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18 करोड़ रुपये दबाने वाली एक्ट्रेस प्रीति जिंटा ने वरिष्ठ पत्रकार सुचेता दलाल पर लगाया फेक न्यूज फैलाने का आरोप!

कुछ दिनों पहले खबरें आईं कि New India Cooperative Bank ने प्रीति जिंटा का ₹18 करोड़ का लोन माफ कर दिया। इस रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस की ओर से भी बयान सामने आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि प्रीति को बीजेपी के करीबी होने का फायदा मिला और बैंक का पतन हो गया।

लेकिन प्रीति जिंटा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने दावा किया कि यह लोन 12 साल पहले लिया गया था और 10 साल पहले ही चुका दिया गया था। उन्होंने कांग्रेस और कुछ पत्रकारों पर बिना तथ्यों की जांच किए फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगाया।

सुचेता दलाल पर सीधा हमला

प्रीति जिंटा ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा: “अगर आप मेरी प्रतिष्ठा की परवाह नहीं करते, तो मुझे आपकी परवाह करने की जरूरत नहीं है। अगली बार, कृपया मुझसे संपर्क करें और जांच करें कि खबर सही है या नहीं, इससे पहले कि आप मेरा नाम घसीटें।”

उन्होंने सुचेता दलाल को टैग करते हुए कहा कि वे उन पत्रकारों की सूची जारी करेंगी, जिन्होंने बिना किसी जांच-पड़ताल के यह खबर चलाई।

सुचेता दलाल भारत की जानी-मानी खोजी पत्रकार हैं, जिन्होंने हर्षद मेहता घोटाले का पर्दाफाश किया था। उन्हें फाइनेंशियल और बिजनेस पत्रकारिता में विशेषज्ञता हासिल है। लेकिन इस विवाद के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस तरह की ख़बरें बिना ठोस तथ्यों की पुष्टि किए प्रकाशित की जानी चाहिए?

अगर कोई तथ्यात्मक त्रुटि हुई है, तो क्या पत्रकारों को सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार करना चाहिए? क्या इस तरह के मामलों में पत्रकारों को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए?


सौमित्र रॉय-

शिमला की प्रीति जिंटा ने हिंदू सनातनी बनते ही झूठ बोलना शुरू कर दिया है। उसके इस तरह झूठ बोलने की स्क्रिप्ट बीजेपी ने लिखी है। लेकिन कई सच्चाइयों का जिक्र करना भूल गए।

  1. मुंबई की जिस न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक से प्रीति ने लोन लिया, उसी बैंक के चेयरमैन हीरेन भानु ने मनी लाइफ को बताया है कि उसने ब्रांच मैनेजर से पूछे बिना 25 करोड़ रुपए के कॉर्पोरेट लोन बांट दिए।
  2. उसी लोन में प्रीति का 18 करोड़ रुपए का लोन भी शामिल है, जिसके बारे में एक्ट्रेस 10 साल पहले ही चुकता किए जाने का झूठ बोल रही हैं।
  3. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट यह भी कहती है कि हीरेन भानु के कहने पर बैंक ने राजहंस ग्रुप को 95 करोड़ और ओंकारा एसेट्स को 210 करोड़ का लोन बांटा। ऐसे और भी लोन मनमाने तरीके से बांटे गए।
  4. जनवरी 2020 को बैंक के एक कर्मचारी ने रिजर्व बैंक को इस मनमानी के प्रति आगाह किया। अब ये सारे लोन एनपीए बन चुके हैं और न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक के बाहर भीड़ लगी है।
  5. मुंबई पुलिस ने बैंक के जनरल मैनेजर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। कुल 122 करोड़ की रकम के गबन को लेकर जांच चल रही है।
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