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आज के अखबार : मतदाता सूची में गड़बड़ी के ठोस आरोप छोड़कर राजस्व के नुकसान को महत्व दिया है

संजय कुमार सिंह

भाजपा पर मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप काफी गंभीर है। सांसदों के पते पर फर्जी वोट बनवाना और लोगों के नाम कटवाना तो लगभग साबित होता है। धर्म विशेष के लोगों को मतदान से रोकने के वीडियो हैं और भाजपा यह सब अभी से नहीं कर रही है। सिस्टम से छेड़छाड़ करके, लोगों को गलत करने के लिए मजबूर करके और बदले में ईनाम देने के सारे मामले तो स्पष्ट और सार्वजनिक हैं। इनमें चुनाव आयुक्त को परेशान करना, नये की नियुक्ति और उनका सहयोग सब शामिल है। मित्र उद्ममी को लाभ पहुंचाना और विरोध करने वालों को परेशान करने के लिए व्यवस्था के दुरुपयोग का मामला भी छिपा हुआ नहीं है। सीएजी की रिपोर्ट के आधार पर झूठा प्रचार, खिलाफ हो तो उसे सार्वजनिक नहीं करना और फिर उसी आधार पर विपक्षी को बदनाम करना अनैतिक होने की हद है पर कोई कुछ नहीं कर सकता?

आज के अखबारों में दिल्ली सरकार की शराब नीति से राजस्व के नुकसान के भाजपाई आरोपों को प्रमुखता से छापा गया है लेकिन मतदाता सूची से संबंधित घपलों के अरविन्द केजरीवाल के आरोपों को प्रमुखता नहीं मिली है। मुझे लगता है कि सरकारी नीति से राजस्व के नुकसान का यह मुद्दा खबर ही नहीं है। वैसे भी, कम से कम बिहार और गुजरात में पूर्ण शराबबंदी है और वहां राजस्व शून्य होगा। अगर वह मुद्दा नहीं है तो कम या ज्यादा मुद्दा क्यों होना चाहिये? जब उसमें बदनीयत के मामले में आम आदमी पार्टी के तमाम नेता जेल भी हो आये हैं और भ्रष्टाचार साबित नहीं हुआ है। आम आदमी पार्टी जैसी नई और छोटी पर निर्वाचित और लोकप्रिय सरकार पर यह आरोप कोई मायने नहीं रखता है क्योंकि सरकार का यही काम है और सब सार्वजनिक है (रिपोर्ट छोड़कर!)। दूसरी ओर, भाजपा पर मतदाता सूची में गड़बड़ी का का आरोप गंभीर है, चुनाव आयोग की निष्क्रियता या चुप्पी न सिर्फ मिलीभगत बल्कि व्यवस्था को चौपट कर सकने का संकेत देती है। सत्तारूढ़ व मजबूत सरकार के लिए ऐसा करना अनैतिक तो है ही।

अखबारों ने भले आम आदमी पार्टी पर भाजपा के आरोपों को महत्व दिया है लेकिन मैं आम आदमी पार्टी के आरोप (और काम, जांच व खुलासे) को ज्यादा महत्व दूंगा। हालांकि, द हिन्दू ने अपने अंतरराष्ट्रीय संस्करण में इसे पांच कॉलम में छापा है। वैसे भी, यह खुलासा मीडिया का काम हो सकता था। हिन्दुस्तान टाइम्स ने आप के आरोपों का संकेत पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने की लीड में दिया है। शीर्षक है, अमित शाह और अरविन्द केजरीवाल जनकल्याण और मतदाता सूची पर भिड़े। इस खबर के साथ अमित शाह की तीन कॉलम में विशालकाय तस्वीर केजरीवाल के आरोपों को दबा औऱ छिपा दे रही है। इसका कारण भी समझा जा सकता है पर यह कम नहीं है कि हिन्दुस्तान टाइम्स ने इसे शीर्षक बनाया है। खबर टाइम्स ऑफ इंडिया में भी है और भले लीड नहीं है, पढ़ने-पढ़ाने लायक है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने केजरीवाल के गंभीर आरोप के साथ अमित शाह के आरोप को छापकर भले पत्रकारीय संतुलन बनाया हो लेकिन खबर तो यही है कि भाजपा अपने पूर्व सांसदों, सांसदों और मंत्रियों के पते पर मतदाता बना रही है और यह नई दिल्ली सीट पर अरविन्द केजरीवाल को हराने के लिए किया जा रहा है।

कहने की जरूरत नहीं है कि अगर यह सही है तो गंभीर मामला है और कार्रवाई होनी चाहिये नहीं है तो केजरीवाल पर निराधार आरोप लगाने का मामला सरकार और चुनाव आयोग दोनों बना सकते हैं। पर ‘जो जीता वही सिकंदर’ मानने वाले लोग इस तरह के आरोप झेलते हैं। इस गंभीर आरोप के जवाब में टाइम्स ऑफ इंडिया में अमित शाह की अपील अपने स्तर की है। उसपर मुझे कुछ नहीं कहना। लेकिन यह बताने से खुद को रोक नहीं पा रहा हूं कि अमर उजाला ने अमित शाह के आरोप को ऊपर रखा है और केजरीवाल के आरोप को नीचे। यही नहीं, यहां केजरीवाल का आरोप ‘सांसदों के पते’ की जगह ‘गलत तरीके से’ हो गया है और पत्रकारिता के इस महीन खेल को समझना-बताना साधारण नहीं है। नवोदय टाइम्स बराबर की खबरों को बराबरी में छापता रहा है। आज यहां मामला बराबरी का नहीं है। अमित शाह की घोषणा लीड है, पांच को आपदा से मुक्ति का दिन। यह दो मई दीदी गईं के अंदाज में है और नरेन्द्र मोदी की भाजपा ऐसी घोषणाओं में बहुत आगे है इसमें अब कोई शक नहीं है। केजरीवाल का आरोप नवोदय टाइम्स में वैसे है जैसे होना चाहिये। तीन कॉलम की इस खबर का शीर्षक है, केजरीवाल ने केंद्रीय मंत्री, सांसद पर लगाया फर्जी वोट बनवाने का आरोप। केंद्र सरकार विरोधी खबरों की ऐसी प्रस्तुति अब दुर्लभ है लेकिन जब होती है तो लगता है कि सरकार का दबाव तो बहाना है सेवा का जो स्तर है वह तभी संभव है जब गुलामी में आनंद आ रहा हो। पर वह अलग मुद्दा है।   

भाजपा और आप या शाह और केजरीवाल के आरोपों के मुकाबले भाजपा के नड्डा का आरोप टाइम्स ऑफ इंडिया में लीड है और अमर उजाला में यह चार कॉलम की लीड है। खबर कैग के हवाले से छपी है जबकि इंडियन एक्सप्रेस में यह पहले पन्ने पर दो कॉलम की खबर है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की फोटो के साथ छपी है। शीर्षक में ही कहा गया है कि नड्डा ने सीएजी की रिपोर्ट के हवाले से कहा कि (दिल्ली सरकार की) शराब नीति से 2026 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उपशीर्षक आप का जवाब या पलटवार है, रिपोर्ट भाजपा कार्यालय में बनी है, कोई साख नहीं है। यहां यह दिलचस्प है कि सरकारी नीति (या कार्य) से राजस्व का नुकसान मुद्दा है तो नोटबंदी और केंद्र सरकार की तमाम नीतियों से नुकसान की बात भी होनी चाहिये। अगर राज्य सरकार की शराब नीति ही मुद्दा है तो कम से कम बिहार और गुजरात में पूर्ण शराबबंदी है। उससे न सिर्फ राजस्व का नुकसान है आम लोगों को शादियां बिहार से बाहर करनी पड़ रही है और बिहार में हो तो मेरे जैसे नहीं पीने वाले भी शादी में जाने से मना कर देते रहे हैं। होता यह है कि बाहर के लोगों में किसी के पास किसी भी तरह से शराब मिल गई तो काफी सारे लोग फंसाये जा सकते हैं और यह सही भी हो तो कोई क्यों जोखिम ले। हालांकि वह अलग मुद्दा है लेकिन भाजपा सरकार की नीति से राजस्व का नुकसान तो हो ही रहा है जो कभी मु्द्दा नहीं रहा।

अगर सरकारी राजस्व के नुकसान की बात की जाये तो यह याद दिलाना पड़ेगा कि नोटबंदी से हुए नुकसान की कभी चर्चा नहीं हुई और प्रधानमंत्री ने अभी हाल के अपने पॉडकास्ट में यह भी कहा है कि जोखिम उठाने की मेरी क्षमता का अभी तक पूरा उपयोग नहीं हुआ है। जाहिर है प्रधानमंत्री कुछ अलोकप्रिय या राजस्व के नुकसान (लोगों की जान भी गई थी) वाला निर्णय करें तो जोखिम उठाना और दूसरी निर्वाचित सरकार करे तो राजस्व का नुकसान। वह भी ऐसा कि इसमें कोई बदनीयत साबित हुए बिना आप के कई नेता जेल हो आये। अपने बारे में प्रधानमंत्री ने अभी कहा है और पहले भी कह चुके हैं कि गलती बदइरादे से नहीं करेंगे। खुद की गलती का इरादा देखा जाये और दूसरों की गलती से नुकसान – यह दोहरा विचार है और एक निर्वाचित सरकार पर दूसरी निर्वाचित सरकार लागू करे या कोशिश करे तो वह इरादा गलत भले न हो, चुनाव जीतने का ही तो है? सीएजी की ही रिपोर्ट की ही बात की जाये तो 2जी घोटाले में 1,76,000 करोड़ रुपये का कथित नुकसान और फिर सीएजी विनोद राय को ईनाम और उनकी माफी की कहानियां अब पुरानी हो चुकी हैं। 2023 में कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया था कि सीएजी ने केंद्र सरकार के भिन्न विभागों में एक-दो नहीं सात घोटालों का खुलासा किया था। तब उन्होंने तंज भी किया था कि प्रधानमंत्री को चाहिये कि सीएजी की व्यवस्था ही खत्म कर दी जाये। उसके बाद से खबरें और आरोप तो गायब ही हैं अब यह नया मामला सामने आया है।

भाजपा नेताओं ने आप पर आरोप लगाने के लिये जिस सीएजी रिपोर्ट का हवाला दिया है उसके बारे में आप ने कहा है और अखबारों ने अपनी इच्छा से छोटे बड़े में छापा है। इंडियन एक्सप्रेस का तो बता ही चुका, अमर उजाला ने भाजपा के आरोप मनगढ़ंत और निराधार शीर्षक से छापा है जबकि यह रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं है और जैसा मैंने पहले कहा है, काफी समय से नहीं होती रही है। जो हुई थी, जिससे भाजपा को फायदा हुआ उसके लिये सीएजी को ईनाम दिया जा चुका है और यह सब सार्वजनिक है। ऐसे में सीएजी की रिपोर्ट के आधार पर इस तरह आरोप लगाने के बाद आम आदमी पार्टी अभी यही कह पा रही है कि आरोप मनगढ़ंत हैं जबकि सही भी हो तो उसका कोई मतलब नहीं है क्योंकि सरकारें इसीलिये चुनी जाती हैं। उसके काम का मकसद आवश्यक राजस्व प्राप्त करके जनसेवा के काम करना होता है। हालांकि, राजनीति का यह हाल हो गया है कि कि अमर उजाला की एक खबर के अनुसार कांग्रेस ने कहा है कि इस (या दिल्ली में) भ्रष्टाचार के लिए आम आदमी पार्टी और भाजपा दोषी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव आलोक शर्मा ने कहा है कि कांग्रेस पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर सत्ता में आई आप खुद कैग रिपोर्ट सदन में पेश नहीं कर रही है। भाजपा का मामला आप जानते हैं लेकिन उसके बारे में कांग्रेस प्रवक्ता भी कुछ नहीं बोल रहे हैं। वास्तविकता आप जानते हैं आप और भाजपा ने मिलकर कांग्रेस का विरोध किया था। सीएजी की रिपोर्ट बनवाई गई थी और सीएजी को ईनाम दिया जा चुका है।

जहां तक सरकारी राजस्व की बात है, भाजपा सरकार जीएसटी के रूप में ज्यादा वसूली करके जनता को परेशान ही कर रही है और उसका श्रेय भी नहीं लेती। वसूली बढ़ गई के जरिये उसे यह बताना होता है कि सब चंगा सी हालांकि उसका नुकसान ज्यादा है और मौके-बेमौके छिपा भी लिया जाता है। जनता सब देख रही है और अखबार भी समझ ही रहे होंगे, सेवा क्यों कर रहे हैं वो जानें। शीशमहल के आरोप के बाद भाजपा का यह नया आरोप भी वैसे ही है। कहने की जरूरत नहीं है कि सरकार की घोषित नीति से नफा हो या नुकसान – सरकार का यही काम है और केंद्र सरकार का यह काम नहीं है कि वह राज्य सरकारों के ऊपर सीबीआई या ईडी की तरह काम करे लेकिन आप देख सकते हैं कि आम आदमी को लूटने ठगने के मामलों में तो केंद्र सरकार कार्रवाई नहीं कर पाती है। बचाव के पुख्ता इंतजाम करने की बजाय फोन पर सतर्क किया जा रहा है और सरकारी एजेंसी का दुरुपयोग सत्ता में बने रहने के लिए किया जा रहा है। इसमें मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और हटवाने का आरोप काफी गंभीर और अनैतिक है। लेकिन अखबारो में उसका शोर नहीं है। आम आदमी के खिलाफ भाजपा के इस शोर को टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी सीएीजी की अधिकृत रिपोर्ट के रूप में छापा है और इंट्रो में बताया है कि यह एलजी और सरकार के पास है लेकिन सदन में नहीं रखी गई है।

सीएजी ने भाजपा पर कई आरोप लगाये है और केंद्र सरकार के मामले में सीएजी की रिपोर्ट पर जब चर्चा नहीं होती है सरकार समर्थक और कुछ निष्पक्ष लोग भी कहते हैं कि विपक्ष को भी यही करना चाहिये। मैं इससे सहमत नहीं हूं। सरकारों को अपना काम करना चाहिये और जनता को चुनाव के समय निर्णय करने देना चाहिये। भाजपा अपना काम तो नहीं ही कर रही है, चुनाव जीतने की कोशिश में ही लगी रहती है और विपक्ष से भी यही अपेक्षा की जाती है कि वह चुनाव जीतने के लिए वही सब करे जो भाजपा करती है। इससे होगा कुछ नहीं, व्यवस्था ऐसी ही बन जायेगी जो चिन्ताजनक है। इसमें राहुल गांधी का काम प्रशंसा करने वाला है कि वे चुनाव जीतने के लिए काम नहीं कर रहे हैं और हार कर भी हताश या निराश नहीं हो रहे हैं मानों उनने भाजपा (या संघ परिवार का) विरोध करना ही अपना काम चुना है चुनाव जीतना नहीं और यही सच्ची जन सेवा है। आप जानते हैं कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के साथ उत्तर प्रदेश में विधानसभा के उपचुनाव भी हैं और पिछली बार इसे अच्छी तरह से लड़ने के लिए बचा लिया गया था। भाजपा की तैयारियां वहां के लिए भी हैं और अमर उजाला के साथ द टेलीग्राफ में भी खबर है, योगी ने बंटेंगे तो कटेंगे लाइन को पुनर्जीवित किया। इसका विस्तार अमर उजाला में है। टॉप पर सात कॉलम का शीर्षक है, प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ…. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राम लला का पंचामृत से अभिषेक। पहले कालम में हिन्दी में ‘महाकुंभ’ लिखा है और कहा जा सकता है कि इस तरह हिन्दी अखबार हिन्दू अखबार होने अहसास करा रहा है। तस्वीरों, शीर्षक को रहने देता हूं बस योगी जी ने जो कहा है वह बता देता हूं, जाति और भाषा में बंटेंगे तो खामियाजा धर्मस्थलों को भुगतना होगा : योगी।

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