
संजय कुमार सिंह
बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने की भारत के लोगों की कोशिशों पर बांग्लादेश के एतराज के बाद भारत सरकार ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त को बुलाकर कहा है कि सीमा पर जो हो रहा है वह मौजूदा करार और प्रोटोकोल के अनुसार है। आज यह खबर कई अखबारों में है लेकिन खास बात यह है कि आज ही यह खबर भी छपी है कि चीन के साथ सीमा पर ‘एक स्तर का टकराव’ है। विश्वास बहाल करने के लिए सेना प्रमुख उपेन्द्र द्विवेदी राजनयिक स्तर पर वार्ता का इंतजार कर रहे हैं। आज सेना दिवस के मौके पर कल दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए उन्होंने यह बात कही तो इसका अपना महत्व है। खास कर इसलिए कि अप्रैल 2020 की घटनाओं के बाद जब दोनों देशों की पैट्रोलिंग बंद हो गई और चार साल बाद यानी ढाई महीने पहले शुरू होने वाली थी तो 26 अक्तूबर 2024 को मेरे ज्यादातर अखबारों ने चीन के पसीजने, एलएसी पर पैट्रोलिंग की स्थितियां बनने और ‘इसी महीने’ शुरुआत होने की खबर प्रमुखता से दी थी। तब द टेलीग्राफ में लीड का शीर्षक था, चीन के पसीजने पर परम सावधानी। खबर में कहा गया था, सीमा पर डिसएंगेजमेंट और खाली करने की जो प्रक्रिया चल रही है उसमें भरोसा नहीं है। मुख्य खबर के साथ द हिन्दू में भी एक छोटी सी खबर थी। इसके अनुसार, यह स्पष्ट नहीं है कि ‘बफ़र ज़ोन’ जारी रहेगा या नहीं। भारत चीन सीमा वार्ता में साउथ ब्लॉक द्वारा नई शुरुआत की घोषणा के कई दिनों बाद अब जब एलएसी पर अलग होने (डिसएंगेजमेंट) की प्रक्रिया शुरू हो रही है तो विशेषज्ञों और पूर्व राजनयिकों ने प्रस्ताव की बारीकियों के संबंध में पूर्ण पारदर्शिता की मांग की है (थी)।
आज बांग्लादेश की खबर सरकारी है और कह सकता हूं कि प्रेस विज्ञप्ति वाली है। लेकिन हिन्दुस्तान टाइम्स में यह तीन कॉलम में छपी है जबकि चीन के साथ सीमा पर एक स्तर के टकराव की खबर सिंगल कॉलम में छपी है। खबर में लिखा है कि एलएसी पर स्थिति के बारे में पूछे गये एक सवाल के जवाब में द्विवेदी की यह टिप्पणी देपसांग और डेमचोक में साढ़े चार साल बाद पैट्रोलिंग गतिविधि शुरू होने से संबंधित खबरों के ढाई महीने बाद आई है। इंडियन एक्सप्रेस में भी यह खबर सिंगल कॉलम में है। दि एशियन एज में यह खबर पांच कॉलम में है जबकि बांग्लादेश वाली सिंगल कॉलम में। द हिन्दू में बांग्लादेश वाली खबर दो कॉलम में है लेकिन सेना प्रमुख वाली खबर नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया में बांग्लादेश वाली खबर तो सिंगल कॉलम में है लेकिन सेना प्रमुख की प्रेस कांफ्रेंस की दूसरी बात शीर्षक है। अमर उजाला में सेना प्रमुख की खबर पांच कॉलम की लीड है। शीर्षक है, चीन सीमा पर हमारी तैनाती संतुलित और पुख्ता, सर्दियों में भी कम नहीं होंगे सैनिक। अखबार ने मुख्य बात का संकेत उपशीर्षक में दिया है। जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने कहा, एलएसी पर हालात संवेदनशील पर स्थिर। हम किसी भी स्थिति से निपटने में सक्षम। यहां बांग्लादेश की खबर भी चार कॉलम में है। शीर्षक है, बांगलादेश के कार्यवाहक उच्चायुक्त तलब, बाड़ पर आपत्ति खारिज। नवोदय टाइम्स में दूसरे पहले पन्ने पर दोनों खबरें एक साथ सिंगल कॉलम में हैं। शीर्षक है, भारत ने बांग्लादेश के कार्यवाहक उच्चायुक्त को किया तलब। दूसरी खबर का शीर्षक है, पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर स्थिति संवेदनशील लेकिन स्थिर : सेना प्रमुख।
आज के सभी अखबारों में जब कुंभ और सरकार का प्रचार प्रमुखता से है तब द टेलीग्राफ ने दोनों पड़ोसी देशों से सीमा पर टकराव की स्थिति को एक साथ गंभीरता से छापा है। अखबार की लीड खबर का फ्लैग शीर्षक है, सेना प्रमुख ने सरकार की बातों से अलग बात की और कहा, टकराव खत्म नहीं हुआ है और सुरक्षा बलों की तैनाती कम नहीं होगी। आप जानते हैं कि पैट्रोलिंग शुरू होने के समय स्थिति ठीक या सामान्य होने का कितना प्रचार किया गया था और कई दिनों तक चला था। 28 अक्तूबर 2024 को मैंने यहां लिखा था, “एलएसी पर गश्ती शुरू होने की बड़ी खबर और उसके बाद का महा लचर फॉलोअप। कल सूत्रों के हवाले से एलएसी पर चार साल बाद गश्ती फिर शुरू होने का प्रचार करने के बाद आज विदेश मंत्री जयशंकर के हवाले से छपा है, चीन विवाद के निपटारे के बाद ही सीमा प्रबंधन व स्थिरता पर होगी बात। विदेश मंत्री इस सरकार के काबिल लोगों में हैं फिर भी पहले छपी और अब इस खबर में देखिये कितने अंतरविरोध हैं। मुझे तो लग रहा है कि जमीन पर कुछ हुआ होता, हेडलाइन मैनेजमेंट की जरूरत नहीं होती, तो कल की खबर (लीड) बेमतलब थी। गश्ती शुरू हो जाती तो एक ही बार खबर धूम-धड़ाके से छपती। ज्यादा असर करती। लेकिन मामला मिलने पर ‘लाल आंखें दिखाने’ और दिखाने की जरूरत खत्म करने का था जो निपट गया। अब लीपा-पोती मजबूरी है। खबरों का फॉलोअप भी होता है और यह इतना लचर है कि पहले पन्ने पर नहीं छपा जबकि मूल खबर सूत्रों की थी और फॉलोअप में जो है वह विदेश मंत्री के हवाले से है।”
इसके बाद अब जो है वह सेना प्रमुख के हवाले से है और सरकार के कहे (या प्रचार) से अलग है तो उसे बताना बनता था। लेकिन अकेले द टेलीग्राफ ने चीन और बांग्लादेश सीमा की दोनों खबरों को मिलाकर लीड बनाया है। चीन का मामला तो जो है सो है ही और उसपर पहले लिख चुका हूं। आइये अब बांग्लादेश सीमा की भी बात कर लूं। खबर के अनुसार भारत ने बांग्लादेश पर पड़ोसी की तरह पहल की लेकिन बाड़ लगाने पर झिड़क दिया। असल में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सोमवार को बांग्लादेश को “रणनीतिक पड़ोसी” बताया और कहा कि किसी भी तरह के मनमुटाव से किसी देश को फ़ायदा नहीं होगा इसके बाद कुछ ही घंटों में द्विपक्षीय संबंधों में असहजता और बढ़ गई। भारत ने सीमा पर बाड़बंदी अभियान के बारे में ढाका की चिंताओं को खारिज कर दिया। भारत-बांग्लादेश संबंधों के बारे में पूछे जाने पर द्विवेदी ने सुबह कहा, “हम पड़ोसी हैं, हमें साथ रहना है और एक-दूसरे को समझना है। किसी भी तरह का मनमुटाव एक-दूसरे के हित में नहीं है।” खबर के अनुसार, मंत्रालय की मीडिया विज्ञप्ति में कहा गया कि बांग्लादेश के कार्यवाहक उच्चायुक्त नुरुल इस्लाम को बताया गया कि भारत ने बाड़ लगाने सहित सीमा पर सुरक्षा उपायों पर दोनों सरकारों के बीच सभी प्रोटोकॉल और समझौतों का पालन किया है। विज्ञप्ति में कहा गया कि राजदूत को यह भी बताया गया कि भारत कांटेदार तार की बाड़ लगाने, सीमा पर रोशनी करने, तकनीकी उपकरणों की स्थापना और मवेशियों की बाड़ लगाने जैसे उपायों के माध्यम से अपराध मुक्त सीमा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। विज्ञप्ति में सीमा पार अपराधों में तस्करी, अपराधियों की आवाजाही और तस्करी का हवाला दिया गया। राजदूत को मंत्रालय का संदेश रविवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के उस बयान को खारिज करने के समान था जिसमें “बांग्लादेश-भारत सीमा पर बीएसएफ की हालिया गतिविधियों” पर अपनी “गहरी चिंता” व्यक्त की गई थी। इससे आप समझ सकते हैं कि वास्तविक स्थिति क्या है और प्रचार कुछ और का है।
आज अखबारों में इस खबर को छोड़कर सोनमर्ग सुरंग शुरू होने की खबर को ज्यादा महत्व और प्रचार दिया गया है। इंडियन एक्सप्रेस, दि एशियन एज़, हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर लीड है। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड भी यही खबर है लेकिन शीर्षक कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मांग पर है। मैंने पहले लिखा है कि उमर अब्दुल्ला ईवीएम की शिकायत बंद करने और इंडिया गठबंधन को खत्म करने जैसी बातें करें तो अखबारों में प्रमुखता मिलती है लेकिन प्रधानमंत्री से राज्य की जरूरत बतायें उससे संबंधित मांग करें तो वो बात नहीं होती। वैसे भी, प्रधानमंत्री ने उमर अब्दुल्ला की मांग का जवाब नहीं दिया। कायदे से यह भी खबर होनी चाहिये थी पर है ही नहीं। टाइम्स ऑफ इंडिया के शीर्षक के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा कि अपना वादा पूरा करेंगे। आप जानते हैं कि 5 अगस्त 2019 को जब राज्य से अनुच्छेद 370 हटाया गया तभी राज्य को दो हिस्सों में बांट कर केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। पांच साल से बाद राज्य में चुनाव हुए और निर्वाचित मुख्यमंत्री दोनों केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर फिर एक राज्य बनाने की मांग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कोई समय तो नहीं ही बताया है कह रहे हैं कि अपना वादा पूरा करेंगे। नवोदय टाइम्स में इस खबर का शीर्षक है, सही वक्त पर होंगी सही चीजें : मोदी।
इस खबर में कहा गया है, प्रधानमंत्री ने जम्मू कश्मीर के लोगों से कहा कि वे जम्मू कश्मीर के लोगों से किये गये अपने वादों को पूरा करेंगे। द टेलीग्राफ ने लिखा है कि सही समय पर कहकर मोदी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से चुटकी ली है। द हिन्दू में सुरंग के उदघाटन की खबर सेकेंड लीड है। लीड मुद्रास्फीति दिसंबर में चार महीने में सबसे कम है। दि एशियन एज में भी टनल के उद्घाटन की खबर लीड है। यहां सिंगल कॉलम की की खबर से बताया गया है कि राज्य को राज्य का दर्जा सही समय पर मिलेगा। यह सही समय कब होगा, कोई नहीं जानता। फिर भी आज यह पहले पन्ने की खबर है।
14.01.2025


