Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

आज के अखबार : नागरिक अधिकार सीमित किये जा रहे हैं, सरकार की घुसपैठ बढ़ती जा रही है, द टेलीग्राफ में छपी ये दो खबरें देखिए!

संजय कुमार सिंह

इंडियन एक्सप्रेस की लीड आज अपने संस्थान की खबर है। हिन्दुस्तान टाइम्स के पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर संस्थान की खबर लीड है। टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिन्दू और अमर उजाला में विदेशी खबर लीड है। हिन्दस्तान टाइम्स की लीड भी यही विदेशी खबर है। भले अंतरराष्ट्रीय महत्व की है। ऐसे में आज की एकमात्र देसी खबर जो किसी अखबार की लीड है और सरकार विरोधी नहीं है, वह नवोदय टाइम्स में छपी है। इसका शीर्षक है, अस्पतालों में दवा की कीमतों पर फैसला करें राज्य : सुप्रीम कोर्ट। सातवें अखबार की लीड प्रधानमंत्री की प्रशंसा या उनका प्रचार है। अकेले द टेलीग्राफ की लीड मणिपुर की खबर है। मणिपुर आप जानते हैं। मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति शासन में केद्रीय गृहमंत्रालय वहां की स्थितियों को देख रहा है पर उसकी खबर दिल्ली में पहले पन्ने पर अमूमन नहीं होती है। जो होती है वह आप जानते हैं। आज द टेलीग्राफ की लीड का फ्लैग शीर्षक है, कुकी ने निरंकुश आंदोलन का विरोध किया, मैतेई नाराज।

गुवाहाटी डेटलाइन से उमानंद जायसवाल की बाईलाइन वाली खबर इस प्रकार है (अनुवाद मेरा), 8 मार्च से संघर्ष प्रभावित मणिपुर में सभी सड़कों पर मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने के केंद्र के फैसले को पहली बाधा मिली है। एक प्रमुख कुकीज़ो संगठन ने चल रहे संघर्ष के राजनीतिक समाधान और उनकी मांग पूरी होने तक इस तरह की आवाजाही को संभव नहीं होने देने का संकल्प लिया है। उधर, कांगपोकपी स्थित जनजातीय एकता समिति (कोटू) ने सोमवार को फैजांग में मार्टेयर्स (शहीद) कब्रिस्तान में आयोजित 22वें स्मरण दिवस के मौके पर  इस निर्णय की घोषणा की। 3 मई 2023 को मेइती और कुकीज़ो के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से जिले में हर महीने की 3 तारीख को यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।प्रतिबंधित पहुंचपर कोटू के प्रस्ताव में कहा गया है किकुकीज़ो क्षेत्रों में तब तक किसी भी मुक्त आवाजाही की अनुमति नहीं दी जाएगी जब तक कि समुदाय की आकांक्षाओं का सम्मान करने वाला कोई समाधान नहीं निकल जाता है संगठन ने कुकीज़ो लोगों के लिए एक केंद्र शासित प्रदेश बनाकर अपनेएक अलग प्रशासन के लिए अटूट संघर्षको आगे बढ़ाने का भी संकल्प लिया, इस मांग का मेइती लोग कड़ा विरोध कर रहे हैं। कोटू ने कहा, “कुकीज़ो लोग तब तक बने रहेंगे जब तक कि एक अलग प्रशासन हासिल नहीं हो जाता, जिसमें कोई समझौता या आत्मसमर्पण नहीं होगा।”  

आप जानते हैं कि भारतीय पूंजी बाजार अपने सबसे मुश्किल समय में है और निवेशकों को भारी नुकसान हो रहा है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री सैर कर रहे थे। आज भी उससे संबंधित खबर है लेकिन एक और खबर ध्यान देने लायक है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है, उद्योग जगत वैश्विक अवसरों का लाभ उठाये। मुझे नहीं लगता है कि यह बताने या कहने वाली बात है उद्योग जगत को हर अवसर का लाभ उठाना ही चाहिये। सवाल उठता है कि सरकार ने उद्योग जगत को कौन से मौके मुहैया कराये हैं और उद्योग जगत को क्या लाभ हुआ है। खासतौर से 2016 की नोटबंदी के कारण हुए नुकसान के बाद। कहने की जरूरत नहीं है कि नोटबंदी जैसे फैसले के कारण उद्योग व्यापार को भारी नुकसान हुआ और अच्छा खासा बाजार चौपट हो गया। इसमें इस सरकार की नीतियों का कम योगदान नहीं है। इस कारण किस्तें चुकाना मुश्किल हो गया। बचने के लिए कोई विदेश भागा किसी ने आत्महत्या कर ली। विदेश भागे व्यवसायियों में से किसी को वापस लाने की खबर नहीं है। बैंकों के जो पैसे लेकर गये थे वो डूब ही गये। जो उद्योग धंधे बंद हो गये उनकी कोई सुध नहीं ली गई। सरकार की गलतियों का कोई मुआवजा नहीं दिया गया और इन सबके बावजूद जो चल रहे हैं उन्हें सलाह की मौके का लाभ उठायें। यह नहीं कि ऐसा है और यह मौका है और इसका ऐसे लाभ उठाया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए मुझे प्रधानमंत्री से शिकायत नहीं है। वे चतुर राजनेता है और अपनी राजनीति कर रहे हैं। वे समय पर बदलते रहे हैं और राजनतिक लाभ उठाने वाली बातें करते रहे हैं। इसमें मेरी पढ़ाई नहीं हुई से लेकर एंटायर पॉलिटिकल साइंस में एमए होने का दावा, प्रेस कांफ्रेंस में डिग्री बंटवाना सब शामिल है और सबको सब कुछ पता है। दूसरे ढंग से कहूं तो उन्होंने कभी छिपाया भी नहीं कि वे समय और जरूरत के अनुसार बात करते हैं। कभी अरुण जेटली के जरिये तो कभी सॉलिसिटर जनरल के जरिये।  मेरी चिन्ता यह है कि सब जानने के बाद आज की उनकी सलाह इतनी महत्वपूर्ण कैसे हो गई कि उसे लीड बना दिया गया?

आज यह खबर दि एशियन एज में लीड है। नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने पर दो कॉलम में है। इंडियन एक्सप्रेस में भी यह खबर दो कॉलम के शीर्षक से चार कॉलम में है। दो कॉलम में वनतारा के वन्यजीव पुनर्वास व संरक्षण केंद्र में उनकी तस्वीर है। यहां शीर्षक और प्रभावशाली है। दुनिया को विश्वसनीय साझेदारों की जरूरत है, हमारा उद्योग दर्शक बना हुआ नहीं रह सकता है। कहने की जरूरत नहीं है कि उद्योग को जो करना होगा करेगा और उसमें सक्षम होना ही चाहिये। नरेन्द्र मोदी की छवि उद्योग के मददगार या उद्योग को समझने वाली जैसी नहीं है फिर उनके कहे को इतना महत्व देने की जरूरत पड़ी तो इसलिए कि दूसरी खबर नहीं है। वह भी तब जब तृणमूल कांग्रेस ने मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों को लीपने-पोतने की कोशिश का आरोप लगाया है और इसे पहले पन्ने पर छापने की जगह नहीं है। हालांकि, दि एशियन एज ने अगर मोदी के इस बयान को लीड बनाया है कि दुनिया भारत से उम्मीद कर रही है, उसका फायदा उठाया जाये तो तृणमूल के आरोप और मतदाता सूची के मामले में उसकी शिकायत की खबर को भी तीन कॉलम में छापा है।

हिन्दुस्तान टाइम्स ने मतदाता सूची या मणिपुर की खबर पहले पन्ने पर नहीं छापी है लेकिन यह खबर दी है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में वन्यजीव राहत केंद्र की शुरुआत की। खबर में लिखा है कि रिलायंस की इस इकाई का उद्घाटन करने के कई दिनों बाद इसकी प्रशंसा की। यह खबर मोदी की पोस्ट से ली गई है जो उन्होंने खुद एक्स पर की है। एक तरफ तो प्रधानमंत्री उद्योगपतियों को सलाह दे रहे हैं दूसरी ओर आज ही खबर है, ट्रप का टैरिफ लागू अमेरिका का चीन, कनाडा व मैक्सिको से व्यापार युद्ध शुरू। यह अमर उजाला का शीर्षक है और इसके साथ छपी एक खबर है, अमेरिका ने सैन्य सहायता रोकी तो यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने माफी मांगी। आज यह खबर लगभग ऐसे ही शीर्षक के साथ टाइम्स ऑफ इंडिया और द हिन्दू में लीड है। अंग्रेजी के ये शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होते – (अमेरिकी) सहायता में कटौती के बाद जेलेंस्की ने विरामसंधि की पेशकश की।  

जाहिर है, व्यापारियों को आज ही बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार मुश्किल है और उसपर भारत का नियंत्रण नहीं है। भारत जहां नियंत्रण रख सकता है वहां नोटबंदी से नुकसान कर चुका है। शेयर बाजार में गिरावट पर सरकार ने अगर कुछ नहीं कहा है तो आज खबर है कि पूर्व सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। पिछली अदालत को प्राथमिक तौर पर पर्याप्त सबूत मिले थे और अब हाईकोर्ट ने कहा है, तथ्यों की जांच परख बिना दिया गया आदेश। मैं नहीं जानता सच क्या है लेकिन अखबार की खबरों से तो नहीं लगता है कि पैसे हों भी तो उससे व्यवसाय करने की कोशिश करके जोखिम ली जा सकती है और नहीं हो तो बाजार ऐसा नहीं है कि कर्ज लेकर काम किया जा सके।

भारतीय उद्यमी वैसे ही जांच, भ्रष्टाचार और लालफीताशाही से परेशान हैं। आज खबर है कि आयकर विभाग कर चोरी रोकने के लिए करदाताओं के सोशल मीडिया पोस्ट से लेकर ई-मेल, मोबाइल फोन और कंप्यूटर तक की जांच कर सकेगा। टैक्स चोरी रोकना जरूरी है और इसके लिए अधिकारियों को अधिकार भी जरूरी हैं। अभी तक देखा गया है कि अधिकारी इन अधिकारों का दुरुपयोग करते हैं और इनसे भ्रष्टाचार फैलता है। मुद्दा भ्रष्टाचार रोकने का था पर इस सरकार ने जो किया है उससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा ही घटेगा नहीं। पिछले कई कामों और नियमों का फायदा नहीं हुआ है वह अपनी जगह है और वसूली के मामले बढ़े हैं। इलेक्टोरल बांड इसका जीता जागता उदाहरण है। ऐसे में पूरा माहौल उद्योग व्यापार के खिलाफ है और इसकी शुरुआत जीएसटी से ही हो गई थी। इसमें दिलचस्प यह है कि आयकर तब लगता है जब न्यूनतम आय से ज्यादा कमाई होने लगे। इसी तरह जीएसटी एक न्यूनतम सीमा से ऊपर के कारोबार पर ही देय है। पर शुरू में कई व्यवसायों के लिए इस न्यूनतम सीमा की भी छूट नहीं रखी गई थी और बाद में यह छूट तो मिल गई पर छापे और जांच की कार्रवाई किसी पर भी की जा सकती है। अगर किसी का कारोबार ही टैक्स देने की सीमा से कम है तो उसे काम करने की छूट मिलनी चाहिये। सहायता और प्रोत्साहन की जरूरत होती है लेकिन यहां छापे और जांच का डर बना रहता है। कुल मिलाकर देश में उद्योग व्यवसाय का माहौल ही नहीं है पर प्रधानमंत्री अपनी दुनिया में हैं।  मीडिया ऐसी दुनिया में कि उनकी सलाह लीड बन जा रही है। 

व्यवसायी हो या आम नागरिक उसके अधिकार सीमित किये जा रहे हैं। उसके जीवन में सरकार की घुसपैठ बढ़ती जा रही है और न्याय भी ऐसे हो रहे हैं जो आम आदमी को समझ में न आयें। उदाहरण के लिए आज ही दो खबरें हैं और द टेलीग्राफ ने दोनों को एक साथ छापा है। एक खबर का शीर्षक है, औरंगजेब की प्रशंसा के लिए विधायक के खिलाफ मामला। समाजवादी पार्टी के विधायक का नाम है अबू आजमी। दूसरी खबर सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, किसी को पाकिस्तानी या मियां-तियां कहना धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है। इस फैसले का लाभ 80 साल के हरि नंदन सिंह को मिलेगा और ये दोनों फैसले कल की खबर के बाद आये हैं। कल की खबर थी, संविधान लागू हुए 75 साल हो गये… अब तो अभिव्यक्ति की आजादी का अर्थ समझे पुलिस। यह सुप्रीम कोर्ट का कथन है जो कल अखबारों में छपा था। इसके बाद आज फिर खबर है कि मुसलिम विधायक के खिलाफ शिकायत दर्ज हो गई। पिछली टिप्पणी कांग्रेस के मुस्लिम सांसद के खिलाफ मामला दर्ज किये जाने पर थी। नागरिकों के दूसरे वर्ग के के खिलाफ एफआईआर तो होती नहीं है, ईनाम मिलता है सो अलग। एक बार किसी मामले में हो गई थी तो रिकार्ड समय में जमानत मिल गई। देश ऐसे चल रहा है और इसमें उद्योग को सलाह लीड बन जा रही है।    

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन