अपनी डफली अपना राग और उसमें शीश महल बनाम राज महल की आधी-अधूरी कहानी

संजय कुमार सिंह

आज मेरे आठ में से सात अखबारों की लीड अलग है। द हिन्दू और नवोदय टाइम्स अपवाद हैं। दोनों की लीड तिरुपति में भगदड़ से छह लोगों की मौत और 20 श्रद्धालुओं के घायल होने की खबर है। वैसे तो तिरुपति की खबर सभी अखबारों में है। इंडियन एक्सप्रेस में महाकुम्भ की तैयारियों की खबर के साथ है। कुल मिलाकर आज सब अपनी डफली अपना राग गा रहे हैं और मुझे संपादकों के लिए डफली वाले डफली बजा… गाना याद आ रहा है। दिल्ली विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद भाजपा शीश महल को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। कल यहां इस बारे में लिखा था कि जबरन भाजपा के मुद्दे को हवा दी जा रही है। आज स्थिति और दिलचस्प है। अकेले हिन्दुस्तान टाइम्स ने इसे लीड बनाया है जबकि नवोदय टाइम्स ने इसे, ‘अब हुआ सीएम बनाम पीएम आवास का विवाद’ शीर्षक से पाठकों को दूसरा पक्ष भी बताने की कोशिश की है। हिन्दुस्तान टाइम्स में चार कॉलम की लीड का शीर्षक है, चुनाव की तैयारियों के क्रम में बंगला विवाद बदसूरत हो रहा है। इसके साथ तीन कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, चुनाव आयोजनों में भाजपा बंगले की प्रतिकृति के साथ शीश महल हमले को आगे बढ़ाती रहेगी।  

इससे साफ है कि भाजपा के पास दिल्ली में आम आदमी पार्टी से लड़ने के लिए कोई मुद्दा नहीं है। यह इस चुनौती के बाद भी सामने नहीं आया कि 10 साल में दिल्ली के लिए कुछ किया हो तो उसके नाम पर वोट मांगे जायें। जो भी हो, आम आदमी पार्टी ने भाजपा के इस चुनावी मुद्दे की हवा निकाल दी है। हालांकि, दि एशियन एज की खबर के मुताबिक, “आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के संघर्ष ने दिल्ली की दौड़ को जीवंत बना दिया है; भाजपा को लाभ हो सकता है”। मैं नहीं जानता और ना समझ पा रहा हूं कि भाजपा को कैसे या क्यों लाभ होगा। वह भी तब जब इसी खबर का उपशीर्षक है, केजरीवाल ने समर्थन के लिए ममता और अखिलेश का आभार जताया। जो भी हो यह दिल्ली चुनाव के लिए दिल्ली के अखबारों की रिपोर्टिंग का रुझान है। नवोदय टाइम्स की आज की खबर पर आने से पहले शीशमहल पर भाजपा के आरोप और आम आदमी के जवाब की संक्षिप्त जानकारी जरूरी है। इससे आप समझ सकते हैं कि अखबारों में क्या मिलने वाला है। वैसे उसपर यहां बात होती रहेगी।

खबर तो सोशल मीडिया पर भी है लेकिन मैं एनडीटीवी डॉट इन की खबर बताता हूं। शीर्षक है, सोने के टॉयलेट और स्विमिंग पूल… आओ और देखो‘, केजरीवाल के शीशमहलपर आप का भाजपा को चैलेंज। कल, बुधवार यानी आठ जनवरी की इस खबर के अनुसार, आम आदमी पार्टी की ओर से कहा गया है कि आज सुबह 11 बजे बीजेपी नेता मीडिया के साथ केजरीवाल के पूर्व सीएम आवास पर आएं और दिखाएं कि सोने के टॉयलेट और स्विमिंग पूल कहां हैं। साथ ही कहा है कि मीडिया खुद बीजेपी का झूठ देखे। एनडीटीवी ने आगे लिखा है, आम आदमी की तरफ से कहा गया है कि सच्चाई वह खुद मीडिया को दिखाएंगे। केजरीवाल जिस आवास में रह रहे थे, उसका दौरा करवाया जाएगा। उन्होंने चैलेंज किया कि मीडिया के साथ भाजपा नेता भी आएं और मुख्यमंत्री आवास का दौरा करें। आकर देख लें कि स्विमिंग पूल और सोने का टॉयलेट कहां है। इसके बाद बीजेपी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राजमहल का दौरा भी करवाए। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी 2700 करोड़ के राजमहल में रहते हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि यह दौरा कल नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री निवास खाली होने के बावजूद सुरक्षाकर्मियों के घेरे में था। इस आशय का वीडियो आम आदमी पार्टी ने जारी किया था। प्रधानमंत्री निवास में प्रवेश वैसे ही मुश्किल था।

नवोदय टाइम्स में मुख्य शीर्षक के साथ दो खबरें हैं। पहली अरविन्द केजरीवाल की – सुना है राजमहल में एक सिंहासन, जिसकी कीमत 150 करोड़ से ज्यादा है। दूसरी खबर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेव की है, बदनामी के डर से केजरीवाल उठा रहे पीएम आवास पर सवाल। यहां सच्चाई यही है कि आम आदमी पार्टी ने यह आरोप लगाया है कि भाजपा झूठे आरोपों से केजरीवाल को बदनाम कर रही है। इसका जवाब यही है कि आरोपों की पुष्टि कराई जाये। अगर आरोपों के अनुसार स्विमिंग पूल, बार और खर्चा दिखता तो लोग मान लेते। हालांकि, तब भी यह सवाल उठता कि प्रधानमंत्री के मुकाबले मुख्यमंत्री कितना छोटा है और उसका बजट या बंगला कितना छोटा या कम सुविधा संपन्न होना चहिये। केजरीवाल ने अपने बंगले पर ज्यादा खर्च कर दिया यह आरोप तो तुलना से ही साबित होगा। हालांकि दूसरे मु्द्दे भी हैं जिनकी चर्चा मैं कल कर चुका हूं। अखबारों की खबरों से मुझे लगता है कि भाजपा के आरोपों में दम नहीं है और आप की चुनौती दमदार है। जो भी हो, यह चुनावी मुद्दा नहीं है पर भाजपा का यह दावा रहता है कि केजरीवाल ने कहा था कि वे सुविधाएं नहीं लेंगे, आम आदमी की तरह रहेंगे। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि खंडहर में रहेंगे और छत गिर जायेगी तो मरम्मत नहीं करवायेंगे या उसी का करवायेंगे जो गिर गया और अलगी छत के फिर गिरने का इंतजार करेंगे। वैसे भी ये बहुत छोटी बातें हैं और इसी को मुद्दा बनाने का साफ मतलब है कि और कोई मामला नहीं है।

आइये अब आज के अखबारों की लीड बता दूं। इससे आपको अंदाजा लगेगा कि दूसरे अखबारों ने क्या छोड़ा या किसे ज्यादा महत्व दिया। हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ नवोदय टाइम्स और द हिन्दू की लीड ऊपर बता चुका हूं। 

1. इंडियन एक्सप्रेस

चाबहार के जरिये व्यापार को लेकर सुरक्षा की चिन्ता : भारत और तालिबान ने सर्वोच्च स्तर की पहली वार्ता की। इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, विदेश सचिव दुबई में अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री से मिले। उपशीर्षक है, विदेश मंत्रालय ने कहा, अफगानिस्तान के लोगों के विकास की अर्जेन्ट आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए तैयार।

2. टाइम्स ऑफ इंडिया

“सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के खिलाफ केस ‘विधायिका बनाम अदालत की शक्ति की परीक्षा’ है”।

3. दि एशियन एज

प्रधानमंत्री ने कहा, केंद्र आंध्र प्रदेश के विकास लक्ष्यों का समर्थन करेगा। इसका फ्लैग शीर्षक है, नरेन्द्र मोदी ने विशाखापत्तनम में रैली की, चंद्रबाबू नायडू की तारीफ की, दो लाख करोड़ की परियोजनाएं शुरू कीं।

4. द टेलीग्राफ

आज की लीड छत्तीसगढ़ में मारे गये पत्रकार के साथ एक यादगार असाइनमेंट की कहानी है। फिरोज एल विनसेट ने नई दिल्ली डेटलाइन से लिखी है। शीर्षक है, एक मारे गये पत्रकार की खून से लिखी सीख।

5. अमर उजाला

फ्लैग शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश : हादसे का शुरुआती एक घंटा पीड़ितों के उपचार में अहम। मुख्य शीर्षक है, केंद्र 14 मार्च तक घायलों के कैशलेस इलाज की योजना बनाये।

आप जानते हैं कि केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना है और भाजपा का यह आरोप है कि इसे दिल्ली सरकार ने लागू नहीं किया है। इससे संबंधित आप की घोषणा और भाजपा के आरोप दिल्ली मेट्रो में पैसे खर्च करके लगवाये गये हैं। जाहिर है, केंद्र सरकार अपनी योजना को अच्छा कहती है जबकि आम आदमी पार्टी का आरोप है कि वह किसी काम की नहीं है और इसलिए उसने उसे लागू नहीं किया है। जो भी हो, इसपर लड़ाई है, खर्च है और विज्ञापन तो खबर का जो भी रूप है और नहीं है – वह महत्वपूर्ण है और आज दिल्ली के किसी अस्पताल में पहले पन्ने पर नहीं है तो उसका अलग महत्व है। इस खबर के साथ एक खबर और है, अधिकतम डेढ़ लाख रुपये देने के केंद्र के प्रस्ताव पर चिन्ता। आप समझ सकते हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार जनता को क्या दे रही है, और कैसे दे रही है तथा दिल्ली में या वैसे भी उसके पास चुनाव लड़ने के मुद्दे नहीं होते हैं तो क्यों? उदाहरण के लिए हाल में खबर थी कि वाइस चांसलर बनने के लिए अब शैक्षणिक पृष्ठभूमि का आवश्यकता नहीं होगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनने के लिए पहले से नहीं है – ये तो सबको पता है और उसका प्रयाग भी हो चुका है। अब वीसी बनने के लिए इसकी आवश्यकता नहीं है। इससे कौन सा जनहित होगा, राम जानें पर सच यह है कि व्याख्याता बनने के लिए सिर्फ डिग्री नहीं नेट पास होना भी जरूरी है। सरकार ऐसे तमाम नियम बना और बदल रही है (मकसद समझना मुश्किल नहीं है) पर जनहित के काम के लिए सुप्रीम कोर्ट को निर्देश देना पड़ रहा है। अखबार पूरी बात नहीं बताते हैं सो अलग। अपराध के छोटे-मोटे मामलों में कार्रवाई क्या होगी जब चुनाव में गड़बड़ी करने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।

आज कुछ और अखबारों की लीड के शीर्षक इस प्रकार हैं

1. द ट्रिब्यून

संयुक्त संसदीय समिति की पहली बैठक में विपक्ष ने एक देश एक चुनाव के असली मकसद पर सवाल उठाया। उपशीर्षक है, आर्थिक व्यवहार्यता, संरचना के सवाल उठाये। भाजपा के सदस्यों ने इस कदम को पथ प्रदर्शक कहा।

2. द स्टेट्समैन

केंद्र नायडू सरकार के पीछे दृढ़ता से है : प्रधानमंत्री मोदी

3. हिन्दुस्तान

सीएम आवास में ‘सोना खोजने’ पहुंचे आप नेता

4. दैनिक जागरण

दिल्ली में दो खेमों में बंटा इंडिया (अखबार ने आईएनडीआईए लिखा है)

इस मुख्य शीर्षक के तहत दो खबरें हैं और इनका शीर्षक मूख्य शीर्षक का उपशीर्षक है। पहली खबर का शीर्षक है, आप के समर्थन व कांग्रेस के विरोध में उतरीं सपा, तृणमूल, राजद और शिवसेना-यूबीटी। दूसरा शीर्षक है, आप की संजीवनी के मुकाबले कांग्रेस लाई जीवन रक्षा योजना। यहां मुख्य शीर्षक का आधार इंडिया गठबंधन के दलों का आप को समर्थन देना है। यहां यह तथ्य है कि इंडिया समूह लोकसभा चुनाव के लिये बना था और तब भी बंगाल में दोनों दल अलग चुनाव लड़े थे। विधानसभा चुनावों में तो गठबंधन के कई दल अलग और आमने-सामने चुनाव लड़ चुके हैं। यही इस समय हो रहा है तो उसे इंडिया को बंटना बताया जा रहा है और खुलकर किये गये एलान को ऐसे बताया गया है जैसे कोई बड़ा खुलासा अखबार ने किया हो। इस खबर की एक प्रस्तुति दि एशियन एज में भी है जिसकी चर्चा पहले कर चुका हूं।   

5. दैनिक भास्कर

दिल्ली की खबर स्थानीय एडिशन में बाकायदा लीड है और इसमें पूरे मामले की लगभग पूरी जानकारी है। मुख्य शीर्षक शीश महल बनाम राज महल भी पूरी कहानी कहता है। यह शीर्षक अपने आप में पूरा है और दोनों दलों के आरोप का सार ही नहीं सच भी है। यह बताता है कि भाजपा मुख्यमंत्री निवास को मुद्दा बनायेगी तो आप प्रधानमंत्री निवास को मुद्दा बनाएगी। सादा जीवन उच्च विचार केवल दिल्ली पर राज करने के लिए जरूरी नहीं है और मुख्यमंत्री से अपेक्षा की जाती है कि वे पैसों की बर्बादी नहीं करें तो प्रधानमंत्री क्या करते हैं यह बताना और जानना दोनों जरूरी है। मुख्य खबर के साथ एक शीर्षक है, पीएम-सीएम दोनों आवास सरकारी हैं, दोनों में धन के दुरुपयोग की जांच हो। दूसरी खबर का शीर्षक और दिलचस्प है, बंगले से सोने के टॉयलेट समेत महंगा सामान गायब : भाजपा। मुझे याद आता है कि ‘टोंटी चोरी’ पर भाजपा कितना परेशान हुई थी अब उसके सत्ता में रहते सोने का टायलट चोरी हो गया और वह रोक नहीं पाई। एक और खबर का शीर्षक है, इंडिया गठबंधन की पार्टियां आप के साथ, कांग्रेस अलग-थलग। 

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