
संजय कुमार सिंह
आज सुबह नहीं लिख पाया इसलिए बिन्दुवार सिर्फ खास खबरें। इंडियन एक्सप्रेस में कांग्रेस नेता और प्रवक्ता शमा मोहम्मद की खबर है जो रोहित शर्मा पर उनकी पोस्ट को लेकर विवाद पैदा करने के लिए है। सोशल मीडिया पर चर्चा है कि संसद से लेकर टीवी स्डूटियो तक में गाली देने वालों की वैसी खबर नहीं ली जाती है जैसी एक खिलाड़ी को मोटा कहने पर शमा मोहम्मद की ली जा रही है। इसमें दिलचस्प यह भी है कि आज तक की एक पत्रकार का वीडियो वायरल है जिसमें वे माफी मांगने के बारे में पूछ रही हैं। यह दिलचस्प है कि प्रेस कांफ्रेंस में उनके सवाल पूछने पर राहुल गांधी ने कह दिया था कि यह तो भाजपा की लाइन है और इसके बाद हुई तल्खी के लिए कइयों ने राहुल गांधी की आलोचना की थी और संबंधित पत्रकार की पत्रकारिता की तारीफ की थी। अब वे वही करती देखी जा रही हैं जो आज इंडियन एक्सप्रेस ने (भी) किया है। आज यह खबर दि एशियन एज और नवोदय टाइम्स में भी पहले पन्ने पर है। कुल मिलाकर, आज पत्रकारिता के दो आर्दर्शों की पोल खुली है।
इंडियन एक्सप्रेस में ही आज एक और खबर जो बताती है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा है कि कुम्भ में भगदड़ की खबर नहीं फैलने दी ताकि घबराहट न फैल जाये। अब इसका नफा-नुकसान कौन देखे और कुछ हो भी तो कोई क्या कर लेगा। तथ्य यह है कि घबराहट फैली ही होती तो कुछ लोग कम जाते और तब शायद नई दिल्ली स्टेशन पर भगदड़ नहीं मचती, सड़क दुर्घटना में मरने वाले बच जाते लेकिन उससे क्या फर्क पड़ना है। जो भी हो, जब खबर ही दब गई तो उसे उचित ठहराइये या गलत कहिये – जो चले गये वो गये। मोक्ष मिला या नहीं। उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 लोगों की मौत की बात की। न्यूजलौन्ड्री ने इससे बहुत ज्यादा लोगों के मरने की बात की है और राज्य सरकार ने ना इसकी पुष्टि की है ना खंडन किया है। किसी को मतलब ही नहीं है तो क्या किया जा सकता है। जाहि विधि रखे राम ताहि विधि रहिये।
इस सनातन मजबूरी का क्या असर हो रहा है इसका पता आज अमर उजाला की एक खबर से लगता है। इसके अनुसार, उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में 750 डाटा सेंटर खोलने के लिए एमओयू करने वाली कंपनी का कर्ताधर्ता निवेशकों के 3558 करोड़ रुपये बटोर कर पत्नी के साथ विदेश भागने के फेर में कल पकड़ा गया। अब योजना का क्या होगा और निवेशकों के पैसे अंडा दें या बच्चा क्या फर्क पड़ता है। कायदे से व्यवस्था ऐसी होनी चाहिये कि कोई आम आदमी को भी न ठग-लूट पाये। यहां स्थिति यह है कि एक तरह से सरकार के साथ मिलकर निवेशकों को लूट ले गया।

हो भी क्यों नहीं जब जनता को फोन पर चेतावनी देकर या सतर्क करके बड़ी सरकार अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ले रही हो और जनता की सेवा छोड़कर चुनाव जीतने में लगी हो। कुम्भ के बाद अब दमकल से 75 जिलों में गंगा जल भेजा जा रहा है ताकि जो लोग कुम्भ नहीं आ पाये उन्हें यह पवित्र जल मिल जाये। जो आये थे वो अपने पड़ोसी-रिश्तेदार के लिए ले गये हों – ऐसा तो हमारा समाज है नहीं और सब सरकार को ही करना है तो जिनका धर्म सरकार के ही भरोसे है उनके लिए यह जरूरी काम भी हो रहा है। इसकी खबर आज दि एशियन एज में पहले पन्ने पर है। इससे 75 जिलों के लूटे गये निवेशकों को शायद राहत मिले।
ऐसे में आज के अखबारों में दो प्रमुख खबरें हैं। एक तो अमर उजाला और टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, संविधान लागू हुए 75 साल हो गये… अब तो अभिव्यक्ति की आजादी का अर्थ समझे पुलिस। सुप्रीम कोर्ट की कही यह बात कुछ अखबारों में लीड है कुछ में दूसरी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते रहे हैं कि 70 साल देश में कुछ नहीं हुआ। उनके 10 साल के शासन और तीसरी बार चुन लिये जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस पर यह टिप्पणी की है तो अखबारों ने शीर्षक में नहीं बताया है कि मामला गुजरात का है।
हिन्दुस्तान टाइम्स ने द हिन्दू की तरह अपनी लीड के जरिये कहा है कि सुप्रीम कोर्ट सोशल मीडिया के लिए कानून चाहता है। उसी ने दी कॉलम की अपनी दूसरी खबर के जरिये कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को महत्व देने की बात गुजरात पुलिस से कही गई है और यह कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किये जाने के संदर्भ में है। सोशल मीडिया का मामला कोर्ट में था तो सुप्रीम कोर्ट ने उसके लिए कानून की जरूरत समझी यह एक बात है लेकिन तथ्य यह भी है कि सरकार ऐसा कोई कानून बनाना चाहती है और अभी उसके पास ऐसे कानून और अधिकार हैं जिससे नई दिल्ली स्टेशन पर भगदड़ और मौत के वीडियो हटाने के लिए कहा गया था। मुख्यमंत्री ने तो खबर ही रोक ली औऱ स्वीकार भी किया है।
ऐसे में कोई नया कानून बिल्कुल गैर जरूरी और अनुचित है फिर भी सरकार जो चाहती है करती है। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने कानून की जरूरत बताई है तो उसे लीड बनाकर अखबारों ने सरकार की सेवा कर दी है। सोशल मीडिया पर (और समाज में) जो अश्लील सामग्री है वह बताकर बिल्कुल अलग और पसंद करने वाले लोगों के लिए है। ना कोई जबरदस्ती है और ना मुफ्त में उपलब्ध पहली अश्लील सामग्री है। इसलिए मुझे उसकी कानून की कोई जरूरत नहीं लगती है। सरकार को क्यों लगती है बताने की जरूरत नहीं है और ऐसे में अदालत ने अगर किसी मामले में कानून की जरूरत बताई है तो जरूरी नहीं है कि कानून बन ही जाये। खास कर तब जब कई अखबारों ने रिपोर्टिंग बंद कर रखी है और ऐसी ही खबरों से पन्ना भर रहे हैं, दिन काट रहे हैं।
आज के अखबारों में सिर्फ द टेलीग्राफ की लीड ऐसी खबर है जिसे फॉलो अप कहा जा सकता है। इसके अनुसार अवैध रूप से विदेश भेजने वाले एजेंट सबसे ज्यादा गुजरात में हैं। आप जानते हैं कि हाल में अमेरिका से वापस किये गये अवैध आप्रवासियों से पहले भी अवैध आप्रवासियों को ले जा रहा एक विमान रास्ते में रोककर जांच के बाद वापस मुंबई भेज दिया गया था। बताने की जरूरत नहीं है कि ऐसे एजेंट के खिलाफ कार्रवाई क्यों होनी चाहिये। वापस भेजे गये लोगों से एजेंट का पता, कार्यशैली और सबूत वगैरह मिल सकता था पर किसी कार्रवाई की खबर नहीं है और इसका नतीजा यह हुआ कि हाल में जब ऐसे अप्रवासियों को बेड़ियों में वापस भेजा गया तो पूरे देश का अपमान हुआ और सरकार कुछ नहीं कर पाई। संदेश यह गया कि सरकार ऐसे पलायन रोकना नहीं चाहती है।
इन खबरों के अलावा आज दिल्ली के दो अखबारों ने दिल्ली की खबर को लीड बनाया है। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, कैग रिपोर्ट पर भाजपा, आप विधायकों के बीच नोंकझोंक। दि एशियन एज की लीड का शीर्षक है, “दिल्ली की मुख्यमंत्री का वादा, आप के सभी घोटालों का खुलासा करूंगी”। इसमें दिलचस्प है कि दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लिनिक को मुद्दा बनाया जा रहा है। कहने की जरूरत नहीं है कि यह अपने किस्म की अनूठी योजना है और अगर लागू नहीं हो पाई या इसमें कुछ गड़बड़ी रही तो उसके लिए केंद्र की भाजपा सरकार के अलावा लाटसाब कम जिम्मेदार नहीं हैं। पर वह सब मुद्दा ही नहीं है। मीडिया ने खबर छाप दी कि भाजपा की आयुष्मान योजना दिल्ली में लागू हो गई जबकि यह आम आदमी के लिए है ही नहीं और यह एक बीमा योजना है जबकि मोहल्ला क्लिनिक की अवधारणा ही क्रांतिकारी और सुविधाजनक है। फिर भी इसे लागू करने की बजाय बदनाम किया जा रहा है। जो भी हो, सीएजी की रिपोर्ट पर आतिशी का भाषण जोरदार रहा यह खबर ही नहीं है। सुबह मुख्य धारा की मीडिया में इसपर कुछ नहीं था जबकि आम आदमी पार्टी के यू ट्यूब चैनल पर मैंने देखा था।
आतिशी ने कहा है, भाजपा काम करने में नहीं आप को गालियां देने पर केंद्रित है। खुशी है कि सीएजी की रिपोर्ट पर चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि भाजपा आखिरकार सीएजी रिपोर्ट के बारे में बात कर रही है। पिछले 15 से 20 वर्षों में मैंने उन्हें सीएजी के निष्कर्षों पर इतना भरोसा करते कभी नहीं देखा। जब उत्तराखंड में सीएजी की रिपोर्ट में वन विभाग द्वारा आईफोन पर किए गए खर्च में अनियमितताओं को उजागर किया गया था, तो भाजपा ने इस पर चर्चा नहीं की। इसी तरह, जब द्वारका एक्सप्रेसवे पर सीएजी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 19 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर की दर से स्वीकृत सड़क 250 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर की दर से बनाई गई, तो भाजपा ने इस पर भी बहस नहीं की। लेकिन अब कम से कम हमारी वजह से वे इस पर चर्चा तो कर रहे हैं।” कहने की जरूरत नहीं है कि 2जी घोटाले में सीएजी की रिपोर्ट को मुद्दा बनाने वाली भाजपा ने सीएजी को ईनाम दिया तो मामला अदालत में साबित नहीं हुआ। भाजपा जब सत्ता में आई, सीएजी की रिपोर्ट पर चर्चा नहीं हुई और भाजपा के खिलाफ रिपोर्ट करने वाले अकाउंटैंट का तबदला हो गया और अब उसी सीएजी की रिपोर्ट के आधार पर आप को बदनाम करने की कोशिश चल रही है जबकि उसमें आप की प्रशंसा भी है। आम आदमी पार्टी भाजपा को कड़ी टक्कर दे रही है। देखा जाये आगे क्या होता है। इसमें अखबारों से कोई उम्मीद करना व्यर्थ है। इन खबरों में सबसे महत्वपूर्ण खबर जो लगभग सभी अखबारों में समान महत्व (और फोटो) के साथ है वह है, प्रधानमंत्री सैर पर हैं।


