
संजय कुमार सिंह
कुम्भ की शुरुआत आज होनी है और दो हिन्दी के अखबारों के अलावा द टेलीग्राफ में यही लीड है। द हिन्दू, इंडियन एक्सप्रेस और हिन्दुस्तान टाइम्स ने फोटो से ही काम चला लिया है तो टाइम्स ऑफ इंडिया में कुम्भ की खबर सेकेंड लीड है। दि एशियन एज में दो कॉलम की खबर है। हिन्दी अखबारों में नवोदय टाइम्स का पहला पन्ने पूरी तरह कुम्भ मय है तो अमर उजाला ने इसे लीड ही बनाया है, दूसरी खबरें भी हैं। द टेलीग्राफ की खबर सबसे अलग है।
अखबार ने पृथ्वी के सबसे बड़े आयोजन के लिए जब धर्म, राजनीति और सत्ता एकजुट हो रही है तब एक साधु की अपील को प्रमुखता से छापा है और कुम्भ में शामिल हो रहे भिन्न साधुओं की तस्वीरों के साथ उनका संक्षिप्त परिचय भी दिया है। साधु की अपील इस प्रकार है, महाकुंभ में हम देवताओं की पूजा करने के लिए समय के सिवा किसी से कुछ नहीं चाहते। कहने की जरूरत नहीं है कि यह एक आम पाठक के लिए खबर या रिपोर्टिंग हैं। पीयूष श्रीवास्तव ने इसमें बताया है कि 45 वर्षीय स्वामी हरिपुरी उर्फ कबूतर बाबा, अपनी जटाओं पर कबूतर बैठाए हुए हैं। उनका कहना है कि वे दोनों शिव भक्त हैं। चेहरे पर राख लगाए, मीडिया से दूर रहने वाले साधु ने पत्रकारों से कुछ शब्द कहे और जल्दी में आगे बढ़ गये, “मैं और मेरा कबूतर संगम में पवित्र स्नान करेंगे; हमने 2019 के अर्ध कुंभ में भी ऐसा किया था।” हरिपुरी सोमवार को मेले के उद्घाटन से तीन दिन पहले राजस्थान के मेवाड़ से इलाहाबाद में महाकुंभ में पहुंचे हैं। उनके तोते ने उन्हें तुरंत आकर्षण का केंद्र बना दिया, लेकिन वे 26 फरवरी को कार्यक्रम समाप्त होने तक पूर्ण एकांत चाहते हैं। ऐसे और भी कई साधुओं का वर्णन व तस्वीर इस खबर में है।
आगे लिखा है, योगी आदित्यनाथ इतने शर्मीले नहीं हैं। उत्तर प्रदेश के लगभग हर जिले में एलईडी वैन का एक बेड़ा घूम रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री की तस्वीरें और महाकुंभ क्षेत्र के दृश्य दिखाए जा रहे हैं और नारे लगाए जा रहे हैं, जिसमें लोगों से कुंभ में आने का आग्रह किया जा रहा है। स्थानीय साधु राजेश शुक्ला ने कहा कि राजनेता जो चाहें करें, साधु और तीर्थयात्री “भगवान की पूजा करने के अलावा किसी से कुछ नहीं चाहते हैं”। वृंदावन के स्वामी देवगिरी उर्फ रबड़ीवाले बाबा अपने तंबू में बैठकर भक्तों के बीच मुफ्त रबड़ी बांट रहे हैं। वे कहते हैं, “हर सुबह पहली प्लेट कपिल मुनि को समर्पित की जाती है। इसके बाद, पूरे दिन सभी आगंतुकों को रबड़ी दी जाती है।” देवगिरी का दावा है कि उन्हें मुफ्त दूध मिलता है, जिससे उनकी टीम इतनी रबड़ी बनाती है कि हर दिन लगभग एक लाख तीर्थयात्रियों को कुछ चम्मच रबड़ी दी जा सके। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “मुझे प्रचार पसंद नहीं है। आप रबड़ी ले सकते हैं, लेकिन कृपया मुझे अपने समाचार चैनलों के लिए कवर न करें।” उन्होंने आगे कहा, “मेरे लिए धर्म उन लोगों से कहीं ज़्यादा गहरा विचार है जो भगवान के ज़रिए प्रचार चाहते हैं।” मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के मंत्रियों की टीमें देश के दूसरे हिस्सों में उनकी सरकार द्वारा आयोजित रोड शो में शामिल हुई हैं – उदाहरण के लिए, 30 दिसंबर को पंजाब के मोहाली में – जाहिर तौर पर “महाकुंभ का प्रचार” करने के लिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आदित्यनाथ को दिखाते हुए बैनर और पोस्टर दिखाए। खबर के बीच एक बॉक्स में कुम्भ से संबंधित खास बातें बताई गई हैं जबकि हिन्दी अखबारों में सरकार की तैयारियों और कृपा का प्रचार है।
मंदिर बनाने और हिन्दुत्व की रक्षा के लिये के लिए सत्ता में आई नरेन्द्र मोदी की भाजपा सरकार ने 10 साल में जनहित के जो काम किये हैं उसके नाम पर दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए वोट नहीं मांग रही है और नये मुद्दे तलाशने में परेशान नजर आ रही है। इससे पहले आप पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था का शोर, कितने जीरो का सवाल और प्रोफेसर साब के दल-बदल की कहानी सुन चुके हैं। अयोध्या में भाजपा हार गई सो अलग। तीसरे कार्यकाल में दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए मुद्दे की कमी भी अब खबर नहीं है और ऐसे में संगम पर सनातन का सबसे बड़ा समागम हो रहा है (अमर उजाला की लीड का शीर्षक)। आज शुभारंभ है और अखबारों में सरकारी प्रचार का यह हाल है कि खबर सिर्फ सरकार की कृपा बताती है और अपने आप में पूरी नहीं है। इस खबर को देखिये – टोल प्लाजा टैक्स फ्री कर दिये गये। शीर्षक पढ़ते ही सवाल उठता है कि टैक्स फ्री का मतलब तो यही होता है कि टोल लगेगा, टैक्स नहीं। खबर से यह स्पष्ट नहीं है और यह खबर तब छपी है जब कल ही अखबारों में खबर छपी थी कि भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार की शराब नीति से राजस्व का घाटा हुआ।

कहने की जरूरत नहीं है कि टैक्स माफ करने से भी घाटा होगा और सरकार जब इस मामला में घाटा उठा रही है, उठा सकती है तो भाजपा अध्यक्ष ने क्या आरोप लगाया था जो कल छपा था। दूसरी बात यह है कि इस कुंभ की तैयारियों के लिए सरकार ने क्या किया के साथ बताया और पढ़वाया जा रहा है जबकि इसका विस्तार जानने की कोशिश में मुझे एक पुरानी खबर मिली जो 19 नवंबर 2024 की है। जनसत्ता डॉट कॉम की इस खबर के अनुसार, जनवरी 2025 में प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ को लेकर सरकार ने हाईवे को टॉल फ्री करने का यह कदम उठाया है। 45 दिनों तक लोग इन टोल प्लाजा से बिना शुल्क दिए गुजर सकेंगे। हालांकि यह छूट सिर्फ निजी वाहनों के लिए होगी। कमर्शियल और भारी वाहनों को टोल देना होगा। … उत्तर प्रदेश सरकार ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के साथ मिलकर प्रदेश के इन सात टोल प्लाजाओं पर टोल टैक्स फ्री करने का ऐलान कर दिया है। बता दें कि साल 2019 में जब कुंभ मिलेगा आयोजन हुआ था। तब भी टोल फ्री किया गया था। कहने की जरूरत नहीं है कि आज की खबर सिर्फ प्रचार के लिए है।
सरकार और उसके काम के इस प्रचार के बीच आज के बाकी पांच अखबारों की लीड इस प्रकार है, 1) इंडियन एक्सप्रेस – फ्लैग शीर्षक है, विकसित भारत डायलॉग। मुख्य शीर्षक है, “कंफर्ट जोन से बाहर निकलिये, भारत की लंबी छलांग का समय है : प्रधानमंत्री”। उपशीर्षक है, कहा अगले दशक के अंत तक देश 10 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है। 2) दि एशियन एज ने इसे लीड बना दिया है। शीर्षक है, युवा भारत को 10 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था, विकसित भारत बनाएंगे : मोदी। फ्लैग शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने विवेकानंद की प्रशंसा की, ‘युवा शक्ति’ से बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए कहा। कहने की जरूरत नहीं है कि युवा शक्ति को नेतृत्व देने से लेकर उनके लिए शिक्षा, रोजगार और परीक्षा तक की व्यवस्था करने में यह सरकार फिसड्डी साबित हुई है और जो व्यवस्था पहले थी उसे भी खराब ही किया है और अब प्रधानमंत्री जो कह रहे हैं उसका मतलब यही है कि सरकार कुछ करे न करे वे बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ें। वैसे तो यह युवाओं की मजबूरी है और अगर वे कामयाब रहे और नहीं भी रहे तो एक समय अर्थव्यवस्था पांच ट्रिलियन की हुई वैसे ही दस ट्रिलियन की भी होगी। सरकार प्रचार और प्रचारकों का प्रबंध करेगी अखबार आपको उपलब्धियां बताते रहेंगे। इसमें देश की संस्कृति की बात करने वाले योगदान करते रहेंगे।
इनमें ऐसे लोग भी हैं जो टाइम्स ऑफ इंडिया की आज की खबर के अनुसार, राजस्थान अग्नि शमन सेवा में काम करते थे और जयपुर में गिरफ्तार किये गये हैं क्योंकि वे फैक्ट्रियों में आग लगा देते थे और उन्हें बुझाने के लिए पहुंचने की प्रक्रिया में दमकलों से डीजल चुराकर बेचते थे। कहने की जरूरत नहीं है कि दमकलों में बहुत ज्यादा डीजल नहीं होता है और उसमें से कितना चुराकर बेच पाते होंगे कि फैक्ट्रियों में आग लगाकर उनका नुकसान करते थे और उन्हें जोखिम में डालते थे। भारत में उद्योग व्यापार करके, फैक्ट्री चलाकर पैसे कमाना कितना मुश्किल और जोखिम भरा है – इससे पता चलता है। वसूली करने वाले स्थानीय गुंडों से लेकर सरकारी अफसरों, टैक्स, कानून, मजदूर यूनियन सब को संतुष्ट करके भी नरेश गोयल और विजय माल्या बनने के लिए मजबूर हो सकते हैं। पहले यह सब सामान्य लगता था लेकिन अब जब भारतीय संस्कृति का बोल-बाला है तो यह भी रेखांकित किया जाना चाहिये कि यहां कैसे लोग हैं और कैसी व्यवस्था है। किसी उद्योग का चलना-नहीं चलना तमाम कारणों पर निर्भर करता है और वो कैसे संचालित होते हैं।
इसकी चर्चा के लिए 3) हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड बताता हूं। मुझे लगता है कि यह बड़ा मामला है और बहुत कुछ सोचने को मजबूर करता है लेकिन खबर दूसरे अखबारों में छपी ही नहीं, चर्चा ही नहीं होगी तो इससे जुड़े मु्द्दे कैसे उठेंगे। खबर के अनुसार भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ बनाने के विवाद में बांग्लादेश ने भारतीय उच्चायुक्त को बुलाकर गंभीर चिन्ता जताई है। आप जानते हैं कि सीमा पार से घुसपैठ का मुद्दा बहुत पुराना है। असम का छात्र आंदोलन इसी मुद्दे पर हुआ था औऱ झारखंड चुनाव के साथ दिल्ली में भी अवैध घुसपैठियों को वोटर बनाने और उन्हें सुविधायें देकर चुनाव जीतने का आरोप लगता रहा है। यह भी कि नरेन्द्र मोदी की सरकार ने घुसपैठ रोकने के लिए कुछ नहीं किया। पिछले दिनों खबर थी कि भारतीय नागरिकों ने बाड़ लगाने की कोशिश की तो बांग्लादेश के सैनिकों ने विरोध किया और भारतीय सैनिकों या सीमा सुरक्षा बल के लोगों के सहयोग से बाड़ लगाई जा सकी। अब बांग्लादेश ने अधिकृत रूप से इसका विरोध किया है मतलब साफ है कि वह नहीं चाहता है कि बाड़ बने। भारत सरकार अगर नहीं बनवा रही है तो एक कारण यह भी है और संभव है पहले की सरकारों के समय से हो पर नरेन्द्र मोदी इसका क्या कर रहे हैं वह आप समझ सकते हैं।
यहां यह दिलचस्प है जमशेदपुर में एक तार बनाने की कंपनी है। और तब से है जब शहर की स्थापना हुई होगी। इसके कर्मचारियों की कॉलोनी टाटा मोटर्स की कॉलोनी से लगी हुई है और मैं बचपन से देख रहा हूं कि तार कंपनी की कालोनी टाटा मोटर्स की कॉलोनी के मुकाबले बहुत गरीब लगती थी। बचपन में मुझे किसी ने बताया था कि मामला अंतरराष्ट्रीय बाजार का है टाटा मोटर्स के उत्पादों की मांग है (पहले यहां रेल इंजन भी बनता था, अब के बुलडोजर और तबके एक्सक्वेटर से लेकर ट्रक बस सब यहां बनते हैं और उन दिनों भी रोज 100 ट्रक बस बनते थे। दूसरी ओर तार का बाजार वैसा नहीं था और मुझे बताने वाले ने कहा था कि अगर भारत सरकार सीमा पर बाड़ लगाने का फैसला करे तो कंपनी के दिन फिर जायेंगे। यह 1971 में बांग्लादेश बनने से पहले की बात भी हो सकती है या संभव है तभी मुझे बताया गया हो। पर तथ्य यह है कि बाड़ जो बना, जितना बना या नहीं बना तार कंपनी लगभग वैसे ही है। पिछली बार गया था तो चर्चा थी कि टाटा स्टील ने उसे खरीद लिया है और कुछ पैसे लगे हैं। इससे पहले टाटा स्टील ने वहां की ट्यूब कंपनी और कृषि औजार बनाने वाली कंपनियों को खरीद लिया था तो मैं यही समझ रहा था कि यह बड़ी मछली द्वारा छोटी मछली को खाने का मामला है लेकिन कहानी कुछ और हो सकती थी। पर वह अलग मामला है।
4.) टाइम्स ऑफ इंडिया की आज की लीड भी भारत की इस समय की समस्या औऱ चिन्ता है। शीर्षक है, एच-1बी वीजा की चर्चा के बीच कुछ भारतीयों ने नौकरी खोई। आप जानते हैं कि यह अमेरिका का मामला है और आज की एक बड़ी खबर, द हिन्दू की सेकेंड लीड है, ट्रम्प के शपथग्रहण समारोह में 20 जनवरी को भारत के विदेश मंत्री जयशंकर जायेंगे। खबर के अनुसार शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री को आमंत्रित किये जाने की संभावना थी लेकिन सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्री जयशंकर को उनके नाम से निमंत्रण दिया गया है। जो भी हो, टाइम्स ऑफ इंडिया ने जयशंकर को बुलाये जाने या उनके शामिल होने की खबर को अपनी लीड के साथ सिंगल कॉलम में छापा है। यहां बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त को तलब किये जाने और ‘अनधिकृत’ बाड़ लगाने का विरोध किये जाने की खबर सिंगल कॉलम में है। इन खबरों के बीच दिल्ली के चुनाव की खबर आज दब गई है। हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर है, झुग्गियों, घुसपैठियों पर आप, भाजपा भिड़े। 5.) द हिन्दू ने इसरो की खबर को लीड बनाया है।
अमर उजाला ने दोनों खबरें छापी हैं और इससे मामला स्पष्ट है। इन खबरों के अनुसार भाजपा ने कहा है कि आम आदमी पार्टी ने 10 साल में कुछ नहीं किया, हम करेंगे झुग्गी बस्ती का विकास। इसके जवाब में अरविन्द केजरीवाल ने कहा है , जितने झुग्गी वालों को बेघर क्या, उन्हें बसायें तो नहीं लडूंगा चुनाव। मुझे लगता है आप के मुकाबले भाजपा का यह दांव भी फेल हो चुका है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा है, केजरीवाल ने अमित शाह को चुनौती दी, झुग्गी वालों को एक दिन में फिर से बसायें, मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा। केजरीवाल यह चुनौती ऐसे ही नहीं दे रहे हैं। उनकी पार्टी ने सभी सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। भाजपा ने तीसरी सूची जारी की है उसमें एक नाम है और यह मोहन सिंह बिष्ट का जो टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय लड़ने पर विचार करने की घोषणा कर चुके थे। दि एशियन एज ने इस मामले में केजरीवल के आरोप और भाजपा के जवाब को ही शीर्षक बनाया है और वह नहीं बताया जो चुनौती केजरीवाल ने दी है।


