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निजी FM रेडियो पर अब खबरें और लाइव स्पोर्ट्स भी हो सकेंगे ऑन-एयर, पढ़ें कैसे?

नई दिल्ली: टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) की नई सिफारिशों को एसोसिएशन ऑफ रेडियो ऑपरेटर्स फॉर इंडिया (AROI) ने निजी एफएम रेडियो प्रसारकों के लिए “गेम-चेंजर” करार दिया है।

TRAI ने 21 फरवरी 2025 को टेलीकम्युनिकेशंस अधिनियम, 2023 के तहत प्रसारण सेवाओं के लिए सेवा अधिकरण ढांचे से जुड़ी सिफारिशें जारी कीं। यह अधिनियम 1885 के टेलीग्राफ अधिनियम की जगह ले रहा है।

अब एफएम रेडियो पर खबरें और लाइव स्पोर्ट्स

TRAI की नई सिफारिशों के तहत निजी एफएम रेडियो स्टेशनों को अब प्रति घंटे 10 मिनट तक समाचार और समसामयिक घटनाओं के प्रसारण की अनुमति मिलेगी। इसके अलावा, वे राष्ट्रीय खेल आयोजनों की लाइव कवरेज भी कर सकेंगे। यह बदलाव वर्षों पुरानी पाबंदियों के हटने का संकेत है और रेडियो प्रसारण के क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

डिजिटल स्ट्रीमिंग की भी मंजूरी

निजी रेडियो प्रसारकों को अब अपने एफएम कंटेंट को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी स्ट्रीम करने की अनुमति होगी, जिससे वे डिजिटल श्रोताओं तक पहुंच बना सकेंगे। यह बदलाव रेडियो उद्योग की बढ़ती डिजिटल मांग को देखते हुए किया गया है।

नया टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल फ्रेमवर्क

AROI ने TRAI की तकनीक-निरपेक्ष (Technology-Neutral) नीति की सराहना की, जिससे एफएम प्रसारकों को डिजिटल ट्रांसमिशन तकनीकों को अपनाने की स्वतंत्रता मिलेगी। साथ ही, सेवा अनुमति (Service Authorisation) को स्पेक्ट्रम नीलामी से अलग करने के फैसले को भी पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम बताया गया।

रेडियो ऑपरेटर्स को मिलेगा अधिक लचीलापन

FM स्टेशनों के लिए अनिवार्य को-लोकेशन नियम समाप्त: इससे ऑपरेटर्स अपने खर्चों में कटौती कर सकेंगे और इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर उपयोग कर पाएंगे।

टेलीकॉम कंपनियों के साथ स्वैच्छिक इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग की अनुमति दी गई।

लाइसेंस नवीनीकरण की अवधि 10 साल होगी और इसके लिए 4% समायोजित सकल राजस्व (AGR) शुल्क देना होगा।

कुछ बिंदुओं पर उद्योग को आपत्ति

AROI ने कुछ सिफारिशों पर सवाल भी उठाए, जिनमें प्रमुख हैं:

2030 तक अनिवार्य रूप से नए ढांचे में माइग्रेशन का प्रस्ताव, जिस पर और चर्चा की जरूरत है।

जिलावार एफएम आवृत्ति आवंटन का सुझाव, जिस पर रेडियो उद्योग को और स्पष्टता चाहिए।

हालांकि, मौजूदा लाइसेंसधारकों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के नए सिस्टम में जाने का विकल्प दिया गया है, जिससे बदलाव को आसान बनाया जा सके।

अब मंत्रालय की बारी

TRAI ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से शहर-वार एफएम फ्रीक्वेंसी आवंटन की समीक्षा करने और रेडियो कवरेज को ग्रामीण जिलों तक विस्तारित करने का आग्रह किया है।

इसके अलावा, रेडियो प्रसारण के लिए अलग कार्यक्रम और विज्ञापन संहिता (Programme & Advertisement Codes) बनाने का सुझाव भी दिया गया है, जिससे इसे अन्य मीडिया नियमन से अलग किया जा सके।

रेडियो उद्योग के लिए बड़ा अवसर

AROI के एक प्रतिनिधि ने कहा कि ये सिफारिशें रेडियो उद्योग के लिए स्वागत योग्य कदम हैं, लेकिन कुछ प्रावधानों पर अभी और विचार-विमर्श जरूरी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भविष्य को देखते हुए रेडियो क्षेत्र को अधिक लचीली और समकालीन नीतियों की जरूरत है।

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