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निग़त अब्बास : भाजपा की भोंपू अब कांग्रेस के लिए बैटिंग करेगी, देखें वीडियो

पेशे से वकील और टीवी पैनलिस्ट निग़त अब्बास अब कांग्रेस का दामन थाम चुकी हैं. अब तक भाजपा के लिए बैटिंग कर रही थीं. कांग्रेस ने उन्हें मंच भी सौंप दिया. कांग्रेस ने महिला का मंच पर बोलते वीडियो शेयर कर जो कुछ लिखा है नीचे पढ़ें, लेकिन उससे पहले पत्रकार श्याम मीरा सिंह ने कांग्रेस की पोस्ट रिपोस्ट करते हुए इन मोहतरमा के लिए क्या कुछ लिखा है वह पढ़ें…


श्याम मीरा सिंह-

कांग्रेस पार्टी ने एक ही दिन में उस औरत के प्रवचनों को स्टेज दे दी, जो एक दिन पहले तक अपने पर्सनल हित के लिए भाजपा के लिए भोंपू का काम करती थी। इसने ना लिबरल लोगों को बख्शा, ना सेक्युलर लोगों, ना मुसलमानों को। और आज अचानक कांग्रेस के मंच पर सेक्यूलरिज्म का प्रवचन लेकर प्रकट है।


महिला के इस वीडियो को शेयर कर कांग्रेस ने अपने एक्स हैंडल पर क्या लिखा है- पढ़ें

मैं कांग्रेस की सोच के साथ आगे बढ़ रही हूं कि ‘साथ रहेंगे तो मजबूत रहेंगे।’ कांग्रेस में हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ने की परंपरा रही है।

कांग्रेस का मंच हर वर्ग के लोगों को समानता का अधिकार भी देता है और उसके अधिकारों की लड़ाई भी करता है.. चाहे वो किसी भी जाति या समुदाय से आते हों।

आज BJP की डर और कट्टरता की राजनीति को खत्म करने का समय आ गया है।

मैं आज पहली बार कांग्रेस पार्टी के कार्यालय आई हूं, ये एक पार्टी का कार्यालय लगता है, लेकिन BJP का कार्यालय एक ‘5 स्टार कार्यालय’ है।

ये तब है जब कांग्रेस की देश में ज्यादा समय तक सरकार रही है। साफ पता चलता है कि BJP ने भ्रष्टाचार किया है।

आज सड़क पर चलने वाला मुसलमान डरता है, यही कारण है कि मैं BJP छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुई हूं।

मुझे खुशी है कि यहां TV डिबेट्स में जाने से पहले BJP की तरह ये नहीं बताया जाएगा कि मुसलमानों के खिलाफ बोलकर कैसे वायरल होना है।

https://x.com/shyammeerasingh/status/1884189790456930328?s=48


नरेंद्र नाथ मिश्रा-

आदरणीय नेतागण, आप किसी भी राजनीतिक दल में रहे,यह आपका लोकतांत्रिक हक है। समय के हिसाब से आपका दल बदलना भी आपका लोकतांत्रिक हक है। इसमें भी कोई बुराई नहीं। जब भी किसी दल में रहे, उसके प्रति ईमानदार रहना भी सही। उनकी आयडियोलॉजी को सपोर्ट करना भी सही बात है। यहां तक सबठीक है। लेकिन इसके लिए कभी शब्दों की सीमा नहीं लांघे। ऐसी सीमा को पार नहीं करें कि जब दूसरे दल में कभी जाना पड़े तो आपको अपने ही शब्द ही पीछा नहीं छोड़ें। लोगों की बातों को तो इग्नोर कर लेंगे। खुद से आप अपने पुराने शब्दों को देखकर अपना चेहरा आईना में देख पाएंगे?

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