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जर्मनी में AfD का उभार : दक्षिणपंथ का रास्ता ट्विटर (X) से होकर जाता है क्या?

मनोज अभिज्ञान-

लन मस्क की हालिया हरकतें सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि जर्मनी समेत पूरे यूरोप और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गहरी चोट कर रही हैं। एक अमेरिकी अरबपति, जो पहले से ही अमेरिकी राजनीति में अपनी संलिप्तता और ध्रुवीकरण के लिए कुख्यात है, अब जर्मनी में धुर-दक्षिणपंथी पार्टी, ‘अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी’ (AfD) को खुलकर समर्थन दे रहा है। यह न केवल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का कुत्सित प्रयास है, बल्कि लोकतंत्र के साथ भद्दा मजाक भी है।

मस्क, जो खुद को ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ का मसीहा कहते हैं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से एक राजनीतिक दल को बढ़ावा देने में जुटे हैं, जिसकी विचारधारा को जर्मन खुफिया एजेंसियों ने ‘संभावित चरमपंथी संगठन’ की श्रेणी में रखा है। यह वही जर्मनी है जिसने अपनी ऐतिहासिक भूलों से सबक लेकर फासीवादी ताकतों को बढ़ावा देने के हर प्रयास को नकारा है, और अब मस्क के रूप में एक बाहरी हस्तक्षेप का सामना कर रहा है, जो खुलेआम इन चरमपंथी विचारों का प्रसार कर रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब मस्क ने अपने विशाल सोशल मीडिया प्रभाव का दुरुपयोग किया है। अमेरिकी राजनीति में, उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के अभियान को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों डॉलर खर्च किए थे, और अब जर्मनी में वही रणनीति अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि एक अमेरिकी अरबपति को जर्मनी की राजनीति में इतनी दिलचस्पी क्यों है? क्या यह महज विचारधारा का समर्थन है, या इसके पीछे कोई व्यावसायिक स्वार्थ छिपा हुआ है? मस्क की टेस्ला फैक्ट्री जर्मनी में भी स्थित है, और वह पहले भी जर्मन प्रशासन की नीतियों को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। क्या यह जर्मन सरकार पर दबाव बनाने की साजिश है?

मस्क की गतिविधियों ने यूरोपीय संघ को भी सतर्क कर दिया है। यूरोपीय आयोग पहले ही X से यह जानकारी मांग चुका है कि क्या कंपनी के एल्गोरिदम को इस तरह से बदला गया है जिससे AfD को बढ़ावा मिले। जर्मन अदालतें भी अब X को चुनाव संबंधी राजनीतिक डेटा साझा करने के लिए मजबूर कर रही हैं। हालांकि अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है कि X के एल्गोरिदम को AfD के पक्ष में हेरफेर किया गया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि मस्क के हस्तक्षेप से AfD को सोशल मीडिया पर असामान्य रूप से अधिक कवरेज मिल रही है।

AfD का समर्थन करना महज़ राजनीतिक निर्णय नहीं है, बल्कि खतरनाक प्रवृत्ति का संकेत है। यह पार्टी न केवल प्रवासियों के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए जानी जाती है, बल्कि इसका जुड़ाव कई कट्टर दक्षिणपंथी समूहों से भी रहा है। यह पार्टी जर्मनी के उदार लोकतंत्र के लिए खतरा बन चुकी है और मस्क का इसे समर्थन करना उनकी गैर-जिम्मेदाराना सोच को दर्शाता है। क्या यह महज संयोग है कि मस्क ने AfD का समर्थन उस समय किया जब पार्टी की लोकप्रियता में तेजी से गिरावट आ रही थी?

अगर हम आंकड़ों पर गौर करें तो यह साफ होता है कि मस्क का समर्थन मिलने के बाद AfD की नेता एलिस वेडेल के फॉलोअर्स की संख्या दोगुनी हो गई है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इनमें से अधिकांश फॉलोअर्स जर्मनी के बाहर के हैं। इसका मतलब यह है कि मस्क की रणनीति जर्मनी के मतदाताओं को प्रभावित करने से ज्यादा, वैश्विक स्तर पर दक्षिणपंथी ताकतों को एकजुट करने की है। यह वैश्विक राजनीतिक ध्रुवीकरण का संकेत है, जहां अरबपति पूंजीपति दक्षिणपंथी सरकारों को सत्ता में लाने के लिए अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं।

जर्मनी के राजनेताओं ने मस्क के इस हस्तक्षेप पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (CDU) के नेता फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा है कि मस्क को राजनीतिक या कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। यह सही भी है, क्योंकि अगर कोई बाहरी शक्ति किसी देश के चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश करे, तो उसे रोकना लोकतंत्र का कर्तव्य बन जाता है।

एलन मस्क की इन हरकतों का एक और खतरनाक पहलू है – वे दक्षिणपंथी ताकतों को नई वैधता देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने न केवल AfD की नेता वेडेल का प्रचार किया, बल्कि एक लाइव इंटरव्यू में उन्हें ‘बहुत ही समझदार व्यक्ति’ भी कह दिया। क्या यह केवल समर्थन है, या दक्षिणपंथी राजनीति को सामान्य बनाने की सोची-समझी साजिश? अगर दुनिया के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक खुलेआम कट्टरपंथी पार्टियों को समर्थन देगा, तो इससे दुनियाभर में दक्षिणपंथी कट्टरता को बढ़ावा मिलेगा।

अभी जर्मनी के चुनावों में यह स्पष्ट नहीं है कि मस्क का यह हस्तक्षेप AfD को कितना फायदा पहुंचाएगा। लेकिन यह जरूर स्पष्ट हो गया है कि मस्क का उद्देश्य केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं है, बल्कि वह वैश्विक स्तर पर राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने पहले अमेरिका में ट्रंप का समर्थन किया, फिर ब्राजील में जायर बोलसोनारो का और अब जर्मनी में AfD को। यह खतरनाक प्रवृत्ति है जो लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

लोकतंत्र को बचाने के लिए हमें यह समझना होगा कि अरबपतियों का राजनीति में हस्तक्षेप खतरनाक खेल है। यह केवल एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है। अगर एलन मस्क जैसे लोग अपने प्रभाव और धन का इस्तेमाल कर लोकतांत्रिक चुनावों को प्रभावित करते रहे, तो आने वाले समय में हमें और भी अधिक अप्रत्याशित और खतरनाक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

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