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डिजिटल युग में फोटो पत्रकारों पर काम का दबाव कैसे बढ़ रहा है? देखें तस्वीर

एस के यादव-

क्या आपने फोटो पत्रकारिता की बदलती हुई इन प्रवृत्तियों पर ध्यान दिया है?

प्रस्तुत चित्र में एक फोटो पत्रकार द्वारा प्रयागराज कुंभ के समापन अवसर पर संगम के निकट नदी में कचरा साफ कर रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घटना का अपने कैमरे से स्टिल फोटो और दूसरे हाथ में स्मार्टफोन से वीडियो साथ-साथ खींचा जा रहा है।

करीब डेढ़ सौ साल पहले जब अखबार में फोटोग्राफी शामिल की गई थी तब कोई पत्रकार कैमरे से फोटो खींचता था और बाजार से किसी डार्क रूम सहायक को बुलाकर पत्रकार द्वारा खींची गई फोटो की रील डेवलप कराई जाती थी और उसका प्रिंट बनवाया जाता था ताकि उसे छापा जा सके। समय के साथ अखबारों में फुल टाइम प्रेस फोटोग्राफर रखे जाने लगे। धीरे-धीरे प्रेस फोटोग्राफर का स्थान फोटो जर्नलिस्ट ने ले लिया जिसका काम फोटो खींचने के साथ-साथ न्यूज़ लिखना और कैप्शन लिखना भी था।

आधुनिक पत्रकारिता में जब से सूचना एवं संचार तकनीक में तेजी से बदलाव हुए हैं और मीडिया, डिजिटल मीडिया में तब्दील हो चुका है ऐसे में अब फोटो पत्रकार से अपेक्षा की जाती है कि वह फोटो खींचने, इसका कैप्शन और न्यूज़ लिखने के साथ-साथ वीडियो भी खींचे।

इस चित्र में आप डिजिटल मीडिया युग के एक फोटो पत्रकार के ऊपर काम के दबाव को देख सकते हैं जिसमें फोटो पत्रकार को नदी में खुद का संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ स्टिल कैमरा और स्मार्टफोन से वीडियो दोनों को हैंडल करने के साथ सही समय पर सही तस्वीर खींचने की भी जिम्मेदारी है जिसे वह बखूबी अंजाम देते हुए दिखाई पड़ रहे हैं।

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