
सुप्रीम कोर्ट ने हिंडनबर्ग-अडानी विवाद में दाखिल याचिका पर आगे सुनवाई करने से इनकार कर दिया है और याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने यह भी पूछा है कि याचिकाकर्ता पर जुर्माना कितना लगाया जाए।
याचिकाकर्ता विशाल तिवारी ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाया था। हालांकि, 5 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार ने उनकी अर्जी को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया था।
अडानी-हिंडनबर्ग विवाद का पूरा विवरण-
जनवरी 2023:
अमेरिकी शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी समूह पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि अडानी समूह ने वित्तीय धोखाधड़ी और स्टॉक में हेरफेर किया है। इसके बाद अडानी समूह के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई, जिससे कंपनी का बाजार पूंजीकरण 100 बिलियन डॉलर से अधिक गिर गया।
फरवरी 2023:
अडानी समूह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें रिपोर्ट के आरोपों की जांच की मांग की गई।
मार्च 2023:
सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष समिति गठित की और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) को निर्देश दिया कि वह इन आरोपों की गहन जांच करे।
मई 2023:
विशेष समिति ने सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद, कोर्ट ने SEBI को अपनी जांच पूरी करने के लिए 14 अगस्त 2023 तक का समय दिया।
जनवरी 2024:
सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य याचिका को खारिज करते हुए अडानी समूह के खिलाफ CBI जांच की मांग को ठुकरा दिया। साथ ही, SEBI को जांच की अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 3 महीने का समय दिया गया।
अगस्त 2024:
हिंडनबर्ग रिसर्च ने SEBI प्रमुख माधबी पुरी बुच और उनके पति पर अडानी समूह से जुड़े ऑफशोर फंड्स में हिस्सेदारी रखने का आरोप लगाया। हालांकि, SEBI प्रमुख ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया।
निष्कर्ष:
सुप्रीम कोर्ट ने अडानी-हिंडनबर्ग मामले में आगे सुनवाई से साफ इनकार करते हुए याचिकाकर्ता की याचिका खारिज कर दी है। इस विवाद की जांच SEBI की निगरानी में की जा रही है। SEBI पर भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का दबाव है।


