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आज के अखबारों ने राहुल गांधी के कहे को साबित किया है, आरएसएस ने सभी संस्थाओं पर कब्जा कर लिया है

संजय कुमार सिंह

आज इंडियन एक्सप्रेस में दो कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, “राहुल ने कहा भाजपा, आरएसएस और भारतीय सत्ता से लड़ रहा हूं; भाजपा की आलोचना के शिकार हुए।” कहने की जरूरत नहीं है कि यह सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी तथा उसके संघ परिवार के खिलाफ राहुल गांधी का स्पष्ट आरोप है और निराधार तो नहीं ही है। दि एशियन एज में इस खबर का शीर्षक है, “भारतीय सत्ता से लड़ रहा हूं : राहुल के कहने से विवाद शुरू”। भाजपा जैसी पार्टी है और जुकरबर्ग के बयान के लिए जब उसने उसने जब मेटा को भी माफी मांगने के लिए मजबूर किया तो राहुल गांधी के आरोपों पर चुप रहने का कोई मतलब नहीं है। इसलिए, मुझे लगता है कि विवाद हुआ से ज्यादा बड़ी खबर है कि राहुल गांधी ने ऐसा कहा। खासकर तब जब राहुल गांधी ने जो कहा है और इंडियन एक्सप्रस ने जो लिखा है उसके अनुसार, राहुल ने यह भी कहा कि सत्तारूढ़ संस्था ने हरेक संस्थान पर कब्जा कर लिया है। मैं यहां कहता और लिखता रहा हूं कि अखबार निष्पक्ष नहीं दिखते हैं। आज अंग्रेजी अखबारों में यह खबर द हिन्दू में संक्षेप में है। यहां लीड अमेरिका, हमास और गाजा युद्धविराम पर है। शीर्षक है, अमेरिका और हमास ने कहा, गाजा युद्धविराम करार तैयार। टाइम्स ऑफ इंडिया ने राहुल गांधी के भाषण को पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर दो कॉलम में छापा है। 

हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर तीन कॉलम में है लेकिन शीर्षक है, भागवत पर राहुल के हमले से नया राजनीतिक टकराव। इससे लगता है कि भविष्य में अखबार का यह स्टैंड हो सकता है कि भाजपा तो ऐसी ही है उसके साथ काम करना है तो दबकर रहो, उसकी बात मानो आदि आदि। कहने की जरूरत नहीं है कि राहुल गांधी मोहन भागवत पर हमला करेंगे तो (सत्तारूढ़) भाजपा बवाल काटेगी ही और इसलिये शीर्षक यह हो जाये जो छपा है तो मूल बात छपेगी ही नहीं। मूल बात जो राहुल गांधी ने कही है वह नवोदय टाइम्स में छपी है। भागवत ने जो कहा वह राष्ट्रद्रोह और अगर इसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है, अदाणी की सदस्यता पूछने पर सदस्यता चली जाये, निर्वाचित मुख्यमंत्री को जेल में रखा जाये, केंद्रीय गृहमंत्रालय मुकदमा चलाने की अनुमति दे लेकिन महीनों जेल में रहने पर भी कुछ ठोस नहीं निकले, भागवत जैसों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो तो राहुल गांधी का यह कहना भी सही है कि इंडियन स्टेट्स से लड़ रहे हैं हम। पर खबर नहीं छपना भी मायने रखता है। अमर उजाला में राहुल गांधी की खबर पहले पन्ने पर नहीं है। यहां जुकरबर्ग के बयान पर मेटा इंडिया के माफी मांगने की खबर चार कॉलम में है – भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की तस्वीर के साथ है। कल मैंने लिखा था कि निशिकांत दुबे ने संसदीय समिति की ताकत बताई थी। साथ ही मैने बताया था कि सेबी प्रमुख माधवी पुरी बुच माफी मांगना तो छोड़िये, सवालों के जवाब देने नहीं आईं।

इसीलिए, द टेलीग्राफ में आज यह खबर भले सिंगल कॉलम में है, शीर्षक है, मेटा को दिल्ली में अपने जैसा मिला। खबर में टेलीग्राफ ने लिखा है मेटा माफी मांगने में इतना तत्पर पहले कभी नहीं रहा। संकेत यह भी है कि यह दक्षिण पंथी के प्रति नरम रहता है। अखबार ने आगे बताया है, 2022 में, मेटा के स्वामित्व वाली फेसबुक की पूर्व डेटा वैज्ञानिक सोफी झांग ने खुलासा किया था कि सोशल मीडिया दिग्गज ने 2019 और 2020 में भाजपा सांसद विनोद सोनकर से जुड़े फर्जी अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई के लिए उनकी सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया था। नकली फेसबुक अकाउंट वे होते हैं जिन्हें ऐसे उपयोगकर्ता संचालित करते हैं जो वे खुद नहीं होते हैं जिनका प्रतिनिधित्व फेसबुक अकाउंट करता है। इनका संचालन अवैध नहीं है लेकिन अनैतिक माना जाता है क्योंकि इससे वास्तविक उपयोगकर्ताओं की आवाज दब जाती है। झांग के दस्तावेज़ों से पता चलता है कि ठुकराल ने 2020 में पंजाब में तीन कांग्रेस विधायकों से जुड़े नकली समूहों के खिलाफ कार्रवाई को मंजूरी दी थी। उन्होंने कहा: “सोनकर के खिलाफ़ मिले सबूतों का स्तर शिवनाथ ठुकराल के लिए व्यक्तिगत रूप से पंजाब कांग्रेस के कई विधायकों के कर्मचारियों के खिलाफ़ कार्रवाई को मंजूरी देने के लिए पर्याप्त से अधिक था।” लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संचार और आईटी पर संसदीय पैनल – उस समय कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता में – को 2021 में झांग को बुलाने की अनुमति नहीं दी। ठुकराल ने पैनल के समक्ष अपने बयान में उनके आरोपों को खारिज कर दिया। उसी वर्ष, झांग ने ब्रिटिश संसद को बताया कि फेसबुक “सत्तावादी सरकारों को राजनीतिक विमर्श में हेरफेर करने की अनुमति दे रहा है” जिसके कारण “राजनीतिक उथल-पुथल हुई है जिसमें जान-माल का नुकसान और उत्पीड़न शामिल है…।”

नवोदय टाइम्स की खबर के अनुसार, राहुल गांधी ने कहा है कि संघ प्रमुख किसी और देश में होते (और ऐसी बात करते) तो गिरफ्तार हो जाते। यही नहीं, राहुल गांधी ने यह भी कहा है कि देश की चुनाव प्रणाली में गंभीर समस्या है। खबर के अनुसार, राहुल गांधी ने हालिया विधानसभा चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि देश की चुनाव प्रणाली में गंभीर समस्या है। इसमें उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच अचनाक करीब एक करोड़ नये मतदाताओं का सामाने आ जाना समस्या की बात है। आप जानते हैं कि दिल्ली में भी ऐसा हुआ है और काफी नए मतदाता जुड़े हैं जबकि पुराने के नाम अकारण हटाये भी गये है। सबसे दिलचस्प यह है कि सांसदों के पते पर कई नए नाम जुड़े हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि सांसद का घर उनके रहने के लिए होता है और वहां अस्थायी रूप से रहने आये लोगों को दिल्ली का मतदाता नहीं बनाया जा सकता है और स्थायी रूप से रहने वाला जहां रहेगा वहां के पते पर मतदाता होगा भले वह दिल्ली के किसी झुग्गी में रहे या राष्ट्रपति भवन में। मुझे लगता है कि इस गंभीर शिकायत के बाद दिल्ली के चुनाव रोक कर मामले की जांच होनी चाहिये थी और संतोषजनक जवाब के बाद ही मतदान कराये जाने चाहिये थे। ऐसी स्थिति में राहुल गांधी के आरोप बेहद गंभीर है और उन्हें गंभीरता नहीं मिलना उनके आरोपों की पुष्टि करता है।

अकले द टेलीग्राफ ने राहुल गांधी की खबर को लीड बनाया है। आइये उसे पढ़ें और जानें कि पूरा मामला क्या है। टेलीग्राफ की खबर का फ्लैग शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, कांग्रेस भारतीय सत्ता से लड़ रही है। भाजपा ने कहा उसके खिलाफ साजिश है। मुख्य शीर्षक है, युद्ध की स्थिति। आपको याद होगा कि सत्ता में आने के बाद नरेन्द्र मोदी की सरकार और उनके समर्थकों ने राहुल गांधी को पप्पू बनाने का अभियान चलाया था। राहुल गांधी और कांग्रेस ने न तो इसका विरोध किया और ना इससे वैसे नाराज हुए जैसे होना चाहिये था। राहुल गांधी ने कांग्रेस मुक्त भारत के जवाब में यह भी कहा था कि लड़कर हरायेंगे, हमें भाजपा मुक्त भारत नहीं चाहिये। हमारी विचारधारा अलग है और हम उन्हें विचारधारा के स्तर पर हरायेंगे। यही नहीं, राहुल गांधी संसद में प्रधानमंत्री से गले लगने भी गये थे और अब पीछे मुड़कर देखिये तो समझ में आयेगा कि रणनीति के लिहाज से राहुल गांधी कितने मजबूत और भाजपा कितनी कमजोर थी। हालांकि अभी वह मुद्दा नहीं है लेकिन सत्ता के खिलाफ साजिश से निपटना सत्ता का काम है और वह कमजोर होने का रोना रोकर सहयोग नहीं पा सकती है। मुझे लगता है कि राहुल गांधी जल्दी में नहीं हैं इसलिए राजनीति दिलचस्प होगी और भाजपा वाले हारेंगे नहीं, बिखर जायेंगे।    

अनिता जोशुआ की बाईलाइन वाली टेलीग्राफ की खबर इस प्रकार है, कांग्रेस ने बुधवार को दिल्ली में अपने नए मुख्यालय का उद्घाटन किया और आरएसएस तथा उसके प्रमुख मोहन भागवत के खिलाफ जोरदार हमला बोला। भागवत ने कहा था कि भारत को पिछले साल 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के साथ “सच्ची आजादी” मिली है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारत के शासक चाहते हैं कि देश एक “धूर्त, गुप्त, अज्ञात समाज” द्वारा चलाया जाए। उन्होंने कहा कि केवल कांग्रेस के पास ही आरएसएस-भाजपा से लड़ने की वैचारिक और इच्छा शक्ति है। उन्होंने कहा कि आरएसएस-भाजपा के खिलाफ लड़ाई सिर्फ राजनीतिक नहीं है। उन्होंने कहा, “भाजपा और आरएसएस ने हमारे देश की हर संस्था पर कब्जा कर लिया है। अब हम भाजपा, आरएसएस और भारतीय राज्य से ही लड़ रहे हैं।” भाजपा ने “भारतीय राज्य से लड़ने” की टिप्पणी को आगे बढ़ाया और इसे कांग्रेस के “शहरी नक्सलियों और डीप स्टेट के साथ संबंधों का सबूत बताया, जो भारत को बदनाम, अपमानित उसकी साख खराब करना चाहते हैं।”

एक तरफ अगर अखबारों ने इस खबर (असल में सरकार पर विपक्ष के आरोप) को महत्व नहीं दिया है तो आज ज्यादातर अखबारों की लीड नौ सेना में तीन युद्धपोतों को शामिल किया जाना है। निश्चित रूप से यह सरकार का प्रचार है और संभावित युद्ध में मजबूत होने के लिए है। कहने की जरूरत नहीं है कि यह जैसा और जिसका भी विकास हो, विध्वंसात्मक है। इससे भारत मजबूत हुआ होगा लेकिन उसके लोग या नागरिक मजबूत नहीं हुए हैं। तय हुआ है कि टैक्स (या हिन्दुओं की भलाई के नाम पर) और चूसे जाएंगे। खास कर तब जब रोजगार के अभाव में और कई दूसरे कारणों से दूसरे देशों के सैनिक के रूप में लड़ने के लिए भी मजबूर हैं। समुद्री सुरक्षा तो ठीक है लेकिन हवा सुरक्षित नहीं है और उससे लोग बीमार हो रहे हैं तो समुद्री सुरक्षा का क्या करना। डॉलर के मुकाबले रुपये के गिरने की बात होती है तो प्रचार किया जाता है कि डॉलर मजबूत हुआ है, रुपया कमजोर नहीं हुआ है। पर वास्तविकता यह है कि निर्यात कम हुआ है और दिसंबर में यह तीन महीने में सबसे कम था। ऐसे में डॉलर मजबूत तो है ही, हमारे पास आ भी कम रहा है। यह खबर आज द हिन्दू में सेकेंड लीड है। दिल्ली की जनता ठंड और कोहरे की मार झेल रही है सरकार युद्ध पोत और पनडुब्बी से मजबूत हो रही है। प्रधानमंत्री इसे अपना ‘विकासवाद’ बता रहे हैं।  जबकि राजधानी दिल्ली की जनता भयंकर प्रदूषण की चपेट में है। नवोदय टाइम्स की आज की लीड यही है।

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